शिवबाबा :ब्रह्मा बाबा का रिश्ता-(06)शिव बाबा ब्रह्मा बाबा के सच्चे सखा।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

अध्याय 6 : शिव बाबा – ब्रह्मा बाबा का सच्चा सखा
“हर कदम साथ निभाने वाले उस सच्चे सखा को जानो”
“शिव बाबा – ब्रह्मा बाबा के सच्चे सखा | हर कदम साथ निभाने वाले परम मित्र का रहस्य | Murli Deep Talk”
प्रस्तावना
हर आत्मा जीवन में किसी न किसी सहारे की तलाश करती है।
कोई ऐसा जो हर स्थिति में साथ दे, जो सुने, जो कभी छोड़े नहीं।
परंतु इस संसार में हर साथ अस्थायी (temporary) है।
हर रिश्ता किसी न किसी परिस्थिति में टूट जाता है।
लेकिन एक ऐसा सखा है —
जो कभी दूर नहीं जाता, जो सदा साथ निभाता है।
वह है — शिव बाबा,
जो ब्रह्मा बाबा के सच्चे सखा बने और आज हम सबके भी वही सखा हैं।
1. सखा संग संबंध का रहस्य
भक्तिमार्ग में लोग भगवान को “सखा” कहते हैं,
परंतु उस सच्चे सखा का अनुभव केवल संगमयुग में ही होता है।
भक्तिमार्ग में यह स्मृति रह जाती है कि “परमात्मा मेरा सखा है”,
लेकिन वास्तव में परमात्मा संगम पर आकर सखा बनते हैं।
साकार मुरली 14 फरवरी 1970 में शिवबाबा कहते हैं –
“शिव बाबा बच्चों के सच्चे सखा हैं।
वे हर कार्य में साथ निभाते हैं। कोई और ऐसा सखा नहीं।”
यही अनुभव ब्रह्मा बाबा को सबसे पहले हुआ —
कि यह ईश्वर कोई दूर का नहीं,
बल्कि मेरा साथी, मेरा मित्र, मेरा मार्गदर्शक है।
2. सच्चा सखा कौन?
ब्रह्मा बाबा कहते थे —
“जब सब छोड़ जाएँ, तो भी एक शिव बाबा साथ है।”
उनके जीवन की हर चुनौती में उन्होंने यह अनुभव किया —
जब भी विरोध, अपमान या कठिनाई आई,
तो वे मन ही मन कहते — “बाबा, तू है ना मेरा साथी!”
और तुरंत मन में शांति, समाधान और शक्ति का अनुभव होता।
यह योग नहीं, संग का अनुभव था।
योग का अर्थ केवल साधना नहीं —
बल्कि सच्चे सखा के संग का अनुभव है।
3. कब निभाते हैं शिव बाबा यह साथ?
बहुतों को लगता है कि परमात्मा द्वापर से साथ निभाते हैं —
परंतु बाबा ने स्पष्ट किया है कि
“परमात्मा केवल संगमयुग पर ही आते हैं।”
साकार मुरली (25 सितम्बर 1969) में बापदादा ने कहा –
“मैं चारों युगों में नहीं आता।
मैं तो केवल संगमयुग पर आता हूँ,
जब सब आत्माएँ मुझे पुकार-पुकारकर थक जाती हैं।”
भक्तिमार्ग में तो लोग पुकारते हैं,
परंतु उत्तर संगमयुग पर ही मिलता है।
भक्ति का फल ज्ञान है,
और यह ज्ञान केवल इस समय परमात्मा देते हैं।
4. ब्रह्मा बाबा और शिव बाबा की सखा-संगी लीला
ब्रह्मा बाबा के जीवन में यह सखा-संबंध अद्भुत था।
वे हर कार्य, हर सेवा में बाबा को अपने साथ महसूस करते।
जब सेवा में कोई रुकावट आती,
तो वे कहते —
“बाबा, यह तेरी सेवा है, तू ही उपाय निकाल।”
और उपाय अपने आप सामने आ जाता।
यह था “सखा-संबंध का अनुभव।”
साकार मुरली (22 मई 1970) में बाबा कहते हैं –
“ब्रह्मा बाबा ने हर कदम पर मुझ सखा को साथ रखा,
इसलिए वह पास विद ऑनर हुए।”
5. योग और सखा का गहरा संवाद
योग कोई औपचारिक साधना नहीं है।
बाबा कहते हैं —
“मुझसे बातें करो जैसे मित्र से बातें करते हो।”
साकार मुरली (9 मार्च 1969) में कहा गया –
“मैं तुम बच्चों का सच्चा सखा हूँ।
मुझसे ऐसे बातें करो जैसे मित्र से करते हो।
मैं हर दिल की बात जानता हूँ।”
इसलिए जब कोई समस्या आती है,
तो बाबा से बात करो:
“बाबा, इसके लिए क्या करूँ?”
