(15)Is it possible for anyone to become a truly virtuous king in today’s world?

S.Y.(15)क्या आज की दुनिया में कोई भी सतो प्रधान राजा बन सकता है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय : संगम युग — नई दुनिया की नीव

भूमिका (Introduction)

संगम युग —
न पुरानी दुनिया,
न पूरी नई दुनिया,
बल्कि नई दुनिया की नीव

आज हम पाठ 15 में एक बहुत बड़ा प्रश्न उठाते हैं—

क्या आज की दुनिया में कोई भी सतोप्रधान राजा बन सकता है?

यही प्रश्न हमें ले जाता है
रावण राज्य बनाम राम राज्य
की गहराई में।


नंबर 1 — आज का सबसे बड़ा सवाल

अक्सर मन में प्रश्न उठता है—

  • क्या आज की दुनिया में कोई राजा, शासक या नेता
    पूरी तरह सतोप्रधान बन सकता है?

  • अगर नहीं, तो क्यों नहीं?

ब्रह्मा कुमारीज़ का ज्ञान
इसका उत्तर बहुत स्पष्ट देता है—

आज की दुनिया में सतोप्रधान राजा बनना असंभव है।

लेकिन यह समझने के लिए हमें
तीन बातों को गहराई से समझना होगा—

  1. सतोप्रधानता क्या है?

  2. आज कौन-सा युग चल रहा है?

  3. आज राज्य कैसे मिलता है?


नंबर 2 — सतोप्रधानता का वास्तविक अर्थ

मुरली – 30 नवंबर 1967

“सतोप्रधान माना संपूर्ण निर्विकारी और आत्म-अभिमानी।”

 सतोप्रधान आत्मा की पहचान:

  • पूर्ण पवित्रता

  • विकारों से पूर्ण मुक्ति

  • देह-अभिमान का पूर्ण त्याग

पूर्ण पवित्रता का अर्थ
“मैं आत्मा हूँ” के सिवाय
कोई भी देह-भाव नहीं।

सिर्फ एक को ‘मेरा’ कहा जा सकता है — शिव बाबा।

 उदाहरण:

आज के शासक के पास—

  • परिवार

  • पद

  • सत्ता

  • स्वार्थ

  • प्रतिस्पर्धा

तो क्या ऐसी स्थिति में
पूर्ण निर्विकारिता संभव है?


नंबर 3 — देह-भान से मुक्ति क्यों असंभव है?

सतोप्रधान जीवन का आधार—

  • विकार-शून्य स्थिति

  • स्वार्थ-रहित अवस्था

अब प्रश्न उठता है—

क्या आज की सत्ता में रहते हुए
कोई व्यक्ति इन गुणों को धारण कर सकता है?

उत्तर है — नहीं।

क्योंकि सत्ता स्वयं
देह-अभिमान को बढ़ाती है।


नंबर 4 — आज की दुनिया किस युग में है?

मुरली – 2 अक्टूबर 1967

“यह रावण राज्य है, जहाँ सब रजो-तमोप्रधान हैं।”

 कलयुग की विशेषताएँ:

  • संघर्ष

  • प्रतिस्पर्धा

  • हिंसा

  • स्वार्थ

  • भय

यह वातावरण ही सतोप्रधानता के विरुद्ध है।


नंबर 5 — आज राजा बनने की प्रक्रिया

आज राजा वही बनता है—

  • जिसके पास धन है

  • शक्ति है

  • राजनीति है

  • चालाकी है

  • बाहुबल है

मुरली का संकेत

रावण राज्य में
राज्य बल और बुद्धि-बल से मिलता है।

ये सभी गुण
सतोप्रधानता के बिल्कुल विपरीत हैं।


नंबर 6 — सत्ता और पवित्रता का टकराव

मुरली – 7 फरवरी 1971

“जहाँ सत्ता और स्वार्थ है
वहाँ विकार अवश्य आएंगे।”

 आज की सत्ता—

  • आत्मिक शुद्धता बढ़ाती नहीं

  • बल्कि नष्ट करती है


नंबर 7 — सतोप्रधान राजा कहाँ संभव है?

मुरली – 18 जनवरी 1969

“सतोप्रधान राज्य सतयुग में ही होता है।”

 सतयुग की विशेषताएँ:

  • कोई राजनीति नहीं

  • कोई हिंसा नहीं

  • कोई संघर्ष नहीं

  • राज्य व्यवस्था स्वाभाविक

राजा बनता नहीं,
संस्कार से प्रकट होता है।


नंबर 8 — आज के राजा और सतयुग के राजा में अंतर

आज का राजा सतयुग का राजा
रजो-तमोप्रधान सतोप्रधान
बल से सत्ता संस्कार से राज्य
डर से शासन प्रेम से व्यवस्था

मुरली – 9 सितंबर 1965

“राम राज्य में राज्य अधिकार नहीं,
स्वभाव होता है।”


नंबर 9 — क्या आज कोई सतोप्रधान बन सकता है?

