(96)गीता जयन्ती ही हीरे तुल्य क्यों? असली भगवान कौन?
“गीता का असली भगवान कौन है? | गीता जयंती हीरे तुल्य क्यों?”
1. प्रारंभ
ओम शांति।
आज हम समझेंगे — गीता का भगवान कौन है और गीता जयंती को हीरे तुल्य क्यों कहा गया है।
2. गीता जयंती का महत्व
गीता जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं,
बल्कि यह वह दिन है जब मानव जीवन का सर्वोच्च सत्य उद्घाटित हुआ।
3. श्रीकृष्ण और गीता ज्ञान
श्रीमद् भागवत के अनुसार,
श्रीकृष्ण का जन्म और गीता ज्ञान का समय अलग-अलग था।
लेकिन गीता रहस्य बताता है कि भगवान का दिव्य जन्म और गीता का अवतरण — एक साथ हुआ।
4. भगवान का दिव्य जन्म
भगवान शिव परमधाम से अवतरित होकर
प्रजापिता ब्रह्मा की काया में प्रवेश करते हैं।
यही उनका अलौकिक जन्म है।
इस जन्म के साथ ही गीता का ज्ञान आरंभ होता है।
5. गीता जयंती और शिवरात्रि
लौकिक जन्म लेने वाले श्रीकृष्ण नहीं,
बल्कि निराकार शिव ही गीता के भगवान हैं।
इसीलिए कहा जाता है —
“शिवरात्रि ही गीता जयंती है, और गीता जयंती ही शिवरात्रि।”
6. गीता का असली उद्देश्य
गीता का उद्देश्य कौरव-पांडव का युद्ध नहीं है।
बल्कि आत्मा को पतित से पावन बनाकर देव पद तक पहुँचाना है।
भारत को कोड़ी तुल्य से हीरे तुल्य बनाना है।
7. उदाहरण
जैसे दीपक जलते ही प्रकाश फैलता है,
वैसे ही भगवान के दिव्य अवतरण से ज्ञान का प्रकाश फैलता है।
जैसे कोयला विशेष प्रक्रिया से हीरा बनता है,
वैसे ही योग अग्नि आत्मा को पवित्र बनाती है।
8. निष्कर्ष
बाकी सभी जयंतियां कोड़ी तुल्य हैं,
लेकिन गीता जयंती हीरे तुल्य है।
क्योंकि इसी दिन भगवान अवतरित होकर
आत्माओं को सत्य ज्ञान देते हैं और नर्क को स्वर्ग में बदलने का कार्य शुरू होता है।
“गीता का भगवान कौन है? | गीता जयंती प्रश्नोत्तर”
Questions and Answers
Q1. गीता का भगवान कौन है?
Ans: गीता का भगवान निराकार शिव परमात्मा हैं, न कि श्रीकृष्ण। श्रीकृष्ण का जन्म लौकिक है, जबकि गीता का ज्ञान शिव बाबा ब्रह्मा के माध्यम से देते हैं।
Q2. गीता जयंती हीरे तुल्य क्यों कहलाती है?
Ans: क्योंकि इसी दिन परमात्मा अवतरित होकर आत्माओं को सत्य ज्ञान देते हैं और पतित से पावन बनाने का कार्य शुरू करते हैं। यह दिन स्वर्ग स्थापना का प्रारंभ है।
Q3. गीता का असली उद्देश्य क्या है?
Ans: गीता का उद्देश्य कौरव-पांडव का युद्ध नहीं है, बल्कि आत्मा को शुद्ध बनाकर देव पद तक उठाना है और भारत को कोड़ी तुल्य से हीरे तुल्य बनाना है।
Q4. भगवान का दिव्य जन्म किस प्रकार हुआ?
Ans: भगवान शिव परमधाम से अवतरित होकर प्रजापिता ब्रह्मा की काया में प्रवेश करते हैं। यही उनका अलौकिक जन्म है।
Q5. गीता जयंती और शिवरात्रि का क्या संबंध है?
Ans: शिवरात्रि और गीता जयंती दोनों एक ही हैं। शिवरात्रि वह दिन है जब शिव परमात्मा अवतरित होकर गीता का ज्ञान सुनाते हैं।
Q6. योग अग्नि आत्मा को कैसे पवित्र बनाती है?
Ans: जैसे कोयला विशेष प्रक्रिया से हीरा बनता है, वैसे ही राजयोग की अग्नि आत्मा को विकारों से मुक्त कर पवित्र और दिव्य बनाती है।
Disclaimer
यह वीडियो केवल आध्यात्मिक शिक्षा और ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, मत, संप्रदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।
कृपया इस ज्ञान को समझने और आत्म-विकास के दृष्टिकोण से ही ग्रहण करें।
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