(04) Celebrate union with Shiva on Shiv Jayanti

(04)शिव जयन्यती पर शिव से मिलन मनाएं

(04) Celebrate union with Shiva on Shiv Jayanti

( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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शिव जयंती पर शिव से मिलन: महाशिवरात्रि के उपलक्ष में

ओम शांति

आज का विषय है महाशिवरात्रि के उपलक्ष में शिव जयंती पर शिव से मिलन।

परमात्मा शिव से मिलन मनाना ही सच्ची शिव जयंती है। यदि हमने मिलन नहीं मनाया, तो फिर यह जयंती कैसी? शिव जयंती अर्थात परमात्मा से मिलन का पर्व।


भारत: एक आध्यात्मिक भूमि

भारत एक आध्यात्मिक भूमि है, जहाँ प्रत्येक त्यौहार किसी न किसी गहरी आध्यात्मिक स्मृति को ताज़ा करने के लिए मनाया जाता है। महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि परमात्मा शिव के इस धरती पर अवतरण की यादगार है।


शिव का अवतरण: विश्व परिवर्तन का कार्य

शिव जयंती केवल शिव का जन्मदिन नहीं, बल्कि हमारा भी जन्मदिन है। साथ ही, यह सतयुग और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआत भी है। संगमयुग का प्रारंभ और गीता ज्ञान के प्रकट होने का समय भी इसी के साथ होता है। ब्राह्मण धर्म का जन्म भी इसी समय होता है, जब परमात्मा आते ही गीता का ज्ञान सुनाना प्रारंभ करते हैं।


परमात्मा शिव कब, क्यों और कैसे आते हैं?

1. शिव कब आते हैं?

  • जब अज्ञानता और तमोगुण चरम सीमा पर पहुँच जाता है।
  • जब कलयुग का अंत और सतयुग का प्रारंभ होने वाला होता है।
  • जब संपूर्ण विश्व पतित हो जाता है।

2. शिव क्यों आते हैं?

  • संपूर्ण संसार को पतित से पावन बनाने के लिए।
  • सत्य धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए।
  • संपूर्ण आत्माओं को मोक्ष और जीवन-मुक्ति देने के लिए।

3. शिव कैसे आते हैं?

  • शिव किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते।
  • वे परकाया प्रवेश करते हैं।
  • वे ब्रह्मा बाबा के शरीर में प्रवेश कर इस धरा पर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।

शिव और शंकर में अंतर

  • शिव परमधाम के निवासी हैं, जबकि शंकर सूक्ष्मलोक के देवता हैं।
  • शिव साकार शरीर धारण नहीं करते, जबकि शंकर एक देवता हैं।
  • शिव सर्व आत्माओं के परमपिता हैं, जबकि शंकर उनकी ही रचना हैं।
  • शिवलिंग की पूजा होती है, परंतु शंकर की आराधना होती है।
  • शिव स्वयं ज्ञान का सागर हैं, जबकि शंकर उनकी प्रेरणा से कार्य करते हैं।

शिवरात्रि: अज्ञानता से ज्ञान की ओर

शिवरात्रि केवल रात्रि का पर्व नहीं, बल्कि अज्ञान की रात्रि से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाने का संकेत है। जब संपूर्ण संसार अज्ञान और पाप में डूब जाता है, तब परमात्मा शिव ज्ञान का प्रकाश लेकर आते हैं। इसी कारण इसे शिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि शिव ज्ञान प्रकाश से अज्ञान की रात्रि को ज्ञान के दिन में परिवर्तित करते हैं। यही कारण है कि इसे शिव जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि शिव जन्म नहीं लेते, बल्कि दिव्य अवतरण करते हैं।


शिव से सच्चा मिलन कैसे हो?

1. सच्चा जागरण:

  • असली जागरण ज्ञान की रोशनी में आना और अपनी आत्मा को पहचानना है।
  • बाहरी रोशनी जलाने से जागरण नहीं होता, बल्कि ज्ञान रूपी प्रकाश से आत्मा का जागरण होता है।

2. योग बल द्वारा आत्मा को शक्तिशाली बनाना:

  • परमात्मा से सच्चा मिलन योग के द्वारा होता है।
  • जब हम परमात्मा को निरंतर याद करते हैं, तो हमें शक्ति और अनुभव प्राप्त होता है।
  • बाबा की श्रीमत पर चलने से योग बल बढ़ता जाता है।

3. परमात्मा शिव के हाथों से ज्ञान और शक्तियाँ प्राप्त करना:

  • जो आत्माएँ शिव बाबा के मार्ग पर चलती हैं, वे दिव्य वरदान और शक्तियाँ प्राप्त करती हैं।

महाशिवरात्रि: आत्मा का जागरण और संकल्प

महाशिवरात्रि केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का पर्व है। भक्त पूजा और जागरण करते हैं, लेकिन असली जागरण तब होता है जब आत्मा को अपनी वास्तविक पहचान मिलती है। परमात्मा शिव हमें बुला रहे हैं:

“मेरे बच्चे, स्वयं को पहचानो, मैं तुम्हारा पिता हूँ।”

