(04)This cycle of creation lasts 5,000 years. Why does it rotate? The mystery of creation.

YouTube player

सृष्टि चक्र :-(04)सृष्टि चक्र का यह चक्र है 5000 वर्ष का। वो क्यों घूमता है?सृष्टि का रहस्य

अध्याय 4: 5000 वर्ष का चक्र बार-बार क्यों घूमता है?

(“सृष्टि चक्र का रहस्य” श्रृंखला का चौथा भाग)


प्रस्तावना: सृष्टि का रहस्य क्या है?

हम सबने ब्रह्मा कुमारियों की कक्षाओं में सुना है कि यह सृष्टि नाटक 5000 वर्ष का है —
एक पूर्ण चक्कर जो बार-बार चलता है।
परंतु प्रश्न उठता है — केवल 5000 वर्ष ही क्यों?
क्यों यह पुनरावत बार-बार होता है?

आइए, शिव बाबा की मुरली की रोशनी में इस अनंत चक्र का रहस्य समझते हैं।


1. सृष्टि का पूर्व निर्धारित नाटक

 11 अक्टूबर 2025 की मुरली:

“मीठे बच्चे, यह विश्व नाटक बेहद सुव्यवस्थित और पूर्वनियत है।”

यह सृष्टि कोई आकस्मिक घटना नहीं — बल्कि पूर्व निर्धारित योजना है।
हर आत्मा, हर युग, हर घटना उसी क्रम में घटती है।

जैसे एक फिल्म तीन घंटे की होती है — चाहे आप कितनी बार देखें,
वही दृश्य, वही संवाद बार-बार आते हैं।
वैसे ही यह विश्व ड्रामा 5000 वर्ष का है, जो एक सेकंड आगे-पीछे नहीं हो सकता।


2. क्यों 5000 वर्षी नाटक ही?

शिव बाबा समझाते हैं:
यह नाटक मानव सभ्यता के संपूर्ण विकास और पतन का संक्षिप्त रूप है।

युग अवधि (वर्ष) विशेषता
सतयुग 1250 पूर्ण पवित्रता और सुख
त्रेतायुग 1250 गुणों की थोड़ी कमी
द्वापरयुग 1250 अज्ञान की शुरुआत
कलियुग 1250 पूर्ण अधोगति, तमोप्रधानता

जब संसार तमोप्रधान हो जाता है — तब परमात्मा अवतरित होकर आत्माओं को पावन बनाते हैं।

 बापदादा का संदेश:

“बच्चे, जब अंधकार पूर्ण होता है, तभी प्रकाश का अवतरण होता है।”


3. चक्र का रहस्य: घड़ी जैसा संसार

 4 अक्टूबर 2025 की मुरली:

“यह सृष्टि ड्रामा एकदम Set और Repeat होने वाला है, इसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता।”

जैसे घड़ी की सुई 12 बजकर फिर 12 पर लौट आती है,
वैसे ही सतयुग से कलियुग तक का चक्र पुनः सतयुग पर लौट आता है।

उदाहरण:

घड़ी रुक सकती है, पर यह विश्व चक्र कभी नहीं रुकता।

चारों युग मिलकर 5000 वर्ष का Cycle of Time बनाते हैं —
एक पूर्ण वृत्त, जिसमें हर आत्मा अपना निश्चित रोल निभाती है।


4. चक्र का दोहराव — न कभी रुके, न बदले

 23 सितंबर 2025 की मुरली:

“बच्चे, यह 5000 वर्ष का नाटक हर सेकंड वैसे ही दोहराता है जैसे पहले हुआ था।”

एक बार ड्रामा समाप्त होता है, तो उसी क्रम में नया चक्र आरंभ हो जाता है।
यह पुनरावर्तन इतना सटीक है कि परमात्मा भी इसे बदल नहीं सकते।

 उदाहरण:
जैसे कोई पुरानी फिल्म आप कितनी बार भी चलाएं —
वो कभी नई नहीं बन जाती।
बस वही रोल, वही सीन, वही परिणाम।


5. विज्ञान और सृष्टि चक्र का मिलान

Cyclic Universe Theory के अनुसार —
ब्रह्मांड फैलता (Expansion) है और सिकुड़ता (Contraction) है।
सतयुग में मानव संख्या लगभग 9 लाख,
और कलियुग में 9 अरब तक बढ़ जाती है।
फिर चक्र पुनः आरंभ होता है।

