01-08-2025/आज की मुरली बड़े-बड़े अक्षर में पढ़ें और मंत्रमुग्ध करें
“यह गीत है भक्ति मार्ग का… अब ज्ञान का तीसरा नेत्र दो!” | अद्भुत राज़ योग ज्ञान |
मुख्य भाषण शीर्षकों सहित स्क्रिप्ट:
1. भूमिका: यह गीत किसका है?
“यह गीत है भक्ति मार्ग का गाया हुआ।”
यह गीत उस आत्मा की पुकार है, जो भक्ति के अंधकार में भटकते-भटकते थक चुकी है। वह अब कहती है — “हम अन्धेरे में हैं, अब ज्ञान का तीसरा नेत्र दो।”
यह आवाज़ किसी साधारण मनुष्य की नहीं, बल्कि उस आत्मा की है जो अब सत्य ज्ञान की खोज में ईश्वर को पुकार रही है।
2. कलियुग: अज्ञान की नींद में सोया संसार
“कलियुग में सब अज्ञान की आसुरी नींद में सोये हुए कुम्भकरण हैं।”
बाप कहते हैं, सारा संसार इस समय गहरी अज्ञानता में डूबा है। सच्चे सुख और सच्चे ज्ञान को पहचानने की बुद्धि भी नहीं रही। लोग भक्ति करते-करते थक गए, परन्तु सत्य मार्ग नहीं मिला।
3. ज्ञान का द्वार: सिर्फ एक शिवबाबा खोलते हैं
“ज्ञान बहुत सिम्पल है… यह ज्ञान सिवाए ज्ञान सागर बाप के कोई दे नहीं सकता।”
वेद-शास्त्र पढ़ने से, हठयोग या गुरुओं के पास जाने से ज्ञान नहीं मिलता। भगवान खुद आकर ज्ञान देते हैं — और वही ज्ञान है, जिससे आत्मा पावन बनती है, फिर से देवता बनती है।
4. भक्ति में भ्रम: गंगा, तीर्थ, स्नान — सब भावना का खेल
लोग समझते हैं जहाँ पानी है, वहाँ स्नान करने से पवित्र हो जाएंगे — चाहे वह झरना हो या तालाब।
पर सच्चा पतित-पावन जल वह है जो ज्ञान का अमृत है, जो ईश्वर खुद पिलाते हैं।
5. ज्ञानियों की चुनौतियाँ: पढ़ा हुआ सब भूलना है
“हमने इतने शास्त्र पढ़े हैं…”
बाप कहते हैं, पुराना सब पढ़ा हुआ भूलो। अब श्रीमत पर चलना है। यह ज्ञान इतना सहज है, परंतु देह-अहंकार वाले आत्माओं को समझ में नहीं आता।
6. विश्व शांति का एकमात्र उपाय: आत्मिक दृष्टि और राजयोग
“विश्व में शान्ति तो होती है लड़ाई के बाद… यह लड़ाई कोई भी समय लग सकती है।”
बाप कहते हैं — आत्मा अपने कर्मातीत स्वरूप में पहुंचे, यही उपाय है शांति का।
राजयोग से ही सच्ची शांति और नई दुनिया की स्थापना संभव है।
7. राजयोग: भगवान खुद सिखाते हैं
“यह राजयोग भगवान ही सिखलाते हैं… मनुष्य मनुष्य को पावन नहीं बना सकते।”
राजयोग कोई साधारण योग नहीं, यह वो मार्ग है जहाँ आत्मा परमात्मा से मिलन कर फिर से राजा बनती है।
भगवान स्वयं आते हैं सिखाने — और वही हमें स्वर्ग का मालिक बनाते हैं।
8. श्रीकृष्ण को गीता का भगवान मानने की भूल
“गीता में भूल करने से ही भारत का यह हाल हुआ है…”
भगवान ने स्वयं गीता में कहा — “मामेकम् याद करो”, पर मनुष्यों ने श्रीकृष्ण को गीता का भगवान बना दिया।
श्रीकृष्ण तो जन्म-मरण में आने वाला आत्मा है।
परमपिता परमात्मा शिव ही अजन्मा, अविनाशी और ज्ञान का सागर हैं।
9. ज्ञान का पात्र: पवित्रता — सोने का बर्तन
“शेरनी का दूध सोने के बर्तन में ही टिके।”
भगवान का यह दिव्य ज्ञान तभी आत्मा में टिकता है जब वह पवित्र हो।
बाप बार-बार कहते हैं — पवित्र बनो।
यह अन्तिम जन्म पवित्र रहो, ताकि 21 जन्म के लिए स्वर्ग की राजाई मिल सके।
10. भारत की हार और जीत का खेल: ड्रामा अनुसार
“भारत की ही हार और जीत पर यह ड्रामा बना हुआ है।”
अभी भारत पतित बना है, इसलिए हार रहा है।
बाप आकर भारत को फिर से सतयुगी देवता बनाते हैं।
राजयोग द्वारा यह पुराना भारत फिर से स्वर्णिम भारत बन जाएगा।
11. भविष्य की दुनिया: जहाँ कोई दुःख नहीं होगा
“3 हज़ार वर्ष तक कोई लड़ाई नहीं होगी, कोई कोर्ट, कोई जेल नहीं होगी।”
बाप ऐसी दुनिया की स्थापना कर रहे हैं — जहाँ सिर्फ सुख ही सुख होगा।
यह ज्ञान यात्रा और पवित्र जीवन से ही वहाँ पहुँचा जा सकता है।
12. निष्कर्ष: यह आख़िरी मौका है!
