गीता का भगवान काैन है?(75)क्या श्रीमद् भागवत ने भगवान श्री कृष्ण का अपमान किया?गीता और भागवत का सच
“त्रिमूर्ति शिव बनाम त्रिमूर्ति ब्रह्मा – असली रहस्य | शिव बाबा के तीन कर्तव्य |
1. प्रस्तावना – प्रश्न से शुरुआत
बहुत लोग पूछते हैं – “त्रिमूर्ति ब्रह्मा” क्यों कहा जाता है?
परंतु शिव बाबा बार-बार स्पष्ट करते हैं – असली है “त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच”, न कि “त्रिमूर्ति ब्रह्मा भगवानुवाच।”
उदाहरण: जैसे गीता को लोग कहते हैं – “कृष्ण भगवानुवाच”। जबकि गीता वास्तव में शिव भगवानुवाच है।
2. त्रिमूर्ति का असली परिचय
त्रिमूर्ति का आधार है – शिव, ब्रह्मा और विष्णु।
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लोग भ्रमवश “शिव-शंकर” कह देते हैं, लेकिन शिव और शंकर अलग हैं।
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त्रिमूर्ति का आधार है स्वयं परमपिता परमात्मा शिव।
मुरली नोट (20-08-2025):
“बाप कहते हैं – त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच। मनुष्य समझते हैं शंकर आँख खोलते हैं तो विनाश हो जाता है। पर यह सब कल्पना मात्र है।”
3. शिव बाबा के तीन मुख्य कर्तव्य
(A) स्थापना – नई सृष्टि की शुरुआत
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शिव बाबा का पहला कर्तव्य है – नई सतोप्रधान सृष्टि की स्थापना।
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यह कार्य वे प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से कराते हैं।
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ब्राह्मण ही आगे चलकर देवता बनते हैं।
मुरली नोट (20-08-2025):
“प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा शिवबाबा स्थापना कर रहे हैं। विष्णु द्वारा स्थापना नहीं कराते।”
उदाहरण: जैसे स्कूल का प्रिंसिपल नया सेशन शुरू कराता है, वैसे ही शिव बाबा हर कल्प संगमयुग पर नई पढ़ाई शुरू कराते हैं।
(B) पालना – ज्ञान और योग की शक्ति से
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शिव बाबा मात-पिता बनकर बच्चों को पालते हैं।
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ज्ञान और योग की पालना से ही आत्मा पतित से पावन बनती है।
मुरली नोट (09-03-2020):
“हे कृष्ण की आत्मा, तुमने 84 जन्म लिए हैं। अभी तुम्हारा नाम ब्रह्मा रखा है। ब्रह्मा सो विष्णु बनेगा।”
उदाहरण: जैसे माँ अपने बच्चे को संस्कारों की पालना देती है, वैसे ही शिव बाबा हमें ज्ञान-योग से संस्कारी बनाते हैं।
(C) विनाश और उद्धार
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शिव बाबा का तीसरा कर्तव्य है – पुरानी दुनिया का विनाश और सब आत्माओं का उद्धार।
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वे सबका हिसाब-किताब चुक्तु कराते हैं और शान्तिधाम ले जाते हैं।
मुरली नोट (20-08-2025):
“सबका हिसाब-किताब चुक्तु कराए, तुमको पतित से पावन बनाकर ले जाता हूँ।”
उदाहरण: जैसे डॉक्टर पुरानी बीमारी खत्म करके नई जिंदगी देता है, वैसे ही शिव बाबा पुरानी दुखी दुनिया का अंत कर नई सुखी दुनिया स्थापित करते हैं।
4. निष्कर्ष – असली रहस्य
त्रिमूर्ति का आधार है – शिव।
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ब्रह्मा = स्थापना का माध्यम।
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विष्णु = राज्य का परिणाम।
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शंकर = विनाश का संकल्प।
अंतिम उदाहरण:
जैसे एक घर बनाने में –
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इंजीनियर (शिव) प्लान बनाता है,
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कॉन्ट्रैक्टर (ब्रह्मा) निर्माण करता है,
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मालिक (विष्णु) उसमें सुखपूर्वक रहता है।
ठीक वैसे ही शिव बाबा तीनों कार्य कराते हैं – स्थापना, पालना और विनाश।
Q&A Format (Speech Style)
Q1: लोग क्यों कहते हैं “त्रिमूर्ति ब्रह्मा भगवानुवाच”?
A: क्योंकि ग़लतफ़हमी हुई।
असल में भगवान शिव ने ही गीता सुनाई है।
मुरली (20-08-2025): “बाप कहते हैं – त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच।”
Q2: असली त्रिमूर्ति कौन-कौन से हैं?
A: शिव (सर्वोच्च बिंदु), ब्रह्मा (माध्यम), विष्णु (फल), शंकर (विनाश का संकल्प)।
शिव = Director, ब्रह्मा = Contractor, विष्णु = Result (Heaven), शंकर = Transformation।
Q3: शिव बाबा के तीन कर्तव्य क्या हैं?
(A) स्थापना
A: नई सतोप्रधान सृष्टि की स्थापना ब्रह्मा के माध्यम से।
मुरली (20-08-2025): “प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा मैं स्थापना कराता हूँ।”
उदाहरण: स्कूल का प्रिंसिपल नया सेशन शुरू कराता है।
(B) पालना
A: बच्चों को ज्ञान और योग की पालना देना।
मुरली (09-03-2020): “हे कृष्ण की आत्मा, तुमने 84 जन्म लिए हैं… ब्रह्मा सो विष्णु बनेगा।”
उदाहरण: जैसे माँ अपने बच्चे को संस्कार देती है।
(C) विनाश
A: पुरानी दुनिया का नाश और आत्माओं का उद्धार।
मुरली (20-08-2025): “सबका हिसाब-किताब चुक्तु कराए और पावन बनाकर ले जाता हूँ।”
उदाहरण: डॉक्टर बीमारी मिटाकर नई जिंदगी देता है।
Disclaimer
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आधिकारिक शिक्षाओं पर आधारित है।
इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मिक उत्थान है।
यह किसी भी धर्म, पंथ या परंपरा की आलोचना नहीं करता।
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