वे हमें विकारों से मुक्त कर देवता बनाने आए हैं।


शिव जयंती पर संकल्प

  • स्मृति में रखें कि स्वयं शिव हमें ज्ञान और शक्तियाँ दे रहे हैं।
  • राजयोग द्वारा परमात्मा से सच्चा मिलन करें।
  • शिव को केवल पूज्य समझने के बजाय उनके द्वारा सिखाए गए ज्ञान को अपनाएँ।
  • अपनी आत्मा को पवित्र बनाकर परमात्मा के योग्य बनाएँ।

निष्कर्ष

शिव जयंती मात्र एक त्यौहार नहीं, बल्कि परमात्मा के अवतरण का दिव्य संदेश है। उन्होंने हमें अज्ञान के अंधकार से निकालने के लिए ज्ञान और शक्तियाँ दी हैं। अब हमें उनसे सच्चा मिलन मनाना है, ना कि केवल पारंपरिक रूप से शिवरात्रि मनानी है।

इस बार शिव जयंती नहीं, शिव मिलन मनाएँ।

शिव जयंती पर शिव से मिलन मनाएँ: महाशिवरात्रि के उपलक्ष में

प्रश्न-उत्तर श्रृंखला

1.प्रश्न-शिव जयंती का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर: शिव जयंती केवल शिव के अवतरण का स्मरण नहीं, बल्कि आत्माओं के जागरण और परमात्मा शिव से सच्चे मिलन का पर्व है। यह आत्मा को परमात्मा के ज्ञान और योग के द्वारा पावन बनाने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

2.प्रश्न-महाशिवरात्रि को आध्यात्मिक दृष्टि से कैसे समझा जाए?

उत्तर: महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक त्यौहार नहीं, बल्कि परमात्मा शिव के इस धरती पर अवतरण की यादगार है। यह अज्ञानता की रात्रि से ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत है।

3.प्रश्न-परमात्मा शिव कब अवतरित होते हैं?

उत्तर:

  • जब अधर्म अपने चरम पर होता है।
  • जब चारों ओर अज्ञानता, अशांति और दुख व्याप्त होते हैं।
  • जब मानवता अपने मूल दिव्य स्वरूप को भूल जाती है और पतित अवस्था में आ जाती है।
4. प्रश्न-परमात्मा शिव क्यों आते हैं?

उत्तर:

  • संपूर्ण आत्माओं को पतित से पावन बनाने के लिए।
  • सत्य, शांति और प्रेम के आधार पर नए विश्व की स्थापना के लिए।
  • हमें हमारे वास्तविक दिव्य स्वरूप की पहचान देने के लिए।
5. प्रश्न-परमात्मा शिव कैसे आते हैं?

उत्तर: परमात्मा शिव किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे ब्रह्मा बाबा के शरीर में प्रवेश करके ज्ञान का उपदेश देते हैं और ब्राह्मण धर्म की स्थापना करते हैं।

6.प्रश्न-शिव और शंकर में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • शिव परमधाम में रहने वाले परमात्मा हैं, जबकि शंकर देवताओं में एक विशेष भूमिका निभाते हैं।
  • शिव का कोई स्थूल शरीर नहीं होता, जबकि शंकर को एक देवता के रूप में चित्रित किया जाता है।
  • शिवलिंग शिव की निशानी है, जबकि शंकर की मूर्ति होती है।
7.प्रश्न-असली जागरण क्या होता है?

उत्तर: असली जागरण बाहरी दीपक जलाने से नहीं, बल्कि आत्मा को ज्ञान और योग से रोशन करने से होता है। आत्मा जब अपने सच्चे स्वरूप को पहचानकर परमात्मा से योग लगाती है, तब असली जागरण होता है।

8.प्रश्न-शिव से सच्चा मिलन कैसे करें?

उत्तर:

  • राजयोग द्वारा आत्मा और परमात्मा का मिलन संभव होता है।
  • शिव बाबा की श्रीमत का पालन करने से आत्मा सशक्त बनती है।
  • जब आत्मा विकारों से मुक्त होकर शिव के मार्ग पर चलती है, तभी उसे दिव्य शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
9.प्रश्न-महाशिवरात्रि के उपलक्ष में हमें क्या संकल्प लेना चाहिए?

उत्तर:

  • परमात्मा शिव को स्मृति में रखकर पवित्र जीवन अपनाएँ।
  • केवल पूजा करने के बजाय, उनके ज्ञान को अपने जीवन में धारण करें।
  • आत्मा को सशक्त बनाने के लिए राजयोग का अभ्यास करें।
10.प्रश्न-निष्कर्ष में शिव जयंती का क्या संदेश है?

उत्तर: शिव जयंती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि परमात्मा से सच्चे मिलन का पर्व है। यह हमें याद दिलाती है कि हमें अपने विकारों से मुक्त होकर आत्मा की पवित्रता को पुनः प्राप्त करना है और सत्य धर्म की पुनर्स्थापना में योगदान देना है।

इस बार शिव जयंती नहीं, शिव मिलन मनाएँ! 🚩🕉

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