“मौत सिर पर खड़ा है… याद की यात्रा से विकर्म विनाश करने हैं।”
अब यह अन्तिम जन्म है।
जो आत्मा अभी “मामेकम्” की श्रीमत पर चलेगी, वही भविष्य की देवी-देवता बन पाएगी।
बाकी सब, इस महान बदलाव को देखने वाले बनेंगे, बनने वाले नहीं।
प्रश्नोत्तर श्रृंखला:
“यह गीत है भक्ति मार्ग का… अब ज्ञान का तीसरा नेत्र दो!” | अद्भुत राज़ योग ज्ञान |
Q1. यह गीत किस आत्मा की पुकार है?
A: यह गीत उस आत्मा की पुकार है जो भक्ति के अंधकार में भटकते-भटकते थक चुकी है और अब सच्चे ज्ञान की खोज में ईश्वर को पुकार रही है — “हम अंधेरे में हैं, अब ज्ञान का तीसरा नेत्र दो।”
Q2. वर्तमान समय में संसार किस स्थिति में है?
A: कलियुग में संसार अज्ञान की गहरी नींद में सोया हुआ है। इसे कुम्भकरण जैसी नींद कहा गया है, जिसमें लोगों को सच्चे सुख और परमात्मा की पहचान नहीं है।
Q3. ज्ञान देने वाला कौन है? क्या कोई मनुष्य दे सकता है?
A: नहीं। सच्चा ज्ञान सिर्फ ज्ञान सागर शिवबाबा ही दे सकते हैं। यह ज्ञान बहुत सहज है, लेकिन अहंकार में फँसी आत्माएं इसे नहीं समझ पातीं।
Q4. क्या गंगा-स्नान और तीर्थ यात्रा से आत्मा पावन बन सकती है?
A: नहीं। यह सब भक्ति मार्ग की भावनाएँ हैं। सच्चा पतित-पावन अमृत ज्ञान है, जो परमात्मा खुद आकर देते हैं।
Q5. क्या शास्त्र पढ़ने से मोक्ष मिल सकता है?
A: नहीं। शास्त्रों में सिर्फ भक्ति मार्ग की कहानियाँ हैं। बाप कहते हैं — अब सब पढ़ा हुआ भूलो और श्रीमत पर चलो।
Q6. विश्व शांति का सच्चा उपाय क्या है?
A: आत्मिक दृष्टि और राजयोग ही विश्व शांति का एकमात्र उपाय है। जब आत्मा कर्मातीत स्थिति में पहुँचती है, तब शांति स्वाभाविक रूप से आती है।
Q7. राजयोग क्या है और इसे कौन सिखाता है?
A: यह कोई हठयोग नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा का मिलन है। इसे खुद परमात्मा शिव सिखाते हैं — जिससे आत्मा फिर से स्वर्ग की मालिक बनती है।
Q8. क्या श्रीकृष्ण गीता का भगवान है?
A: नहीं। गीता का भगवान परमपिता परमात्मा शिव हैं। श्रीकृष्ण जन्म-मरण में आने वाला देवता है, परन्तु परमात्मा शिव अजन्मा और अविनाशी हैं।
Q9. ज्ञान टिकता कब है?
A: जब आत्मा पवित्र होती है, तब ज्ञान टिकता है। इसीलिए कहा — “शेरनी का दूध सोने के बर्तन में ही टिके।”
Q10. भारत की हार-जीत किस पर निर्भर है?
A: भारत की हार और जीत ड्रामा अनुसार होती है। अभी भारत पतित है, पर बाप आकर इसे फिर से सतयुगी स्वर्णिम भारत बनाते हैं।
Q11. भविष्य की दुनिया कैसी होगी?
A: वहाँ कोई दुःख नहीं होगा — न कोई युद्ध, न कोर्ट, न जेल। वह शाश्वत शांति और सुख का राज्य होगा, जो अभी की राजयोग साधना से ही प्राप्त होता है।
Q12. अभी का समय क्यों महत्वपूर्ण है?
A: यह अन्तिम जन्म है। अभी अगर आत्मा “मामेकम्” की श्रीमत पर चले, तो वह देवी-देवता बन सकती है। नहीं तो सिर्फ दृश्य देखने वाले बनकर रह जाएगी।
DISCLAIMER:
यह वीडियो आध्यात्मिक अध्ययन, मनन और विचार जागरण के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें व्यक्त विचार ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक ज्ञान और मुरली शिक्षाओं पर आधारित हैं। यह किसी धर्म, व्यक्ति या आस्था की आलोचना नहीं करता। कृपया इस ज्ञान को खुले मन और आत्मिक दृष्टिकोण से समझें।
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