साक्षात्कार मूर्त कैसे बने?-(10)पहचान की आंख हमारी क्यों नहीं खुली? बाबा की मुरली से सच्चा रहस्य।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय: पहचान की आंख क्यों नहीं खुली और इसे खोलने का मार्ग
1. परिचय – आज का दसवां विषय
आज हम दसवां विषय कर रहे हैं – पहचान की आंख क्यों अभी नहीं खुली।
-
पहचान खुलना अर्थात पहचान होना, पहचान करना, यही सच्चा अनुभव है।
-
पहचान खुलने से ही आत्मा को साक्षात्कार मिलता है।
मुख्य प्रश्न:
-
अभी हमारी पहचान क्यों नहीं खुली?
-
इसे खोलने का मार्ग क्या है?
2. अभी पहचान क्यों नहीं खुली?
अव्यक्त मुरली 24 जनवरी 1973:
“वर्तमान में बहुत सी आत्माएं दूसरों की लाइन में खड़ी हैं। इसलिए वे स्वयं की पहचान नहीं कर पाई।”
-
जब हम दूसरों की तुलना करते हैं, तब आत्मा की असली शक्ति छुप जाती है।
-
हम बाबा को नहीं देखते, बल्कि दादियों, दीदियों और भाई-बहनों को देखते रहते हैं।
-
यह है दूसरों की लाइन में लगना।
उदाहरण:
-
बच्चे खेल में भाग लेते हैं और केवल दूसरों की चाल देखते हैं।
-
परिणाम: ना खेल का नियम समझ पाते हैं, ना अपनी स्थिति।
3. पहचान खुलने के लिए क्या चाहिए?
-
बाबा की पहचान होना अनिवार्य है।
-
साक्षात्कार और अनुभव लेना जरूरी है।
-
बाजार में साक्षात्कार नहीं मिलता; साक्षात्कार की चाबी बाबा के पास है।
अनुभव लेने का तरीका:
-
बाबा की याद में रहना।
-
जितना बाबा का ज्ञान समझ में आता है, उतना साक्षात्कार होता है।
-
जितना ध्यान और अटेंशन देंगे, उतना अनुभवी बनेंगे।
बाबा का संकेत:
“चाबी मेरे पास नहीं है।”
-
वास्तव में चाबी हमारे पास है।
-
मेहनत के अनुसार अनुभव और साक्षात्कार मिलेगा।
4. साक्षात्कार और अनुभव का महत्व
-
बाबा ने सभी खजाने मुरली में दे दिए हैं।
-
अब हमें उन्हें पढ़ना, समझना और जीवन में धारण करना है।
-
जब आत्मा समझ ले कि वह साक्षात बाप के साथ त्रिमूर्ति स्मृति में स्थाई है, तभी पहचान खुलती है।
त्रिमूर्ति स्मृति:
-
मैं आत्मा हूँ।
-
शिव बाबा और ब्रह्मा बाबा मेरे साथ हैं।
-
केवल उनकी श्रीमत के अनुसार देखना, सुनना, बोलना, करना।
उदाहरण:
-
जैसे परीक्षा में स्वयं हल करने से ही ज्ञान का अनुभव होता है।
-
दूसरों की नकल करने से केवल परिणाम मिलता है, अनुभव नहीं।
5. सहज योगी क्यों बनें?
-
सहज योगी बिना संघर्ष के स्थाई अनुभव करता है।
-
अपने अंदर की शक्ति को महसूस करता है।
-
पहचान धीरे-धीरे खुलती है।
उदाहरण:
-
जैसे नदी का पानी हमेशा बहता रहता है, उसी तरह आत्मा की ऊर्जा सहज रूप में बहती रहे।
-
पहचान स्वतः जागृत होती है।
6. निष्कर्ष
-
अभी पहचान की आंख इसलिए नहीं खुली कि हम दूसरों की लाइन में खड़े हैं।
-
हमें ब्रह्मा बाबा को फॉलो करना है।
-
त्रिमूर्ति स्मृति – शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा और आत्मा – रखनी है।
-
यही मार्ग है साक्षात्कार मूरत बनने का।
-
पहचान की आंख क्यों नहीं खुली और इसे खोलने का मार्ग
प्रश्न 1: आज का दसवां विषय क्या है?
