(12)Why wasn’t Lord Krishna a king?

S.Y.(12)श्री कृष्ण राजा क्यों नहीं?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय 12

संगम युग ही नई दुनिया की नींव

आज का विषय पाँच गहरे रहस्यों पर आधारित है:

  1. श्री कृष्ण राजा क्यों नहीं?

  2. कर्म इंद्रियों का सच्चा राजा कौन?

  3. गीता का वास्तविक अर्थ

  4. मोक्ष का रहस्य

  5. बाप, टीचर और सतगुरु – तीनों रूपों का ज्ञान


1️⃣ यह प्रश्न आज सबसे जरूरी क्यों?

आज संसार भ्रम से भरा हुआ है।

 संदेह और भ्रम में अंतर

संदेह भ्रम
निर्णय न कर पाना गलत निर्णय को सही मान लेना
रस्सी है या सांप – समझ न आना रस्सी को ही सांप समझ लेना

 झूठे सुख को सुख समझ लेना – यही भ्रम है।
 जो भगवान नहीं है उसे भगवान मान लेना – यही भ्रम है।

आज:

  • कृष्ण को भगवान कह दिया।

  • गीता को युद्ध ग्रंथ समझ लिया।

  • मोक्ष को सदा की छुट्टी मान लिया।

लेकिन संगम युग में परमात्मा कहते हैं –
“मैं तुम्हें सत्य, इतिहास और भूगोल समझाता हूं।”


2️⃣ श्री कृष्ण राजा क्यों नहीं?

मुरली – 18 जनवरी 1969

बाबा ने कहा –
“सतयुग में श्री कृष्ण राजकुमार है, राजा नहीं।”

क्यों?

सतयुग में राजगद्दी पर लक्ष्मी-नारायण बैठते हैं।
कृष्ण उनका बाल रूप है।

ऐतिहासिक दृष्टांत

  • कृष्ण का जन्म कंस के राज्य में हुआ।

  • कंस मामा था, जो भांजे को मारना चाहता था।

  • यह घोर कलयुग की निशानी है।

कंस को मारने के बाद भी कृष्ण स्वयं राजा नहीं बने।
उन्होंने नाना को गद्दी पर बैठाया।

महत्वपूर्ण बिंदु

राजा बनने के लिए संघर्ष चाहिए।
सतयुग में संघर्ष नहीं होता।
राजकुमार जन्म से ही अधिकारी होता है।


3️⃣ कर्म इंद्रियों का सच्चा राजा कौन?

मुरली – 12 अगस्त 1968

“जो कर्म इंद्रियों को जीत लेता है वही सच्चा राजा है।”

पांच कर्म इंद्रियां:

  • आंख

  • कान

  • वाणी

  • हाथ

  • पांव

जो इनको विकारों से चलने नहीं देता –
वही श्रीकृष्ण समान आत्मा है।

 बाहरी राज्य से पहले आंतरिक राज्य चाहिए।
 जिसने स्वयं पर विजय पाई वही महाराजा है।


4️⃣ क्या कलयुग में सतोप्रधान राजा संभव है?

मुरली – 30 नवंबर 1967

“रावण राज्य में सतोप्रधानता संभव नहीं।”

आज:

  • सत्ता हिंसा से आती है।

  • राजनीति स्वार्थ से चलती है।

  • प्रतियोगिता और संघर्ष है।

इसलिए आज देवता समान राजा संभव नहीं।


5️⃣ गीता का वास्तविक अर्थ

मुरली – 25 नवंबर 1965

“गीता का ज्ञान संगम पर समझ में आता है।”

गीता में लिखा है:

देह सहित देह के सब धर्म छोड़ो और मुझ एक को याद करो।

इसका अर्थ:

  • जाति छोड़ो

  • लिंग छोड़ो

  • धर्म छोड़ो

  • देहाभिमान छोड़ो

 अपने को आत्मा समझो।

युद्ध के मैदान में यह शिक्षा नहीं दी जा सकती।
यह आत्मिक शिक्षा है।


6️⃣ नई दुनिया में निर्णय ऑटोमेटिक कैसे?

