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इसका आज हम चौथा विषय कर रहे हैं।
आज का विषय है एक ब्रह्मा कुमारी छात्र की दिनचर्या।
चाहे वह भाई हो या चाहे वह बहन हो। छात्रा नहीं लिखा इसलिए छात्र लिखा है ताकि ज्यादा शब्द ना हो जाए। ब्रह्मा कुमारी छात्र चाहे वह कुमारी कन्या हो, चाहे ब्रह्मा कुमार माता हो, चाहे अधर कुमार हो, चाहे कुमार भाई हो — कोई भी हो, सबके लिए नियम एक ही है।
बाकी कौन कितना करता है, क्या करता है और क्या नहीं करता है यह उस आत्मा का अपना पार्ट है।
एक ब्रह्मा कुमारी छात्र की दिनचर्या कैसी होती है?
अमृतवेला से नाइट तक पूरा आध्यात्मिक शेड्यूल कैसे होता है — सवेरे से रात तक एक सिस्टम रहता है। उसको हम अच्छी तरह से समझने का प्रयास करेंगे।
BK Daily Routine Explain – सुबह 4:00 बजे क्यों उठते हैं?
किसी भी प्रकार का यह प्रश्न पूछा जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं, साकार मुरली संदर्भों तथा अनुभव आधारित समझ पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी पर जीवन शैली थोपना नहीं बल्कि ब्रह्मा कुमारी छात्र जीवन की दिनचर्या को समझाना है। हर व्यक्ति अपनी परिस्थिति अनुसार अभ्यास करता है। दर्शक इसे आध्यात्मिक अध्ययन के रूप में देखें।
एक ब्रह्मा कुमारी छात्र की दिनचर्या कैसी होती है? क्योंकि यहां ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में चाहे कोई भी हो — सभी छात्र कहलाते हैं।
ब्रह्मा कुमार, ब्रह्मा कुमारी, भाई, बहन — एज कोई भी हो, सभी को छात्र कहा जाता है। विद्यार्थी कहा जाता है। स्टूडेंट कहा जाता है।
और अमृतवेले से नाइट तक सोने तक एक रूटीन दिया हुआ है।
लोग क्यों जानना चाहते हैं BK Daily Routine?
क्योंकि वे समझना चाहते हैं कि इनका जीवन कैसा है। क्या हम भी इस जीवन के अनुसार चल सकते हैं?
अभी तक लोगों ने देखा कि ब्रह्मा कुमारी जीवन शैली को बहुत स्ट्रिक्ट तरीके से पालन किया जाता है। इसलिए उसे बहुत कठिन समझते हैं। कहते हैं — यह बहुत मुश्किल है, हम ब्रह्मा कुमारी नहीं बन सकते, हम इस दिनचर्या को फॉलो नहीं कर सकते।
उनके बारे में बहुत से मिथ फैले हुए हैं। उन मिथ को हम समझना और समझाना चाहेंगे। इसमें किसी प्रकार का मिथ नहीं है। जो जितना कर सकता है करे। नहीं कर सकता है तो यहां कोई मजबूरी नहीं है।
जितना करेगा उसका अपना ही फायदा है। यदि किसी चीज में आपको फायदा दिखाई नहीं देता तो मत करें। परंतु जानने का अधिकार तो सभी को है।
जब ब्रह्मा कुमारी जीवन के बारे में सुनते हैं तो पहला प्रश्न यही होता है —
ये लोग सुबह 4:00 बजे क्यों उठते हैं?
इनकी दिनचर्या कैसी होती है?
क्या पूरा दिन ध्यान में ही बीतता है?
क्या ये सामान्य जीवन जी पाते हैं?
आज हम एक ब्रह्मा कुमारी छात्र की दिनचर्या को सुबह से रात तक समझेंगे।
लेकिन याद रखिए — यह कोई जबरदस्ती का नियम नहीं है। कोई कितना भी कर सकता है। इसमें फ्लेक्सिबिलिटी है। यह एक चुनी हुई आध्यात्मिक जीवन शैली है।
अमृतवेला – 3:30 बजे उठना
3:30 से 4 बजे तक अपने आप को फ्रेश करें। स्नान करना हो तो स्नान करें। यदि आप फ्रेश महसूस करते हैं तो बिना स्नान किए भी योग में बैठ सकते हैं।
4:00 बजे से 5:00 बजे तक मेडिटेशन किया जाता है।
अमृतवेला क्या है?
