(15) When does the soul enter the body? What does the soul think before birth?

AAT.(15)”आत्मा कब आती है शरीर में?जन्म से पहले आत्मा क्या सोचती है ?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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आत्मा कब आती है शरीर में?

(आध्यात्मिक अध्ययन आधारित: मुरली 16 नवंबर 2025)


1. प्रस्तावना — जन्म का अदृश्य रहस्य

हर मानव ने कभी न कभी यह प्रश्न अवश्य पूछा है—

“आत्मा शरीर में कब प्रवेश करती है?”
“जन्म से पहले आत्मा क्या सोचती है?”

बहुत-से लोग कहते हैं:

  • तीसरे महीने आत्मा आती है

  • चुर–पुर शुरू होती है तब आती है

परंतु चुर–पुर कारण नहीं है। वह केवल संकेत (Signal) है।
मूल प्रश्न है —
आत्मा कब आती है? क्यों आती है? कौन भेजता है?


2. मूल उत्तर — आत्मा कब आती है?

भाईजी कहते हैं—
“जब आत्मा का पुराना पार्ट खत्म होता है और नया पार्ट शुरू होता है, तब आत्मा शरीर में प्रवेश करती है।”

यही इस रहस्य की जड़ है।

आत्मा दो स्थानों से आती है:

  1. परमधाम से

  2. इस संसार से (एक शरीर छोड़ दूसरे गर्भ में)


3. आत्मा का पहला प्रकार: परमधाम से आना

कल्प की शुरुआत में जब आत्माएँ प्रथम बार अवतरण करती हैं, तब—

  • परमधाम में कोई संकल्प नहीं होता।

  • जैसे ही समय पूरा होता है—
    एक सेकंड में आत्मा उतर आती है।

आत्मा सोचती है:

“मेरा कॉस्ट्यूम नीचे तैयार है… मुझे जाना है।”

उदाहरण:

जैसे थिएटर में कलाकार को पता हो कि उसका रोल शुरू होने वाला है—
वह तुरंत मंच पर उतर जाता है।
उसी तरह आत्मा समय पूरा होते ही आती है।


4. आत्मा का दूसरा प्रकार: इस संसार से आना

जब आत्मा एक शरीर छोड़ती है, तो उसका संकल्प होता है—

“यहाँ मेरा हिसाब-किताब पूरा हुआ… अब मुझे अगले गर्भ में प्रवेश करना है।”

इसमें दो बातें होती हैं—

  • परिवार, कर्म, रिश्तों का अकाउंट समाप्त होता है

  • नया शरीर, नया गर्भ आकर्षित करता है (कर्म अनुसार)


5. ‘चुर–पुर’ क्या है? कारण या संकेत?

बहुत लोग कहते हैं:

“गर्भ में चुर–पुर हुई → आत्मा आ गई।”

पर यह कारण नहीं,
यह तो केवल शरीर के अंग हिलने का संकेत है

आत्मा कभी भी प्रवेश कर सकती है—
उसके आने का सही कारण है—
उसके नये पार्ट का समय शुरू होना।


6. आत्मा के जन्म से पहले आने के तीन संकल्प

(1) परमधाम से सीधा आना

संकल्प:
“नीचे मेरा शरीर है… मुझे जाना है।”

(2) गर्भ में प्रवेश करना

संकल्प:
“कोई मुझे बुला रहा है… गर्भ तैयार है।”

(3) एक शरीर से दूसरे में बदलना

संकल्प:
“यहाँ हिसाब पूरा… अब नया जन्म।”


7. जन्म से पहले आत्मा क्या सोचती है?

