S.Y.(02)श्री कृष्ण का जन्म सतयुग में नहीं, संगम युग में कैसे होता है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय : श्री कृष्ण का असली जन्म — संगम युग का गुप्त रहस्य
भूमिका : एक ऐसा प्रश्न जिसने सदियों से भ्रम बनाए रखा
एक ऐसा प्रश्न…
जिसने सदियों से मानव बुद्धि को उलझा रखा है।
श्री कृष्ण का जन्म कब हुआ?
गीता का ज्ञान किसने दिया?
और यह सब कब हुआ?
जब भी श्री कृष्ण का नाम आता है,
अधिकांश लोग यही मानते हैं कि
श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ।
कहीं लिखा है सतयुग में,
कहीं द्वापर में,
तो कहीं यह भी कहा गया कि
उन्होंने दो बार जन्म लिया।
यही भ्रम आज सच्चाई को ढक देता है।
सामान्य धारणाएँ और उनका भ्रम
कुछ लोग मानते हैं —
✔ श्री कृष्ण का जन्म सतयुग में हुआ
✔ फिर द्वापर में आकर लीला की
कुछ कहते हैं —
✔ अभी जन्म हुआ ही नहीं
✔ भविष्य में सतयुग में होगा
यहाँ तक कि कई लोग यह भी नहीं मानते
कि संगम युग पर कोई जन्म होता है।
परंतु ब्रह्मा कुमारी ज्ञान
इस पूरी धारणा को जड़ से बदल देता है।
प्रश्न उठता है: सतयुग में जन्म क्यों?
यदि सतयुग —
✔ संपूर्ण सुख
✔ संपूर्ण पवित्रता
✔ संपूर्ण पूर्णता का युग है
तो वहाँ जन्म लेने की आवश्यकता ही क्यों?
यहीं से संगम युग का रहस्य खुलता है।
क्योंकि
सतयुग में जन्म नहीं होता —
वहाँ तो प्राप्ति होती है।
मुरली – 21 अक्टूबर 1967
“जन्म तो संगम पर होता है।
सतयुग तो प्राप्ति और प्रालब्ध का युग है।”
चारों युगों की सटीक व्यवस्था
• कलयुग – पतन
• संगम युग – परिवर्तन
• सतयुग – प्राप्ति (प्रालब्ध)
• त्रेता – विस्तार
संगम युग पर किया हुआ पुरुषार्थ
उसकी प्रालब्ध
सतयुग में मिलती है।
कोई भी देव आत्मा
सतयुग में जन्म नहीं लेती —
वहाँ वह राज्य प्राप्त करती है।
श्री कृष्ण आत्मा कौन है?
मुरली – 12 अगस्त 1968
“श्री कृष्ण कोई साधारण आत्मा नहीं है।
वह नंबर वन सतोप्रधान आत्मा है।”
श्री कृष्ण आत्मा की विशेषताएँ:
✔ सबसे अधिक पवित्रता
✔ सबसे अधिक योग बल
✔ श्रेष्ठ और दिव्य संस्कार
यह स्थिति एक जन्म में नहीं बनती।
इसके लिए संगम युग की तपस्या आवश्यक है।
संगम युग : जन्म का नहीं, निर्माण का समय
संगम युग जन्म लेने का नहीं,
आत्मा के निर्माण का समय है।
मुरली – 5 दिसंबर 1966
“संगम युग आत्माओं को देवता बनाने का समय है।”
उदाहरण
जैसे:
• परीक्षा पास करने के बाद डिग्री मिलती है
• ट्रेनिंग के बाद पोस्टिंग मिलती है
वैसे ही —
संगम युग = आत्मिक ट्रेनिंग
सतयुग = देवता पद की पोस्टिंग
श्री कृष्ण का असली “जन्म” क्या है?
