(30)“माया को दोषी बनाने के बजाए मास्टर रचता, शक्तिशाली बनो”
“मास्टर रचयिता की सीट पर स्थित रहो | बाप समान योगी आत्मा |Avyakt Murli 17 Jan 1982”
अध्याय 1: मास्टर रचयिता की स्टेज
बापदादा ने कहा – ज्ञानी और योगी तो सभी अपने को कहते हैं,
लेकिन बाप समान ज्ञानी और योगी वही हैं जो हमेशा मास्टर रचयिता की पोज़ीशन पर स्थित रहते हैं।
जब आत्मा इस सीट पर स्थित होती है, तो उसके शुद्ध संकल्प से वातावरण बदल जाता है।
उदाहरण: जैसे कोई राजा अपने आदेश से पूरा राज्य चला सकता है, वैसे ही मास्टर रचयिता आत्मा संकल्प से वातावरण और वायुमंडल बना सकती है।
Murli Note (17-01-1982):
“मास्टर रचता सेकेण्ड में अपने शुद्ध संकल्प रूपी आर्डर से जो वायुमण्डल बनाने चाहें वह बना सकते हैं।”
अध्याय 2: गिरने का कारण
कभी-कभी एक व्यर्थ संकल्प भी हमें इस सीट से नीचे खींच लेता है।
उसी सेकण्ड माया आकर कब्जा कर लेती है।
उदाहरण: जैसे राजा ने अपना सिंहासन खाली किया, तो दुश्मन आकर कब्जा कर लेते हैं।
Murli Note:
“आह्वान कौन करता माया को? स्वयं नीचे आ जाते, पोज़ीशन की सीट छोड़ देते, तो खाली स्थान को माया अपना बना लेती है।”
अध्याय 3: कुमारियों की विशेषता
बापदादा ने कुमारियों को कहा – कुमारी स्वतंत्र पंछी है, पिंजरे की मैना नहीं।
उनका जीवन ही फैसले का समय है।
अगर लक्ष्य पक्का है तो कोई भी हिला नहीं सकता।
Murli Note:
“कुमारी तो स्वतन्त्र पंछी है। इसी नशे में रहो – हम हैं बाप के तख्तनशीन। सतयुग का राज्य तख्त भी इस तख्त के आगे कुछ नहीं है।”
अध्याय 4: अधरकुमार और गृहस्थ जीवन
अधरकुमारों को बापदादा ने कहा – तुम्हें भक्ति की मेहनत और गृहस्थी की मेहनत से छुड़ा दिया है।
अब तुम हो जीवनमुक्त आत्मा, जो सदा खुशी में नाचते और गीत गाते रहो।
Murli Note:
“जीवनमुक्त आत्मायें सदा खुशी में नाचते रहो, गीत गाओ और हल्के होकर उड़ो।”
अध्याय 5: रूहानी गुलाब बनो
बापदादा ने बच्चों को रूहानी गुलाब कहा –
गुलाब अपनी खुशबू और सुंदरता से सबको आकर्षित करता है।
वैसे ही बाप के बच्चे अपनी रूहानी खुशबू फैलाने वाले हैं।
Murli Note:
“सदा यह स्मृति में रहे कि हम अल्लाह के बगीचे के रूहानी गुलाब हैं।”
अध्याय 6: पाण्डवों की विजय स्मृति
पाण्डव पाँच होते भी सदा विजयी थे, क्योंकि बाप साथी था।
यही स्मृति हमें भी विजयी रत्न बनाती है।
उदाहरण: जैसे युद्ध में सैनिक को अपने सेनापति की उपस्थिति आत्मविश्वास देती है, वैसे ही बाप की स्मृति हमें हर स्थिति में विजयी बनाती है।
Murli Note:
“जैसे बाप सदा विजयी है वैसे बाप का बनने वाले भी सदा विजयी।”
अध्याय 7: रिफ्रेश होने का स्थान
बापदादा ने कहा – यज्ञस्थल पर आना ही रिफ्रेश होना है।
चाहे थोड़ी देर के लिए भी आएं, आत्मा हल्की और कमल समान हो जाती है।
Murli Note:
“यह स्थान ही रिफ्रेश होने का है। यहाँ आना ही रिफ्रेश होना है।”
“मास्टर रचयिता की सीट पर कैसे स्थित रहें? | प्रश्नोत्तर अव्यक्त मुरली से (17 जनवरी 1982)”
प्रश्न 1: बापदादा ने मास्टर रचयिता किसे कहा है?
उत्तर: जो आत्माएँ सदा बाप समान ज्ञानी और योगी बनकर अपने संकल्प की शक्ति से वातावरण को बदल सकती हैं, उन्हें बापदादा ने मास्टर रचयिता कहा है।
प्रश्न 2: मास्टर रचयिता आत्मा की शक्ति क्या होती है?
उत्तर: ऐसी आत्मा शुद्ध संकल्प से वातावरण बना सकती है, जैसा वायुमंडल चाहें वैसा बना सकती है और जिसकी कमी है उसे प्राप्ति करवा सकती है।
Murli Note (17-01-1982):
“मास्टर रचता सेकेण्ड में अपने शुद्ध संकल्प रूपी आर्डर से जो वायुमण्डल बनाने चाहें वह बना सकते हैं।”
प्रश्न 3: आत्मा कब इस सीट से नीचे गिरती है?
उत्तर: जब आत्मा व्यर्थ संकल्प में फँस जाती है तो तुरंत अपनी सीट से नीचे आ जाती है और उसी क्षण माया आकर कब्जा कर लेती है।
प्रश्न 4: कुमारियों के लिए बापदादा ने क्या विशेष कहा?
उत्तर: कुमारियों को स्वतंत्र पंछी कहा गया, पिंजरे की मैना नहीं। उनका जीवन फैसले का समय है, और यदि लक्ष्य पक्का है तो कोई उन्हें हिला नहीं सकता।
प्रश्न 5: अधरकुमारों के लिए क्या संदेश था?
उत्तर: अधरकुमारों को बापदादा ने कहा कि वे भक्ति और गृहस्थ की मेहनत से मुक्त हो गए हैं। अब वे जीवनमुक्त आत्मा हैं जिन्हें सदा खुशी में गीत गाना और नाचते रहना है।
प्रश्न 6: रूहानी गुलाब बनने का क्या अर्थ है?
उत्तर: रूहानी गुलाब वह आत्मा है जो अपने गुणों और खुशबू से सबको आकर्षित करती है, जैसे गुलाब पूजा में अर्पित होता है, वैसे ही आत्मा भी बाप के यज्ञ में अर्पित हो जाती है।
प्रश्न 7: पाण्डवों की विजय हमें क्या सिखाती है?
उत्तर: पाण्डव पाँच होते भी विजयी थे क्योंकि बाप उनका साथी था। इसी तरह जो आत्माएँ बाप को अपना साथी मानती हैं, वे सदा विजयी रहती हैं।
प्रश्न 8: यज्ञस्थल पर आने का क्या लाभ है?
उत्तर: यज्ञस्थल पर आना ही रिफ्रेश होना है। चाहे थोड़ी देर के लिए भी आत्मा आए, तो हल्की और कमल समान हो जाती है।
Disclaimer
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज संस्था की आधिकारिक शिक्षा का विकल्प नहीं है।
यह केवल अध्यात्मिक अध्ययन, प्रेरणा और व्यक्तिगत मनन के उद्देश्य से बनाया गया है।
कृपया इसे Shrimat के रूप में न लें, बल्कि ज्ञान-मनन की दृष्टि से ग्रहण करें।
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