(94)गीता ज्ञान व्दारा स्वर्ग की स्थापना
“गीता का भगवान कौन है? | गीता ज्ञान से स्वर्ग की स्थापना | Shiv और सहज राजयोग”
प्रस्तावना (Introduction)
ओम शांति।
आज हम एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार करेंगे –
गीता का भगवान कौन है?
और गीता का असली उद्देश्य क्या है?
गीता का असली उद्देश्य
क्या भगवान केवल महाभारत युद्ध के लिए आए थे?
क्या परमधाम से आकर उन्होंने युद्ध कराना ही अपना काम समझा?
नहीं।
भगवान का कार्य है – पावनता और स्वर्ग की स्थापना।
मिथ्या मान्यताएं
शास्त्रों में लिखा है कि युद्ध के बाद पांडव हिमालय चले गए।
लेकिन क्या कोई हिमालय पार कर स्वर्ग पहुंच सकता है?
क्या कोई कलयुगी देह सहित सतयुग में जा सकता है?
नहीं।
ये केवल कवि कल्पनाएं हैं, वास्तविकता नहीं।
गीता का वास्तविक फल
गीता ज्ञान का असली फल यह है कि –
शूद्र से ब्राह्मण और ब्राह्मण से देवता बनते हैं।
भारतवासी तमोप्रधान से सतोप्रधान बनते हैं।
स्वर्ग कोई अलग जगह नहीं,
यही भारत भूमि पावन बनकर स्वर्ग बनती है।
सहज राजयोग
परमात्मा शिव ब्रह्मा तन में प्रवेश कर सहज राजयोग सिखाते हैं।
इस योग से आत्मा विकारों पर विजय पाती है और पवित्र बनती है।
जैसे गंदा पानी फिल्टर होकर शुद्ध हो जाता है,
वैसे ही आत्मा भी योग से शुद्ध हो जाती है।
गीता अध्याय का संदेश
गीता अध्याय 2, श्लोक 11 से 30 में बताया गया है –
आत्मा अमर है।
ना यह कटती है, ना जलती है, ना मरती है।
यही आत्मज्ञान आत्मा को देव पद तक पहुंचाता है।
मुरली से प्रमाण
12 अगस्त 2024 की मुरली में बाबा ने कहा –
यह ज्ञान बच्चों को शूद्र से ब्राह्मण और ब्राह्मण से देवता बनाता है।
18 जनवरी 2023 की अव्यक्त मुरली में कहा गया –
ड्रामा में भगवान का कार्य है पावनता की स्थापना और स्वर्ग की रचना।
निष्कर्ष
गीता केवल युद्ध का ग्रंथ नहीं है।
यह स्वर्ग की स्थापना का आधार है।
जो इसे अपनाता है,
वह नर्क से स्वर्ग की ओर कदम बढ़ाता है।
“गीता का भगवान कौन है? | प्रश्न और उत्तर द्वारा गीता का रहस्य”
Questions and Answers
Q1. गीता का असली उद्देश्य क्या है?
गीता का असली उद्देश्य पावनता और स्वर्ग की स्थापना है, न कि केवल महाभारत युद्ध।
Q2. क्या भगवान महाभारत युद्ध के लिए आए थे?
नहीं। भगवान युद्ध कराने नहीं आते।
वह आत्माओं को पवित्र बनाने और स्वर्ग रचने के लिए आते हैं।
Q3. क्या पांडव सचमुच हिमालय पार कर स्वर्ग गए थे?
नहीं। यह केवल मिथ्या मान्यता और कवि कल्पना है।
स्वर्ग कोई अलग जगह नहीं, बल्कि यही भारत भूमि पावन बनकर स्वर्ग बनती है।
Q4. गीता ज्ञान का वास्तविक फल क्या है?
गीता ज्ञान से मनुष्य शूद्र से ब्राह्मण और ब्राह्मण से देवता बनता है।
Q5. परमात्मा शिव कैसे योग सिखाते हैं?
परमात्मा शिव ब्रह्मा तन में प्रवेश कर सहज राजयोग सिखाते हैं।
इस योग से आत्मा विकारों पर विजय पाकर पवित्र बनती है।
Q6. गीता अध्याय 2, श्लोक 11-30 का मुख्य संदेश क्या है?
इसमें बताया गया है कि आत्मा अमर है।
आत्मा न कटती है, न जलती है, न मरती है।
Q7. मुरली में भगवान का कार्य कैसे बताया गया है?
12 अगस्त 2024 की मुरली में कहा गया:
“यह ज्ञान बच्चों को शूद्र से ब्राह्मण और ब्राह्मण से देवता बनाता है।”
18 जनवरी 2023 की अव्यक्त मुरली में:
“भगवान का कार्य है पावनता की स्थापना और स्वर्ग की रचना।”
Q8. गीता को युद्ध का ग्रंथ क्यों नहीं माना जाना चाहिए?
क्योंकि गीता केवल युद्ध का शास्त्र नहीं है।
यह नर्क से स्वर्ग की ओर ले जाने वाला दिव्य ज्ञान है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो केवल शैक्षिक और आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, पंथ, संप्रदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।
यहाँ प्रस्तुत सभी विचार गीता ज्ञान और आध्यात्मिक साहित्य पर आधारित हैं।
कृपया इसे केवल सीखने और आत्म-विकास की दृष्टि से ही ग्रहण करें।
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