विश्व नाटक :-(30)क्या ब्रह्मांड बना या शाश्वत है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय: ब्रह्मांड – बना या शाश्वत?
प्रस्तावना
हम विश्व नाटक का 30वां पाठ पढ़ रहे हैं।
आज का विषय है: क्या ब्रह्मांड बना है या शाश्वत?
बहुत से लोग सोचते हैं कि सितारे अपने आप बनते हैं। क्या यह सच है? विज्ञान और अध्यात्म क्या कहते हैं, यह जानना महत्वपूर्ण है।
1. विज्ञान की सीमाएँ
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आम दुनिया मानती है कि विज्ञान ने सब कुछ देखा और सिद्ध कर दिया।
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लेकिन क्या किसी ने कभी देखा कि एक तारा कैसे बनता है? या पूरा जीवन चक्र कैसा होता है?
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मानव जीवन की अवधि 100–150 वर्ष है, जबकि तारे अरबों वर्षों तक जीवित रहते हैं।
उदाहरण:
एक वैज्ञानिक ने किसी व्यक्ति को 10 सेकंड देखकर उसके पूरे जीवन की कहानी लिखने की कल्पना करना, तारे के जीवन को समझने के बराबर है।
स्टुअर्ट इंग्लिश, 1967: “हम किसी तारे का पूरा जीवन, भूत, वर्तमान और भविष्य नहीं बता सकते।”
एबेल, 1969: “तारे के बारे में अनुमान करना वैसा है जैसे किसी मनुष्य को 10 सेकंड देखकर उसकी पूरी कहानी लिख देना।”
2. वैज्ञानिक सिद्धांत और हकीकत
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विज्ञान कहता है कि सितारे गैस के बादलों से बनते हैं, गुरुत्वाकर्षण उन्हें जोड़ता है और वे प्रज्वलित हो जाते हैं।
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परंतु, संपूर्ण प्रक्रिया का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
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केवल कल्पना और अनुमान के आधार पर सिद्धांत बनाए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सिर्फ़ जो देखा और मापा गया है, वही विज्ञान कह सकता है। सितारों का जन्म और मृत्यु देखी नहीं जा सकती।
3. आध्यात्मिक दृष्टिकोण
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ब्रह्मांड अनादि और शाश्वत है।
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सितारे, सूर्य, चंद्र, ग्रह – सब रूपांतरित होते रहते हैं, न कि नए बनाए जाते हैं।
मुरली प्रमाण:
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12 फरवरी 1969: “यह सृष्टि अनादि है, अनंत है। दुनिया की वस्तुएं बनती नहीं, नई-पुरानी होती रहती हैं।”
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23 जनवरी 1965: “मैं ब्रह्मा के तन में प्रवेश कर ज्ञान देता हूं। इसी से नई दुनिया स्थापन होती है।”
उदाहरण:
जैसे पानी पानी ही रहता है, वायु वायु ही रहती है, अग्नि अग्नि ही रहती है – इसी प्रकार सितारे और ग्रह भी हमेशा मौजूद रहते हैं, केवल उनका रूप परिवर्तन होता है।
4. परमात्मा का कार्य
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भौतिक निर्माण नहीं: परमात्मा तारों या ग्रहों को नहीं बनाते।
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चेतना और व्यवस्था का निर्माण:
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सुप्त को जागृत करना
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अव्यवस्थित को व्यवस्थित करना
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पतित को पावन बनाना
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मुरली प्रमाण:
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परमात्मा का उद्देश्य विश्व पुनर्निर्माण और मानव चेतना का जागरण है।
5. विज्ञान और अध्यात्म का संगम
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विज्ञान और अध्यात्म दोनों सीमाओं को पूरा करते हैं।
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विज्ञान सिद्धांतों और अवलोकन पर आधारित है।
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अध्यात्म अनादि सृष्टि, शाश्वतता और चेतना का ज्ञान देता है।
मुख्य सार:
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सितारों की रचना केवल कल्पना है, सिद्ध नहीं।
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ब्रह्मांड न बनाया गया है, न नष्ट होता है।
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परमात्मा भौतिक नहीं, चेतना को पुनर्जागृत करते हैं।
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5000 वर्षों में विश्व की पुनरावृत्ति होती है – सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग का चक्र।
निष्कर्ष
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ब्रह्मांड शाश्वत है, न कि बनाया गया।
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सितारे और ग्रह रूपांतरण के माध्यम से जीवन चक्र में प्रवेश करते हैं।
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परमात्मा का कार्य भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि मानव चेतना और व्यवस्था का जागरण है।
1. विज्ञान की सीमाएँ
प्रश्न 1: क्या विज्ञान ने यह देखा है कि एक तारा कैसे बनता है?
उत्तर: नहीं। किसी वैज्ञानिक ने कभी किसी तारे का जन्म और पूरा जीवन चक्र देखा नहीं है। हमारी मानव आयु लगभग 100–150 वर्ष है, जबकि तारे अरबों वर्षों तक जीवित रहते हैं।
प्रश्न 2: विज्ञान और आम दुनिया में इस विषय पर क्या विश्वास है?
