(72)Union with God is the soul’s highest relationship.

(72)ईश्वर से मिलन आत्मा का सर्वाेच्च संबंध ?

( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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“ईश्वर से मिलन और आत्मा का सर्वोच्च संबंध | ब्रह्मा बाबा की तरह योगी जीवन कैसे बनाएं?”
(Om Shanti | Brahma Baba’s Yogic Life & Direct Connection with God)

 ओम शांति – आइए हम ब्रह्मा बाबा को फॉलो करें

ब्रह्मा बाबा – जिनका जीवन एक मिसाल है।
जिन्होंने सांसारिक, पारिवारिक, धार्मिक जीवन को त्यागकर ईश्वर से संबंध को ही जीवन का केंद्र बना लिया।
आज हम उनके जीवन के 72वें विशेष विषय पर बात करेंगे:
“ईश्वर से मिलन और आत्मा का सर्वोच्च संबंध”


योग – परमात्मा से सीधा संबंध

मुरली पॉइंट:
“बच्चे! मुझसे योग लगाओ तो पावन बन जाओ।”

बाबा हमें सिखाते हैं कि कोई पूजा, माला, मंत्र नहीं –
सिर्फ “मैं आत्मा, वो परमात्मा” का संबंध ही सच्चा योग है।

बुद्धि का योग क्या है?
यह मन का नहीं, बुद्धि का योग है।
जैसे रेडियो को ट्यून किया जाता है, वैसे ही बुद्धि को परमात्मा पर ट्यून करें।


सबसे सरल योग – सहज राजयोग

मुरली पॉइंट:
“यह है सहज राजयोग – कोई आसन, प्राणायाम या तपस्या नहीं चाहिए।”

यह आत्मा को राजा बनाने वाला योग है।
राजयोग का अर्थ है – “मन की दिशा बदलनी है – बुद्धि की नहीं।”
काम करते हुए, चलते-फिरते, बोलते हुए भी योग कर सकते हैं।
इसे वर्किंग मेडिटेशन या कर्मयोग कहते हैं।


पहचान: मैं कौन?

मुरली पॉइंट:
“पहले आत्मा को जानो – मैं आत्मा हूं, यह शरीर मेरा वस्त्र है।”

हम आत्मा हैं – एक लाइट का कण, जो मस्तिष्क के मध्य में स्थित है।
जैसे ड्राइवर गाड़ी चलाता है – वैसे ही आत्मा शरीर को चलाती है।


परमात्मा की पहचान – वो कौन है?

मुरली पॉइंट:
“परमात्मा भी एक ज्योति बिंदु है – परमपिता शिव।”

परमात्मा भी आत्मा है – लेकिन निराकार, अशरीरी और सर्वगुण संपन्न।
उदाहरण:
सूरज जैसा नहीं कि प्रकाश अपने आप दे –
परमात्मा से कुछ पाने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है।

मुरली चेतावनी:
“परमात्मा से कोई भी चीज अपने आप नहीं मिलती – मेहनत करनी पड़ती है।”


मन की शक्ति और ध्यान की दिशा

मुरली पॉइंट:
“मन की शक्ति को एक दिशा दो – बाबा की दिशा।”

जब मन को ज्ञान से भर देंगे –
तो सारे विचार अपने आप शिव बाबा की ओर मुड़ेंगे।

उदाहरण:
जैसे नदी को एक दिशा देने से उसका प्रवाह तीव्र हो जाता है –
वैसे ही मन को एक दिशा देने से शक्ति मिलती है।

 ब्रह्मा बाबा जैसे बनना संभव है

ब्रह्मा बाबा ने अपने जीवन से दिखा दिया –
कैसे बुद्धि के योग से जीवन दिव्य बनता है।

“बच्चे! मैं चलता हूं – तुम भी मेरे पदचिन्हों पर चलो।”

 आइए, हम भी उसी पवित्र रास्ते पर चलें –
जहां मंज़िल है – ईश्वर से मिलन और आत्मा की सच्ची पहचान।

“ईश्वर से मिलन और आत्मा का सर्वोच्च संबंध | ब्रह्मा बाबा की तरह योगी जीवन कैसे बनाएं?”
(Om Shanti | Brahma Baba’s Yogic Life & Direct Connection with God)


 ओम शांति – ब्रह्मा बाबा को फॉलो करें

ब्रह्मा बाबा का जीवन दिव्यता का आदर्श है।
अब आइए प्रश्नों के माध्यम से उनके जीवन और परमात्मा से संबंध पर गहराई से चिंतन करें।


प्रश्न 1: ब्रह्मा बाबा की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?