बहुत गहरा प्रश्न है।
आध्यात्मिक ज्ञान कहता है—

जन्म से पहले आत्मा के पास होता है:

  • संस्कार

  • अपना भावी पार्ट

  • कर्मों का आकर्षण

  • गर्भ का निमंत्रण

आत्मा सोचती है—

“यह मेरा नया रोल है… मुझे इसे निभाना है।”


8. आत्मा का उतरना — ‘The Voice’ (जगदीश भाई) की व्याख्या

जगदीश भाई लिखते हैं:

  • आत्मा को अपनी पिछली कॉस्ट्यूम याद होती है।

  • आत्मा जानती है कि उसे कौन-सा शरीर पहनना है।

  • कुछ आत्माएँ ऊपर से निमंत्रण सुनकर आती हैं — “अब नीचे आओ।”

यह प्रक्रिया अत्यंत सूक्ष्म और दिव्य है।


9. आत्मा और शरीर — रथ और रथी का सिद्धांत

शरीर = रथ
आत्मा = रथी (ड्राइवर)

जब रथी नहीं है → रथ = अर्थी
इसलिए शरीर मृत कहलाता है।

उदाहरण:

अर्जुन का रथ → सारथी श्रीकृष्ण
ब्रह्मा बाबा का तन → सारथी शिवबाबा


10. आत्मा कहाँ रहती है?

आम भाषा में कहा जाता है—

“भृकुटी में आत्मा है।”

यह स्मरण की बिंदी है।
वास्तविक स्थान है—

👉 3–4 इंच अंदर, रीढ़ की हड्डी और ब्रेन के संधि-स्थान पर
यहीं से:

  • आदेश (Order) निकलते हैं

  • शरीर संचालित होता है

  • रिकॉर्डिंग (Sanskar) होती है

इसी कारण इसे आज्ञा चक्र कहा जाता है।


11. मुरली नोट — 16 नवंबर 2025

“यह शरीर आत्मा का घर है। आत्मा इसकी मालकिन है।”

क्यों मालकिन?

क्योंकि—

  • मन

  • बुद्धि

  • संस्कार

आत्मा में होते हैं।
शरीर केवल साधन है।
इसलिए मालिक आत्मा ही है।


12. निष्कर्ष — जन्म का आध्यात्मिक विज्ञान

  • आत्मा समय आने पर शरीर में आती है।

  • यह कर्म, रोल, निमंत्रण और समय का खेल है।

  • आत्मा अविनाशी है। शरीर केवल एक कॉस्ट्यूम।

  • जन्म से पहले आत्मा एक सूक्ष्म संकल्प लेती है —
    “मुझे अपना नया पार्ट निभाना है।”

  • Q1: मनुष्य सबसे पहले कौन-सा प्रश्न पूछता है?

    ✔ A1: हर मानव कभी न कभी यह प्रश्न पूछता है—

    • “आत्मा शरीर में कब प्रवेश करती है?”

    • “जन्म से पहले आत्मा क्या सोचती है?”

    ज्यादातर लोग मानते हैं कि चुर–पुर होने पर आत्मा आती है, पर यह केवल संकेत है, कारण नहीं


     Q2: आत्मा शरीर में कब प्रवेश करती है?

    ✔ A2: जब आत्मा का पुराना पार्ट समाप्त होता है और नया पार्ट शुरू होता है, तब आत्मा नया शरीर धारण करती है।
    यही आत्मा-प्रवेश का आधार है।


     Q3: आत्मा दो जगहों से कैसे आती है?

    ✔ A3:
    आत्मा दो स्थानों से आती है—

    1. परमधाम से — जब कल्प की शुरुआत होती है।

    2. संसार से — एक शरीर छोड़कर दूसरे गर्भ में प्रवेश।


     Q4: जब आत्मा परमधाम से आती है तब क्या होता है?

    ✔ A4: परमधाम में आत्मा के पास कोई संकल्प नहीं होता।
    जैसे ही समय पूरा होता है—
    एक सेकंड में आत्मा उतर आती है।

    संकल्प होता है—
    “मेरा कॉस्ट्यूम नीचे तैयार है… मुझे जाना है।”


     Q5: जब आत्मा संसार से दूसरे शरीर में आती है, तो क्या सोचती है?

    ✔ A5: आत्मा का संकल्प होता है—
    “यहाँ मेरा कर्म-अकाउंट पूरा हुआ… अब मुझे नया जन्म लेना है।”

    यह कर्म, परिवार और संस्कारों के अनुसार अगला गर्भ चुनती है।


     Q6: गर्भ में चुर–पुर होने से आत्मा का आना सिद्ध होता है?

