MURLI 05-04-2026 |BRAHMA KUMARIS

Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below

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05-04-26
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
रिवाइज: 15-11-09 मधुबन

स्वराज्य की रिजल्ट चेक करके स्वयं को चेंज करो और अखण्ड राज्य के अधिकारी बनो

आज दिलाराम बाप अपने राजदुलारे बच्चों से मिलने आये हैं। दुलारे क्यों हैं? जानते हो कि आप हर एक बच्चा तीन तख्त के मालिक हो? एक स्वराज्य का तख्त, दूसरा है बापदादा के दिल का तख्त और तीसरा है भविष्य का तख्त। तीनों तख्त के अधिकारी हो। अपने भविष्य तख्त का भी यहाँ ही अभ्यास कर रहे हो। भविष्य की तैयारी वा पुरुषार्थ अभी ही कर रहे हो। अब का पुरुषार्थ अनेक जन्म का राज्य भाग्य दिलाने वाला है। इस समय ही अपने राज्य भाग्य के संस्कार धारण कर रहे हो क्योंकि अब का पुरुषार्थ भविष्य के राज्य का अधिकारी बनाता है। तो चेक करो कि इस समय अपना पुरुषार्थ यथार्थ है? जैसे भविष्य में एक राज्य होगा तो अभी चेक करो कि हमारा एक राज्य मन में चलता है? पुरुषार्थ में एक राज्य है? या माया राज्य में विघ्न डालती है? एक राज्य के बजाए माया का प्रभाव तो नहीं पड़ता? दो राज्य तो नहीं होते हैं? भविष्य की विशेषता है ही एक राज्य की। तो अभी का अभ्यास भविष्य में चलता है। तो चेक करो कि अभी स्वराज्य है? स्वराज्य में कहाँ माया दखल तो नहीं करती है? दो राज्य तो नहीं हैं? अगर दो राज्य चलता है तो एक राज्य के संस्कार कब भरेंगे? भविष्य की विशेषता है ही एक राज्य और एक धर्म। धर्म कौन सा है? आपकी विशेष धारणा कौन सी है? सम्पूर्ण पवित्रता। तो चेक करो कि एक धर्म है? बीच में दूसरा धर्म अपवित्रता का दखल तो नहीं देता? साथ में यह भी चेक करो कि लॉ एण्ड आर्डर एक का है या माया भी बीच में दखल करती है? एक का राज्य निर्विघ्न चलता है? और बात – राज्य में सदा सुख और शान्ति नेचुरल रहती है। तो अभी देखो अपने राज्य में सदा सुख शान्ति है? कोई दखल तो नहीं होता? स्वराज्य में माया अपना दखल देकर अशान्ति तो नहीं फैलाती है? स्वराज्य में कोई सैलवेशन, कोई प्रशन्सा का प्रभाव तो माया नहीं डालती है? सदा सुख, शान्ति, आनंद, प्रेम, अतीन्द्रिय सुख कायम रहता है? क्योंकि जानते हो कि भविष्य राज्य में सर्व प्राप्ति हैं, सम्पन्नता है, इस कारण सन्तुष्टता भी है। तो अभी भी स्वराज्य सम्पन्न रहता है कि कोई कमी रहती? क्योंकि अभी के पुरुषार्थ में अगर कमी रह गई तो भविष्य अखण्ड राज्य के अधिकारी कैसे बनेंगे! सारा आधार अभी के पुरुषार्थ पर है। अभी की कोई भी कमी भविष्य के सम्पूर्ण राज्य के अधिकारी नहीं बन सकते। बहुतकाल का यह स्वराज्य का अभ्यास भविष्य राज्य के अधिकारी बनाता है। तो यह अपनी चेकिंग सदा रहे क्योंकि अभी अगर बहुतकाल का पुरुषार्थ नहीं होगा तो प्रालब्ध भी कम मिलती है इसलिए बापदादा समय प्रति समय यह अटेन्शन खिंचवा रहा है कि इसके लिए अभी अपने को सम्पन्न और सम्पूर्ण बनाओ। अगर अभी बीच-बीच में कह देते हैं कि पुरुषार्थ चल रहा है लेकिन पुरुषार्थ के बीच में तो-तो तो नहीं आता! यह तो हो जायेगा, यह तो कर लेंगे, यह संस्कार अविनाशी 21 जन्म का, अखण्ड राज्य का अधिकारी नहीं बनायेगा।