अमृतवेला ब्रह्म मुहूर्त है। यह वह समय है जब वातावरण शांत, शुद्ध और स्थिर होता है। उस समय दुनिया का कोई काम नहीं होता। इसलिए मन शांत होता है और बुद्धि को पूरा समय मिलता है।
इस समय सबकॉन्शियस माइंड एक्टिव होता है क्योंकि मन बुद्धि को कोई काम नहीं देता। सारा दिन मन बार-बार बुद्धि को काम देता रहता है — यह कैसे करूं, वह कैसे करूं।
परंतु अमृतवेले में मन शांत होता है। तब बुद्धि मंथन करती है।
परमात्मा कहते हैं — बच्चे इस समय मेरे साथ बैठकर अपने जीवन की समस्याओं का समाधान करो। विघ्न विनाशक बनो।
अमृतवेले परमात्मा की डायरेक्शन पर अपने पुराने समस्याओं का समाधान करना और नए दिन की योजना बनाना — यह अमृतवेले का मुख्य उद्देश्य है।
इसे मनमनाभव भी कहा जाता है।
अमृतवेले बैठकर हमें अपने मन को बाबा की डायरेक्शन समझानी है और उसी अनुसार अपनी दिनचर्या बनानी है।
साकार मुरली का महत्व
साकार मुरली में कहा गया है — अमृतवेला बहुत अच्छा समय है। उस समय याद अच्छी लगती है। उस समय हम अपनी समस्याओं का सहज समाधान कर सकते हैं।
यह समय आत्मा और परमात्मा के संबंध को मजबूत करता है।
जब हम परमात्मा की डायरेक्शन पर अपने निर्णय लेते हैं तो परमात्मा के साथ संबंध का अनुभव होता है।
यही अनुभव सबसे बड़ी प्राप्ति है।
आत्मा की बैटरी चार्ज
जैसे मोबाइल को सुबह चार्ज करते हैं तो पूरा दिन चलता है। उसी प्रकार अमृतवेले में आत्मा की बैटरी चार्ज होती है।
अमृतवेले में हम क्या करते हैं?
• शांति में बैठना
• मैं आत्मा हूं — इसका अभ्यास करना
• परमात्म स्मृति में रहना
• सकारात्मक संकल्प करना
सकारात्मक संकल्प वह होते हैं जो हमें आगे बढ़ाते हैं और हमारी कमियों को दूर करने में मदद करते हैं।
सवेरे साकार मुरली याद करने से शक्ति मिलती है क्योंकि हम परमात्मा की डायरेक्शन पर अपना दिन शुरू करते हैं।
सुबह की तैयारी और मुरली
5:00 बजे से 6:00 बजे तक व्यक्ति अपने अनुसार रूटीन बना सकता है — सैर करना, स्नान करना या अन्य तैयारी।
7:00 से 8:00 बजे के बीच मुरली क्लास का समय होता है।
मुरली क्लास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें रोज नई परमात्मा की डायरेक्शन मिलती है। यह आत्मा का भोजन है।
नींद का संतुलन
यदि आप रात को देर से सोते हैं तो अमृतवेला जल्दी नहीं हो सकेगा।
यदि 8–9 बजे सो जाते हैं तो 3:30 बजे उठना आसान है।
कम से कम 5–6 घंटे की नींद जरूरी है। यदि आप 3 बजे उठते हैं तो दिन में शरीर को थोड़ा विश्राम भी देना चाहिए।
स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
मुरली कब सुनें?
यदि कोई 7 बजे मुरली नहीं सुन सकता क्योंकि उसे ड्यूटी पर जाना है, तो वह 24 घंटे में किसी भी समय मुरली सुन सकता है।
• पढ़ सकते हैं
• ऑडियो सुन सकते हैं
• वीडियो देख सकते हैं
आजकल हर माध्यम उपलब्ध है।
मुरली आत्मा का दैनिक आध्यात्मिक पाठ है जो पूरे विश्व में एक ही भेजा जाता है।
इसलिए रोज मुरली सुनना या पढ़ना जरूरी है।