उत्तर मुरली में मिलेगा —
क्योंकि बाबा की श्रीमत वहीं निहित है।
योग का अर्थ है —
जागृत अवस्था में बाबा से संवाद,
उनकी श्रीमत से हर स्थिति का समाधान निकालना।
यह कोई खोने वाला योग नहीं,
बल्कि जागने वाला योग है।
6. सखा के साथ का लाभ – अभी या कभी नहीं
संगमयुग पर ही सखा का लाभ लेने का अवसर है।
जो इस समय परमात्मा को सखा मानकर चलते हैं,
वही आगे विश्व के स्वामी बनते हैं।
अव्यक्त वाणी (14 जनवरी 1979) में बापदादा ने कहा –
“बाप को सखा समझो, तो बंधन मिटेंगे।
बाप को दूर मानो, तो माया बीच में आ जाएगी।”
इसलिए कहा गया —
“अब या कभी नहीं।”
यही समय है उस सच्चे सखा से गहरा संबंध जोड़ने का।
उदाहरण: मित्रता की सच्ची पहचान
एक बार ब्रह्मा बाबा पर भारी विरोध हुआ।
बहुतों ने कहा — “यह असंभव कार्य है।”
पर बाबा ने मुस्कराते हुए कहा —
“जब मेरे साथ सच्चा सखा शिव है,
तो असंभव क्या?”
और परिणाम —
आज वही असंभव सेवा विश्व में फैली।
यह उदाहरण दिखाता है कि
जब सखा साथ हो, तो हर असंभव संभव हो जाता है।
धारणा बिंदु
1️⃣ हर परिस्थिति में यह स्मृति रखो — “मेरा सखा मेरे साथ है।”
2️⃣ बाबा से दिल की बातें करो, उनसे श्रीमत लो।
3️⃣ सखा-संबंध को स्थायी बनाने के लिए मुरली नियमित पढ़ो।
वरदान (अव्यक्त वाणी 14 फरवरी 1985)
“सखा-संग का अनुभव करने वाले आत्माएँ
कभी अकेलापन महसूस नहीं करतीं।
वे हर कदम पर बाप समान बनते जाते हैं।”
स्लोगन:
“सच्चा सखा वही — जो हर स्थिति में साथ निभाए, और वही शिव बाबा है।”
शिव बाबा – ब्रह्मा बाबा के सच्चे सखा | हर कदम साथ निभाने वाले परम मित्र का रहस्य |
प्रस्तावना
Q1: जीवन में आत्माएँ किस चीज़ की तलाश करती हैं?
A1: हर आत्मा किसी न किसी सहारे की तलाश करती है — कोई ऐसा जो हर स्थिति में साथ दे, सुने और कभी छोड़े नहीं।
Q2: क्या संसार में सभी साथी स्थायी होते हैं?
A2: नहीं, इस संसार में हर साथी अस्थायी (temporary) होता है। हर रिश्ता किसी न किसी परिस्थिति में टूट जाता है।
Q3: ऐसे सच्चे सखा का उदाहरण कौन हैं?
A3: शिव बाबा — जो ब्रह्मा बाबा के सच्चे सखा बने और आज हम सबके लिए भी वही सखा हैं।
1. सखा संग संबंध का रहस्य
Q4: भक्तिमार्ग में “सखा” का अनुभव कब होता है?
A4: सच्चे सखा का अनुभव केवल संगमयुग में होता है। भक्तिमार्ग में स्मृति रह जाती है, लेकिन वास्तविक सखा संगम पर ही बनता है।
Q5: साकार मुरली (14 फरवरी 1970) में शिवबाबा ने क्या कहा?
A5:
“शिव बाबा बच्चों के सच्चे सखा हैं। वे हर कार्य में साथ निभाते हैं। कोई और ऐसा सखा नहीं।”
Q6: ब्रह्मा बाबा ने शिव बाबा को किस रूप में अनुभव किया?