बापदादा सदा के लिए अटेन्शन दिला रहा है, चेक करो कि अगर कोई भी विघ्न आता है, तूफान आता है तो तूफान तोहफा बन जाता है? तूफान, तूफान नहीं लेकिन तोहफा बन जाये। कोई भी माया का वार होता है, अनुभव कराती है माया, तो वह अनुभव भी ऐसे अनुभव हो कि हमको यह अनुभव की सीढ़ी आगे बढ़ाती है। इसके लिए बापदादा कहते सदा अपना चार्ट आपेही चेक करो। जितना अपना चार्ट चेक करेंगे उतना ही चेक करके चेंज करेंगे। तो हर एक अपने चार्ट को चेक करते हो? करते हो? जो रोज़ करता है वह हाथ उठाओ। जो रोज़ करता है, कभी कभी नहीं? रोज़ चार्ट चेक करो और चेंज करो क्योंकि समय का इशारा बापदादा ने काफी समय से दिया है। समय को देख भी रहे हो, मनुष्यों के मन में चिंता बढ़ रही है और आपके मन में चिंता नहीं लेकिन प्रभु चिंतन है। प्रभु चिंतन होने के कारण आप सदा जानते हो कि हम निमित्त हैं, निर्मान हैं क्योंकि करावनहार बाप है। इसके कारण आपके मन में चिंता नहीं है, करावनहार करा रहा है, यह स्मृति सदा आगे बढ़ा रही है।

अभी विशेष हर एक को यह चेक करना है कि इस संगमयुग का एक एक सेकण्ड समय और संकल्प शुभ चलता है? इस समय के महत्व को जान एक सेकण्ड, सेकण्ड नहीं लेकिन एक सेकण्ड की वैल्यू है, महत्व है। कभी कभी बच्चे कहते हैं कि संकल्प चला लेकिन दो चार सेकण्ड चला। लेकिन संगम समय की वैल्यू है, अभी एक सेकण्ड एक घण्टे के बराबर है। इतना इस समय की वैल्यू है क्योंकि बापदादा ने कह दिया है कि अचानक किसी भी समय आपका फाइनल पेपर होगा। बापदादा भी बतायेगा नहीं इसलिए इस समय का अटेन्शन स्वयं को सम्पूर्ण और सम्पन्न बनाना है। बापदादा ने जो सर्व खजाने दिये हैं उस एक एक खजाने को समय पर कार्य में लगाना है। खजानों के मालिक हो, मालिक की विशेषता यह है कि जिस समय जिस खजाने की आवश्यकता है उस समय वह खजाना कार्य में लगाता है। आप आर्डर करो समाने की शक्ति को तो समाने की शक्ति कार्य में लगती है? क्योंकि मालिक उसको कहा जाता है जो समय पर अपने खजाने कार्य में लगा सके। तो अभी सभी को इतना स्व पर अटेन्शन देना है। सबके अन्दर खुशी का खजाना सदा ही चेहरे और चलन में दिखाई दे। खुशी अविनाशी बाप की देन है। तो अविनाशी बाप की देन को अविनाशी रखो। खुशी के लिए कहा जाता है – खुशी जैसी कोई खुराक नहीं, खुशी जैसा कोई खजाना नहीं। तो जिसके अन्दर सदा खुशी है उनके नयनों से, चेहरे से, चलन से आटोमेटिक दिखाई देती है। बापदादा का वरदान है कि सदा खुश रहो और सदा खुशी बांटो क्योंकि खुशी बांटने से खुशी बढ़ेगी और कोई भी खजाना बांटने से कम होता है लेकिन खुशी का खजाना जितना बांटेंगे उतना बढ़ेगा। तो चेक करो खुशी का खजाना सदा कायम है?

