AAT.(19)जन्म-मरण के चक्रव्यूह की पूरी सच्चाई।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
“आत्मा का रहस्य – 19वां भाग
जन्म-मरण के चक्रव्यूह की पूरी सच्चाई।
आत्मा, स्वर्ग, नर्क और पुनर्जन्म —
कैसे आत्मा स्वर्ग में जाती है?
कैसे आत्मा नर्क में जाती है?
कैसे आत्मा पुनर्जन्म लेती है?
आज हम इस रहस्य का मंथन करेंगे।
1. आत्मा का स्टिक स्वरूप
आत्मा का सही रूप क्या है?
आत्मा का रूप बिंदु है — स्टार-लाइक एंटिटी।
इसकी लंबाई-चौड़ाई-ऊंचाई को मापा नहीं जा सकता।
आत्मा इतना सूक्ष्म है कि दुनिया के किसी सूक्ष्मदर्शी यंत्र से भी नहीं देखा जा सकता।
उसे Point of Light कहा जाता है — लाइट का एक सूक्ष्मतम बिंदु।
हम उस पॉइंट ऑफ लाइट को न बना सकते हैं, न ड्रा कर सकते हैं, न किसी को दिखा सकते हैं।
आत्मा अदृश्य शक्ति है जिसे न देखा जा सकता है न मापा जा सकता है,
पर उसकी उपस्थिति हर पल अनुभव होती है।
यदि आत्मा नहीं है तो शरीर केवल पड़ा हुआ है — जीवन नहीं है।
2. आत्मा शरीर की चालक है
जीवन तभी है जब आत्मा शरीर के साथ है।
आत्मा शरीर में स्थाई नहीं — केवल उसका चालक है।
शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है।
आत्मा अजर, अमर, अविनाशी है —
न जल सकती है, न कट सकती है, न मरती है, न पैदा होती है।
उदाहरण –
जैसे कार बदल जाती है, पर चालक वही रहता है।
3. आत्मा का स्थान और भूमिका
आत्मा पाँचों तत्वों से नहीं बनी है और किसी भी तत्व को पार कर सकती है।
आत्मा किसी तत्व में जाए तो उस तत्व के वजन या आयतन में कोई फर्क नहीं पड़ता।
वह इतनी वेटलेस और सूक्ष्म है।
आत्मा वृकुटी (भौंहों के मध्य) में एक दिव्य तारे के रूप में विराजमान मानी जाती है।
चित्र केवल दिखाने के लिए है — वास्तविक आत्मा अदृश्य है।
रीढ़ की हड्डी से नर्वस सिस्टम दिमाग तक संदेश पहुंचाता है।
आत्मा वहीं बैठकर सभी संदेशों को रिसीव करती है और आदेश देती है।
आत्मा नहीं तो न कोई मैसेज लेने वाला, न आदेश देने वाला।
यहीं तीन महत्वपूर्ण ग्लैंड्स हैं —
पीनियल, पिट्यूटरी और हाइपोथैलेमस,
जिनके माध्यम से आत्मा शरीर को नियंत्रित करती है।
4. आत्मा = चेतना
आत्मा है तो चेतना है।
आत्मा नहीं तो चेतना नहीं।
आत्मा की भूमिकाएँ:
शरीर को चेतना देना
मस्तिष्क को संचालित करना
संस्कार और कर्मों को संचालित करना
मन संदेश लाता है,
बुद्धि नियम बनाती है,
दोहराव से संस्कार बन जाते हैं,
और फिर मन ऑटोमेटिक उसी प्रकार कार्य करता है—
जब तक परिवर्तन का आदेश न दिया जाए।
5. उदाहरण
जैसे बिजली के बिना उपकरण बेकार हैं,
वैसे आत्मा के बिना शरीर बेकार है।

