AAT.(12)कोमा में आत्मा कहां जाती है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
“आत्मा का रहस्य आज 12वा विषय है।
कोमा में आत्मा कहां जाती है?
कोमा क्या होता है भाई?
कोमा कौन बताएगा?
ब्रेन से आत्मा तक कोई कनेक्शन नहीं रहते हैं।
आत्मा को जो मैसेज देना है, वो ब्रेन जो हमारा बॉडी का पार्ट है—
पीनियल, पिट्यूटरी, हाइपोथैलेमस ये जो ग्लैंड्स हैं,
यह प्रॉपर रिस्पॉन्ड नहीं देते।
नर्वस सिस्टम से मैसेज का आना भी होता है और मैसेज का जाना भी होता है।
यह ब्रेन के आधार पर ही मन रीड करती है।
परंतु वो ब्रेक हो जाता है।
या तो आने वाला बंद हो जाता है या जाने वाला बंद हो जाता है
या दोनों ही बंद हो जाते हैं।
या पार्शियल बंद होता है तो कुछ न कुछ रिस्पांस दे पाता है।
अब कैसा रिस्पांस दे पाता है — लेने वाला या देने वाला — वो डिपेंड करता है।
परंतु कितना रिस्पांस दे पाता है वो उस पर निर्भर करता है।
मतलब कई ऐसे होते हैं जो सिर्फ देखते रहते हैं बस और कुछ नहीं कर सकते।
मतलब उनको न तो हमारी कोई बात समझ में आ रही होती है
न वो अपनी बात हमें बता पा रहे होते हैं।
बस वो जाग रहे हैं या सो रहे हैं।
बाकी शरीर का कोई अंग हिलता नहीं, किसी का कोई अंग थोड़ा हिलता है,
किसी का ज्यादा होता है—
ये सारे पार्ट्स कितने काम आएंगे वह इस पर निर्भर है
कि वह कोमा से बाहर आते हैं या नहीं।
ये बात डिपेंड करती है कि ब्रेन का कितना पार्ट वर्क कर रहा है।
वह कोमा से बाहर आ जाता है और वह कितना आ पाता है
वह उस पार्ट पर निर्भर है।
परंतु कोमा में आत्मा कहां जाती है?
क्योंकि वह तो अब बोल नहीं पा रहा है, देख नहीं पा रहा है,
सुन नहीं पा रहा है, समझा भी नहीं पा रहा है।
आत्मा और शरीर का अद्भुत संबंध
आत्मा और शरीर का संबंध—
मनुष्य जीवित तभी कहलाता है जब आत्मा इस शरीर में निवास करती है।
शरीर केवल एक यंत्र है जबकि आत्मा उसकी शक्तिशाली चालक है।
बीके मुरली कहती है—
आत्मा गाड़ीवान है और शरीर गाड़ी।
जब गाड़ी में चालक नहीं रहता तो गाड़ी चाहे कितनी सुंदर हो
वह चल नहीं सकती।
उदाहरण—
जैसे एक कंप्यूटर का CPU निष्क्रिय हो जाए,
तो मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस कोई कार्य नहीं कर सकते।
मेन तो मदरबोर्ड है—CPU।
यदि वही ब्लॉक हो गया है तो कुछ नहीं चलेगा।
उसी तरह आत्मा के बिना शरीर निष्क्रिय यंत्र बन जाता है।
कोमा में शरीर की स्थिति
कोमा में व्यक्ति
न बोल सकता है,
न हिल सकता है,
न आंखें खोल पाता है।
यानि शरीर के उपकरण तो हैं,
पर आत्मा का संपर्क उनमें नहीं बन पा रहा।
मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है।
(बीच में श्रोता के अनुभव और संवाद)
कोमा के अलग-अलग स्तर होते हैं—
कंप्लीट कोमा, पार्शियल कोमा, ब्रेन-डेड स्टेट आदि।
क्लीनिकल डेड
जब ब्रेन पूरी तरह डेड हो जाए
तो डॉक्टर इसे क्लीनिकल डेड कहते हैं।
ऐसी आत्माएं शरीर में तो रहती हैं,
पर वह शरीर कोई काम नहीं कर सकता।
आत्मा उस समय शरीर में ही होती है—
बोलना चाहती है, सुनना चाहती है, देखना चाहती है—
लेकिन आगे के अंग डेड हैं, मैसेज नहीं दे रहे।
आंखें खुली हैं पर मैसेज नहीं पहुंच रहा।
कान सुनते नहीं।
हाथ प्रतिक्रिया नहीं दे रहे।
नसों से आने वाला-जाने वाला मैसेज
रीढ़ की हड्डी और फिर ब्रेन तक जाता है।
वहीं आत्मा की सीट होती है।
जब रास्ता ही बंद हो जाए,
तो आत्मा powerless हो जाती है।
लकवा (Paralysis) में भी यही होता है,
पर लकवे में छोटा हिस्सा जाता है।
कोमा में ब्रेन जाता है।
ब्रेन जितना damage—उतना permanent damage।
आत्मा शरीर में रहते भी पार्ट नहीं बजा पाती।
जितना समय पार्ट है—वह शरीर में रहती है,
फिर शरीर छोड़ देती है।
कोमा तब तक माना जाता है
जब तक व्यक्ति वेंटिलेटर पर है।
जब वेंटिलेटर हट जाए और सांस खुद आने लगे
तो कोमा से बाहर मान लिया जाता है—
भले ब्रेन डैमेज रहे।
कोमा से बाहर आने के बाद—
कोई पहचान नहीं पाता,
किसी का नाम भूल जाता,
कभी बचपन में पहुंच जाता,
कभी पिछले जीवन की स्मृतियां सक्रिय हो जाती हैं।
कुछ काम कर पाता है, कुछ नहीं।
ये सब आत्मा के कार्मिक अकाउंट पर निर्भर है।
कोमा और आत्मा का कनेक्शन
जब ब्रेन तक आने-जाने वाले संदेश बाधित हो जाते हैं
तो आत्मा शरीर पर नियंत्रण नहीं रख पाती।
यह स्थिति ऐसे है जैसे मोबाइल ऑन है
पर नेटवर्क बंद है।
बीके ज्ञान बताता है—
आत्मा रहती तो है शरीर में
पर संचालन सुचारू नहीं होता।
आत्मा की सीट — पीनियल ग्रंथि के पास
वहां से आत्मा विचार, निर्णय, क्रिया संचालित करती है।
जब आत्मा अपनी सीट से हटे
तो भ्रम, बेहोशी, कोमा जैसी अवस्था बनती है।
जैसे गाड़ी का ड्राइवर स्टीयरिंग छोड़ दे।
बेहोशी — आत्मा थोड़े समय संचालन छोड़ देती है।
जैसे ही आत्मा सक्रिय, शरीर उठ जाता है।
आत्मा अपनी सीट से बाहर जाए तो—
शरीर चलना बंद।
हृदय की गति धीमी।
स्वास रुकने लगती है।
नसें सुस्त हो जाती हैं।
बीके मुरली:
जब आत्मा शरीर छोड़ देती है,
शरीर एक क्षण भी काम नहीं कर सकता।
कोमा और डॉक्टर
डॉक्टरों की चिकित्सा और आत्मा की इच्छा
कभी-कभी मिलकर शरीर को पुनः जगाती है।
जब आत्मा निर्णय ले—
“मुझे अभी कर्म निभाना है”
तो शरीर में प्रतिक्रियाएं लौट आती हैं।