मुरली स्पष्ट करती है —
श्री कृष्ण का जन्म शरीर से नहीं,
पवित्रता और योग से होता है।
अर्थात संगम युग में वह आत्मा:
✔ देहभान छोड़ देती है
✔ विकारों से मुक्त हो जाती है
✔ कर्मेंद्रियों पर विजय पा लेती है
इसीलिए कहा गया —
कर्मेंद्रियों का राजा
मुरली – 8 जनवरी 1969
“सतयुग में श्री कृष्ण जन्म नहीं लेते,
वहाँ वे राजकुमार कहलाते हैं।”
भक्ति में लीलाएँ, ज्ञान में सच्चाई
मुरली – 3 मार्च 1971
“भक्ति में श्री कृष्ण की लीलाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया।
सत्य संगम पर समझाया गया है।”
उदाहरण
मक्खन चोरी का अर्थ —
ज्ञान का सार धारण करना
अर्थात श्री कृष्ण आत्मा ने
संगम युग में ज्ञान का मक्खन निकाला।
श्री कृष्ण गीता क्यों नहीं सुनाते?
मुरली – 25 नवंबर 1965
“गीता ज्ञान देने वाला
एक निराकार परमात्मा है,
कृष्ण नहीं।”
क्योंकि श्री कृष्ण आत्मा
कभी जीवन-बंधन में नहीं आती।
उन्हें स्वयं ज्ञान लेने की आवश्यकता नहीं होती।
संगम युग क्यों सबसे भारी है?
मुरली – 2 अक्टूबर 1967
“संगम युग छोटा है,
पर सबसे भारी है।”
यदि संगम पर:
पवित्रता नहीं अपनाई
योग नहीं किया
तो सतयुग का अधिकारी नहीं बन सकता।
निष्कर्ष : असली जन्म कहाँ होता है?
शरीर का जन्म — साधारण है
आत्मिक देवता जन्म — संगम युग में होता है
मुरली – 14 अप्रैल 1972
“जो संगम पर जैसा बना,
वही सतयुग में वैसा बनेगा।”
अंतिम संदेश (Powerful Closing)
यदि श्री कृष्ण बनने की इच्छा है —
तो संदेश बिल्कुल स्पष्ट है:
जन्म नहीं, निर्माण करो।
सतयुग नहीं, संगम युग पकड़ो।
प्रश्न 1: श्री कृष्ण के जन्म को लेकर सदियों से भ्रम क्यों बना हुआ है?
उत्तर:
क्योंकि अलग–अलग शास्त्रों, मान्यताओं और भक्ति कथाओं में श्री कृष्ण के जन्म को
कहीं सतयुग, कहीं द्वापर और कहीं दो बार जन्म लेने से जोड़ा गया है।
यही विरोधाभास सच्चाई को ढक देता है और भ्रम पैदा करता है।
प्रश्न 2: आमतौर पर लोग श्री कृष्ण के जन्म के बारे में क्या मानते हैं?
उत्तर:
अधिकांश लोग मानते हैं कि श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ,
महाभारत युद्ध के समय या उसके आसपास।
कुछ लोग मानते हैं कि उनका जन्म सतयुग में होगा,
और कुछ यह भी मानते हैं कि अभी उनका जन्म हुआ ही नहीं है।
प्रश्न 3: ब्रह्मा कुमारी ज्ञान इस धारणा को कैसे बदलता है?
उत्तर:
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान स्पष्ट करता है कि
श्री कृष्ण का असली जन्म न द्वापर में होता है,
न सतयुग में,
बल्कि संगम युग में होता है।
यह ज्ञान जन्म को शरीर से नहीं,
आत्मिक परिवर्तन से जोड़ता है।
प्रश्न 4: यदि सतयुग संपूर्ण सुख और पवित्रता का युग है, तो वहाँ जन्म क्यों नहीं हो सकता?
उत्तर:
क्योंकि सतयुग प्राप्ति और प्रालब्ध का युग है,
वहाँ किसी प्रकार की मेहनत या निर्माण नहीं होता।
मुरली – 21 अक्टूबर 1967
“जन्म तो संगम पर होता है।
सतयुग तो प्राप्ति और प्रालब्ध का युग है।”
प्रश्न 5: चारों युगों की सही व्यवस्था क्या है?
उत्तर:
• कलयुग – पतन का युग
• संगम युग – परिवर्तन का युग
• सतयुग – प्राप्ति (प्रालब्ध) का युग
• त्रेता – विस्तार का युग
संगम युग पर किया हुआ पुरुषार्थ
सतयुग में प्रालब्ध के रूप में मिलता है।
प्रश्न 6: क्या कोई देव आत्मा सतयुग में जन्म लेती है?