मुरली – 21 मार्च 1970

“आत्मा में संस्कार रिकॉर्डेड हैं।”

आत्मा = एक सीडी
5000 वर्ष का पार्ट रिकॉर्डेड।

सतयुग में:

  • शरीर सतोप्रधान

  • बुद्धि शुद्ध

इसलिए भोजन, व्यवहार, निर्णय – सब स्वतः सही होते हैं।


7️⃣ आत्मा नया जन्म क्यों लेती है?

मुरली – 7 फरवरी 1971

हर जन्म में नया पार्ट।

जैसे अभिनेता:

  • एक फिल्म में राजा

  • दूसरी में गरीब

वैसे आत्मा:

  • नया शरीर

  • नया नाम

  • नया देश

  • नया रोल

पर कार्मिक अकाउंट बराबर होता है।


8️⃣ मोक्ष स्थायी क्यों नहीं?

यदि कोई आत्मा स्थायी रूप से बाहर हो जाए
तो ड्रामा अनादि कैसे रहेगा?

ड्रामा चक्राकार है।

मोक्ष = कर्मों से अस्थाई मुक्ति
स्थायी अनुपस्थिति नहीं।


9️⃣ भगवान टीचर कैसे बनते हैं?

मुरली – 9 सितंबर 1965

“भक्ति में याद है, ज्ञान में पढ़ाई है।”

भक्ति मार्ग में:

  • पुकारते हैं

  • रोते हैं

  • मांगते हैं

संगम पर:

  • उत्तर मिलता है

  • ज्ञान मिलता है

  • शिक्षा मिलती है

इसलिए भगवान टीचर बनते हैं।


🔟 बाप, टीचर, सतगुरु – तीन रूप

 बाप

विरासत देता है – स्वर्ग का अधिकार।

 टीचर

ज्ञान देता है – आत्म पहचान।

 सतगुरु

मंजिल तक पहुंचाता है – मुक्ति और जीवनमुक्ति।


 निष्कर्ष

मुरली – 5 दिसंबर 1966

“संगम युग छोटा है पर सबसे महान है।”

संगम युग:

  • भ्रम से सत्य की यात्रा

  • देह से आत्मा की यात्रा

  • अज्ञान से ज्ञान की यात्रा

यदि आज आपके भ्रम टूट रहे हैं
तो समझ लीजिए —
आप सत्य की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 1: यह विषय आज सबसे ज्यादा जरूरी क्यों है?

✅ उत्तर:

क्योंकि आज संसार भ्रम से भरा हुआ है।

  • जो भगवान नहीं है उसे भगवान कह दिया।

  • गीता को युद्ध का ग्रंथ समझ लिया।

  • मोक्ष को सदा की छुट्टी मान लिया।

संगम युग में परमात्मा स्वयं आकर कहते हैं —
“मैं तुम्हें सत्य, इतिहास और भूगोल समझाता हूँ।”


 प्रश्न 2: संदेह और भ्रम में क्या अंतर है?

✅ उत्तर:

  • संदेह = निर्णय न कर पाना (रस्सी है या सांप?)

  • भ्रम = गलत को सही मान लेना (रस्सी को ही सांप समझ लेना)

झूठे सुख को सुख समझ लेना — यही भ्रम है।


 प्रश्न 3: श्री कृष्ण को राजकुमार क्यों कहा जाता है, राजा क्यों नहीं?

मुरली – 18 जनवरी 1969

✅ उत्तर:

बाबा ने कहा – “सतयुग में श्री कृष्ण राजकुमार है, राजा नहीं।”

  • सतयुग में लक्ष्मी-नारायण राजगद्दी पर बैठते हैं।

  • कृष्ण उनका बाल रूप है।

  • कृष्ण का जन्म कंस के राज्य में हुआ — जो कलयुग का प्रतीक है।

  • कंस को मारने के बाद भी स्वयं राजा नहीं बने, नाना को गद्दी दी।

 सतयुग में संघर्ष नहीं होता।
 राजकुमार जन्म से अधिकारी होता है।


 प्रश्न 4: कर्म इंद्रियों का राजा कौन?

