क्या भारत वास्तव में स्वतंत्र हुआ है?(01)
“क्या भारत वास्तव में स्वतंत्र हुआ है? | सच्ची आज़ादी का आध्यात्मिक रहस्य”
1. प्रस्तावना
क्या भारत वास्तव में स्वतंत्र हुआ है?
यह प्रश्न सुनकर हर कोई चौंकता है।
लोग कहेंगे – “आप कैसी बातें कर रहे हैं? भारत तो 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो गया।”
हाँ, कानूनी और राजनीतिक स्वतंत्रता तो हमें मिल गई, परंतु क्या हम आत्मिक और वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त कर पाए हैं?
2. कानूनी स्वतंत्रता बनाम वास्तविक स्वतंत्रता
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15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से राजनीतिक स्वतंत्रता मिली।
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26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू हुआ।
लेकिन प्रश्न यह है –
क्या इस स्वतंत्रता ने हमें दुख, भय, क्रोध, लोभ और विकारों से मुक्त किया?
क्या हम वास्तव में आत्मिक दृष्टि से स्वतंत्र हुए हैं?
3. सच्ची स्वतंत्रता का आध्यात्मिक अर्थ
ब्रह्माकुमारी मुरली में शिवबाबा कहते हैं –
“जब तक पाँच विकारों की गुलामी है, तब तक तुम स्वतंत्र नहीं।”
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हम क्रोध, लोभ, वासना, अहंकार और अज्ञान के बंधन में बंधे हुए हैं।
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यह गुलामी हमें बार-बार दुख और अशांति की ओर खींच ले जाती है।
4. विकारों की गुलामी
क्रोध की गुलामी
हम कहते हैं – “मैं गुस्सा नहीं करना चाहता था, पर आ गया।”
इसका अर्थ है कि हम अपने मन के मालिक नहीं हैं।
लोभ की गुलामी
जितना लोभ बढ़ता है, उतना असंतोष बढ़ता जाता है।
वासना की गुलामी
अपवित्रता और अशुद्धता बढ़ती जा रही है।
अहंकार की गुलामी
“मैं” और “मेरा” हमें बाँधते रहते हैं।
अज्ञान की गुलामी
मृत्यु का भय, हानि का डर, भविष्य की चिंता – ये सब हमें कैद कर देते हैं।
5. केले के पत्ते का रहस्य (उदाहरण)
जैसे केले के पत्ते के अंदर कई परतें छिपी होती हैं, वैसे ही स्वतंत्रता के पीछे भी कई परतें छिपी हैं।
क्या हम दुखों से स्वतंत्र हैं?
क्या हम अशांति से मुक्त हैं?
क्या आत्मा विकारों से आज़ाद हुई है?
6. मुरली का दृष्टिकोण
अव्यक्त मुरली 15 अगस्त 2021 में बाबा कहते हैं –
“बच्चे, यह मुक्ति और जीवन-मुक्ति का समय है।”
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मुक्ति = विकारों से आज़ादी
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जीवन-मुक्ति = स्वर्गीय जीवन की स्वतंत्रता
7. निष्कर्ष – सच्ची स्वतंत्रता कहाँ मिलेगी?
1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिली, परंतु सच्ची और पूर्ण स्वतंत्रता अब परमात्मा शिव के ज्ञान और योग से मिल रही है।
स्वतंत्रता = स्व (आत्मा) का तंत्र
जब आत्मा स्वयं पर शासन करना सीखती है – मन, बुद्धि और संस्कार को परमात्मा की श्रीमत पर चलाती है – तभी सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
“गीता का भगवान कौन है? | सच्चे गीता ज्ञान का रहस्य”
प्रश्नोत्तर (Q&A शैली)
प्रश्न 1: गीता का भगवान कौन है?
उत्तर: गीता में स्वयं भगवान शिव बोलते हैं। श्रीकृष्ण का नाम बाद में जोड़ा गया, लेकिन गीता ज्ञान का वास्तविक दाता निराकार परमपिता परमात्मा शिव है।
प्रश्न 2: गीता का असली उद्देश्य क्या है?
उत्तर: गीता का उद्देश्य है आत्मा को अपने स्वरूप का बोध कराना, मोह-माया से मुक्त करना और परमात्मा से योग जोड़ना।
प्रश्न 3: श्रीकृष्ण का नाम गीता में क्यों आया?
उत्तर: द्वापर से कलियुग में भक्ति काल की शुरुआत हुई। यादगार के रूप में श्रीकृष्ण को गीता का भगवान मान लिया गया। परंतु असली गीता ज्ञान संगमयुग पर शिवबाबा द्वारा दिया जाता है।
प्रश्न 4: गीता में अर्जुन किसका प्रतीक है?
उत्तर: अर्जुन हर आत्मा का प्रतीक है जो मोह-माया में फंसी है। भगवान उसे सत्यज्ञान देकर मोह से नष्टोमोहन बनाते हैं।
प्रश्न 5: असली गीता ज्ञान से हमें क्या मिलता है?
उत्तर: असली गीता ज्ञान से आत्मा को शांति, सुख और परमात्मा का सच्चा परिचय मिलता है। यही ज्ञान आत्मा को विश्व-नायक और देवता स्वरूप बनाने की शक्ति देता है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो/लेख केवल आध्यात्मिक शिक्षा और आत्मिक जागृति के उद्देश्य से बनाया गया है। इसमें प्रस्तुत सभी विचार, उदाहरण और व्याख्याएँ ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं एवं शास्त्रों पर आधारित हैं। इसका किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, संस्था या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का उद्देश्य नहीं है। दर्शक/पाठक अपने विवेक से इसका अध्ययन करें।
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