उत्तर:
नहीं।
कोई भी देव आत्मा सतयुग में जन्म नहीं लेती।
वहाँ वह राज्य और पद की प्राप्ति करती है।
जन्म और निर्माण का कार्य संगम युग में होता है।
प्रश्न 7: श्री कृष्ण आत्मा कौन है?
उत्तर:
मुरली – 12 अगस्त 1968
“श्री कृष्ण कोई साधारण आत्मा नहीं है।
वह नंबर वन सतोप्रधान आत्मा है।”
श्री कृष्ण आत्मा में:
• सर्वाधिक पवित्रता
• सर्वाधिक योग बल
• श्रेष्ठ और दिव्य संस्कार होते हैं।
प्रश्न 8: क्या श्री कृष्ण जैसी अवस्था एक जन्म में बन सकती है?
उत्तर:
नहीं।
यह स्थिति एक जन्म में नहीं बनती।
इसके लिए संगम युग में
लगातार योग, पवित्रता और पुरुषार्थ की तपस्या आवश्यक है।
प्रश्न 9: संगम युग को “जन्म का नहीं, निर्माण का समय” क्यों कहा गया है?
उत्तर:
क्योंकि संगम युग में आत्मा का रूपांतरण होता है।
मुरली – 5 दिसंबर 1966
“संगम युग आत्माओं को देवता बनाने का समय है।”
जैसे परीक्षा के बाद डिग्री मिलती है,
वैसे ही संगम युग आत्मिक ट्रेनिंग का समय है
और सतयुग देवता पद की पोस्टिंग।
प्रश्न 10: श्री कृष्ण का असली “जन्म” वास्तव में क्या है?
उत्तर:
श्री कृष्ण का जन्म शरीर से नहीं,
पवित्रता और योग से होता है।
संगम युग में वह आत्मा:
• देहभान छोड़ देती है
• विकारों से मुक्त हो जाती है
• कर्मेंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेती है
इसीलिए उन्हें कर्मेंद्रियों का राजा कहा गया है।
प्रश्न 11: मुरली के अनुसार सतयुग में श्री कृष्ण को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
मुरली – 8 जनवरी 1969
“सतयुग में श्री कृष्ण जन्म नहीं लेते,
वहाँ वे राजकुमार कहलाते हैं।”
क्योंकि वहाँ उन्हें राज्य पाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता।
प्रश्न 12: भक्ति की लीलाएँ और ज्ञान की सच्चाई में क्या अंतर है?
उत्तर:
मुरली – 3 मार्च 1971
“भक्ति में श्री कृष्ण की लीलाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया,
सत्य संगम पर समझाया गया है।”
उदाहरण:
मक्खन चोरी का अर्थ है —
ज्ञान का सार धारण करना।
प्रश्न 13: श्री कृष्ण गीता का ज्ञान क्यों नहीं देते?
उत्तर:
मुरली – 25 नवंबर 1965
“गीता ज्ञान देने वाला एक निराकार परमात्मा है,
कृष्ण नहीं।”
क्योंकि श्री कृष्ण आत्मा कभी जीवन-बंधन में नहीं आती,
उन्हें स्वयं ज्ञान लेने की आवश्यकता नहीं होती।
प्रश्न 14: संगम युग को सबसे “भारी” युग क्यों कहा गया है?
उत्तर:
मुरली – 2 अक्टूबर 1967
“संगम युग छोटा है, पर सबसे भारी है।”
यदि संगम युग में
पवित्रता और योग नहीं अपनाया,
तो सतयुग का अधिकारी नहीं बन सकता।
प्रश्न 15: असली जन्म कहाँ होता है?
उत्तर:
✔ शरीर का जन्म — साधारण है
✔ आत्मिक देवता जन्म — संगम युग में होता है
मुरली – 14 अप्रैल 1972
“जो संगम पर जैसा बना,
वही सतयुग में वैसा बनेगा।”
अंतिम प्रश्न: यदि श्री कृष्ण बनना है, तो क्या करना होगा?
उत्तर:
संदेश बिल्कुल स्पष्ट है —
जन्म नहीं, निर्माण करो।
सतयुग नहीं, संगम युग पकड़ो।
डिस्क्लेमर
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं, मुरली ज्ञान एवं व्यक्तिगत अध्ययन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, शास्त्र या व्यक्ति का खंडन करना नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों को साझा करना है।
सभी दर्शक इस ज्ञान को आत्मिक चिंतन के रूप में ग्रहण करें।
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