मुरली – 21 मार्च 1970“संगम युग में आत्मा

सतोप्रधान बनने की पढ़ाई करती है।”

 आज राजा बनना संभव नहीं,
लेकिन—

राजा आत्मा बनना संभव है।

 राजा आत्मा कौन?

  • मन का राजा

  • बुद्धि का राजा

  • संस्कारों का राजा

  • कर्मेन्द्रियों का राजा


नंबर 10 — संगम युग: ट्रेनिंग का समय

मुरली – 14 अप्रैल 1972

“अब जो जैसा पुरुषार्थ करेगा
वही पद पाएगा।”

आज हम—

  • आत्मिक अभ्यास करते हैं

  • पवित्रता धारण करते हैं

ताकि
सतयुग में राजा बन सकें।


निष्कर्ष (Conclusion)

मुरली – 5 दिसंबर 1966

“रावण राज्य में देवता नहीं हो सकते।”

इसलिए—

  • आज की दुनिया में
    सतोप्रधान राजा बनना संभव नहीं

  • लेकिन आज
    सतोप्रधान आत्मा बनना संभव है


अंतिम संदेश (Powerful Closing)

अगर आज आप दुनिया को बदलना चाहते हैं—

राजा बनने की नहीं,
राजा आत्मा बनने की कोशिश करो।

क्योंकि—

आज का पुरुषार्थ ही
कल का राज्य है।

प्रश्न 1: संगम युग क्या है?

उत्तर:
संगम युग वह विशेष समय है जो
न पुरानी दुनिया है और न पूरी नई दुनिया,
बल्कि नई दुनिया की नीव रखने का युग है।
यही वह समय है जब आत्माएँ अपने भविष्य के राज्य का निर्माण करती हैं।


प्रश्न 2: इस अध्याय का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर:
इस अध्याय का मुख्य प्रश्न है—
“क्या आज की दुनिया में कोई भी सतोप्रधान राजा बन सकता है?”
यही प्रश्न हमें रावण राज्य और राम राज्य के अंतर को समझने की ओर ले जाता है।


 नंबर 1 — आज के बड़े प्रश्न पर आधारित Q&A

प्रश्न 3: क्या आज की दुनिया में कोई राजा या नेता पूरी तरह सतोप्रधान बन सकता है?

उत्तर:
ब्रह्मा कुमारीज़ के ज्ञान के अनुसार—
नहीं।
आज की दुनिया में सतोप्रधान राजा बनना असंभव है।


प्रश्न 4: सतोप्रधान राजा न बन पाने के कारण क्या हैं?

उत्तर:
इसे समझने के लिए तीन बातों को जानना आवश्यक है—

  1. सतोप्रधानता क्या है

  2. आज कौन-सा युग चल रहा है

  3. आज राज्य कैसे प्राप्त होता है


 नंबर 2 — सतोप्रधानता के अर्थ पर प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 5: सतोप्रधानता का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर:
मुरली – 30 नवंबर 1967

“सतोप्रधान माना संपूर्ण निर्विकारी और आत्म-अभिमानी।”

सतोप्रधानता का अर्थ है—

  • पूर्ण पवित्रता

  • विकारों से संपूर्ण मुक्ति

  • देह-अभिमान का पूर्ण त्याग


प्रश्न 6: पूर्ण पवित्रता किसे कहते हैं?

उत्तर:
पूर्ण पवित्रता का अर्थ है—
“मैं आत्मा हूँ” के सिवाय
कोई भी देह-भाव न होना।
ऐसी स्थिति में आत्मा सिर्फ एक को ही ‘मेरा’ कहती है — शिव बाबा को।


प्रश्न 7: क्या आज का शासक पूर्ण निर्विकारी हो सकता है?

उत्तर:
आज के शासक के पास—
परिवार, पद, सत्ता, स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा होती है।
ऐसी स्थिति में पूर्ण निर्विकारिता संभव नहीं


 नंबर 3 — देह-भान से मुक्ति पर प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 8: सतोप्रधान जीवन का आधार क्या है?

उत्तर:
सतोप्रधान जीवन का आधार है—

  • विकार-शून्य स्थिति

  • स्वार्थ-रहित अवस्था


प्रश्न 9: क्या सत्ता में रहते हुए देह-भान से मुक्त रहना संभव है?

उत्तर:
नहीं।
क्योंकि सत्ता स्वयं
देह-अभिमान को बढ़ाती है,
जिससे आत्मिक शुद्धता घटती है।


 नंबर 4 — युग की पहचान पर प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 10: आज की दुनिया किस युग में है?