मुरली – 12 अगस्त 1968

✅ उत्तर:

“जो कर्म इंद्रियों को जीत लेता है वही सच्चा राजा है।”

पाँच कर्म इंद्रियां:

  • आँख

  • कान

  • वाणी

  • हाथ

  • पांव

जो इन्हें विकारों से चलने नहीं देता — वही आत्मा श्रीकृष्ण समान बनती है।

 बाहरी राज्य से पहले आंतरिक राज्य चाहिए।


 प्रश्न 5: क्या आज रावण राज्य में सतोप्रधान राजा संभव है?

मुरली – 30 नवंबर 1967

✅ उत्तर:

नहीं।

  • सत्ता हिंसा से आती है।

  • राजनीति स्वार्थ से चलती है।

  • वातावरण ही तमोप्रधान है।

इसलिए आज देवता समान राजा संभव नहीं।


 प्रश्न 6: गीता का वास्तविक अर्थ क्या है?

मुरली – 25 नवंबर 1965

✅ उत्तर:

गीता का ज्ञान संगम युग पर समझ में आता है।

“देह सहित देह के सब धर्म छोड़ो…”

अर्थ:

  • जाति नहीं

  • लिंग नहीं

  • धर्म नहीं

  • देहाभिमान नहीं

 अपने को आत्मा समझो।

गीता युद्ध का ग्रंथ नहीं — आत्मज्ञान का ग्रंथ है।


 प्रश्न 7: नई दुनिया में निर्णय स्वतः सही कैसे होंगे?

मुरली – 21 मार्च 1970

✅ उत्तर:

आत्मा में 5000 वर्ष का पार्ट रिकॉर्डेड है।

आत्मा एक सीडी समान है।

सतयुग में:

  • शरीर सतोप्रधान

  • बुद्धि शुद्ध

इसलिए भोजन, व्यवहार, निर्णय — स्वतः सही।


 प्रश्न 8: हर जन्म में नाम, रूप, देश क्यों बदलता है?

मुरली – 7 फरवरी 1971

✅ उत्तर:

हर जन्म में आत्मा नया पार्ट बजाती है।

जैसे अभिनेता:

  • अलग फिल्म

  • अलग रोल

वैसे आत्मा:

  • नया शरीर

  • नया नाम

  • नया देश

पर कार्मिक अकाउंट पूरा होता है।


 प्रश्न 9: ड्रामा अनादि है तो स्थायी मोक्ष क्यों संभव नहीं?

✅ उत्तर:

यदि आत्मा स्थायी रूप से बाहर चली जाए
तो 5000 वर्ष का ड्रामा चक्र पूरा कैसे होगा?

मोक्ष = कर्मों से अस्थायी मुक्ति
स्थायी अनुपस्थिति नहीं।


 प्रश्न 10: भक्ति मार्ग का भगवान संगम युग में शिक्षक कैसे बनता है?

📖मुरली – 9 सितंबर 1965

✅ उत्तर:

भक्ति में:

  • याद है

  • पुकार है

ज्ञान में:

  • पढ़ाई है

  • समझ है

इसलिए संगम पर भगवान टीचर बनते हैं।


 प्रश्न 11: बाप, टीचर और सतगुरु – तीनों में क्या अंतर है?

✅ उत्तर:

🔹 बाप – विरासत देता है (स्वर्ग का अधिकार)
🔹 टीचर – ज्ञान देता है (आत्म पहचान)
🔹 सतगुरु – मंजिल तक ले जाता है (मुक्ति)


 निष्कर्ष

मुरली – 5 दिसंबर 1966

“संगम युग छोटा है पर सबसे महान है।”

संगम युग क्या है?

  • भ्रम से सत्य की यात्रा

  • देह से आत्मा की यात्रा

  • अज्ञान से ज्ञान की यात्रा

आवश्यक सूचना (Disclaimer)

यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं, मुरली ज्ञान एवं व्यक्तिगत अध्ययन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, शास्त्र, परंपरा या मान्यता का खंडन या आलोचना करना नहीं है।
यह प्रस्तुति केवल आत्मिक जागृति, जीवन परिवर्तन और संगम युग की सही समझ के लिए है।
दर्शक इसे आध्यात्मिक दृष्टि से ग्रहण करें।

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