02-08-2025/Read today’s Murli in big letters, listen and contemplate

02-08-2025/आज की मुरली बड़े-बड़े अक्षरों में पढ़े सुनें और मंथन करे

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“संगमयुग में राखी का पुनर्जन्म: जब परमात्मा बाँधते हैं आत्मा को रक्षा-सूत्र | 


प्रस्तावना

हम सब जानते हैं कि रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
पर क्या आपने कभी सोचा कि –
क्या राखी सिर्फ एक धागा है?
या यह है कोई आध्यात्मिक पुनर्जागरण का पर्व?

आज हम जानेंगे कि संगमयुग, जब स्वयं परमात्मा शिव इस सृष्टि पर आते हैं,
तब कैसे राखी का असली, आत्मिक और ईश्वरीय अर्थ प्रकट होता है।


 1. वर्तमान समय की पुनरावृत्ति – संगमयुग में राखी का पुनर्जन्म

 संगमयुग क्या है?

संगमयुग वह दिव्य काल है जब
पुराना कलियुगी विश्व समाप्त हो रहा होता है,
और नया सतयुगी विश्व जन्म लेने वाला होता है।
इसी युग में परमात्मा शिव आकर आत्मा को उसका सच्चा स्वरूप याद दिलाते हैं।

 इस समय क्या होता है?

  • परमात्मा आत्मा से कहता है: “बच्चे, तू आत्मा है।”

  • विकारों से दूर रहने की प्रतिज्ञा कराई जाती है।

  • यह कोई धागा नहीं, बल्कि परमात्मा का रक्षा-सूत्र है।


 2. मुरली बिंदु – 4 अगस्त 2014

“बाबा कहते हैं – यह रक्षाबन्धन पर्व ईश्वरीय यज्ञ से उत्पन्न हुआ है। यह विकारों से रक्षा का बन्धन है। आत्मा स्वयं परमात्मा से बंध जाती है।”
Sakar Murli – 4 अगस्त 2014

इसका अर्थ है –
यह पर्व कोई धर्म, परंपरा या समाज से उत्पन्न नहीं हुआ,
बल्कि स्वयं परमात्मा द्वारा रचित है।
यह आत्मा और परमात्मा के बीच
विकारों से सुरक्षा का दिव्य अनुबंध है।


 3. आत्मा की आत्मा से भेंट

परमात्मा कहता है – “अब देह-अभिमान छोड़ो, आत्मा बनो।”

जब आत्मा को अपने शाश्वत स्वरूप की स्मृति आती है,
तो वह पवित्रता की ओर बढ़ती है।
यही राखी का मूल अर्थ है – स्वयं की आत्मा से भेंट।


 4. ब्राह्मण बहनों का संदेश – पवित्रता की प्रतिज्ञा

ब्रह्माकुमारी बहनें जब राखी बाँधती हैं,
तो वह यह नहीं कहतीं कि “मैं तेरी बहन हूँ, तू मेरी रक्षा कर”,
बल्कि वह आत्मा को यह संदेश देती हैं –

“भाई, तू आत्मा है। अब विकारों से रक्षा कर।
मन-वचन-कर्म से पवित्र बन, यही है तेरी सच्ची विजय।”


 5. यह पर्व हर युग में नहीं होता – सिर्फ संगमयुग में

रक्षाबंधन का यह आत्मिक रूप हर कल्प में नहीं होता।
यह सिर्फ संगमयुग में होता है –
जब परमात्मा पुनः धरती पर आकर
आत्मा को पाँच विकारों से रक्षा का रक्षा-सूत्र बांधते हैं।


 6. ड्रामा की पुनरावृत्ति

हर कल्प की तरह,
इस संगमयुग पर भी राखी पुनः आत्मा के लिए
ईश्वरीय शक्ति और पवित्रता का संकल्प बनकर आती है।

यह पुनरावृत्ति है –
हर आत्मा की मुक्ति की घड़ी।


 निष्कर्ष – राखी का असली अर्थ

पारंपरिक राखी संगमयुग की राखी
बहन-भाई का त्यौहार आत्मा-परमात्मा का पर्व
बाहरी धागा आंतरिक प्रतिज्ञा
एक दिन की रस्म जन्म-जन्मांतर की सुरक्षा
भौतिक रक्षा आत्मा की विकारों से रक्षा

सच्ची राखी वही है, जिसमें आत्मा अपने ऊपर नियंत्रण पाए – और परमात्मा से जुड़कर पवित्रता की शक्ति अर्जित करे।

संगमयुग में रक्षाबंधन का आत्मिक अर्थ | प्रश्नोत्तर रूप में समझें


प्रश्न 1: क्या रक्षाबंधन सिर्फ एक पारंपरिक त्यौहार है?

