परमात्मा क्या कहते हैं?
[प्रशंसा]
आज हम 15वाँ विषय करेंगे।
फेक न्यूज़
और नफरत का ज़हर।
फेक न्यूज़ और नफरत का ज़हर।
सच, शांति और समझ — तीन शब्द हैं।
एक शब्द है सच।
दूसरा शब्द है शांति।
और तीसरा शब्द है समझ।
परमात्मा इसे कैसे देखते हैं?
परमात्मा इसको कैसे देखते हैं?
सूचना का युग या भ्रम का युग?
यह सूचना का युग है या भ्रम का युग?
दुनिया के अंदर आज जो चारों तरफ सूचनाएँ दी जा रही हैं,
या भ्रम फैलाया जा रहा है।
आज दुनिया में जानकारी की कमी नहीं।
चारों तरफ कितने प्रकार की इंफॉर्मेशन है।
इंफॉर्मेशन आज सारी दुनिया को पागल किए हुए है।
कितने न्यूज़ चैनल हैं, गिनती नहीं कर सकते।
सोशल मीडिया, YouTube, WhatsApp, Instagram, Facebook —
दुनिया भर के मैसेज देने वाले ब्लॉगर्स।
इतना बड़ा इंफॉर्मेशन का एरिया बन चुका है।
और उससे भी बड़ा साधन आ गया है —
Artificial Intelligence।
जहाँ से भी चाहो, इंफॉर्मेशन ले लो।
फिर भी भ्रम बढ़ रहा है।
डर फैल रहा है।
नफरत गहरी हो रही है।
चारों तरफ यह भ्रम है कि सच क्या है?
क्योंकि यह झूठी दुनिया है, भ्रष्ट दुनिया है,
तो यहाँ भ्रम ही फैलेगा।
सच कहाँ से फैलेगा?
डर यह है कि इस न्यूज़ को खोलें या नहीं,
इस मैसेज को देखें या नहीं।
फ्रॉड, भय और नफरत चारों तरफ फैल रही है।
प्रश्न यह है —
फेक न्यूज़ और नफरत को परमात्मा कैसे देखते हैं?
हमारा विषय है — परमात्मा क्या कहते हैं?
दुनिया में झूठे समाचार,
भ्रमात्मक समाचार चारों तरफ फैल रहे हैं।
जो जिसके दिमाग में आता है, वही बोला जा रहा है।
मुरली – 18 जनवरी 1968
जब बुद्धि में अज्ञान होता है,
तब मनुष्य झूठ को सच समझ लेता है।
आत्मिक दृष्टि से देखें —
फेक न्यूज़ क्या है?
फेक न्यूज़ वह है जिसमें गलत सूचना हो,
आधा सच, आधा झूठ — मिक्सिंग।
बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया तथ्य।
परमात्मा की दृष्टि में
फेक न्यूज़ = असत्य से भरी चेतना।
चेतना क्या है?
चेतना आत्मा है।
जब आत्मा में झूठ भरा हुआ हो,
देह अभिमान से हर बात देखी जाए,
तो सत्य कहाँ से आएगा?
आज पूरी दुनिया देह अभिमान में है।
देह समझकर जो भी समाचार दिए जा रहे हैं —
टीवी, रेडियो, YouTube, Facebook, Instagram —
वो सब फेक न्यूज़ बन जाते हैं।
मुरली – 5 अक्टूबर 1966
असत्य बुद्धि को कमजोर बनाता है।
सत्य बुद्धि को शक्तिशाली बनाता है।
दुनिया से मिलने वाली अधिकांश जानकारी
देहधारियों से आती है,
इसलिए उसमें सत्य नहीं होता।
डर फैलाने वाले मैसेज —
“यह शेयर नहीं किया तो अनर्थ हो जाएगा”
देवी-देवताओं के नाम से डर फैलाया जाता है।
यह जानकारी है या डर का व्यापार?
परमात्मा कहते हैं —
यह डर का व्यापार है।
नफरत कहाँ से जन्म लेती है?
नफरत बाहर से नहीं आती।
नफरत भीतर से आती है।
“मैं सही, दूसरा गलत”
“मेरा विचार श्रेष्ठ, उसका गलत”
मुरली – 4 अप्रैल 1967
देह अभिमान से द्वेष उत्पन्न होता है।
एक ही समाचार —
एक को गुस्सा,
दूसरे को डर,
तीसरे को नफरत।
क्यों?
क्योंकि हर आत्मा के संस्कार अलग हैं।
परमात्मा की दृष्टि
यह मीडिया संकट नहीं,
यह बुद्धि संकट है।
मुरली – 9 सितंबर 1968
जिसकी बुद्धि शुद्ध होती है,
वह किसी के बहकावे में नहीं आता।
सोना और कचरा दोनों सामने हों —
अगर आँखें सही हैं तो पहचान हो जाती है।
समस्या चीज़ की नहीं,
आँखों की है।
परमात्मा को सबसे अधिक दुख
भाई-भाई में अविश्वास।
मुरली – 12 दिसंबर 1967
तुम भाई होकर एक-दूसरे से शंकित हो गए।
जहाँ शोर अधिक होता है,
वहाँ सत्य दब जाता है।
मुरली – 21 जुलाई 1967
जहाँ शोर है, वहाँ सत्य छिप जाता है।
युवाओं का भटकाव
उत्तेजना, ट्रोलिंग, आक्रोश।
मुरली – 8 मार्च 1969
जब युवा शक्ति क्रोध में आती है,
तब विनाश तेज होता है।
परमात्मा का समाधान
परमात्मा तीन चीज़ें देते हैं —
सत्य, शांति और मौन।
सत्य केवल परमात्मा से मिलता है।
शांति केवल परमात्मा से मिलती है।
मौन शक्ति का भंडार है।
मुरली – 19 नवंबर 1966
मौन शक्ति का भंडार है।
मुख का मौन नहीं,
मन का मौन चाहिए।
शुभ भावना
मुरली – 2 फरवरी 1969
शुभ भावना वातावरण को शुद्ध कर देती है।
शुभ भावना तब आती है
जब हम आत्मा की दृष्टि से देखते हैं।
देह दृष्टि से शुभ भावना संभव नहीं।
परमात्मा की दुनिया
ना फेक न्यूज़,
ना नफरत,
ना अविश्वास।
मुरली – 27 मार्च 1969
स्वर्ग में शब्द भी पवित्र होते हैं।
जहाँ हर शब्द सत्य,
हर भाव शुद्ध —
वही स्वर्ग है।
आज हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी
परमात्मा पूछते हैं —
तुम क्या फैला रहे हो?
सत्य या तनाव?
शेयर करने से पहले ठहरो।
परमात्मा के ज्ञान से जाँचो।
अंतिम संदेश
फेक न्यूज़ मन को अशांत करती है।
सत्य समाचार मन को शांति देता है।
जो देह अभिमानी हैं —
वे फेक न्यूज़ फैलाते हैं।
जो आत्म अभिमानी हैं —
वे सत्य फैलाते हैं।
एक फॉरवर्ड समाज बिगाड़ सकता है।
एक शांत आत्मा वातावरण बदल सकती है।
परमात्मा कहते हैं —
सत्य और शांति फैलाओ, यही मेरी सेवा है।
