Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below
अध्याय : सच्चे परवाने और दीपावली का सच्चा रहस्य
मुरली तिथि : 2 अक्टूबर 2025 (साकार मुरली)
1. भूमिका – दीपावली का असली अर्थ
मीठे बच्चे, तुम सच्चे-सच्चे परवाने हो, जो अभी शमा (सुप्रीम ज्योति) पर फिदा होते हो।
इस फिदा होने का ही यादगार है दीपावली।
जैसे दीप जलाकर लोग अंधियारे को मिटाते हैं, वैसे ही परमात्मा आकर आत्माओं की बुझी हुई ज्योति को जगाते हैं।
उदाहरण – जिस प्रकार अंधकारमय कमरे में दीपक जलते ही प्रकाश फैल जाता है, वैसे ही बाबा की याद आत्मा की बुझी लौ को पुनः प्रज्वलित कर देती है।
2. प्रश्न और उत्तर
प्रश्न – बाबा ने अपने बच्चों को कौन-सा समाचार सुनाया है?
उत्तर –
बाबा ने बताया –
-
आत्माएँ निर्वाणधाम से कैसे आती हैं।
-
मैं (शिवबाबा) कैसे आता हूँ।
-
मेरा कार्य क्या है – रामराज्य की स्थापना और रावण पर विजय।
-
तुम बच्चे अब सब कुछ जानते हो और तुम्हारी ज्योति जगी हुई है।
3. दशहरा और दीपावली का सच्चा रहस्य
-
हद का दशहरा – लोग रावण की मूर्ति जलाते हैं।
-
बेहद का दशहरा – आत्मा के भीतर से रावण रूपी पाँच विकारों का दहन।
-
हद की दीपावली – घर-घर दीपक जलाना, लक्ष्मी-पूजन।
-
बेहद की दीपावली – हर आत्मा की ज्योति जागृत होना, रामराज्य की ताजपोशी होना।
उदाहरण – जैसे किसी राजा का राजतिलक होता है तो दीपमाला सजाई जाती है, वैसे ही सतयुग में लक्ष्मी-नारायण की ताजपोशी के यादगार स्वरूप में दीपावली मनाई जाती है।
4. आशिक और माशूक का अलौकिक रहस्य
-
भक्ति मार्ग में आशिक-माशूक का खेल शारीरिक प्रेम है।
-
ज्ञान मार्ग में आत्मा आशिक है और परमात्मा माशूक है।
-
बच्चे कहते हैं – “हम सिर्फ तुम पर बलि चढ़ेंगे।”
-
यही सच्ची दीपावली है – जब आत्मा एक परमात्मा पर ही फिदा हो जाती है।
5. भारत की महिमा और शिवबाबा का कार्य
-
भारत ही वह भूमि है जहाँ शिवबाबा अवतरित होते हैं।
-
उनका जन्मदिन है – शिवजयंती।
-
वही परमात्मा आकर भारत को स्वर्ग बनाते हैं।
-
परंतु अज्ञान के कारण लोग शिवजयंती का महत्व नहीं समझते।
उदाहरण – दूसरे महापुरुषों की जन्मतिथियाँ मनाई जाती हैं, उनकी स्टैम्प भी बनती हैं, परन्तु शिवबाबा का जन्मदिवस कोई जानता ही नहीं।
6. बच्चों की पहचान – स्वदर्शन चक्रधारी
-
ब्राह्मण ही स्वदर्शन चक्रधारी बनते हैं।
-
आत्मा अपने तीन कालों को जानती है।
-
यही योगबल आत्मा को चक्रवर्ती सम्राट बनाता है।
7. धारणा के मुख्य सार
-
रूप-बसन्त बनना – मुख से सदा ज्ञान रत्न ही निकालना, सेवा में उमंग रखना।
-
सच्चा आशिक बनना – एक परमात्मा पर ही फिदा होना। यही सच्ची दीपावली है।
8. वरदान
विश्व महाराजन की पदवी प्राप्त करने वाले सर्वशक्तियों के स्टॉक से सम्पन्न भव।
– जो आत्माएँ विश्व महाराजन बनने वाली हैं, उनके पास पहले से ही शक्तियों का स्टॉक भरा होता है। उनका हर सेकंड, हर संकल्प विश्व कल्याण में सफल होता रहता है।
9. स्लोगन
एक भी कमजोरी अनेक विशेषताओं को समाप्त कर देती है। इसलिए कमजोरियों को तलाक दो।
10. अव्यक्त इशारा
लाइट हाउस और माइट हाउस बनकर मन्सा सेवा करो।
श्रेष्ठ संकल्पों द्वारा अनेकों आत्माओं की सेवा करना ही सच्चा आध्यात्मिक दीप जलाना है।
प्रश्न – बाबा ने अपने बच्चों को कौन-सा समाचार सुनाया है?