उत्तर: आम लोग मानते हैं कि विज्ञान ने सब कुछ देखा और सिद्ध कर दिया। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि सितारे गैस के बादलों से बनते हैं, लेकिन यह केवल कल्पना और अनुमान है।
प्रश्न 3: क्या कोई उदाहरण है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सीमाएँ दिखाता है?
उत्तर: हाँ। एबेल (1969) ने कहा कि किसी तारे के बारे में अनुमान लगाना वैसा है जैसे किसी व्यक्ति को 10 सेकंड देखकर उसका पूरा जीवन लिख देना। स्टुअर्ट इंग्लिश (1967) ने कहा कि हम किसी तारे का पूरा जीवन, भूत, वर्तमान और भविष्य नहीं बता सकते।
2. वैज्ञानिक सिद्धांत और हकीकत
प्रश्न 4: विज्ञान सितारों के बारे में क्या कहता है?
उत्तर: विज्ञान कहता है कि सितारे गैस के बादलों से बनते हैं, गुरुत्वाकर्षण उन्हें जोड़ता है और वे प्रज्वलित हो जाते हैं।
प्रश्न 5: क्या यह सिद्धांत प्रमाणित है?
उत्तर: नहीं। संपूर्ण प्रक्रिया का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद नहीं है। केवल अनुमान और विचार के आधार पर सिद्धांत बनाए गए हैं।
प्रश्न 6: विज्ञान किस चीज़ पर भरोसा करता है?
उत्तर: विज्ञान केवल वही देख सकता है और माप सकता है जो प्रत्यक्ष है। सितारों का जन्म और मृत्यु प्रत्यक्ष रूप से देखी नहीं जा सकती।
3. आध्यात्मिक दृष्टिकोण
प्रश्न 7: ब्रह्मांड के बारे में अध्यात्म क्या कहता है?
उत्तर: ब्रह्मांड अनादि और शाश्वत है। सितारे, सूर्य, चंद्र, ग्रह – सब केवल रूपांतरित होते रहते हैं, न कि नए बनाए जाते हैं।
प्रश्न 8: मुरली में इस विषय पर क्या लिखा है?
उत्तर:
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12 फरवरी 1969: “यह सृष्टि अनादि है, अनंत है। दुनिया की वस्तुएं बनती नहीं, नई-पुरानी होती रहती हैं।”
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23 जनवरी 1965: “मैं ब्रह्मा के तन में प्रवेश कर ज्ञान देता हूं। इसी से नई दुनिया स्थापन होती है।”
प्रश्न 9: इसे उदाहरण से कैसे समझा जा सकता है?
उत्तर: जैसे पानी पानी ही रहता है, वायु वायु ही रहती है, अग्नि अग्नि ही रहती है – उसी प्रकार सितारे और ग्रह भी हमेशा मौजूद रहते हैं, केवल उनका रूप परिवर्तन होता है।
4. परमात्मा का कार्य
प्रश्न 10: क्या परमात्मा तारों या ग्रहों का भौतिक निर्माण करते हैं?
उत्तर: नहीं। परमात्मा भौतिक निर्माण नहीं करते।
प्रश्न 11: फिर उनका कार्य क्या है?
उत्तर: परमात्मा का कार्य है चेतना और व्यवस्था का निर्माण करना:
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सुप्त को जागृत करना
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अव्यवस्थित को व्यवस्थित करना
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पतित को पावन बनाना
प्रश्न 12: इसका मुरली प्रमाण क्या है?
उत्तर: परमात्मा का उद्देश्य विश्व पुनर्निर्माण और मानव चेतना का जागरण है।
5. विज्ञान और अध्यात्म का संगम
प्रश्न 13: विज्ञान और अध्यात्म कैसे जुड़ते हैं?
उत्तर:
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विज्ञान सिद्धांत और अवलोकन पर आधारित है।
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अध्यात्म अनादि सृष्टि, शाश्वतता और चेतना का ज्ञान देता है।
प्रश्न 14: सितारों की रचना के बारे में अंतिम सत्य क्या है?
उत्तर: सितारों की रचना केवल कल्पना है, सिद्ध नहीं। ब्रह्मांड न बनाया गया है, न नष्ट होता है। परमात्मा भौतिक नहीं, चेतना को पुनर्जागृत करते हैं।
प्रश्न 15: विश्व चक्र की पुनरावृत्ति कब होती है?
उत्तर: हर 5000 वर्ष में विश्व की पुनरावृत्ति होती है – सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग का चक्र चलता रहता है।
6. निष्कर्ष
प्रश्न 16: ब्रह्मांड की वास्तविक स्थिति क्या है?
उत्तर: ब्रह्मांड शाश्वत है, न कि बनाया गया। सितारे और ग्रह रूपांतरण के माध्यम से जीवन चक्र में प्रवेश करते हैं।
प्रश्न 17: परमात्मा का कार्य क्या है?
उत्तर: परमात्मा का कार्य भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि मानव चेतना और व्यवस्था का जागरण है।
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