S.Y.(18)संगम युग का सबसे बड़ा रहस्य
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
सिर्फ यही युग ‘पुरुषोत्तम’ क्यों है?
पुरुषोत्तम संगम युग का गुप्त रहस्य
प्रस्तावना
सवाल छोटा है —
उत्तर आत्मा का भविष्य बदल देता है।
बाबा कहते हैं —
“यह पुरुषोत्तम संगम युग है।”
अब प्रश्न उठता है —
संगम तो और भी आते हैं।
दो युगों के बीच का समय हर जगह होता है।
फिर —
-
केवल इसी संगम को पुरुषोत्तम क्यों कहा गया?
-
बाकी संगम युग आत्मा के साथ क्या करते हैं?
आज हम यही मुरली का गूढ़ रहस्य समझेंगे।
1️⃣ संगम युग का अर्थ क्या है?
संगम = दो अवस्थाओं का मिलन
-
रात और दिन का संगम → भोर
-
बचपन और जवानी का संगम → किशोरावस्था
संगम का अर्थ है परिवर्तन का समय।
मुरली 24-01-2003
“संगम युग परिवर्तन का समय है।”
अब प्रश्न —
क्या हर परिवर्तन आत्मा को ऊपर उठाता है?
नहीं।
2️⃣ बाकी संगम युग आत्मा के साथ क्या करते हैं?
बाकी संगम:
-
सतयुग → त्रेता
-
त्रेता → द्वापर
-
द्वापर → कलियुग
मुरली 10-03-2006
“बाकी संगम युग आत्माओं को नीचे गिराते हैं।”
गिरावट कैसे?
-
पावनता घटती है
-
देहभान बढ़ता है
-
परमात्मा की स्मृति टूटती है
-
संस्कार भारी होते जाते हैं
उदाहरण:
सीढ़ियाँ उतरते समय —
हर स्टेप थोड़ा नीचे ले जाता है।
गिरावट अचानक नहीं होती।
उसी प्रकार आत्मा —
धीरे-धीरे पतित बनती है।
3️⃣ फिर यह संगम युग अलग कैसे है?
यह संगम —
कलियुग और सतयुग के बीच है।
मुरली 03-03-2006
“यह पुरुषोत्तम संगम युग आत्माओं को उत्तम बनाता है।”
तुलना समझिए:
| बाकी संगम | पुरुषोत्तम संगम |
|---|---|
| आत्मा गिरती है | आत्मा उठती है |
| देहभान बढ़ता है | देहभान टूटता है |
| स्मृति बिखरती है | स्मृति जुड़ती है |
| पतन | उत्थान |
इसीलिए इसे “पुरुषोत्तम” कहा गया।
4️⃣ “पुरुषोत्तम” शब्द का वास्तविक अर्थ
पुरुषोत्तम =
पुरुष (आत्मा) + उत्तम (श्रेष्ठ)
अर्थात —
जो आत्मा को श्रेष्ठ से श्रेष्ठ बना दे।
मुरली 15-08-2001
“यह युग आत्मा को देव आत्मा बनाने वाला युग है।”
उदाहरण:
लोहे को आग में डालो → शुद्ध होकर चमकता है।
लेकिन वही आग अनियंत्रित हो → जला देती है।
यह संगम युग है —
शुद्ध करने वाली योग-अग्नि।
5️⃣ इस संगम युग में आत्मा के साथ क्या होता है?
इस युग में आत्मा:
-
स्वयं को आत्मा समझती है
-
परमात्मा को पहचानती है
-
देह से न्यारी बनती है
-
संस्कारों का शुद्धिकरण करती है
मुरली 05-05-2004
“यह युग आत्मा का कायाकल्प करने का युग है।”
उदाहरण:
बीमार शरीर →
दवा + परहेज़ + समय → स्वस्थ बनता है
आत्मा →
ज्ञान + योग + पुरुषार्थ → उत्तम बनती है
6️⃣ पढ़ाने वाला कौन है — यही निर्णायक बिंदु
बाकी संगम युगों में:
मनुष्य → मनुष्य को प्रभावित करता है
लेकिन इस संगम युग में:
परमात्मा स्वयं पढ़ाते हैं।
मुरली 24-01-2003
“यह पढ़ाई सिवाय बाप के और कोई पढ़ा नहीं सकता।”
इसलिए यह युग केवल परिवर्तन का नहीं —
उद्धार का युग है।
7️⃣ क्यों केवल यही संगम “पुरुषोत्तम” है?
क्योंकि:
-
यहाँ आत्मा ऊपर जाती है
-
यहाँ पतन रुकता है
-
यहाँ भविष्य की राजधानी बनती है
मुरली 12-01-1996
“अभी आत्मा जैसी बनेगी, वही स्वरूप सदा रहेगा।”
अर्थात —
यह समय निर्णायक है।
एक वाक्य में मुरली का सार
बाकी संगम युग आत्मा को पतन की ओर ले जाते हैं।
पुरुषोत्तम संगम युग आत्मा को उत्तम, पावन और श्रेष्ठ बनाता है।
इसीलिए —
सिर्फ यही युग ‘पुरुषोत्तम’ है।
आत्म चिंतन
क्या मैं इस पुरुषोत्तम संगम युग को पहचान रहा हूँ?
क्या यह युग मुझे ऊपर उठा रहा है — या मैं इसे ऐसे ही गंवा रहा हूँ?
