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(07)The Mystery of the Vampire: Are there really negative spirits? Do vampires really exist?

October 25, 2025November 19, 2025omshantibk07@gmail.com

भूत ,प्रेत:-(07)पिशाच का रहस्य क्या वाकई कोई नकारात्मक आत्मा होती है? क्या सच में पिशाच होते हैं?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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भूत, प्रेत, चुड़ैल, पिशाच, निशाचर आदि पर अध्ययन

आज सातवाँ विषय है — पिशाच का रहस्य

क्या वाकई कोई नकारात्मक आत्मा होती है?
क्या सच में पिशाच होते हैं?

आज हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर जो बहुतों को डराता है — पिशाच।
लेकिन ब्रह्मा कुमारीज़ के गहन आध्यात्मिक ज्ञान में इस डर का भी एक दिव्य समाधान है।
क्योंकि जब हम ज्ञान की रोशनी में देखते हैं तो कोई भी अंधकार टिक नहीं सकता।


पिशाच क्या होता है?

सामान्य रूप से लोग समझते हैं कि पिशाच कोई भूत या आत्मा है जो लोगों को डराती है।
परंतु ज्ञान के अनुसार पिशाच कोई अलग प्राणी नहीं, बल्कि वही आत्मा होती है जो अपने विकारों में फंसी हुई है।
वह शरीर छोड़ चुकी होती है, पर उसकी आसक्तियां, क्रोध या लालच अब भी शेष रहते हैं।

क्यों रह जाते हैं?
क्योंकि यह कार्मिक अकाउंट होता है।
जिन आत्माओं के साथ उसका हिसाब-किताब बाकी होता है, उनके साथ बराबरी करने के लिए वह शरीर लेकर पार्ट नहीं बजा सकती।
इसलिए वह सूक्ष्म शरीर के माध्यम से अपना पार्ट बजाती है।


मुरली (2 नवंबर 2018)

“आत्मा जब विकारों में फंसी रहती है तो अशांत रहती है।
ज्ञान और योग से ही आत्मा को शांति मिलती है।”


पिशाच इंसानों को क्यों परेशान करते हैं?

जब आत्मा देह छोड़ती है लेकिन उसकी इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं —
तो वह समान वाइब्रेशन वाले व्यक्तियों के आसपास खिंच जाती है।
अगर किसी में डर, नशा या क्रोध है तो ऐसी आत्माएं उसकी ओर आकर्षित होती हैं।

लेकिन याद रखें — यह केवल उन्हीं आत्माओं के साथ होता है जिनसे उसका कार्मिक संबंध (पार्ट) होता है।
जिनके साथ कोई हिसाब-किताब नहीं है, उनके पास वह आत्मा नहीं जाती।
जैसे ही कार्मिक अकाउंट बराबर होता है, वह आत्मा अलग हो जाती है।


जैसे अंधेरे में कोई प्रकाश लाए तो अंधकार मिट जाता है,
वैसे ही स्मृति योग से ऐसे प्रभाव भी मिट जाते हैं।


क्या पिशाच केवल रात में आते हैं?

यह एक भ्रम है।
आत्माएं समय के बंधन में नहीं होतीं।
रात में मनुष्य का मन शांत होता है, इसलिए उसकी कल्पनाएं अधिक सक्रिय रहती हैं —
और लोग अनुभव करते हैं कि कोई अदृश्य शक्ति है।

मुरली (10 मार्च 2020):
“डर आत्मा का शत्रु है।
जो बाबा को याद करते हैं, उनके पास कोई नकारात्मक शक्ति नहीं आ सकती।”


पिशाच की ऊर्जा और सामान्य आत्मा में क्या अंतर है?

साधारण आत्मा शांति चाहती है।
पिशाच सदृश्य आत्मा भ्रम में होती है — उसकी ऊर्जा भारी और अस्थिर होती है।
वह विकारों से मुक्त नहीं हुई होती।

जैसे गंदा जल बदबू देता है,
वैसे विकारयुक्त आत्मा नकारात्मक कंपन उत्पन्न करती है।

मुरली (8 सितंबर 2021):
“योग से आत्मा सतोप्रधान बनती है। जो सतोप्रधान है वही सच्ची प्रकाशमय आत्मा है।”


पिशाच से सुरक्षित रहने के उपाय:

  1. कर्मों का ज्ञान रखें।
    यदि किसी आत्मा से हमारा कार्मिक अकाउंट है, तो वह अपना पार्ट पूरा करेगी।
    यदि नहीं है, तो वह हमारे पास नहीं आ सकती।

