“गीता का भगवान कौन है? आज हम इसका 64वां विषय कर रहे हैं। क्या भगवान श्री कृष्ण हैं? या ज्योति बिंदु शिव? गीता का रहस्य उजागर क्या निकलता है गीता का रहस्य? भगवान का स्वरूप – व्यक्त या अव्यक्त परमात्मा का स्वरूप पहला प्रश्न है: वह व्यक्त होगा या अव्यक्त होगा? व्यक्त और अव्यक्त में कोई अंतर होता है क्या? व्यक्त = साकारी, शरीरधारी। अव्यक्त = निराकारी, अशरीरी। व्यक्त = शरीर वाला। अव्यक्त = बिना शरीर का। अमर – जो मरता नहीं। हम बचपन से सुनते आए हैं कि गीता भगवान के मुखारविंद से निकली हुई वाणी है। परंतु प्रश्न यह है कि गीता के भगवान कौन थे? क्या वे मोर मुकुट धारी, पीताम्बर धारी, बांसुरी वाले श्रीकृष्ण थे? या फिर अणु से भी सूक्ष्म, ज्योति बिंदु रूप शिव परमात्मा? गीता कहती है – भगवान अव्यक्त मूरत हैं। परंतु श्रीकृष्ण तो व्यक्त, शरीरधारी थे। तो गीता किसके द्वारा कही गई थी? गीता में भगवान के स्वरूप का वर्णन कुछ महत्वपूर्ण श्लोक हमें सीधा उत्तर देते हैं। अध्याय 7, श्लोक 24 “अव्यक्तं व्यक्तिमापनं मन्यते मामबुद्धयः।” भावार्थ: जो मुझे शरीरधारी व्यक्त रूप में समझते हैं, वे अविवेकी हैं। अर्थात् – परमात्मा कहते हैं कि मैं देहधारी नहीं हूँ। अध्याय 7, श्लोक 25 “नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः।” भावार्थ: मैं सबको अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट नहीं होता। योगमाया से आच्छादित होने के कारण अज्ञानी लोग मुझे अजन्मा और अविनाशी नहीं पहचानते। स्पष्ट है – परमात्मा अजन्मा है। शरीरधारी श्रीकृष्ण का तो जन्म है। इसलिए गीता का गायक कोई और है – अव्यक्त शिव परमात्मा। अध्याय 8, श्लोक 10 “प्रयाण काले मनसाचलेन भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव। भ्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्यक स तं परम पुरुषं उपैति दिव्यम्॥” भावार्थ: साधक जो अंत समय में अचल मन और योगबल से, भ्रूमध्य में प्राण स्थिर कर, परम पुरुष दिव्य ज्योति स्वरूप परमात्मा को याद करता है, वह उसे प्राप्त होता है। अर्थात् – परम पुरुष दिव्य = निराकार, ज्योति स्वरूप परमात्मा। निष्कर्ष उदाहरण से बल्ब में प्रकाश तो है, परंतु बल्ब प्रकाश नहीं है। उसी प्रकार श्रीकृष्ण का शरीर एक माध्यम था। गीता का ज्ञान देने वाला ज्योति बिंदु शिव परमात्मा थे। मुरली प्रमाण साकार मुरली – 14 जुलाई 1965 “बच्चे, भगवान का स्वरूप है ज्योति बिंदु। कृष्ण तो एक राजकुमार था।” अव्यक्त मुरली – 18 जनवरी 1970 “गीता का भगवान शिव है, जो अव्यक्त रूप में ज्ञान सुनाते हैं। कृष्ण को गायक मानने से महिमा में कमी आ गई।” ✅ अंतिम निष्कर्ष गीता का भगवान है – अव्यक्त, अजन्मा, ज्योति बिंदु शिव परमात्मा। श्रीकृष्ण स्वर्ग के पहले राजकुमार हैं, परंतु परमात्मा नहीं।
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