“शिव बाबा ब्रह्मा बाबा के रिश्तों को हम देख रहे हैं। वंडरफुल बातें बाबा इन माध्यमों से समझा रहे।
क्यों कहा जाता है माताओं द्वारा उद्धार?
क्यों कहा जाता है माताओं द्वारा उद्धार? ब्रह्मा बाबा और मम्मा का दिव्य मांबाप संबंध।
दिव्य मांबाप संबंध।
आध्यात्मिक बाप मुख्य माताओं की प्रतिनिधि।
आध्यात्मिक बाप और मुख्य माताओं की प्रतिनिधि संबंध।
ईश्वर का कार्य कहां से शुरू होता है?
ईश्वर का कार्य कहां से शुरू होता है?
कहीं से शुरू होता है ईश्वर का कार्य।
ईश्वर का कार्य कहां से शुरू?
हाँ जी—संगम युग से।
ईश्वर स्वयं कहते हैं—यह माताओं द्वारा उद्धार का समय है।
संगम युग में जब परमपिता परमात्मा परमधाम से आते हैं तो माताओं द्वारा उद्धार करते हैं।
अगर उद्धार माताओं द्वारा होना है तो प्रश्न उठता है कि आध्यात्मिक बाप की भूमिका क्या है?
प्रजापिता ब्रह्मा की फिर क्या भूमिका है?
और माताओं की प्रतिनिधि कौन है?
इसका उत्तर हमें मिलता है—
ब्रह्मा बाबा आध्यात्मिक पिता
और मम्मा सरस्वती
मुख्य माताओं की प्रतिनिधि हैं।
मम्मा का यह अद्भुत संबंध बड़ा ही अद्भुत है।
ब्रह्मा बाबा आध्यात्मिक बाप जिसने माताओं को आगे किया।
ब्रह्मा बाबा की विशेषता ही थी—
अज्ञाकारिता, विनम्रता, मातृशक्ति का सम्मान।
इन्हीं विशेषताओं के कारण परमपिता शिव ने उन्हें चुना।
पर उन्होंने कभी अहंकार या अधिकार को नहीं अपनाया।
साकार मुरली 30 अगस्त 1968
परमपिता शिव ने कहा—
“बाबा माताओं को आगे कर देते हैं।
माताएं ही उद्धार करती हैं।”
ब्रह्मा बाबा जानते थे कि दुनिया को शक्ति और ममता की जरूरत है।
इसलिए उन्होंने नेतृत्व नहीं, बल्कि सहयोग और सशक्तिकरण का मार्ग अपनाया।
उदाहरण
1936–37 में जब यज्ञ शुरू हुआ, बाबा ने सबसे पहले माताओं को जिम्मेदारी दी।
जबकि समाज में उस समय स्त्रियों को महत्व नहीं मिलता था।
यह उनका ईश्वरीय दृष्टिकोण था—
माता शक्ति है।
मम्मा—मुख्य माताओं की प्रतिनिधि,
लीडर ऑफ डिवाइन मदर्स।
माता शक्ति के इस कार्य के लिए ब्रह्मा बाबा ने ओम राधे मातेश्वरी जगत अंबा सरस्वती को क्यों चुना?
क्योंकि वे थीं—
• अत्यंत पवित्र
• अत्यंत बुद्धिमती
• अत्यंत निश्चयी
• अत्यंत ममतामयी
साकार मुरली 25 मई 1969
“सरस्वती माताओं की मुखिया है।
मम्मा ही माताओं की प्रतिनिधि बन बच्चों का पालन करती है।”
मम्मा ने ब्रह्मा बाबा की हर रीति को अपनी शालीनता, मर्यादा और योगबल में ढालकर जीवन का जीवित आदर्श प्रस्तुत किया।
उदाहरण:
एक बार समाज में विरोध बढ़ा।
मम्मा आगे खड़ी हुई और बोली—
“अगर इस ज्ञान में सत्य है तो विरोध मिट जाएगा।”
उनकी वह स्थिरता पूरे यज्ञ की शक्ति बन गई।
माताओं द्वारा उद्धार — वास्तविक अर्थ
साकार मुरली 9 मार्च 1968
शिव बाबा कहते हैं—
“उद्धार माताओं द्वारा ही होना है।”
अर्थ:
• बाबा ज्ञान देते हैं।
• ब्रह्मा बाबा मार्ग बनाते हैं।
• पर माताएं उसे जीवन में लागू करके दुनिया को बदलने का प्रत्यक्ष कार्य करती हैं।
यही कारण है कि ब्रह्मा बाबा स्वयं पीछे रहे और माताओं को आगे किया।
उदाहरण:
दादी प्रकाशमणि, दादी गुलजार, दादी जयंती, दादी मनमोहिनी—
सब उसी मम्मा शक्ति की परंपरा से आगे आईं।
ब्रह्मा बाबा और मम्मा — मांबाप का संयुक्त आध्यात्मिक स्वरूप
ईश्वरीय परिवार में—
• ब्रह्मा बाबा पिता हैं—ज्ञान, मर्यादा और दिशा देने वाले।
• मम्मा माता हैं—संस्कार, ममता और योगबल देने वाली।
साकार मुरली 6 अप्रैल 1969
“मांबाप द्वारा स्थापना होती है।”
लेकिन स्थापना का प्रमुख कार्य माताएं करती हैं और पिता सहारा देते हैं।
यह है अद्भुत संयुक्त कार्य।
इस संबंध से सीख
नेतृत्व का अर्थ—दूसरों को आगे करना, जैसे ब्रह्मा बाबा ने किया।
शक्ति का रूप—माताओं में है, इसलिए उन्हें सम्मान व अग्रता दी गई।
ज्ञान + ममता = आधार
ब्रह्मा का ज्ञान
मम्मा की ममता
आज्ञाकारिता और सशक्तिकरण
बाबा ने मम्मा को आगे रखकर दिखाया कि शक्ति देने वाला बाबा है।
निष्कर्ष — क्यों यह संबंध विश्व परिवर्तन की रीढ़ है?
क्योंकि—
• ब्रह्मा बाबा ने मां शक्ति को उभारा।
• मम्मा ने उसे जीवन में ढाला।
• और ममता ने उस आधार पर दुनिया बदलने का कार्य शुरू किया।
अव्यक्त मुरली 21 जनवरी 1969
“ब्रह्मा और सरस्वती मांबाप हैं।
माताएं उद्धार की मुख्य योगिनी हैं।”
इसलिए यह संबंध केवल पिता-माता का नहीं,
बल्कि परिवर्तन और शक्ति का संबंध है।
समरी टेबल — आध्यात्मिक बाप और माताओं की प्रतिनिधि संबंध
तत्व ब्रह्मा बाबा मम्मा सरस्वती संयुक्त अर्थ
भूमिका आध्यात्मिक पिता माताओं की प्रतिनिधि ज्ञान–ममता का आधार
विशेषताएं मर्यादा, पवित्रता बुद्धि, शक्ति परिवार, ज्ञान, सेवा का आधार
कार्य मार्गदर्शन पालन और नेतृत्व नई दुनिया की नींव