  2. योग और ईश्वर-स्मृति का अभ्यास करें।
    प्रातःकाल योग व ईश्वर की याद में रहने से आत्मा शांत बनती है और स्वाभाविक शक्ति आती है।

  3. सात्विक जीवन शैली अपनाएं।
    नशा, हिंसा और नकारात्मकता से दूरी रखें।
    प्रतिदिन मुरली अध्ययन करें और मन को स्थिर रखें।

  4. परमात्मा शिव से कनेक्शन रखें।
    यही सर्वोच्च सुरक्षा कवच है।

मुरली (21 अक्टूबर 2019):
“जो मेरी याद में रहते हैं, उन्हें कोई नकारात्मक शक्ति छू भी नहीं सकती।”


निष्कर्ष:

पिशाच, भूत या प्रेत से डरने की नहीं,
बल्कि अपने विचारों को पवित्र और शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है।

जब आत्मा बाबा की याद में स्थित होती है,
तो उसके चारों ओर शक्ति और प्रकाश का कवच बन जाता है।
जिसके पास यह दिव्य ऊर्जा होती है, उसके पास कोई नकारात्मक आत्मा नहीं आ सकती।

परंतु अगर हम हॉरर फिल्में, डरावनी कहानियाँ या भूत-प्रेत की चर्चा करते हैं,
तो वही चित्र हमारी बुद्धि में रह जाते हैं और डर या भ्रम पैदा करते हैं।

ज्ञान, योग और ईश्वर-स्मृति से ही आत्मा विकारों और नकारात्मक शक्तियों से मुक्त होती है।
विकर्म विनाश ज्ञान और बाबा की श्रीमत पर चलने से ही संभव है।
जो समझ लेता है कि “मैंने दुख दिया था, अब वही लौटकर आया है,”
वह दुखी नहीं होता — क्योंकि वह आत्मा अब समझ में रहती है।

इस प्रकार, जब आत्मा ज्ञान में स्थिर होती है,
तो उसके सारे विकर्म समाप्त हो जाते हैं और वह सच्चे अर्थों में शांत, शक्तिशाली और मुक्त बन जाती है।

प्रश्न 1: क्या सच में पिशाच या नकारात्मक आत्माएँ होती हैं?

✔ उत्तर: हाँ, लेकिन वे अलग प्राणी नहीं — वही आत्माएँ होती हैं जो विकारों में फँसी होती हैं।

लोग समझते हैं कि पिशाच कोई अलग जीव है।
लेकिन ज्ञान कहता है:

  • आत्मा जब शरीर छोड़ती है

  • और उसके विकार, आसक्ति, क्रोध, लालच, या डर बाकी रह जाते हैं

  • तो वह अस्थिर, भारी, नकारात्मक वाइब्रेशन वाली आत्मा बन जाती है।

यही लोग पिशाच कहते हैं।

 मुरली नोट (2 नवंबर 2018)

“आत्मा जब विकारों में फँसी रहती है तो अशांत रहती है।
ज्ञान और योग से ही आत्मा को शांति मिलती है।”


प्रश्न 2: ये आत्माएँ नकारात्मक क्यों हो जाती हैं?

✔ उत्तर: क्योंकि उनका कार्मिक अकाउंट अधूरा रह जाता है।

कुछ आत्माएँ:

  • इच्छाओं के अधूरे रहने

  • तृष्णा

  • क्रोध

  • बदलेभाव

  • या मोह

के कारण शांत नहीं होतीं।

वे जिन आत्माओं के साथ हिसाब-किताब बना चुकी थीं, उनकी ओर खिंच जाती हैं।

उदाहरण:

जैसे एक अधूरी EMI का बैंक आपको ढूँढ़ता है—
वैसे ही कार्मिक अकाउंट अधूरा होने पर आत्माएँ अपना हिसाब पूरा करती हैं।


प्रश्न 3: क्या पिशाच सिर्फ उन्हीं लोगों को परेशान करते हैं जिनसे हिसाब-किताब हो?

**✔ उत्तर: बिल्कुल।

जिनसे कोई कर्म संबंध नहीं — वहाँ वे नहीं जाते।**

यह आत्माएँ बस वहीं जाती हैं:

  • जहाँ उनसे संबंधित पुराने कर्म हैं

  • जहाँ उनके समान वाइब्रेशन हैं

  • जहाँ लोग डर, नकारात्मकता या नशे में होते हैं

परंतु जिनका कोई अकाउंट नहीं, उनके आसपास वे नहीं टिक सकतीं।


प्रश्न 4: क्या पिशाच रात में ही आते हैं?