उत्तर:नहीं, रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं है।
यह एक आत्मिक उत्सव है, जिसमें आत्मा परमात्मा से पवित्रता का रक्षा-सूत्र बांधती है।


प्रश्न 2: संगमयुग क्या है और इसका राखी से क्या संबंध है?

उत्तर:संगमयुग वह अलौकिक युग है जब पुराना कलियुगी संसार समाप्त हो रहा होता है और नया सतयुगी संसार जन्म लेता है।
इसी युग में परमात्मा शिव आकर आत्माओं को विकारों से रक्षा का संकल्प कराते हैं — यही सच्चा रक्षाबंधन है।


प्रश्न 3: मुरली अनुसार राखी का सच्चा रूप क्या है?

उत्तर:4 अगस्त 2014 की मुरली में परमात्मा ने कहा:
“यह रक्षाबंधन पर्व ईश्वरीय यज्ञ से उत्पन्न हुआ है। यह विकारों से रक्षा का बंधन है।”
इसका अर्थ है कि यह कोई मानवीय परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वरीय व्यवस्था है।


प्रश्न 4: आत्मा की आत्मा से भेंट का क्या अर्थ है?

उत्तर:जब आत्मा देह-अभिमान छोड़कर आत्म-स्वरूप में स्थित होती है, तब परमात्मा से उसकी सच्ची भेंट होती है।
यही राखी का आत्मिक रूप है — आत्मा स्वयं को पहचानती है और पवित्रता को धारण करती है।


प्रश्न 5: ब्रह्माकुमारी बहनें राखी बाँधते समय क्या संदेश देती हैं?

उत्तर:वह कहती हैं:
“भाई, तू आत्मा है। अब विकारों से रक्षा कर।”
यह एक आंतरिक संकल्प है — पवित्रता, संयम और आत्म-जागृति का।


प्रश्न 6: क्या यह आत्मिक रक्षाबंधन हर युग में होता है?

उत्तर:नहीं, यह रक्षाबंधन केवल संगमयुग में होता है — जब परमात्मा स्वयं आकर आत्मा को विकारों से मुक्ति का रक्षा-सूत्र बाँधते हैं।
यह हर कल्प में एक बार ही होता है।


प्रश्न 7: ड्रामा की पुनरावृत्ति में राखी का क्या महत्व है?

उत्तर:हर कल्प में संगमयुग आता है और आत्मा पुनः परमात्मा से जुड़कर पवित्रता की प्रतिज्ञा करती है।
यह रक्षाबंधन आत्मा की मुक्ति और जीवनमुक्ति की ओर पहला कदम होता है।


प्रश्न 8: पारंपरिक राखी और संगमयुग की राखी में क्या अंतर है?

पारंपरिक राखी संगमयुग की राखी
भाई-बहन का पर्व आत्मा और परमात्मा का पर्व
बाहरी धागा आत्मा की आंतरिक प्रतिज्ञा
एक दिन की रस्म जन्म-जन्मांतर की सुरक्षा
भौतिक रक्षा की भावना आत्मा की विकारों से रक्षा

Disclaimer:

यह वीडियो “BK Dr Surender Sharma – Om Shanti Gyan” चैनल द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो ब्रह्माकुमारी संस्थान की आधिकारिक शिक्षाओं पर आधारित आध्यात्मिक जानकारी साझा करता है।
इस वीडियो में प्रयुक्त विचार, मुरली बिंदु, और शिक्षाएँ 13 जून 2025 को BK करुणा द्वारा हस्ताक्षरित अधिकृत शपथपत्र के अंतर्गत लिए गए हैं।
यह वीडियो न तो किसी धर्म, परंपरा या समुदाय की आलोचना करता है और न ही किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने हेतु है।
इसका उद्देश्य है — रक्षाबंधन के पीछे छिपे आत्मिक और ईश्वरीय रहस्य को सहज प्रश्नोत्तर रूप में सभी आत्माओं तक पहुँचाना।

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