उत्तर:
आज हम दसवां विषय कर रहे हैं – पहचान की आंख क्यों अभी नहीं खुली।-
पहचान खुलना अर्थात पहचान होना और पहचान करना।
-
पहचान खुलने से ही आत्मा को साक्षात्कार मिलता है।
-
मुख्य प्रश्न:
-
अभी हमारी पहचान क्यों नहीं खुली?
-
इसे खोलने का मार्ग क्या है?
-
प्रश्न 2: अभी पहचान क्यों नहीं खुली?
उत्तर:
-
अव्यक्त मुरली 24 जनवरी 1973 के अनुसार:
“वर्तमान में बहुत सी आत्माएं दूसरों की लाइन में खड़ी हैं। इसलिए वे स्वयं की पहचान नहीं कर पाई।”
-
जब हम दूसरों की तुलना करते हैं, तब आत्मा की असली शक्ति छुप जाती है।
-
हम बाबा को नहीं देखते, बल्कि दादियों, दीदियों और भाई-बहनों को देखते रहते हैं।
-
यह है दूसरों की लाइन में लगना।
उदाहरण:
-
बच्चे खेल में भाग लेते हैं और केवल दूसरों की चाल देखते हैं।
-
परिणाम: ना खेल का नियम समझ पाते हैं, ना अपनी स्थिति।
प्रश्न 3: पहचान खुलने के लिए क्या चाहिए?
उत्तर:
-
बाबा की पहचान होना अनिवार्य है।
-
साक्षात्कार और अनुभव लेना जरूरी है।
-
बाजार में साक्षात्कार नहीं मिलता; साक्षात्कार की चाबी बाबा के पास है।
अनुभव लेने का तरीका:
-
बाबा की याद में रहना।
-
जितना बाबा का ज्ञान समझ में आता है, उतना साक्षात्कार होता है।
-
जितना ध्यान और अटेंशन देंगे, उतना अनुभवी बनेंगे।
बाबा का संकेत:
“चाबी मेरे पास नहीं है।”
वास्तव में, चाबी हमारे पास है। मेहनत के अनुसार अनुभव और साक्षात्कार मिलेगा।
प्रश्न 4: साक्षात्कार और अनुभव का महत्व क्या है?
उत्तर:
-
बाबा ने सभी खजाने मुरली में दे दिए हैं।
-
हमें उन्हें पढ़ना, समझना और जीवन में धारण करना है।
-
जब आत्मा समझ ले कि वह साक्षात बाप के साथ त्रिमूर्ति स्मृति में स्थाई है, तभी पहचान खुलती है।
त्रिमूर्ति स्मृति:
-
मैं आत्मा हूँ।
-
शिव बाबा और ब्रह्मा बाबा मेरे साथ हैं।
-
केवल उनकी श्रीमत के अनुसार देखना, सुनना, बोलना, करना।
उदाहरण:
-
जैसे परीक्षा में स्वयं हल करने से ही ज्ञान का अनुभव होता है।
-
दूसरों की नकल करने से केवल परिणाम मिलता है, अनुभव नहीं।
प्रश्न 5: सहज योगी क्यों बनें?
उत्तर:
-
सहज योगी बिना संघर्ष के स्थाई अनुभव करता है।
-
अपने अंदर की शक्ति को महसूस करता है।
-
पहचान धीरे-धीरे खुलती है।
उदाहरण:
-
जैसे नदी का पानी हमेशा बहता रहता है, उसी तरह आत्मा की ऊर्जा सहज रूप में बहती रहे।
-
पहचान स्वतः जागृत होती है।
प्रश्न 6: निष्कर्ष क्या है?
उत्तर:
-
अभी पहचान की आंख इसलिए नहीं खुली कि हम दूसरों की लाइन में खड़े हैं।
-
हमें ब्रह्मा बाबा को फॉलो करना है।
-
त्रिमूर्ति स्मृति – शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा और आत्मा – रखनी है।
-
यही मार्ग है साक्षात्कार मूरत बनने का।
-
Disclaimer:
यह वीडियो ब्रह्मा कुमारी मुरली और आध्यात्मिक शिक्षाओं पर आधारित है। उद्देश्य केवल रूहानी ज्ञान साझा करना है। व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव और अभ्यास अलग-अलग हो सकते हैं।