✔ उत्तर: नहीं।

आत्माएँ किसी समय बंधन में नहीं होतीं।

रात में:

  • मन शांत होता है

  • बाहरी गतिविधि कम

  • कल्पना अधिक

  • डर ज्यादा सक्रिय होता है

इसलिए लोगों को लगता है कि रात में आत्माएँ आती हैं।

 मुरली नोट (10 मार्च 2020)

“डर आत्मा का शत्रु है।
जो बाबा को याद करते हैं, उनके पास कोई नकारात्मक शक्ति नहीं आ सकती।”


प्रश्न 5: नकारात्मक आत्मा और सामान्य आत्मा में क्या अंतर है?

✔ उत्तर:

सामान्य आत्मा पिशाच-सदृश्य आत्मा
शांति चाहती है भ्रम में रहती है
स्थिर ऊर्जा भारी व अस्थिर ऊर्जा
सतोप्रधान बन सकती है विकारी व तामसी
प्रकाशमय अंधकारमय कंपन

उदाहरण:
जैसे स्वच्छ जल सुगंध देता है
और गंदा जल बदबू—

वैसे ही विकारमय आत्मा नकारात्मक कंपन देती है।

मुरली नोट (8 सितंबर 2021)

“योग से आत्मा सतोप्रधान बनती है।”


प्रश्न 6: क्या पिशाच से बचने का कोई उपाय है?

✔ हाँ — और बहुत सरल है:

1. कर्म-ज्ञान समझें

अगर अकाउंट है — पूरा होगा।
अगर नहीं है — वह आत्मा पास नहीं आ सकती।

2. निरंतर योग का अभ्यास

स्मृति योग शक्ति का कवच बनाता है।

3. सात्विक जीवन शैली

नशा, हिंसा, डर — नकारात्मक वाइब्रेशन खोलते हैं।

4. मुरली अध्ययन

यह मन को स्थिर और शक्तिशाली बनाता है।

5. परमात्मा शिव का कनेक्शन

सबसे शक्तिशाली सुरक्षा।

 मुरली नोट (21 अक्टूबर 2019)

“जो मेरी याद में रहते हैं, उन्हें कोई नकारात्मक शक्ति छू भी नहीं सकती।”


प्रश्न 7: क्या पिशाच वास्तव में मनुष्य को नुकसान पहुँचाते हैं?

✔ उत्तर:

नहीं — वे सिर्फ वाइब्रेशन के स्तर पर प्रभाव डालते हैं।
नुकसान वहीं तक होता है जहाँ:

  • डर है

  • नैगेटिव सोच है

  • नशा है

  • क्रोध है

  • और कर्म-रिश्ता है

जिस व्यक्ति की विचार शक्ति, योग, और शक्ति ऊँची है—
उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।


प्रश्न 8: हॉरर फिल्में देखने से क्या प्रभाव पड़ता है?

✔ उत्तर:

फिल्मों के दृश्य बुद्धि के सबकॉन्शियस में जम जाते हैं,
जो:

  • डर बढ़ाते हैं

  • कल्पना को सक्रिय करते हैं

  • नकारात्मकता खींचते हैं

इससे आत्मा की ऊर्जा कमजोर होती है।


निष्कर्ष (Conclusion)

  • पिशाच कोई अलग प्राणी नहीं — वही आत्मा है जो विकारों में फँसी है।

  • कार्मिक अकाउंट बराबर होने तक वह खिंच सकती है।

  • योग और ज्ञान से आत्मा सशक्त बन जाती है—फिर कोई नकारात्मक शक्ति निकट नहीं आ सकती।

  • डर अज्ञानता है, ज्ञान प्रकाश है।

  • परमात्म याद प्रकाश का कवच है।

  • Disclaimer

    यह वीडियो किसी को डराने, अंधविश्वास फैलाने या किसी मत-पंथ के विरुद्ध कुछ कहने के उद्देश्य से नहीं है।
    यह केवल ब्रह्मा कुमारीज़ के आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित एक अध्ययन है,
    जिसका उद्देश्य है — आत्मा, कर्म और सूक्ष्म शक्तियों को सही दृष्टि से समझना।

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