(36) To whom does Shiv Baba give the name Brahma?

S-B:-(36)शिव बाबा ब्रह्मा नाम किसको देते हैं?

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आज हम इसमें 36वा विषय करेंगे
शिव बाबा

ब्रह्मा नाम
किसको देते हैं

क्यों देते

बच्चे
शिव बाबा ब्रह्मा के तन में प्रवेश करके
ज्ञान सुनाते हैं।
ब्रह्मा नाम भी मैं ही रखता हूं।
क्योंकि यही सृष्टि का मुख पिता है।

ये लाइन समझ में आई है?
क्योंकि यही सृष्टि का मुख पिता है।
किसको समझ में आया यह?

क्योंकि ब्रह्मा के द्वारा सबको
तो कौन पिता है?

कौन पिता है?

ब्रह्मा बाबा।
हां।
ब्रह्मा नाम भी मैं ही रखता हूं
क्योंकि यही सृष्टि का मुख्य पिता है।

यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
बहुत लोग पूछते हैं परमपिता परमात्मा शिव बाबा
ब्रह्मा नाम किसको देते हैं और क्यों देते हैं?

यह सिर्फ एक नाम नहीं
बल्कि नई सृष्टि की शुरुआत का आधार है।

ऐसा नाम
जिससे मानव से देवता बनने की प्रक्रिया
शुरू होती है।

आज हम इसी रहस्य को
बेहद सरल और गहराई से समझेंगे।

परमपिता शिव का कार्य
ज्ञान देना
पर शरीर नहीं।

मुरली में बार-बार बाबा बताते हैं
मैं निराकार हूं।
मेरा अपना कोई शरीर नहीं।

इसलिए
मैं किसी न किसी के तन में प्रवेश कर
ज्ञान सुनाता हूं।

परमात्मा का काम क्या है?
नई दुनिया बनाना,
मनुष्य को देवता बनाना,
ज्ञान देना,
पुरानी दुनिया का अंत
और नई दुनिया की शुरुआत करना।

शिव बाबा
ब्रह्मा बाबा

इसके लिए परमात्मा को चाहिए
एक विशेष
पवित्र
योग्य मनुष्य तन।

वे कौन है?
जिसे शिव बाबा
ब्रह्मा नाम देते हैं।

अब नई बात आज आपको मिल रही है
शिव बाबा
दयालाल भाई लेखराज के तन में प्रवेश करते हैं।

दयालाल भाई लेखराज –
लेखराज उनका नाम है,
दयालाल भाई भी उनका नाम है।
जैसे किसी के दो नाम होते हैं।

शिव बाबा उन्हें
अपना माध्यम,
दूत,
मुख्य पिता बनाते हैं।

ध्यान रखना –
ब्रह्मा मुख पिता है
और हम मुख वंशावली बच्चे हैं।

प्रथम सृष्टि पुरुष बनाते हैं।

बाबा कहते हैं –
बच्चे, तुम अब ब्रह्मा हो।
तुम सृष्टि के आदि पुरुष हो।

यानी शिव स्वयं यह नाम देते हैं।
कोई मनुष्य यह नाम नहीं रखता।

हर नया और पुराना विद्यार्थी
कभी न कभी यह प्रश्न अवश्य पूछता है –
शिव बाबा ने दयालाल भाई लेखराज के तन में
ही प्रवेश क्यों किया?

इस चयन के पीछे
आध्यात्मिक विज्ञान है,
संयोग नहीं।
यह अनादि नाटक का अटल नियम है।

दयालाल भाई लेखराज कौन थे?
अत्यंत पवित्र
दयालु
परोपकारी
सफल हीरा व्यापारी
समाज में सम्मानित
धार्मिक
भक्तिपूर्ण जीवन
विनम्र
कोमल हृदय

सबसे गहरी बात –
उनके संस्कार सतोप्रधान थे।

इसी कारण
शिव बाबा का पहला चयन
उन्हीं पर हुआ।

मुरली आधारित कारण –
दयालाल भाई की आत्मा
84 जन्मों वाली
प्रथम क्रमांक की आत्मा थी।

बाबा कहते हैं –
मैं पहले-पहले
उसी आत्मा में प्रवेश करता हूं
जो 84 जन्म लेने वाली होती है।

नई सृष्टि की शुरुआत
ऐसी ही आत्मा से हो सकती है।

उनमें
मातृ-पितृ भाव भरपूर था।

शिव बाबा कहते हैं –
ब्रह्मा माता-पिता है।

दयालाल भाई
कोमल हृदय
पालनहार स्वभाव
बच्चों के प्रति अथाह प्रेम

ऐसी आत्मा ही
जगत पिता का रोल निभा सकती है।

वे पूर्ण आज्ञाकारी आत्मा थे।
परमात्मा को ऐसा माध्यम चाहिए
जो बिना तर्क
पूरी आज्ञा का पालन करे।

मुरली में कहा है –
मैं ऐसे तन में आता हूं
जो मेरी बात मानने योग्य होता है।

दयालाल भाई
नम्र
विनम्र
सरेंडर करने वाले थे।

इसलिए
वे परफेक्ट माध्यम बने।

वे धनवान थे
पर अहंकार नहीं।

साधारण भाव
पवित्र दृष्टि
किसी को दुख न देने वाला चरित्र

उनकी विनम्रता
उन्हें शिव-योग्य बनाती है।

उनका हृदय
प्रेममय
दयापूर्ण
करुणा से भरा था।

नई सृष्टि की शुरुआत
प्रेम और दया के आधार पर होती है।

उनमें
दिव्य दर्शन की क्षमता थी।
बाल्यकाल से
उन्हें अनुभूतियां होती थीं।

ऐसा माध्यम
परमात्मा स्वयं चुनते हैं।

अनादि नाटक अनुसार
ब्रह्मा का रोल
एक ही आत्मा का निश्चित है।

वही आत्मा
दयालाल भाई के रूप में आई।

उदाहरण –
जैसे शिक्षक का पहला छात्र
सबसे पहले पूरा ज्ञान धारण करता है
और फिर दूसरों को सिखाता है।

दयालाल भाई
शिव बाबा के पहले छात्र बने।

शिव बाबा सर्वोच्च शिक्षक
ब्रह्मा बाबा प्रधान छात्र

इसलिए
उन्हें ब्रह्मा नाम मिलता है।

ब्रह्मा नाम का उद्देश्य –
एकता
और
सृष्टि परिवर्तन।

ब्रह्मा का अर्थ –
ब्रह्म तत्व में स्थित
पवित्र चैतन्यता।

ब्रह्मा –
देह अभिमान पर विजय
100% आज्ञाकारी
100% पवित्र

इसलिए
यह नाम
केवल लेखराज (दयालाल भाई) के लिए
निर्धारित है।

मुरली में स्पष्ट है –
मैं ब्रह्मा मुख वंशावली बच्चे बनाता हूं।

शिव पिता है
ब्रह्मा माता
और हम सभी
ब्रह्मा कुमार-कुमारियां
शिव बाबा के बच्चे हैं।

निष्कर्ष –
ब्रह्मा नाम
किसी मनुष्य का नाम नहीं
बल्कि परमात्मा की देन है।

इसी नाम से
नई दुनिया की रचना शुरू होती है।