यह सिद्ध करता है कि ब्रह्मा कुमारियों का 5000 वर्षी चक्र
आध्यात्मिक-सवैज्ञानिक सत्य (Spiritual-Scientific Truth) है।


6. अपरिवर्तनीय विश्व नाटक

 7 अक्टूबर 2025 की अव्यक्त मुरली:

“यह 5000 वर्ष का चक्र एक सेकंड आगे-पीछे नहीं हो सकता। इसलिए निश्चिंत रहो, यह ड्रामा सबसे न्यायप्रिय है।”

हर आत्मा अपना निश्चित रोल निभा रही है।
परिस्थितियां दोहराती हैं, लेकिन आत्मा अपनी जागरूकता बदल सकती है।
यही सच्चा राजयोग है — परिस्थितियों में स्थिर रहना।


7. आत्मा का कर्तव्य: चक्र को जानो, श्रेष्ठ भूमिका निभाओ

 मुरली संकेत:

“बच्चे, चक्र को समझो और उसमें अपनी श्रेष्ठ भूमिका निभाओ।”

जब हम इस ज्ञान को आत्मसात करते हैं —
तो हमें पता चलता है कि चिंता व्यर्थ है, सब निश्चित है।
हमारा कार्य है केवल श्रेष्ठ कर्म करना।


निष्कर्ष: सृष्टि का अनंत चक्र

यह सृष्टि 5000 वर्षों का शाश्वत नाटक है —
जो अनंत बार जैसे का तैसा दोहराता है।
हर आत्मा वही भूमिका, वही संस्कार पुनः निभाती है।

जब हम इस रहस्य को समझते हैं —
तो मन में शांति, निश्चिंतता और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता आती है।

 अगला अध्याय:
“चारों युग क्या हैं? — सतयुग से कलियुग तक का सफर”

5000 वर्ष का चक्र बार-बार क्यों घूमता है?

(“सृष्टि चक्र का रहस्य” श्रृंखला – भाग 4)


प्रश्न 1 : 5000 वर्ष का सृष्टि चक्र क्या है?

उत्तर :
5000 वर्ष का सृष्टि चक्र एक पूर्ण विश्व नाटक है,
जिसमें चारों युग — सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग —
एक निश्चित क्रम में आते हैं और फिर वही क्रम दोहराया जाता है।
यह चक्र बार-बार वैसे का वैसा घूमता है।


प्रश्न 2 : यह सृष्टि नाटक आकस्मिक है या पूर्व निर्धारित?

उत्तर :
मुरली – 11 अक्टूबर 2025
बाबा कहते हैं —

“मीठे बच्चे, यह विश्व नाटक बेहद सुव्यवस्थित और पूर्वनियत है।”

अर्थात यह सृष्टि कोई संयोग नहीं,
बल्कि पहले से तय (Pre-determined) नाटक है।


प्रश्न 3 : केवल 5000 वर्ष ही क्यों? इससे अधिक या कम क्यों नहीं?

उत्तर :
क्योंकि 5000 वर्ष में —
✔️ मानव आत्माओं का पूर्ण विकास
✔️ गुणों की सम्पूर्ण यात्रा
✔️ पतन से पुनः उत्थान

सब कुछ सटीक रूप से घटित हो जाता है।
यह समय न कम हो सकता है, न अधिक।


प्रश्न 4 : चारों युग 5000 वर्ष में कैसे बँटे हैं?

उत्तर :

युग अवधि विशेषता
सतयुग 1250 वर्ष पूर्ण पवित्रता और सुख
त्रेता 1250 वर्ष गुणों में हल्की कमी
द्वापर 1250 वर्ष अज्ञान की शुरुआत
कलियुग 1250 वर्ष पूर्ण तमोप्रधानता

चारों मिलकर 5000 वर्ष का Cycle of Time बनाते हैं।


प्रश्न 5 : परमात्मा का अवतरण कब होता है?

उत्तर :
जब संसार पूर्ण अंधकार (तमोप्रधान) में पहुँच जाता है।

बापदादा का संदेश है —

“जब अंधकार पूर्ण होता है, तभी प्रकाश का अवतरण होता है।”

अर्थात कलियुग के अंत में संगमयुग आता है।


प्रश्न 6 : सृष्टि चक्र को घड़ी से क्यों तुलना की जाती है?

