(70) Spiritual meaning of killing of Putana, Aghasur and Bakasur

(70) पूतना, अघासुर तथा बकासुर वध का आध्यात्मिक अर्थ

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“पूतना, अघासुर, बकासुर वध का रहस्य | गीता का भगवान कौन? |”


 1. भूमिका – गीता का भगवान कौन?

ओम् शांति।
आज का विषय है – पूतना, अघासुर और बकासुर वध का आध्यात्मिक रहस्य।
कहानी रूप में हम सबने सुना है कि श्रीकृष्ण ने असुरों का वध किया।
परंतु असल में यह कथाएँ आत्मा के जीवन और विकारों के नाश की शिक्षा देती हैं।


2. पूतना वध = अशुद्धता का अंत

“पूत” = पवित्र, “ना” = नहीं।
अर्थात् पूतना = अशुद्ध नारी।
वह जो स्वयं विकारी है और दूसरों को भी विकार रूपी दूध पिलाती है।
आज भी कई आत्माएँ देह-अभिमान में फँसकर अशुद्ध जीवन जीती हैं।
परमात्मा शिव जब ज्ञान देते हैं तो आत्मा पवित्रता की शक्ति पाती है और पूतना का वध होता है।


3. अघासुर वध = पापी स्वभाव का विनाश

“अघ” = पाप। “असुर” = आसुरी वृत्ति।
अघासुर का विशाल मुख इस बात का प्रतीक है कि पाप सबको निगल जाता है।
जब आत्मा विकारों में डूबती है तो दूसरों को भी अपने साथ खींच लेती है।
परमात्मा का ज्ञान इस पापी प्रवृत्ति का अंत करता है।


4. बकासुर वध = कपटीपन का नाश

“बक” = बगुला।
बगुला बाहर से साधु, भीतर से स्वार्थी होता है।
आज भी अनेक लोग बाहर से धार्मिक, भीतर से विकारी हैं।
भगवान ज्ञान देते हैं — अंदर और बाहर एक समान बनो।
यही है बकासुर का वध।


5. कंस = माया का प्रतीक

कंस सभी असुरों का नायक है।
वास्तविक अर्थ में कंस = माया।
उसके आदेश से विकार आत्मा पर हमला करते हैं — काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार।
परंतु परमात्मा शिव जब ज्ञान मुरली सुनाते हैं, तब आत्मा इन असुरों को जीतकर विजयी बनती है।


6. निष्कर्ष – असली असुर वध कहाँ होता है?

भागवत में असुर वध श्रीकृष्ण से जोड़कर दिखाया गया है।
परंतु सच्चाई यह है कि संगम युग पर शिव परमात्मा ब्रह्मा के तन में प्रवेश करके ज्ञान देते हैं।
वही ज्ञान हमें विकारों से मुक्त करता है।
कृष्ण तो विद्यार्थी है, शिक्षक नहीं।
असली गीता का भगवान शिव है।
हर आत्मा को यह युद्ध भीतर ही लड़ना है और माया पर विजय पाकर पवित्र बनना है।


7. आज का संकल्प

“मैं आत्मा पवित्रता और सत्य की ज्योति से माया के हर असुर पर विजय प्राप्त करूंगा।
मैं बाप समान बनकर विश्व कल्याणकारी बनूँगा।”

“पूतना, अघासुर, बकासुर वध का रहस्य | असली गीता ज्ञान कौन देता है? | ShivBaba Murli Speech Q&A”


 प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)

1. पूतना वध का असली आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

उत्तर: पूतना का अर्थ है अशुद्धता। वह स्वयं अशुद्ध है और दूसरों को भी विकार रूपी विष पिलाती है।
ज्ञान और योग द्वारा जब आत्मा पवित्रता को धारण करती है, तब अशुद्धता का नाश होता है। यही पूतना वध है।


2. अघासुर किसका प्रतीक है?

उत्तर: “अघ” का अर्थ है पाप। अघासुर का विशाल मुख इस बात का प्रतीक है कि पाप आत्मा को निगल जाता है।
जब परमात्मा शिव ज्ञान देते हैं तो आत्मा पाप बंधन से मुक्त होती है। यही अघासुर वध है।


3. बकासुर क्या दर्शाता है?

उत्तर: बकासुर कपटीपन और दोहरेपन का प्रतीक है।
जैसे बगुला बाहर से साधु लगता है, पर भीतर से मछली खाने वाला है।
वैसे ही बाहर से धार्मिक और भीतर से विकारी होना बकासुर वृत्ति है।
ज्ञान आत्मा को अंदर-बाहर एक समान बना देता है।


4. कंस किसका प्रतिनिधि है?

उत्तर: कंस माया का प्रतीक है।
उसके आदेश से विकार – काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार – आत्मा पर आक्रमण करते हैं।
ज्ञान रूपी शक्ति से आत्मा कंस सहित इन सभी असुरों को पराजित करती है।


5. असली असुर वध कहाँ और कब होता है?

उत्तर: यह वध संगमयुग पर होता है, जब परमात्मा शिव स्वयं आकर हमें ज्ञान सुनाते हैं।
भागवत में इसे श्रीकृष्ण से जोड़कर कहा गया, परंतु वास्तविक गीता का भगवान शिव है।
हर आत्मा को यह युद्ध अपने भीतर माया से लड़कर जीतना है।


6. इस ज्ञान से आत्मा को क्या संकल्प लेना चाहिए?

उत्तर:“मैं आत्मा पवित्रता और सत्य की ज्योति से माया के हर असुर पर विजय प्राप्त करूंगा।
मैं बाप समान विश्व कल्याणकारी आत्मा बनूँगा।”

Disclaimer

यह वीडियो/सामग्री केवल आध्यात्मिक अध्ययन, आत्म-चिंतन और प्रेरणा के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार का धार्मिक वाद-विवाद, संप्रदाय विशेष का प्रचार, आलोचना या विवाद करना नहीं है।
सभी प्रश्नोत्तर BapDada Murli एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रेरित हैं।
कृपया इसे केवल स्व-उन्नति, आत्मिक शांति और सकारात्मक चिंतन के लिए ही उपयोग करें।

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