अभी सभी बच्चों को चाहे देश, चाहे विदेश सभी बच्चों को बापदादा एक बात की विशेष मुबारक दे रहे हैं। कौन सी बात? जो सभी ने चाहे देश में, चाहे विदेश में अपने उमंग-उत्साह से आत्माओं को बाप का सन्देश दे दिया। सभी ने अपनी खुशी से जो कार्य किया उस कार्य में प्रोग्राम एक किया, हर जगह एक प्रोग्राम किया लेकिन उसका फल हजार गुणा प्राप्त किया। बापदादा को यही संकल्प है कि अब के समय प्रमाण जो सरकमस्टांश हैं वह आगे आगे नाज़ुक होते जायेंगे इसलिए चाहे गांव है, चाहे कोई भी कोना है, ऐसे उल्हना नहीं रह जाए कि हमारा बाप आया और हमको आपने सन्देश नहीं दिया इसलिए सभी ने जो उमंग-उत्साह से कार्य किया, बापदादा खुश है और ऐसे ही आपस में मिलकर ऐसे प्रोग्राम बनाते रहना। बापदादा ने देखा कि उमंग-उत्साह और हिम्मत सभी ने अपने-अपने विधि से कार्य में लगाया है लेकिन अभी तो सबने बहुत अच्छा किया, आगे भी समय प्रमाण यह लक्ष्य रखो कि कोई भी कोना बिना सन्देश के रह नहीं जाए। इसमें अपना भी पुरुषार्थ अच्छा चलता और आत्माओं का भी कल्याण होता है। सभी को यह प्रोग्राम अच्छे लगे ना! अच्छा लगा! तो बापदादा सभी बच्चों को यही बार-बार कहते कि आत्माओं के प्रति रहमदिल बनो। आजकल दु:ख अशान्ति के कारण सभी दिल से कहते हैं रहम करो, दया करो। तो बाप के साथी आप बच्चे हो, तो बाप बच्चों द्वारा अभी हर एक बच्चे का रहमदिल का पार्ट देखना चाहते हैं। आपका उमंग है कि दु:खमय संसार बदलकर सुखमय संसार आना ही है। तो सुखमय संसार आने के लिए यह दु:ख अशान्ति का विनाश होने के लिए हालतें बदल रही हैं। तो आज का यही बाप का सन्देश याद रखो कि अब चाहे मन्सा, चाहे वाचा, चाहे चेहरे और चलन से सेवा की गति बढ़ाते चलो। अपना राज्य समीप लाते चलो। अच्छा।

इस बारी जो पहली बार आये हैं बापदादा से मिलने, वह हाथ उठाओ। अच्छा बहुत हैं। सभी उठो। मुबारक हो। फिर भी समाप्ति के पहले पहुंच गये हो। नया जन्म ले लिया, इसकी सभी के तरफ से अभी आने वाले बच्चों को बापदादा और चारों ओर के बच्चों द्वारा मुबारक हो, मुबारक हो। ब्राह्मण परिवार को देख खुशी होती है ना! लेकिन जो अभी आये हो उन्हों को बापदादा यही कहते तो अभी बहुत समय बीत गया, बहुत थोड़ा रहा इसलिए पुरुषार्थ तीव्र करना है। तीव्र पुरुषार्थी आगे बढ़ेंगे, चलना नहीं उड़ना। उड़ती कला का पुरुषार्थ करेंगे तो बाप का वर्सा देर से आते हुए भी पूरा अपना हक ले सकते हो। हर सेकण्ड खुश रहना और सभी को पैगाम देना, सन्देश देना। अच्छा।

आज जो बापदादा ने कहा कि स्वराज्य अधिकारी बन स्वराज्य की रिजल्ट चेक करो, वह चेक करने से कोई भी कमी को बहुत समय से चेंज करना है क्योंकि बहुत समय अखण्ड राज्य चले इसकी आवश्यकता है, बहुत समय का पुरुषार्थ, बहुत समय की प्रालब्ध के स्वत: ही अधिकारी बनते हैं इसीलिए अन्डरलाइन बहुत समय का पुरुषार्थ हो। चेकिंग करो और चेंज करो।