उत्तर:ब्रह्मा बाबा की सबसे बड़ी विशेषता थी – ईश्वर से सीधा संबंध
उन्होंने सांसारिक, पारिवारिक और धार्मिक सब बंधनों को त्यागकर, सिर्फ परमात्मा शिव को जीवन का केंद्र बना लिया।
मुरली पॉइंट: “बच्चे! मुझसे योग लगाओ तो पावन बन जाओ।”


प्रश्न 2: सही योग क्या है? और यह किसका योग है – मन का या बुद्धि का?

उत्तर:सच्चा योग है – “मैं आत्मा, वो परमात्मा” का बंधन।
यह मन का नहीं, बुद्धि का योग है।
उदाहरण: जैसे रेडियो की ट्यूनिंग सही करने पर सिग्नल मिलते हैं, वैसे ही बुद्धि को परमात्मा पर ट्यून करना होता है।
मुरली पॉइंट: “यह बुद्धि का योग है, मन का योग नहीं।”


प्रश्न 3: राजयोग को ‘सहज’ क्यों कहा गया है?

उत्तर:क्योंकि इसमें ना कोई आसन, ना प्राणायाम, ना तपस्या की जरूरत है।
यह सिर्फ मन की दिशा बदलने का अभ्यास है।
काम करते हुए भी यह किया जा सकता है, इसलिए इसे वर्किंग मेडिटेशन या कर्मयोग कहते हैं।
मुरली पॉइंट: “यह सहज राजयोग है – जिसमें कोई शारीरिक मेहनत नहीं है।”


प्रश्न 4: आत्मा की पहचान क्या है?

उत्तर:हम आत्मा हैं – एक लाइट का कण – जो मस्तिष्क के बीच में स्थित है।
उदाहरण: जैसे ड्राइवर गाड़ी चलाता है, वैसे ही आत्मा इस शरीर को चला रही है।
मुरली पॉइंट: “मैं आत्मा हूं – यह शरीर मेरा वस्त्र है।”


प्रश्न 5: परमात्मा कौन है? और वो आत्मा से अलग कैसे हैं?

उत्तर:परमात्मा भी आत्मा है – लेकिन अशरीरी, निराकार, और सर्वगुण-संपन्न
उनका नाम है – परमपिता शिव
मुरली चेतावनी: “परमात्मा से कोई भी चीज अपने आप नहीं मिलती – मेहनत करनी पड़ती है।”


प्रश्न 6: क्या परमात्मा से शांति और शक्ति अपने आप मिलती है?

उत्तर:नहीं।यह एक भ्रांति है कि जैसे सूरज की गर्मी अपने आप मिलती है, वैसे परमात्मा से शांति और प्रेम भी अपने आप मिलेंगे।
सच्चाई:
हमें स्वयं पुरुषार्थ करके योग लगाना होता है।
उदाहरण:
सूरज केवल उदाहरण है, परमात्मा से शक्ति प्राप्त करने के लिए हमें पूरा ध्यान और प्रयास लगाना होता है।


प्रश्न 7: मन की शक्ति को एक दिशा में कैसे केंद्रित करें?

उत्तर:जब हम ज्ञान से मन को भरते हैं – तो मन स्वतः बाबा की ओर खिंचता है।
मुरली पॉइंट: “अपने मन की शक्ति को एक ही दिशा दो – बाबा की दिशा।”
उदाहरण: जैसे नदी को एक दिशा देने से उसका प्रवाह तीव्र होता है।


प्रश्न 8: क्या ब्रह्मा बाबा जैसा योगी जीवन हमारे लिए संभव है?

उत्तर:हां।ब्रह्मा बाबा ने यह कर के दिखाया – कि गृहस्थ में रहते हुए भी योगयुक्त, पवित्र, और ईश्वरीय जीवन संभव है।
मुरली वाणी: “बच्चे! मैं चलता हूं – तुम भी मेरे पदचिन्हों पर चलो।”

 ब्रह्मा बाबा का जीवन हमें सिखाता है –
कि जब बुद्धि का योग परमात्मा से जुड़ जाता है,
तो जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आता है।

 आइए, हम भी उनकी तरह योगी, पवित्र और ईश्वरीय जीवन अपनाएं –
जहां मंज़िल है – ईश्वर से मिलन और आत्मा की सच्ची पहचान।

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