बी.के.पति-पत्नी का संबंध (05)स्वप्न दोष और हस्तमैथुन क्या यह भी काम विकार में गिना जाता है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय 1 : विषय की भूमिका – डर नहीं, स्पष्टता
आज का विषय पहले बहनों के लिए था,
अब भाइयों के लिए विशेष रूप से रखा गया है।
विषय:
स्वप्न दोष और हस्तमैथुन – क्या यह भी काम विकार में गिना जाता है?
यह विषय संवेदनशील है,
लेकिन उतना ही आवश्यक भी है।
अनेक युवा आत्माएँ मन में प्रश्न रखती हैं,
पर पूछ नहीं पातीं।
बाबा कहते हैं –
“मैं डराने नहीं, समझाने आया हूँ।”
साकार मुरली – 12 जनवरी 1967
अध्याय 2 : क्या स्वप्न दोष पाप है?
बहुत सारे युवा भाई फोन करके पूछते हैं –
“क्या स्वप्न दोष पाप है?”
उत्तर: नहीं।
स्वप्न दोष जागरूक अवस्था का कर्म नहीं है।
यह नींद की अवस्था में होता है।
आत्मिक समझ
-
मन निष्क्रिय
-
बुद्धि निष्क्रिय
-
केवल पुराने संस्कार सक्रिय
उदाहरण
जैसे कोई व्यक्ति नींद में बोल देता है।
क्या वह जानबूझकर बोला?
नहीं।
इसलिए जहाँ इरादा नहीं,
वहाँ पाप नहीं।
अध्याय 3 : पाप की सही आत्मिक परिभाषा
पाप का अर्थ सामाजिक डर या धार्मिक भय नहीं है।
पाप की परिभाषा (बाबा की भाषा में):
जो आत्मा को कमजोर बनाए, वही पाप।
मनसा – वाचा – कर्मणा
जिस कर्म से
-
स्वयं आत्मा को
-
या किसी अन्य आत्मा को
दुख पहुँचे — वही पाप।
जहाँ
• आत्मिक शक्ति घटे
• योग टूटे
• मन विकारों में फँसे
वह आत्मिक हानि है,
ईश्वर का क्रोध नहीं।
साकार मुरली – 9 जनवरी 1969
“मुझे कमजोर नहीं, साहसी बच्चे चाहिए।”
अध्याय 4 : विकार क्या है? (सिर्फ देह-क्रिया नहीं)
विकार केवल देह-क्रिया नहीं है।
विकार वह है जो आत्मा की शक्ति को कम करे।
जहाँ
• संकल्प विकारी हों
• वासना तीव्र हो
• देह-अभिमान हावी हो
वही काम विकार है।
अव्यक्त मुरली
“कमजोरी को कमजोरी समझो, अपराध नहीं।”
यह अपराध नहीं,
लेकिन उन्नति में बाधा अवश्य है।
अध्याय 5 : स्वप्न दोष – आत्मिक दृष्टि से
स्वप्न दोष क्या है?
अवचेतन (Unconscious) संस्कारों की ऑटोमेटिक क्रिया।
मन के तीन स्तर:
• Conscious
• Sub-conscious
• Unconscious
स्वप्न दोष Unconscious अवस्था में होता है।
इसमें आत्मा का संकल्प या इरादा नहीं होता।
इसलिए इसे पाप या विकार कहना सही नहीं।
अध्याय 6 : हस्तमैथुन पर ब्रह्मा कुमारी दृष्टि
बाबा की दृष्टि में –
हस्तमैथुन पाप नहीं है,
लेकिन पुरुषार्थ में बाधा है।
इसके प्रभाव:
• योग में एकाग्रता कम
• निर्णय शक्ति कमजोर
• आत्मिक ऊर्जा का क्षय
साकार मुरली – 7 जुलाई 1966
“काम विकार आत्मा की शक्ति को नष्ट करता है।”
यदि यह
-
आदत बन जाए
-
वासना के संकल्पों से जुड़ जाए
तो यह विकार की श्रेणी में आता है।
साकार मुरली – 14 नवंबर 1965
“जानबूझकर किया गया विकार दोष है, मजबूरी कमजोरी है।”
अध्याय 7 : बाबा क्या नहीं कहते?
बाबा कभी नहीं कहते –
“तुम गंदे हो”
“तुम्हारा उद्धार नहीं हो सकता”
बाबा कहते हैं –
मैं कमजोर बच्चों को भी अपना बनाता हूँ।
ग्लानि = रावण की चाल
सुधार = बाबा की श्रीमत
अध्याय 8 : ब्रह्मचर्य का सच्चा अर्थ
ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक नियंत्रण नहीं है।
मन, दृष्टि और संकल्प की पवित्रता।
साकार मुरली – 5 अक्टूबर 1966
“मन से विकार गया तो समझो ब्रह्मचर्य आया।”
अध्याय 9 : मुक्त होने की प्रैक्टिकल श्रीमत
1️⃣ अमृतवेले योग
2️⃣ आत्म-अभ्यास – मैं देह से न्यारी आत्मा हूँ
3️⃣ दृष्टि को व्यस्त रखना
4️⃣ अशुद्ध सामग्री से दूरी
5️⃣ संकल्प बदलो – संस्कार बदलेंगे
अव्यक्त मुरली – 14 जनवरी 1989
“संकल्प ही संस्कार बनता है।”
अध्याय 10 : निष्कर्ष – डर नहीं, दिशा
स्वप्न दोष पाप नहीं
हस्तमैथुन पाप नहीं
लेकिन आत्मिक शक्ति को कमजोर करते हैं
कमजोरी पुरुषार्थ को रोकती है
और पद को छोटा कर सकती है।
अंतिम संकल्प
मैं आत्मा हूँ।
पवित्रता मेरा स्वभाव है।
मैं डर से नहीं, ज्ञान से आगे बढ़ूँगा / बढ़ूँगी।
मैं स्वयं को अपराधी नहीं, सुधारशील आत्मा समझूँगा / समझूँगी।
डिस्क्लेमर:
यह वीडियो ब्रह्मा कुमारी के साकार व अव्यक्त मुरलियों, राजयोग की आत्मिक समझ एवं अनुभवजन्य ज्ञान पर आधारित है।
यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक सलाह नहीं है।
इसका उद्देश्य किसी को अपराध-बोध या डर में डालना नहीं, बल्कि डर हटाकर आत्मिक स्पष्टता देना है, जिससे आत्मा ज्ञान, योग और पुरुषार्थ के मार्ग पर स्थिर हो सके।
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