चारों ओर के बापदादा के दिलतख्तनशीन हर एक बच्चे को बापदादा रोज़ अमृतवेले विशेष शक्ति बांटते हैं। अमृतवेले विशेष वरदान, शक्ति बांटते हैं। जो अमृतवेले की शक्ति विशेष वरदान स्वीकार करते हैं वह विशेष तीव्र पुरुषार्थी बनते हैं। अमृतवेले का महत्व रखना अर्थात् बापदादा के सदा तख्तनशीन बनना। तो कई बच्चों का अटेन्शन है और बापदादा रोज़ उन्हों को खास सर्टीफिकेट देते हैं वाह बच्चा वाह!

चारों ओर के तीव्र पुरुषार्थी, हर समय बापदादा को अपना साथी बनाकर कम्बाइण्ड रहने के अभ्यासी बच्चों को बापदादा विशेष वरदान दे रहे हैं कि सदा उड़ते चलो और दूसरों को भी उड़ाने का सहयोग देकर उड़ाते चलो। सभी विजयी हैं और विजय का फल बापदादा की हर समय दुआयें प्राप्त होती हैं। तो अमर बन सबको अमृत पिलाते रहो। चारों ओर के बच्चे बापदादा के सामने हैं। हर बच्चे से बापदादा को दिल का प्यार है क्योंकि हर बच्चे में कोई न कोई विशेषता है। अभी सर्व विशेषताओं से अपने को विशेष आत्मा बनाए आगे बढ़ते चलो। बापदादा का हर एक बच्चे को पर्सनल पदमगुणा यादप्यार स्वीकार हो। अच्छा, अभी तो मिलते रहेंगे। नमस्ते।

दादियों से:- सभी ने खूब चक्र लगाया। आजकल अशान्ति बढ़ती रहती है तो सारा दिन परेशान रहते हैं और शान्ति का वायब्रेशन शान्ति दिलाता है, तो खुश हो जाते हैं। जैसे कोई थका हुआ हो उसको आधा घण्टा भी आराम का मिलता है तो खुश हो जाता है। अच्छा किया। सभी जगह, चाहे छोटे चाहे बड़े सबने अच्छा किया। उमंग जहाँ हैं वहाँ खर्चे की कोई बात नहीं। इतनी आत्माओं को सन्देश तो मिल गया। आपका उल्हना तो पूरा हुआ। अच्छा है। ऐसे बीच-बीच में प्रोग्राम्स बनाते रहो। हर एक शहर अपने अनुसार जैसा भी करे वह ठीक है।

डबल विदेशी बड़ी बहिनों से:- बापदादा को ग्रुप ग्रुप को बुलाके रिफ्रेश करना, यह अच्छा लगता है क्योंकि वहाँ बहुत दूर दूर रहते हैं। नजदीक आने से एक दो के गुण दिखाई देते हैं। दूर दूर में पता नहीं पड़ता है। तो एक दो को देखके उमंग भी आता है। तो आबू में यह प्रोग्राम अच्छा लगता है और एक दो में उत्साह भरके संगठन पक्का करते हो यह अच्छा है। ठीक है। ठीक चल रहा है ना!

एक दो को सहयोग देना इससे आगे बढ़ते हैं। समय देते हो ना, अपनी सेवा छोड़के समय दिल से देते हो। अपना कार्य पूरा किया, सफलता हुई, अभी भले जाओ। सभी ने अच्छी मदद की। फारेन का भी किया इन्डिया का भी किया। अच्छा।