A6: ब्रह्मा बाबा ने अनुभव किया कि शिव बाबा केवल ईश्वर नहीं, बल्कि मित्र, साथी और मार्गदर्शक हैं।
2. सच्चा सखा कौन?
Q7: ब्रह्मा बाबा ने सच्चे सखा का अनुभव कैसे किया?
A7: जब भी विरोध या कठिनाई आई, वे कहते — “बाबा, तू है ना मेरा साथी!”
और मन में शांति, समाधान और शक्ति का अनुभव हुआ।
Q8: योग और सखा अनुभव में अंतर क्या है?
A8: योग केवल साधना नहीं, बल्कि सच्चे सखा के संग का अनुभव है।
3. शिव बाबा कब निभाते हैं साथ?
Q9: क्या परमात्मा द्वापर युग से साथ निभाते हैं?
A9: नहीं, बाबा ने स्पष्ट किया कि “परमात्मा केवल संगमयुग पर ही आते हैं।”
Q10: साकार मुरली (25 सितम्बर 1969) में बापदादा ने क्या कहा?
A10:
“मैं चारों युगों में नहीं आता। मैं तो केवल संगमयुग पर आता हूँ, जब सब आत्माएँ मुझे पुकार-पुकारकर थक जाती हैं।”
Q11: भक्ति का सच्चा फल कब मिलता है?
A11: भक्ति का सच्चा फल — ज्ञान — केवल संगमयुग में परमात्मा द्वारा मिलता है।
4. ब्रह्मा बाबा और शिव बाबा की सखा-संगी लीला
Q12: ब्रह्मा बाबा ने हर सेवा में शिव बाबा को कैसे अनुभव किया?
A12: वे कहते — “बाबा, यह तेरी सेवा है, तू ही उपाय निकाल।”
और समाधान स्वयं सामने आ जाता।
Q13: साकार मुरली (22 मई 1970) में बाबा ने क्या कहा?
A13:
“ब्रह्मा बाबा ने हर कदम पर मुझ सखा को साथ रखा, इसलिए वह पास विद ऑनर हुए।”
5. योग और सखा का गहरा संवाद
Q14: योग का अर्थ केवल साधना नहीं तो क्या है?
A14: योग है — जागृत अवस्था में बाबा से संवाद करना, उनकी श्रीमत से हर स्थिति का समाधान निकालना।
Q15: साकार मुरली (9 मार्च 1969) में बाबा ने क्या कहा?
A15:
“मैं तुम बच्चों का सच्चा सखा हूँ। मुझसे ऐसे बातें करो जैसे मित्र से करते हो। मैं हर दिल की बात जानता हूँ।”
6. सखा के साथ का लाभ – अभी या कभी नहीं
Q16: संगमयुग का क्या विशेष महत्व है?
A16: संगमयुग में ही सखा का लाभ लेने का अवसर है। जो इस समय परमात्मा को सखा मानकर चलते हैं, वही आगे विश्व के स्वामी बनते हैं।
Q17: अव्यक्त वाणी (14 जनवरी 1979) में बापदादा ने क्या बताया?
A17:
“बाप को सखा समझो, तो बंधन मिटेंगे। बाप को दूर मानो, तो माया बीच में आ जाएगी।”
Q18: मित्रता की सच्ची पहचान का उदाहरण क्या है?
A18: ब्रह्मा बाबा पर जब भारी विरोध हुआ, उन्होंने कहा —
“जब मेरे साथ सच्चा सखा शिव है, तो असंभव क्या?”
और वही असंभव कार्य सफल हुआ।
धारणा बिंदु
1️⃣ हर परिस्थिति में यह स्मृति रखें — “मेरा सखा मेरे साथ है।”
2️⃣ बाबा से दिल की बातें करें, उनसे श्रीमत लें।
3️⃣ सखा-संबंध को स्थायी बनाने के लिए मुरली नियमित पढ़ें।
वरदान (अव्यक्त वाणी 14 फरवरी 1985)
“सखा-संग का अनुभव करने वाले आत्माएँ कभी अकेलापन महसूस नहीं करतीं।
वे हर कदम पर बाप समान बनते जाते हैं।”
स्लोगन
“सच्चा सखा वही — जो हर स्थिति में साथ निभाए, और वही शिव बाबा है।”
Disclaimer:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की मुरलियों और ईश्वरीय ज्ञान पर आधारित आध्यात्मिक अध्ययन है।
इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक समझ व आत्मिक जागृति देना है।
सभी अधिकार © ब्रह्माकुमारीज़, माउंट आबू के हैं।
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