    ✔ A6: नहीं।
    चुर–पुर कारण नहीं है, केवल संकेत है।
    अंग बनते हैं, हिलते हैं — शरीर जीवंत होता है।
    लेकिन आत्मा उससे पहले या बाद में भी प्रवेश कर सकती है।
    आत्मा के आने का कारण केवल उसके नए रोल का समय है।


     Q7: आत्मा के आने से पहले तीन प्रकार के संकल्प कौन-से हैं?

    ✔ A7:
    आत्मा तीन प्रकार के संकल्प करती है—

    1. परमधाम से सीधा आना — “मेरा शरीर नीचे है… मुझे जाना है।”

    2. गर्भ में प्रवेश करना — “गर्भ मुझे बुला रहा है।”

    3. एक शरीर से दूसरा शरीर धारण करना — “यहाँ हिसाब पूरा… अब नया जन्म।”


     Q8: जन्म से पहले आत्मा क्या सोचती है?

    ✔ A8: आत्मा सोचती है—
    “यह मेरा नया रोल है… मुझे इसे निभाना है।”
    उसके पास होता है:

    • संस्कार

    • नया पार्ट

    • कर्म-अकाउंट

    • गर्भ का निमंत्रण


     Q9: जगदीश भाई जी (The Voice) में आत्मा के उतरने को कैसे समझाते हैं?

    ✔ A9:
    वे लिखते हैं कि—

    • आत्मा को अपनी पिछली कॉस्ट्यूम का बोध होता है।

    • उसे पता होता है कि कौन-सा शरीर उसे धारण करना है।

    • कुछ आत्माएँ ‘निमंत्रण’ सुनकर नीचे उतरती हैं।

    यह प्रक्रिया अत्यंत दिव्य और सूक्ष्म है।


     Q10: आत्मा और शरीर का संबंध किस उदाहरण से समझा सकते हैं?

    ✔ A10:
    शरीर = रथ
    आत्मा = रथी (ड्राइवर)

    जब रथी नहीं → रथ = अर्थी
    इसीलिए शरीर मृत कहलाता है।

    उदाहरण:
    अर्जुन का रथ → कृष्ण सारथी
    ब्रह्मा बाबा का तन → शिवबाबा सारथी


     Q11: आत्मा वास्तव में कहाँ रहती है?

    ✔ A11:
    आत्मा की वास्तविक सीट है—
    3–4 इंच अंदर, रीढ़ की हड्डी और ब्रेन के मिलन-स्थान पर।

    यहीं से:

    • आदेश (Order) निकलते हैं

    • शरीर संचालित होता है

    • संस्कार रिकॉर्ड होते हैं

    इसी स्थान को आज्ञा चक्र कहते हैं।


     Q12: मुरली 16 नवंबर 2025 में क्या मुख्य बात कही?

    ✔ A12: बाबा कहते हैं—
    “यह शरीर आत्मा का घर है। आत्मा इसकी मालकिन है।”

    क्योंकि मन, बुद्धि, संस्कार — तीनों आत्मा में होते हैं।
    शरीर तो केवल एक साधन है।


     Q13: जन्म का पूरा आध्यात्मिक विज्ञान क्या बताता है?

    ✔ A13:
    जन्म = आत्मा का नया रोल
    शरीर = केवल कॉस्ट्यूम
    समय = प्रवेश का कारण

    जन्म से पहले आत्मा एक संकल्प लेती है—
    “मुझे अपना नया पार्ट निभाना है।”

Disclaimer

यह वीडियो आध्यात्मिक अध्ययन पर आधारित है।
इसमें बताए गए विचार शिवबाबा की मुरलियों, ब्रह्माकुमारी शिक्षाओं और आध्यात्मिक ग्रंथों पर आधारित हैं।
इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान फैलाना, मनन कराना और जीवन को उन्नत बनाना है।
यह किसी भी धार्मिक मत, वैज्ञानिक शोध या मेडिकल सलाह के विरुद्ध नहीं है।
कृपया इसे आध्यात्मिक चिंतन के रूप में स्वीकार करें।

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