यू.पी. ज़ोन के सेवाधारियों से:- बापदादा सभी ज़ोन को कहते हैं कि हर एक अपने ज़ोन में एक ऐसा ग्रुप बनाओ जिस ग्रुप में सभी वर्ग के हों। जो आपके वर्ग बने हुए हैं, सेवा के लिए और हर एक ज़ोन अपने एरिया में हर वर्ग की सेवा कर रहे हो, करते भी रहेंगे लेकिन हर ज़ोन में ऐसा ग्रुप सर्विस का हो जिसमें हर वर्ग का एक एक हो। और जहाँ भी प्रोग्राम करो वहाँ वह ग्रुप अपने अपने वर्ग को विशेष निमन्त्रण दे। कोई भी वर्ग उल्हना नहीं दे कि हमें तो सन्देश नहीं मिला। और हर एक जो वैरायटी ग्रुप बने वह सेवा भी बढ़ाये, अपने वर्ग की और साथ में हर एक अपना-अपना अनुभव सुनावे कि हमारे को इस नॉलेज से क्या मिला और क्या अनुभव कर रहे हैं। तो हर ज़ोन में ऐसा सेवा का ग्रुप तैयार करो। चाहे भाषण करने का टाइम इतना न भी मिले लेकिन उन्हों को फंक्शन के समय पीछे लाइन में बिठाके उनका परिचय स्टेज पोट्री देवे। एक दो का अनुभव भी रख सकते हो और परिवार में रहते अपना कार्य करते हुए हमारी जीवन कैसे बीती, कैसे बदली, वह अनुभव चांस लेके टाइम हो तो सुनावे। तो ऐसे विशेष माइक तैयार करो जो सेवा करता रहे।

अच्छा है यू.पी. ने विशेष ब्रह्मा बाप की पालना लेने का अधिकार प्राप्त किया है। यू.पी. में ब्रह्मा के नाम से यादगार भी है। तो यू.पी. का भाग्य है, जो जगत अम्बा, ब्रह्मा बाबा की पालना ली है। तो पालना की धरनी है। भाग्य का सितारा ब्रह्मा बाप और जगत अम्बा ने यू.पी. को वरदान में दिया। अच्छा है। अभी दिन प्रतिदिन बाप ने देखा कि सेवा स्थान और जो भी उपसेवाकेन्द्र वा गीता पाठशालायें हैं वह पहले से अभी वृद्धि अच्छी है इसीलिए बापदादा खास मुबारक दे रहे हैं कि बढ़ते चलो और नम्बर वृद्धि करने में, सन्देश देने में नम्बरवन बनो। अच्छा है, बापदादा खुश है और बढ़ाते चलना। टीचर्स को मुबारक है। वृद्धि कर रही हो और इससे भी ज्यादा में ज्यादा वृद्धि करते रहना। अच्छा।

वरदान:- संगठन में सहयोग की शक्ति द्वारा विजयी बनने वाले सर्व के शुभचिंतक भव
यदि संगठन में हर एक, एक दो के मददगार, शुभचिंतक बनकर रहें तो सहयोग की शक्ति का घेराव बहुत कमाल कर सकता है। आपस में एक दो के शुभचिंतक सहयोगी बनकर रहो तो माया की हिम्मत नहीं जो इस घेराव के अन्दर आ सके। लेकिन संगठन में सहयोग की शक्ति तब आयेगी जब यह दृढ़ संकल्प करेंगे कि चाहे कितनी भी बातें सहन करना पड़े लेकिन सामना करके दिखायेंगे, विजयी बनकर दिखायेंगे।
स्लोगन:- कोई भी इच्छा, अच्छा बनने नहीं देगी, इसलिए इच्छा मात्रम् अविद्या बनो।

ये अव्यक्त इशारे – महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

जैसे मीठा खाने और खिलाने से थोड़े समय के लिए मुख मीठा होता है, खुश होते हैं। ऐसे स्वयं ही मीठा बन जाओ तो सदा ही मुख में मधुर बोल रहेंगे। ऐसे मधुर बोल स्वयं को भी खुश करेंगे, दूसरे को भी खुश करेंगे। इसी विधि से सदा सर्व का मुख मीठा करते रहो, सदा मीठी दृष्टि, मीठा बोल, मीठे कर्म हो।

प्रश्न 1: बापदादा बच्चों को “तीन तख्त का मालिक” क्यों कहते हैं?

