(30)एक्जिमा और त्वचा योग: योग, आहार और मुरली के आधुनिक उपाय
“एग्जिमा और त्वचा रोग का दिव्य इलाज | योग आहार और मुरली के अद्भुत उपाय |”
1. प्रस्तावना
ओम शांति।
आज हम डिवाइन हेल्थ सीरीज़ का 30वां विषय कर रहे हैं – एग्जिमा और त्वचा रोग।
यह सिर्फ शरीर की समस्या नहीं है, बल्कि आत्मा की स्थिति से भी गहरा सम्बन्ध रखती है।
2. त्वचा – आत्मा का निकटतम आवरण
मुरली (18 मई 1965) कहती है:
“शरीर को शुद्ध और संतुलित रखना आत्मा को मजबूत बनाता है।”
जैसे किसी घर की दीवार गंदी हो जाए तो घर की सुंदरता बिगड़ जाती है, वैसे ही त्वचा आत्मा की चमक और शरीर की स्वस्थता को दर्शाती है।
3. क्या खाएं? – प्राकृतिक और लाभकारी भोजन
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सफेद पैठा, लौकी, गाजर
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पालक, ककड़ी, धनिया के पत्ते
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हरे बेल फल
मुरली (15 जून 1964):
“जो शरीर को हल्का और ताजा रखेगा, वही आत्मा को भी ऊर्जावान बनाएगा।”
खट्टे फल – विटामिन सी से भरपूर
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नाशपाती, अंगूर, आंवला, नींबू, संतरा, लाल अंगूर
उदाहरण: अंगूर त्वचा की रक्षा करता है, वैसे ही सकारात्मक विचार आत्मा को चमकाते हैं।
4. सीड्स और आयुर्वेदिक उपाय
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त्रिफला
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सनाई की पत्तियां
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अमलतास के बीज
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चिया बीज
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अलसी के बीज
मुरली (22 अगस्त 1966):
“बीज छोटे होते हैं लेकिन शक्ति बहुत बड़ी होती है।”
इसी तरह आत्मा भी छोटी है, पर उसकी शक्ति और शांति असीमित है।
5. क्या न खाएं? – त्वचा रोग से बचाव
असुरक्षित खाद्य पदार्थ:
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चीनी, गुड़, शहद, मिठाई, सफेद नमक
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गेहूं, मक्का, बाजरा
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दुग्ध उत्पाद
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बैंगन, पालक, भिंडी, द्वारफली
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सभी मेवे और तैलीय पदार्थ
मुरली (10 मार्च 1967):
“जिसने अपने शरीर को शुद्ध रखा, उसने आत्मा को भी शुद्ध रखा।”
उदाहरण: अत्याधिक तेल या शक्कर जैसे नकारात्मक विचार भी आत्मा पर दाग छोड़ देते हैं।
6. आत्मा और स्वास्थ्य – मुरली का दृष्टिकोण
मुरली कहती है:
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साफ सोच + शुद्ध आहार = स्वस्थ त्वचा और आत्मा।
उदाहरण – जैसे सुबह का सूरज पूरे घर को रोशन करता है, वैसे ही सही भोजन और सकारात्मक मुरली विचार शरीर और आत्मा को स्वस्थ रखते हैं।
7. निष्कर्ष और सुझाव
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संतुलित आहार अपनाएं।
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मुरली में बताए गए आध्यात्मिक टिप्स का अभ्यास करें।
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समय-समय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
स्वस्थ शरीर और स्वस्थ आत्मा – दोनों ही जीवन को आनंदित बनाते हैं।
“एग्जिमा और त्वचा रोग | क्या खाएं और क्या न खाएं? | मुरली और योग से दिव्य इलाज”
Questions & Answers
प्रश्न 1: एग्जिमा और त्वचा रोग आत्मा से कैसे जुड़े हैं?
उत्तर: त्वचा आत्मा का सबसे नजदीकी आवरण है। जैसे दीवार गंदी होने पर घर की सुंदरता बिगड़ जाती है, वैसे ही त्वचा अस्वस्थ हो तो आत्मा की चमक भी प्रभावित होती है। मुरली (18 मई 1965) कहती है – “शरीर को शुद्ध और संतुलित रखना आत्मा को मजबूत बनाता है।”
प्रश्न 2: एग्जिमा और त्वचा रोग में क्या खाएं?
उत्तर:
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सफेद पैठा, लौकी, गाजर
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पालक, ककड़ी, धनिया के पत्ते
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हरे बेल फल
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खट्टे फल जैसे नाशपाती, अंगूर, आंवला, नींबू, संतरा
जैसे अंगूर में विटामिन C त्वचा की रक्षा करता है, वैसे ही अच्छे विचार आत्मा को चमकाते हैं।
प्रश्न 3: मुरली में बीजों और प्राकृतिक उपायों का क्या महत्व बताया गया है?
उत्तर: मुरली (22 अगस्त 1966) कहती है – “बीज छोटे होते हैं, लेकिन शक्ति बहुत बड़ी होती है।”
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त्रिफला,
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सनाई की पत्तियां,
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अमलतास,
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चिया बीज,
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अलसी के बीज – ये त्वचा रोगों में बेहद लाभकारी हैं।
जैसे बीज छोटे होकर भी शक्ति रखते हैं, वैसे ही आत्मा छोटी है पर असीमित शक्ति और शांति का स्रोत है।
प्रश्न 4: त्वचा रोग से बचाव के लिए क्या नहीं खाना चाहिए?
उत्तर:
चीनी, गुड़, शहद, मिठाई, सफेद नमक
गेहूं, मक्का, बाजरा
दुग्ध उत्पाद
बैंगन, भिंडी, पालक, द्वारफली
मेवे और तैलीय/तले हुए पदार्थ
उदाहरण: जैसे ज्यादा तेल या शक्कर त्वचा पर दाग छोड़ सकते हैं, वैसे ही नकारात्मक विचार आत्मा पर बुरा असर डालते हैं।
प्रश्न 5: आत्मा और स्वास्थ्य को जोड़कर मुरली क्या कहती है?
उत्तर:
-
साफ सोच + शुद्ध आहार = स्वस्थ त्वचा और आत्मा।
मुरली (10 मार्च 1967) कहती है – “जिसने शरीर को शुद्ध रखा, उसने आत्मा को भी शुद्ध रखा।”
उदाहरण – जैसे सुबह का सूरज पूरे घर को रोशन करता है, वैसे ही सही भोजन और सकारात्मक विचार आत्मा और शरीर दोनों को रोशन करते हैं।
प्रश्न 6: एग्जिमा और त्वचा रोग में कौन से आध्यात्मिक सुझाव अपनाने चाहिए?
उत्तर:
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संतुलित आहार अपनाएं।
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मुरली में बताए गए आध्यात्मिक टिप्स का अभ्यास करें।
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समय-समय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
Disclaimer
यह वीडियो केवल शैक्षिक और आध्यात्मिक उद्देश्य से बनाया गया है। इसमें बताए गए उपाय, योग, और आहार संबंधी सुझाव सामान्य मार्गदर्शन हैं। किसी भी प्रकार के रोग या स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया पहले अपने चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
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