अ.वी.ना:P-2(12)क्या पृथ्वी सच में अरबों साल पुरानी है?
“अविनाशी विश्व नाटक पार्ट टू
उसका आज हम 12वाँ पाठ कर रहे हैं।
क्या पृथ्वी सच में अरबों साल पुरानी है?
प्रश्न है — क्या पृथ्वी सच में अरबों साल पुरानी है?
आज हम एक बहुत गंभीर परंतु अत्यंत रोचक विषय पर मंथन करने जा रहे हैं।
हमारी पृथ्वी कितनी पुरानी है?
जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं, वो कितनी पुरानी है?
यह केवल वैज्ञानिक प्रश्न नहीं है।
यह मनुष्य की सोच, इतिहास और भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
विषय की पृष्ठभूमि
आज की दुनिया में हमें स्कूल और कॉलेज में सिखाया जाता है कि पृथ्वी लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पुरानी है।
मानव इतिहास लाखों वर्षों में फैला है।
परंतु प्रश्न उठता है —
क्या यह अंतिम सत्य है?
या केवल अनुमान है?
अविनाशी विश्व नाटक पुस्तक का दृष्टिकोण
अविनाशी विश्व नाटक पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि वैज्ञानिकों में स्वयं इस विषय पर भारी मतभेद है।
एक वैज्ञानिक कुछ कहता है, दूसरा कुछ, तीसरा कुछ और चौथा कुछ और।
वैज्ञानिकों के मत आपस में मेल नहीं खाते।
वैज्ञानिक अनुमानों में विवाद क्यों?
पहली बात — अनुमान और मान में अंतर होता है।
मान होता है परफेक्ट।
अनुमान होता है अंदाज़ा।
अनुमान आगे-पीछे हो सकता है।
उसमें सत्यता की पुष्टि नहीं होती।
वैज्ञानिक विधियाँ
मुख्य तीन विधियाँ मानी जाती हैं:
रेडियो कार्बन डेटिंग
यूरेनियम लेड विधि
जीवाश्म विधि
रेडियो कार्बन डेटिंग केवल जैविक वस्तुओं पर लागू होती है — लकड़ी, हड्डी आदि।
इसकी भी कई सीमाएँ हैं।
वातावरण, तापमान और प्रदूषण से परिणाम बदल जाते हैं।
अलग-अलग वैज्ञानिक अलग-अलग आयु बताते हैं।
यूरेनियम लेड विधि चट्टानों में यूरेनियम के लेड में बदलने की गति के आधार पर आयु बताती है।
यह भी मान्यताओं पर आधारित है और अलग-अलग लैब में अलग-अलग परिणाम आते हैं।
जीवाश्म विधि में मिट्टी की परतों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है।
परंतु हर जीव जीवाश्म नहीं बनता।
प्राकृतिक आपदाओं से परतें उलट-पुलट भी हो जाती हैं।
इसलिए जीवाश्म प्रमाण नहीं, अनुमान है।
निष्कर्ष (वैज्ञानिक दृष्टिकोण)
हर विधि की अपनी सीमा है।
हर सिद्धांत समय-समय पर बदलता रहता है।
विज्ञान निष्कर्ष नहीं, संशोधन की प्रक्रिया है।
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान क्या कहता है?
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान का मूल सिद्धांत है —
यह सृष्टि अनादि अविनाशी ड्रामा है।
परमात्मा आकर समझाते हैं —
बच्चे, यह संसार अनादि काल से चला आ रहा है।
इसका आरंभ कोई नहीं बता सकता।
इसकी आयु कोई नहीं बता सकता।
यह नाटक कभी खत्म नहीं होता।
यह 5000 वर्ष का निश्चित चक्र है।
सतयुग — 1250 वर्ष
त्रेता — 1250 वर्ष
द्वापर — 1250 वर्ष
कलयुग — 1250 वर्ष
5000 वर्ष बाद यह चक्र हूबहू रिपीट होता है।
घड़ी का उदाहरण
जैसे घड़ी 12 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है,
वैसे ही यह सृष्टि 5000 वर्ष में एक चक्र पूरा करती है।
हर 5000 वर्ष बाद वही इतिहास, वही भूगोल, वही आत्माएँ, वही भूमिकाएँ।
मुरली प्रमाण
मुरली 23 जनवरी 1967
यह ड्रामा 5000 वर्ष का है — ना एक सेकंड आगे, ना एक सेकंड पीछे।
मुरली 9 मार्च 1969
इतिहास और भूगोल रिपीट होता है। नई आत्मा आती नहीं, कोई जाती नहीं।
निष्कर्ष
यह सृष्टि अनादि है।
यह ड्रामा अविनाशी है।
यह संसार कभी नष्ट नहीं होता।
यह ज्ञान हमें भ्रम से मुक्त करता है।
आत्म-स्मृति में लाता है।
भविष्य का अधिकार दिलाता है।
समापन संदेश
अब प्रश्न यह नहीं है कि पृथ्वी कितनी पुरानी है।
प्रश्न यह है कि मैं आत्मा इस ड्रामा में कौन-सा रोल निभा रही हूँ।
क्योंकि हर आत्मा में 5000 वर्ष का पार्ट रिकॉर्ड है।
हर आत्मा अपने निश्चित समय पर अपनी सीट पर पहुँचती है।
यह है अविनाशी विश्व नाटक का महान रहस्य।