उत्तर:
बापदादा बच्चों को तीन तख्त का मालिक इसलिए कहते हैं क्योंकि हर आत्मा के पास—

  1. स्वराज्य का तख्त (अपने मन और इन्द्रियों पर राज्य)
  2. बापदादा के दिल का तख्त (प्रेम और नजदीकी का स्थान)
  3. भविष्य का राज्य तख्त (स्वर्ग का अधिकार)
    इन तीनों तख्तों का अधिकार है, और इसका अभ्यास अभी संगमयुग में ही किया जा रहा है।

 प्रश्न 2: वर्तमान पुरुषार्थ भविष्य के राज्य से कैसे जुड़ा है?

उत्तर:
अभी का पुरुषार्थ ही भविष्य के राज्य भाग्य का आधार है।
जितना शुद्ध, सशक्त और एकाग्र पुरुषार्थ होगा, उतना ही आत्मा भविष्य में अखण्ड राज्य की अधिकारी बनेगी।
यदि अभी कमी रह गई, तो भविष्य में सम्पूर्ण राज्य का अधिकार नहीं मिल सकता।


 प्रश्न 3: “एक राज्य” का अभ्यास क्या है?

उत्तर:
“एक राज्य” का अर्थ है—
मन, बुद्धि और संस्कार पर केवल आत्मा का नियंत्रण हो, माया का कोई दखल न हो।
अगर माया बीच में आती है (जैसे क्रोध, अशान्ति, भ्रम), तो वह “दो राज्य” हो जाते हैं, जो भविष्य के एक राज्य की तैयारी को कमजोर करता है।


 प्रश्न 4: स्वराज्य की चेकिंग कैसे करें?

उत्तर:
स्वराज्य की चेकिंग के लिए यह देखना चाहिए:

  • क्या मन में सदा शान्ति और सुख है?
  • क्या माया कोई अशान्ति या अशुद्धता तो नहीं ला रही?
  • क्या हर परिस्थिति में स्थिरता बनी रहती है?
  • क्या हर संकल्प पवित्र और सकारात्मक है?

 प्रश्न 5: “एक धर्म” का क्या अर्थ है?

उत्तर:
“एक धर्म” का अर्थ है सम्पूर्ण पवित्रता
आत्मा का स्वधर्म पवित्रता है।
अगर बीच में अपवित्रता (विकार) आ जाती है, तो वह दूसरे धर्म का प्रवेश है, जो स्वराज्य को कमजोर करता है।


 प्रश्न 6: तूफान को “तोहफा” कैसे बनाया जा सकता है?

उत्तर:
जब कोई विघ्न या समस्या आती है, तो उसे सीख और अनुभव में बदल देना चाहिए।
हर कठिन परिस्थिति आत्मा को मजबूत बनाती है—
इसलिए उसे नकारात्मक नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की सीढ़ी (तोहफा) समझना चाहिए।


प्रश्न 7: रोज़ चार्ट चेक करने का महत्व क्या है?

उत्तर:
रोज़ चार्ट चेक करने से—

  • अपनी कमजोरियों का पता चलता है
  • सुधार करने का अवसर मिलता है
  • पुरुषार्थ में निरंतरता आती है
    चार्ट चेक करना ही चेंज करने की पहली सीढ़ी है।

 प्रश्न 8: “प्रभु चिंतन” और “चिंता” में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • चिंता मन को कमजोर करती है और भय उत्पन्न करती है
  • प्रभु चिंतन मन को शक्तिशाली बनाता है और शांति देता है
    प्रभु चिंतन से यह स्मृति रहती है कि करावनहार परमात्मा है, इसलिए चिंता समाप्त हो जाती है।

 प्रश्न 9: संगमयुग के एक सेकण्ड का क्या महत्व है?

उत्तर:
संगमयुग का एक सेकण्ड बहुत मूल्यवान है—
यह एक सेकण्ड एक घंटे के बराबर फल देता है।
इसलिए हर संकल्प और हर सेकण्ड को श्रेष्ठ बनाना आवश्यक है।


प्रश्न 10: “खुशी का खजाना” क्यों विशेष है?