उत्तर :
मुरली – 4 अक्टूबर 2025

“यह सृष्टि ड्रामा Set और Repeat होने वाला है।”

जैसे घड़ी की सुई 12 पर आकर फिर 12 पर लौटती है,
वैसे ही सतयुग → त्रेता → द्वापर → कलियुग
और फिर पुनः सतयुग।


प्रश्न 7 : क्या यह चक्र कभी रुक सकता है या बदला जा सकता है?

उत्तर :
नहीं।
मुरली – 23 सितंबर 2025

“यह 5000 वर्ष का नाटक हर सेकंड वैसे ही दोहराता है।”

यह इतना सटीक है कि
 इसे इंसान नहीं
 प्रकृति नहीं
 यहाँ तक कि परमात्मा भी नहीं बदलते।


प्रश्न 8 : फिल्म के उदाहरण से यह कैसे समझें?

उत्तर :
जैसे कोई फिल्म —
✔️ कितनी भी बार देखें
✔️ वही सीन
✔️ वही रोल
✔️ वही अंत

वैसे ही यह विश्व नाटक भी हर कल्प हूबहू रिपीट होता है।


प्रश्न 9 : क्या विज्ञान भी चक्र की बात करता है?

उत्तर :
हाँ।
Cyclic Universe Theory कहती है —
✔️ ब्रह्मांड फैलता है (Expansion)
✔️ फिर सिकुड़ता है (Contraction)

यह सिद्ध करता है कि
5000 वर्ष का सृष्टि चक्र
आध्यात्मिक + वैज्ञानिक सत्य है।


प्रश्न 10 : मानव संख्या भी चक्र में क्यों बदलती है?

उत्तर :
सतयुग में — लगभग 9 लाख आत्माएँ
कलियुग में — लगभग 9 अरब

फिर विनाश के बाद पुनः
नव सृष्टि की स्थापना होती है।
यही चक्र का नियम है।


प्रश्न 11 : यह नाटक इतना न्यायप्रिय क्यों है?

उत्तर :
अव्यक्त मुरली – 7 अक्टूबर 2025

“यह चक्र एक सेकंड आगे-पीछे नहीं हो सकता, इसलिए यह सबसे न्यायप्रिय है।”

हर आत्मा —
✔️ वही रोल
✔️ वही समय
✔️ वही परिणाम

पाती है।


प्रश्न 12 : अगर सब कुछ फिक्स है, तो पुरुषार्थ का क्या महत्व है?

उत्तर :
घटना फिक्स है,
लेकिन आत्मा की जागरूकता बदल सकती है।

यही राजयोग है —
परिस्थितियों में स्थिर रहना।


प्रश्न 13 : आत्मा का कर्तव्य क्या है?

उत्तर :
मुरली संकेत

“चक्र को जानो और अपनी श्रेष्ठ भूमिका निभाओ।”

चिंता छोड़कर
श्रेष्ठ कर्म और श्रेष्ठ दृष्टि रखना ही आत्मा का कर्तव्य है।


निष्कर्ष : सृष्टि का अनंत चक्र

यह सृष्टि —
✔️ 5000 वर्ष का शाश्वत नाटक है
✔️ जो अनंत बार हूबहू दोहरता है
✔️ हर आत्मा वही भूमिका निभाती है

इस सत्य को जानने से —
मन में शांति, निश्चिंतता और
परमात्मा के प्रति कृतज्ञता उत्पन्न होती है।

5000 वर्ष का चक्र, सृष्टि चक्र पार्ट 4, सृष्टि चक्र का रहस्य, वर्ल्ड ड्रामा, विश्व नाटक, चार युग, सतयुग त्रेता द्वापर कलियुग, 5000 साल का नाटक, ड्रामा सेट और रिपीट, अविनाशी सृष्टि, पूर्व निर्धारित ड्रामा, शिव बाबा मुरली, ब्रह्माकुमारी ज्ञान, सृष्टि का चक्र, कल्प चक्र, संगमयुग, आत्मा का रोल, चक्रीय ब्रह्मांड, विज्ञान और अध्यात्म, राजयोग ज्ञान, शांति का रहस्य,5000 year cycle, Creation cycle part 4, secret of creation cycle, world drama, world drama, four ages, Satyayug Treta Dwapar Kaliyug, 5000 year drama, drama set and repeat, imperishable creation, predetermined drama, Shiv Baba Murli, Brahma Kumari knowledge, cycle of creation, Kalpa cycle, Confluence Age, role of soul, cyclical universe, science and spirituality, Rajyoga knowledge, secret of peace,