AAT.(11)मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का रहस्य।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
आत्मा का रहस्य
हम अध्ययन कर रहे हैं—
मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का रहस्य।
कि आत्मा कैसी यात्रा करती है—
इन बातों को हम समझने का प्रयास करेंगे।
आत्मा शरीर से निकलने के बाद कहां जाती है?
आत्मा शरीर से निकलने के बाद कहां जाती है?
आत्मा शरीर से निकलने के बाद क्या करती है?
हमारे जीवन का यही अटल सत्य है—
जो जन्मा है वह मृत्यु को प्राप्त होगा।
जब शरीर समाप्त होता है तो आत्मा उसे छोड़ अपनी अगली यात्रा पर निकल पड़ती है।
मुरली में परमपिता परमात्मा बार-बार स्मरण कराते हैं—
स्वयं को आत्मा समझो, शरीर नहीं।
क्योंकि यह पहचान आत्मा को मृत्यु के भय से मुक्त करती है।
“मैं आत्मा हूं… इस देश से न्यारी हूं।”
यह अबला को सबला बना देता है।
1. आत्मा के शरीर छोड़ने की प्रक्रिया क्या है?
जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो अपनी गति अपने पुरुषार्थ और कर्मों के अनुसार पाती है।
अंतिम क्षणों की तैयारी में कई बार आत्मा को यह संकेत मिल जाता है कि अब उसका समय पूरा होने वाला है।
वो धीरे-धीरे संसार की बातों से अलग होने लगती है।
यह संकेत होता है कि शरीर अब आत्मा के उपयोग के योग्य नहीं रहा—
तो आत्मा उस शरीर को छोड़ देती है।
उदाहरण:
जैसे कोई व्यक्ति लंबी बीमारी में धीरे-धीरे चेतना खोने लगता है और अंत में उसका स्वास रुक जाता है।
उस क्षण आत्मा देह से बाहर निकल जाती है।
2. कर्मों का लेखा-जोखा और धर्मराज का न्याय
हर आत्मा अपने कर्मों का रिकॉर्ड लेकर चलती है।
बी.के. मुरली में कहा जाता है—
धर्मराज कोई बाहरी सत्ता नहीं।
आत्मा का अपना अंतर-आत्मा ही न्यायालय है।
कर्मों का कंप्यूटर रिकॉर्ड आत्मा स्वयं जानती है कि उसने क्या सही और क्या गलत किया है।
मृत्यु के बाद यही रिकॉर्ड उसकी नई मंज़िल तय करता है।
यह प्रक्रिया इतनी सटीक होती है जैसे आधुनिक समय का डिजिटल डेटा—
न कोई त्रुटि, न कोई चूक।
3. आत्मा को नया शरीर कैसे मिलता है?
आत्मा का अगला जन्म उसके कर्मों की बैलेंस शीट पर आधारित होता है।
जिस आत्मा ने सेवा, सच्चाई और प्रेम के कर्म किए हैं,
उसे सुखद परिस्थितियाँ मिलती हैं।
और जिसने नकारात्मक कर्म किए, उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
4. गर्भ में प्रवेश की प्रक्रिया
बी.के. ज्ञान अनुसार आत्मा का स्थानांतरण बेहद तीव्र होता है।
शरीर छोड़ते ही वे सेकंड से भी कम समय में नए शरीर में प्रवेश कर लेती है।
5. आकाशीय तत्वों में कर्मों का रिकॉर्ड
आत्मा का हर कर्म सूक्ष्म जगत में दर्ज रहता है।
सूर्य, चंद्र और तारे इस ब्रह्मांडीय कंप्यूटर सिस्टम के साक्षी होते हैं।
मुरली में कहा गया है—
कर्मों की मशीन बहुत सटीक है, कोई भी बिंदु छूट नहीं सकता।
6. यमदूत और धर्मराज का रहस्य
धर्मराज या यमदूत केवल प्रतीकात्मक हैं।
वास्तव में आत्मा स्वयं अपने कर्मों का न्याय करती है।
बी.के. ज्ञान कहता है—
आत्मा अपने ही कर्मों का फल भोगने जाती है।
कोई बाहरी सत्ता उसे दंड नहीं देती।
जिस प्रकार के कर्म किए—
उसी के अनुसार अगला पार्ट, सुख–दुख का अनुभव आत्मा को मिलता है।
निष्कर्ष
आत्मा का शरीर छोड़ना एक प्राकृतिक दिव्य प्रक्रिया है।
धर्मराज, यमदूत आदि प्रतीक हैं आत्मा के आंतरिक न्याय के।
हर आत्मा अपने कर्मों के अनुसार सुख–दुख का अनुभव करती है।
सच्चे कर्म ही सच्ची मुक्ति का मार्ग हैं।