उत्तर:
खुशी ऐसा खजाना है जो:

  • बांटने से बढ़ता है
  • चेहरे और व्यवहार में झलकता है
  • आत्मा को सशक्त बनाता है
    इसलिए सदा खुश रहना और खुशी बांटना ही सच्ची सेवा है।

 प्रश्न 11: सेवा की गति कैसे बढ़ाई जा सकती है?

उत्तर:
सेवा तीन तरीकों से बढ़ाई जा सकती है:

  1. मनसा (शुभ संकल्प द्वारा)
  2. वाचा (मीठे वचनों द्वारा)
  3. कर्मणा (व्यवहार और उदाहरण द्वारा)
    हर माध्यम से आत्माओं तक संदेश पहुँचाना ही सेवा है।

 प्रश्न 12: अमृतवेले का विशेष महत्व क्या है?

उत्तर:
अमृतवेले में आत्मा को विशेष शक्ति और वरदान मिलते हैं।
जो आत्मा इस समय का सही उपयोग करती है, वह तीव्र पुरुषार्थी बन जाती है और तेजी से आगे बढ़ती है।


 प्रश्न 13: संगठन में सहयोग की शक्ति क्यों जरूरी है?

उत्तर:
जब सभी एक-दूसरे के सहयोगी और शुभचिंतक बनते हैं—

  • माया का प्रभाव कम हो जाता है
  • संगठन मजबूत होता है
  • विजय निश्चित हो जाती है

 प्रश्न 14: “इच्छा मात्रम् अविद्या” का क्या अर्थ है?

उत्तर:
इसका अर्थ है—
कोई भी छोटी-बड़ी इच्छा आत्मा को कमजोर बनाती है और सच्ची उन्नति में बाधा डालती है।
इसलिए इच्छाओं से मुक्त रहना ही श्रेष्ठ स्थिति है।


 प्रश्न 15: महान बनने के लिए कौन-से गुण आवश्यक हैं?

उत्तर:
महान बनने के लिए दो मुख्य गुण आवश्यक हैं:

  • मधुरता (Sweetness)
  • नम्रता (Humility)
    मीठे बोल, मीठी दृष्टि और नम्र व्यवहार से आत्मा स्वयं भी खुश रहती है और दूसरों को भी खुश करती है।
  • स्वराज्य, स्वराज्य अधिकारी, अखण्ड राज्य, ब्रह्माकुमारी, मुरली, बापदादा, राजयोग, आध्यात्मिक ज्ञान, आत्मा, परमात्मा, संगमयुग, पुरुषार्थ, पवित्रता, एक राज्य, एक धर्म, मन नियंत्रण, खुशी का खजाना, प्रभु चिंतन, अमृतवेला, सकारात्मक सोच, आत्म परिवर्तन, आध्यात्मिक जीवन, सेवा, मनसा सेवा, वाचा सेवा, कर्मणा सेवा, शांति, सुख, आनंद, बीके ज्ञान, आध्यात्मिक हिंदी, राजयोग ध्यान, ब्रह्मा कुमारी हिंदी, दिव्य ज्ञान, आत्म परिवर्तन, आंतरिक शांति, ध्यान भारत, ईश्वरीय ज्ञान, हिंदी प्रवचन, प्रेरणा हिंदी, जीवन बदलने वाला ज्ञान, आत्म बोध, मन की शांति, आध्यात्मिक जागृति, सकारात्मक जीवन, आत्मा चेतना, Swarajya, Swarajya Officer, Akhand Rajya, Brahma Kumari, Murli, BapDada, Rajyoga, Spiritual Knowledge, Soul, God, Confluence Age, Purity, One Kingdom, One Religion, Mind Control, Treasure of Happiness, Contemplation of God, Amritvela, Positive Thinking, Self-Transformation, Spiritual Life, Service, Service by Mind, Service by Word, Service by Action, Peace, Happiness, BK Knowledge, Spiritual Hindi, Rajyoga Meditation, Brahma Kumari Hindi, Divine Knowledge, Self-Transformation, Inner Peace, Meditation India, Divine Knowledge, Hindi Discourse, Inspiration Hindi, Life-Changing Knowledge, Self-Realization, Peace of Mind, Spiritual Awakening, Positive Life, Soul Consciousness, ||