बी.के.पति-पत्नी का संबंध (09पति पत्नी के बीच विश्वास क्यों टूटता है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
ब्रह्मा कुमारी में पति पत्नी का संबंध
इसका नौवां विषय हम देखेंगे।
पति पत्नी के बीच विश्वास
क्यों टूटता है?
पति पत्नी के बीच विश्वास क्यों टूटता है?
क्यों टूट जाता है पति पत्नी के बीच विश्वास?
पति पत्नी के बीच विश्वास क्यों टूटता है?
और कैसे ऐसा विश्वास बने जो कभी टूटे ही नहीं?
पति पत्नी के बीच विश्वास कैसे पैदा होता है — यह पता हो तो
टूटने का कारण भी समझ में आ जाएगा।
एक दूसरे के प्रति विश्वास कैसे बनता है?
जब हम एक दूसरे का कहना मानते हैं,
एक दूसरे को सम्मान देते हैं।
आज का कड़वा सच —
रिश्ते इसलिए नहीं टूटते कि प्यार नहीं है,
रिश्ते इसलिए टूटते हैं क्योंकि विश्वास कमजोर हो गया है।
पति कहता है भरोसा नहीं रहा।
पत्नी कहती है अब यकीन नहीं होता।
मुरली 14 मार्च 1999
बाबा कहते हैं —
विश्वास व्यवहार से नहीं, आत्मिक स्थिति से पैदा होता है।
विश्वास मांगने से नहीं, बनाने से आता है।
विश्वास क्या है और क्या नहीं
दुनिया कहती है —
हर बात बताओ, हर समय जवाब दो।
शक की कोई गुंजाइश न हो।
अव्यक्त मुरली 22 जनवरी 2000
विश्वास आत्मा की स्थिरता का नाम है।
जहां आत्मा डगमगाती है वहां शक पैदा होता है।
उदाहरण —
एक शांत आत्मा बिना पूछे भी भरोसा करती है।
इसलिए समस्या सामने वाले में नहीं,
अपनी आत्मिक स्थिति में है।
विश्वास क्यों टूटता है?
देह अभिमान के कारण।
“तुम मेरे हो” की भावना से नियंत्रण आ जाता है।
जब पति कहता है —
तुम ऐसा कैसे कर सकते हो?
यही वाक्य विश्वास को चोट देता है।
दूसरा कारण — अपेक्षा।
जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, विश्वास टूटता है।
अव्यक्त मुरली 18 अप्रैल 1998
बाबा कहते हैं — अपेक्षा दुख की जननी है।
विश्वास पैदा करने की पहली कुंजी — आत्मविश्वास
पति पत्नी के बीच विश्वास तभी आता है
जब आत्मा को खुद पर भरोसा हो।
27 फरवरी 2001 मुरली
जो स्वयं पर विश्वास करता है वही दूसरों पर विश्वास कर सकता है।
जिस आत्मा को यह विश्वास है —
मैं शांत हूं, मैं पवित्र हूं —
वह साथी के व्यवहार से नहीं डगमगाती।
दूसरी कुंजी — परमात्मा पर विश्वास
सबसे बड़ा रहस्य यह है कि
असल विश्वास एक दूसरे पर नहीं,
ड्रामा और परमात्मा पर होना चाहिए।
अव्यक्त मुरली 11 दिसंबर 1997
बाबा कहते हैं — जो मुझ पर भरोसा करता है, उसे किसी पर संदेह नहीं रहता।
जब मन कहता है —
बाबा जानता है, ड्रामा सही है —
तो शक अपने आप समाप्त हो जाता है।
तीसरी कुंजी — पारदर्शिता नहीं, पवित्रता
आज लोग कहते हैं —
सब कुछ शेयर करो तभी विश्वास होगा।
बाबा कहते हैं —
पवित्र मन में छिपाने जैसा कुछ नहीं होता।
विश्वास का आधार मोबाइल नहीं,
मन की शुद्धता है।
चौथी कुंजी — मौन और सहनशीलता
कई बार विश्वास बातों से नहीं,
मौन से बनता है।
अव्यक्त मुरली 2 फरवरी 1999
मौन से आत्मा की शक्ति प्रकट होती है।
जो हर बात का जवाब देता है — विश्वास खो देता है।
जो कुछ बातें सहन कर लेता है — विश्वास जीत लेता है।
पांचवीं और अंतिम कुंजी — परमात्मा को बीच में रखना
विश्वास तब स्थाई बनता है
जब पति पत्नी के बीच शिव बाबा होता है।
अव्यक्त मुरली 29 जनवरी 1998
बाबा कहते हैं — मुझे बीच में रखो तो रिश्ता अडोल बन जाएगा।
जहां दोनों शिव बाबा को याद करते हैं,
वहां शक और डर का प्रवेश नहीं होता।
समापन निष्कर्ष
पति पत्नी के बीच विश्वास के पांच स्तंभ
-
आत्मविश्वास
-
देह अभिमान से मुक्त दृष्टि
-
परमात्मा पर भरोसा
-
पवित्रता
-
मौन और सहनशीलता
बाबा कहते हैं —
विश्वास योगी आत्मा की निशानी है।
अंतिम शक्ति वाक्य
जहां परमात्मा पर विश्वास है
वहां किसी आत्मा पर अविश्वास नहीं रहता।