प्रश्न 1: संगम युग का अर्थ क्या है?
✅ उत्तर:
संगम = दो अवस्थाओं / दो युगों / दो स्थितियों का मिलन।
उदाहरण:
-
रात और दिन का संगम → भोर
-
बचपन और जवानी का संगम → किशोरावस्था
संगम का अर्थ है परिवर्तन का समय।
मुरली 24-01-2003
“संगम युग परिवर्तन का समय है।”
लेकिन हर परिवर्तन उत्थान नहीं होता।
प्रश्न 2: क्या हर संगम आत्मा को ऊपर उठाता है?
✅ उत्तर:
नहीं।
सभी संगम केवल परिवर्तन लाते हैं,
लेकिन हर परिवर्तन उन्नति नहीं देता।
प्रश्न 3: बाकी संगम युग आत्मा के साथ क्या करते हैं?
बाकी संगम:
-
सतयुग → त्रेता
-
त्रेता → द्वापर
-
द्वापर → कलियुग
मुरली 10-03-2006
“बाकी संगम युग आत्माओं को नीचे गिराते हैं।”
गिरावट कैसे होती है?
-
पावनता घटती है
-
देहभान बढ़ता है
-
परमात्मा की स्मृति टूटती है
-
संस्कार भारी होते जाते हैं
उदाहरण:
सीढ़ियाँ उतरते समय —
हर स्टेप थोड़ा नीचे ले जाता है।
गिरावट धीरे-धीरे होती है।
उसी तरह आत्मा भी क्रमशः पतित बनती है।
प्रश्न 4: यह संगम युग अलग कैसे है?
✅ उत्तर:
यह संगम कलियुग और सतयुग के बीच है।
मुरली 03-03-2006
“यह पुरुषोत्तम संगम युग आत्माओं को उत्तम बनाता है।”
तुलना समझिए:
| बाकी संगम | पुरुषोत्तम संगम |
|---|---|
| आत्मा गिरती है | आत्मा उठती है |
| देहभान बढ़ता है | देहभान समाप्त होता है |
| स्मृति बिखरती है | स्मृति जुड़ती है |
| पतन | उत्थान |
इसीलिए इसे “पुरुषोत्तम” कहा गया।
प्रश्न 5: “पुरुषोत्तम” शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है?
✅ उत्तर:
पुरुषोत्तम =
पुरुष (आत्मा) + उत्तम (श्रेष्ठ)
अर्थात —
जो आत्मा को श्रेष्ठ से श्रेष्ठ बना दे।
मुरली 15-08-2001
“यह युग आत्मा को देव आत्मा बनाने वाला युग है।”
उदाहरण:
लोहे को आग में डालो → शुद्ध होकर चमकता है।
योग-अग्नि में आत्मा → पावन और श्रेष्ठ बनती है।
प्रश्न 6: इस संगम युग में आत्मा के साथ क्या होता है?
✅ उत्तर:
इस युग में आत्मा:
-
स्वयं को आत्मा समझती है
-
परमात्मा को पहचानती है
-
देह से न्यारी बनती है
-
संस्कारों का शुद्धिकरण करती है
मुरली 05-05-2004
“यह युग आत्मा का कायाकल्प करने का युग है।”
उदाहरण:
बीमार शरीर → दवा + परहेज़ + समय → स्वस्थ
आत्मा → ज्ञान + योग + पुरुषार्थ → उत्तम
प्रश्न 7: इस संगम को “उद्धार का युग” क्यों कहा जाता है?
✅ उत्तर:
क्योंकि यहाँ पढ़ाने वाला कोई मनुष्य नहीं,
स्वयं परमात्मा हैं।
मुरली 24-01-2003
“यह पढ़ाई सिवाय बाप के और कोई पढ़ा नहीं सकता।”
बाकी संगमों में मनुष्य मनुष्य को प्रभावित करता है।
इस संगम में परमात्मा आत्मा को ऊँचा उठाते हैं।
प्रश्न 8: क्यों केवल यही संगम ‘पुरुषोत्तम’ है?
✅ उत्तर:
-
यहाँ आत्मा ऊपर जाती है
-
यहाँ पतन रुकता है
-
यहाँ भविष्य की राजधानी बनती है
-
यहाँ आत्मा का स्वरूप सदा के लिए तय होता है
मुरली 12-01-1996
“अभी आत्मा जैसी बनेगी, वही स्वरूप सदा रहेगा।”
अर्थात — यह निर्णायक समय है।
एक वाक्य में सार
बाकी संगम युग आत्मा को पतन की ओर ले जाते हैं।
पुरुषोत्तम संगम युग आत्मा को उत्तम, पावन और श्रेष्ठ बनाता है।
इसीलिए —
सिर्फ यही युग ‘पुरुषोत्तम’ है।
आत्म चिंतन
क्या मैं इस पुरुषोत्तम संगम युग को पहचान रहा हूँ?
क्या यह युग मुझे ऊपर उठा रहा है — या मैं इसे ऐसे ही गंवा रहा हूँ?
Disclaimer
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ की साकार एवं अव्यक्त मुरलियों पर आधारित आत्मिक अध्ययन है।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, व्यक्ति या संस्था की आलोचना नहीं, बल्कि आत्मा की उन्नति हेतु ईश्वरीय ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
दर्शकों से निवेदन है कि आधिकारिक मुरलियों का स्वयं अध्ययन अवश्य करें।
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