उत्तर –
बाबा ने बताया –
-
आत्माएँ निर्वाणधाम से कैसे आती हैं।
-
मैं (शिवबाबा) कैसे आता हूँ।
-
मेरा कार्य क्या है – रामराज्य की स्थापना और रावण पर विजय।
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तुम बच्चे अब सब कुछ जानते हो और तुम्हारी ज्योति जगी हुई है।
3. दशहरा और दीपावली का सच्चा रहस्य
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हद का दशहरा – लोग रावण की मूर्ति जलाते हैं।
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बेहद का दशहरा – आत्मा के भीतर से रावण रूपी पाँच विकारों का दहन।
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हद की दीपावली – घर-घर दीपक जलाना, लक्ष्मी-पूजन।
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बेहद की दीपावली – हर आत्मा की ज्योति जागृत होना, रामराज्य की ताजपोशी होना।
उदाहरण – जैसे किसी राजा का राजतिलक होता है तो दीपमाला सजाई जाती है, वैसे ही सतयुग में लक्ष्मी-नारायण की ताजपोशी के यादगार स्वरूप में दीपावली मनाई जाती है।
4. आशिक और माशूक का अलौकिक रहस्य
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भक्ति मार्ग में आशिक-माशूक का खेल शारीरिक प्रेम है।
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ज्ञान मार्ग में आत्मा आशिक है और परमात्मा माशूक है।
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बच्चे कहते हैं – “हम सिर्फ तुम पर बलि चढ़ेंगे।”
यही सच्ची दीपावली है – जब आत्मा एक परमात्मा पर ही फिदा हो जाती है।
5. भारत की महिमा और शिवबाबा का कार्य
-
भारत ही वह भूमि है जहाँ शिवबाबा अवतरित होते हैं।
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उनका जन्मदिन है – शिवजयंती।
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वही परमात्मा आकर भारत को स्वर्ग बनाते हैं।
उदाहरण – दूसरे महापुरुषों की जन्मतिथियाँ मनाई जाती हैं, उनकी स्टैम्प भी बनती हैं, परन्तु शिवबाबा का जन्मदिवस कोई जानता ही नहीं।
6. बच्चों की पहचान – स्वदर्शन चक्रधारी
-
ब्राह्मण ही स्वदर्शन चक्रधारी बनते हैं।
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आत्मा अपने तीन कालों को जानती है।
-
यही योगबल आत्मा को चक्रवर्ती सम्राट बनाता है।
7. धारणा के मुख्य सार
-
रूप-बसन्त बनना – मुख से सदा ज्ञान रत्न ही निकालना, सेवा में उमंग रखना।
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सच्चा आशिक बनना – एक परमात्मा पर ही फिदा होना। यही सच्ची दीपावली है।
8. वरदान
विश्व महाराजन की पदवी प्राप्त करने वाले सर्वशक्तियों के स्टॉक से सम्पन्न भव।
जो आत्माएँ विश्व महाराजन बनने वाली हैं, उनके पास पहले से ही शक्तियों का स्टॉक भरा होता है। उनका हर सेकंड, हर संकल्प विश्व कल्याण में सफल होता रहता है।
9. स्लोगन
एक भी कमजोरी अनेक विशेषताओं को समाप्त कर देती है। इसलिए कमजोरियों को तलाक दो।
10. अव्यक्त इशारा
लाइट हाउस और माइट हाउस बनकर मन्सा सेवा करो।
श्रेष्ठ संकल्पों द्वारा अनेकों आत्माओं की सेवा करना ही सच्चा आध्यात्मिक दीप जलाना है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज की दैनिक मुरली पर आधारित आध्यात्मिक अध्ययन और मनन के उद्देश्य से बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मा को परमात्मा की सच्चाई और जीवन में आध्यात्मिक मूल्य अपनाने की प्रेरणा देना है।
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