उत्तर:
मुरली – 2 अक्टूबर 1967

“यह रावण राज्य है, जहाँ सब रजो-तमोप्रधान हैं।”

आज की दुनिया कलयुग में है।


प्रश्न 11: कलयुग की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर:

  • संघर्ष

  • प्रतिस्पर्धा

  • हिंसा

  • स्वार्थ

  • भय

यह वातावरण सतोप्रधानता के बिल्कुल विपरीत है।


 नंबर 5 — आज राजा बनने की प्रक्रिया

प्रश्न 12: आज राजा या शासक कैसे बनता है?

उत्तर:
आज वही राजा बनता है जिसके पास—
धन, शक्ति, राजनीति, चालाकी और बाहुबल हो।


प्रश्न 13: मुरली के अनुसार रावण राज्य में राज्य कैसे मिलता है?

उत्तर:
मुरली संकेत
रावण राज्य में
राज्य बल और बुद्धि-बल से मिलता है,
जो सतोप्रधानता के विपरीत है।


 नंबर 6 — सत्ता और पवित्रता

प्रश्न 14: सत्ता और पवित्रता का आपस में क्या संबंध है?

उत्तर:
मुरली – 7 फरवरी 1971

“जहाँ सत्ता और स्वार्थ है, वहाँ विकार अवश्य आएंगे।”

आज की सत्ता आत्मिक शुद्धता को बढ़ाती नहीं,
बल्कि नष्ट करती है।


 नंबर 7 — सतोप्रधान राजा कहाँ संभव है?

प्रश्न 15: सतोप्रधान राजा किस युग में होता है?

उत्तर:
मुरली – 18 जनवरी 1969

“सतोप्रधान राज्य सतयुग में ही होता है।”


प्रश्न 16: सतयुग की राज्य व्यवस्था कैसी होती है?

उत्तर:

  • कोई राजनीति नहीं

  • कोई हिंसा नहीं

  • कोई संघर्ष नहीं

  • व्यवस्था स्वाभाविक होती है

राजा बनाया नहीं जाता,
संस्कार से प्रकट होता है।


 नंबर 8 — आज और सतयुग के राजा में अंतर

प्रश्न 17: आज के राजा और सतयुग के राजा में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर:

  • आज का राजा — रजो-तमोप्रधान

  • सतयुग का राजा — सतोप्रधान

  • आज बल से सत्ता

  • सतयुग में संस्कार से राज्य

  • आज डर से शासन

  • सतयुग में प्रेम से व्यवस्था

मुरली – 9 सितंबर 1965

“राम राज्य में राज्य अधिकार नहीं, स्वभाव होता है।”


 नंबर 9 — क्या आज कोई सतोप्रधान बन सकता है?

प्रश्न 18: क्या आज कोई सतोप्रधान बन सकता है?

उत्तर:
मुरली – 21 मार्च 1970

“संगम युग में आत्मा सतोप्रधान बनने की पढ़ाई करती है।”

आज राजा बनना संभव नहीं,
लेकिन राजा आत्मा बनना संभव है।


प्रश्न 19: राजा आत्मा किसे कहते हैं?

उत्तर:
राजा आत्मा वह है जो—

  • मन का राजा हो

  • बुद्धि का राजा हो

  • संस्कारों का राजा हो

  • कर्मेन्द्रियों का राजा हो


 नंबर 10 — संगम युग की ट्रेनिंग

प्रश्न 20: संगम युग का विशेष महत्व क्या है?

उत्तर:
📜 मुरली – 14 अप्रैल 1972

“अब जो जैसा पुरुषार्थ करेगा, वही पद पाएगा।”

संगम युग
भविष्य के राज्य की ट्रेनिंग का समय है।


 निष्कर्ष से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 21: निष्कर्ष रूप में क्या समझ आता है?

उत्तर:
मुरली – 5 दिसंबर 1966

“रावण राज्य में देवता नहीं हो सकते।”

इसलिए—
आज सतोप्रधान राजा बनना संभव नहीं,
लेकिन आज सतोप्रधान आत्मा बनना संभव है।


 अंतिम संदेश

प्रश्न 22: आज के मनुष्य के लिए सबसे बड़ा संदेश क्या है?

उत्तर:
अगर आप दुनिया को बदलना चाहते हैं—
राजा बनने की नहीं,
राजा आत्मा बनने की कोशिश करें।

Disclaimer:आवश्यक सूचना:
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आध्यात्मिक ज्ञान, मुरली शिक्षाओं एवं आत्मिक चिंतन पर आधारित है।

इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी वर्तमान राजा, सरकार, राजनीतिक व्यवस्था या व्यक्ति की आलोचना करना नहीं है।

यह विषय केवल आध्यात्मिक दृष्टि से सतोप्रधानता, युग परिवर्तन और राज्य व्यवस्था की वास्तविक समझ देने के लिए प्रस्तुत किया गया है।

दर्शक इसे आध्यात्मिक ज्ञान के रूप में ग्रहण करें।

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