(24)Manu’s daughter Ida Where did this Manu’s daughter come from?

S-B:-(24)मनु की बेटी इड़ा ये मनु की बेटी कहां से आई थी?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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आज हम 24वा विषय करेंगे — मनु की बेटी इड़ा ये मनु की बेटी कहां से आई थी? मनुस्मृति एक पुस्तक लिखी गई, जैसे ब्रह्मा बाबा और जगदंबा सरस्वती से सृष्टि की उत्पत्ति का ज़िक्र किया जाता है, वैसे भारत में एक ऐसी पुस्तक भी लिखी गई जिसे मनुस्मृति कहते हैं। मनु को मत्स्य अवतार सबको पता है—मत्स्य अवतार में भगवान मछली के रूप में आते हैं। मनु से कहते हैं: अब संसार के परिवर्तन का समय आ गया है। तुम एक बहुत बड़ी नाव बनाओ और उस नाव के आधार पर हिमालय पर्वत पर चले जाओ। जब यह सृष्टि पुनः स्थापित हो जाएगी, तब तुम नई सृष्टि के आदि पिता बनोगे। एक तरफ मनु को सृष्टि का आदि माना गया है क्योंकि वे बच गए और बाकी सब विनाश हो गया। आगे लिखा है कि मनु को हिमालय पर्वत पर श्रद्धा मिलती है और उनसे एक बेटी पैदा होती है—इड़ा। फिर दिखाया कि बेटी को पैदा करने के बाद बेटी से ही मानव को पैदा किया गया। मनु को पहला मानव माना जाता है। यह माना जाता है कि हमारा मनु पिछले कल्प में था। और जब नए कल्प की शुरुआत होती है, तो मनु और श्रद्धा इड़ा को जन्म देते हैं—और इड़ा से नई सृष्टि का आरंभ होता है, नए युग का आरंभ होता है। सृष्टि के विकास में इड़ा की भूमिका — आध्यात्मिक महत्व दुनिया की दृष्टि से सृष्टि के विकास का आधार स्त्री और पुरुष का होना बताया गया है। तभी सृष्टि का विकास संभव है। अब हम देखेंगे कि इड़ा की भूमिका क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है। हव्वा की रचना — वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण हवा (Eve) एक कन्या—एक लड़की—जो सारे जगत को जन्म देने का निमित्त बनती है। उसकी रचना कैसे होती है? धार्मिक ग्रंथों जैसे बाइबल और कुरान में हवा को आदम की पसली से बनाया गया बताया गया है। आदम की बाईं पसली निकालकर उससे ईव को बनाया गया। इस प्रकार वह उनकी पुत्री समान हुई—उनके शरीर से बनी। हमारे पुराणों में लिखा है कि ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं—संकल्प की पुत्री। परंतु कई कथाओं के अनुसार ब्रह्मा के अंग से बनाई गई। यह कथा पुरुष–स्त्री, जीवन–संगिनी और सामाजिक संरचना के महत्व को दर्शाती है। मुरली में भी बताया गया है कि पुरुष और स्त्री का समन्वय जीवन और सृष्टि का आधार है। उदाहरण: आदम और हव्वा एक दूसरे के पूरक हैं। जीवन में संतुलन और सहयोग के लिए दोनों आवश्यक हैं। सृष्टि की शुरुआत में पुरुष और स्त्री का मिलन परमात्मा की योजना के अनुसार हुआ जिससे जीवन संचालित होता है। यह प्रकृति द्वारा दी गई ऊर्जा और चेतना का संबंध है, जो सृष्टि के विस्तार का आधार है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण विज्ञान मानव जीवन की उत्पत्ति को विकासवादी प्रक्रिया (Evolution) के आधार पर समझाता है—जिसमें लाखों वर्षों में जीव विकसित हुए। मानव जाति का विकास—ह्यूमन एवोल्यूशन—बताता है कि कोई एक पहला पुरुष या पहली महिला नहीं थी, बल्कि प्रजातियां धीरे-धीरे विकसित हुईं। पहले एक एककोशिकीय जीव था → बहुकोशीय बना → धीरे-धीरे बंदर जैसा जीव → वनमानुष → मनुष्य। डीएनए अध्ययन बताता है कि वर्तमान मानव समाज अपने पूर्वजों से विकसित हुआ है। जैसे प्राकृतिक चयन (Natural Selection) से जीव विकसित होते हैं, वैसे ही इंसान भी धीरे-धीरे विकसित हुआ। धर्म और विज्ञान का संतुलन धार्मिक कहानियां प्रतीकात्मक अर्थ और आध्यात्मिक संदेश देती हैं। विज्ञान जीवन की भौतिक प्रक्रिया समझाता है। दोनों एक-दूसरे को पूरक कर सकते हैं—धर्म जीवन का उद्देश्य बताता है, विज्ञान उसका प्रक्रियात्मक पक्ष। निष्कर्ष और मुख्य संदेश हव्वा की रचना की कथा सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। विज्ञान मानव विकास की दीर्घ प्रक्रिया को समझाता है। दोनों दृष्टिकोण समझकर जीवन की गहरी समझ मिलती है। अधिक ज्ञान के लिए आध्यात्मिक अध्ययन और वैज्ञानिक अध्ययन दोनों अपनाने चाहिए। मुख्य प्रश्न–उत्तर प्र. हव्वा की रचना धार्मिक ग्रंथों में कैसे बताई गई है? उ. आदम की पसली से बनाई गई—यह मानव जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। प्र. विज्ञान क्या कहता है? उ. मानव का विकास लाखों वर्षों की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया का परिणाम है। प्र. क्या धर्म और विज्ञान विरोधी हैं? उ. नहीं—दोनों पूरक हैं और जीवन की संपूर्ण समझ देते हैं।

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