Creaate YouTube वीडियो & disclamer, डिस्क्रिप्शन और हैशटैग्स “तीसरा विश्व युद्ध
सृष्टि परिवर्तन।
इसका हम तीसरा पाठ करेंगे।
क्या वैश्विक युद्ध
सृष्टि परिवर्तन का माध्यम है?
क्या वैश्विक युद्ध
सृष्टि परिवर्तन का माध्यम है?
बी के ज्ञान का रहस्य
वर्ल्ड वार और सृष्टि परिवर्तन
क्या युद्ध नई दुनिया लाएगा?
मुरली क्या कहती है? मुरली अर्थात
परमात्मा के वाक्य क्या कहते हैं?
परमात्मा क्या कहते हैं?
डिस्क्लेमर
यह वीडियो आध्यात्मिक अध्ययन और चिंतन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
इसमें व्यक्त विचार ब्रह्मा कुमारी शिक्षाओं, मुरली बिंदुओं तथा वक्ता की आध्यात्मिक समझ पर आधारित हैं।
इस वीडियो का उद्देश्य किसी भी प्रकार का भय उत्पन्न करने वाली भविष्यवाणी करना या किसी देश, समाज या राजनीतिक घटनाओं पर टिप्पणी करना नहीं है।
वैश्विक युद्ध या सृष्टि परिवर्तन का उल्लेख केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विश्व परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने के लिए किया गया है।
बी के ज्ञान के अनुसार क्या वैश्विक युद्ध सृष्टि परिवर्तन का एक माध्यम हो सकता है?
एक माध्यम हो सकता है।
आज दुनिया में बढ़ता हुआ तनाव।
आज दुनिया में बढ़ता हुआ तनाव।
आज दुनिया के अंदर किस बात का टेंशन बढ़ रहा है?
क्यों बढ़ रहा है? इस बात को हम यहां समझने का प्रयास करेंगे।
क्या लगता है आपको?
दुनिया में टेंशन बढ़ा हुआ है?
आज विश्व की परिस्थितियां बहुत तेजी से बदल रही हैं।
पता ही नहीं लग रहा कि कौन दोस्त है, कौन दुश्मन है।
देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है।
एक देश से दूसरे देश में हथियारों की होड़ तेज हो गई है।
आर्थिक और सामाजिक संकट गहराते जा रहे हैं।
आर्थिक संकट क्या है?
क्योंकि युद्ध होने पर पानी की समस्या, खाद्यान्न की समस्या बढ़ सकती है।
जहाँ अरब देशों में पानी की समस्या बहुत बड़ी हो सकती है।
यदि समुद्र के पानी को शुद्ध करने वाले संयंत्र नष्ट हो जाएँ तो पीने के पानी की भारी कमी हो सकती है, क्योंकि समुद्र का पानी सीधे पीने योग्य नहीं है।
संकट गहराते जा रहे हैं।
ऐसे समय में बहुत से लोग यह प्रश्न पूछते हैं।
क्या एक वैश्विक युद्ध सृष्टि परिवर्तन का कारण बन सकता है?
यह जो विश्व युद्ध का वातावरण बन रहा है, चारों तरफ फैलता जा रहा है —
क्या यह सृष्टि परिवर्तन का कारण बन सकता है?
यह प्रश्न केवल राजनीतिक नहीं है।
यह प्रश्न आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
क्योंकि यदि हम समझ जाएँ कि विश्व परिवर्तन कैसे होता है
तो हम डरने की बजाय तैयार होना सीखेंगे।
हम डरेंगे नहीं —
हम तैयार होना सीखेंगे।
सृष्टि परिवर्तन का आध्यात्मिक सिद्धांत
अध्यात्म के अनुसार, ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार, सृष्टि परिवर्तन का एक नियम है।
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार सृष्टि 5000 वर्ष का एक चक्र है।
ठीक 5000 वर्ष के बाद सृष्टि हूबहू रिपीट होती है।
यह परिवर्तन एक्यूरेट टाइम पर होता है।
दुनिया की घड़ियाँ गलत हो सकती हैं,
परंतु परमात्मा की घड़ी में कभी गलती नहीं हो सकती।
यह बात हमें बहुत अच्छी तरह से समझनी चाहिए।
जब यह समझ आ जाए कि परमात्मा की घड़ी में गलती नहीं हो सकती
तो हम समझ सकते हैं कि संसार का खेल कैसे चलता है।
यह संसार का खेल 5000 साल का है।
5000 साल बाद यह खेल हूबहू रिपीट होता है।
चार युगों में यह चक्र चलता है।
सतयुग
त्रेता
द्वापर
कलयुग
इन चारों युगों के बाद आता है —
संगम युग
संगम युग सृष्टि परिवर्तन का समय है।
जब पुरानी दुनिया समाप्त होकर नई दुनिया की स्थापना होती है।
साकार मुरली 19 जनवरी 1969 में समझाया गया है —
यह पुरानी दुनिया समाप्त होकर नई दुनिया बननी है।
दो कल्पों के बीच के समय को संगम युग कहा जाता है।
इसे अमृतवेला या पुरुषोत्तम संगम युग भी कहा जाता है।
इसका अर्थ है कि परिवर्तन निश्चित है।
लेकिन प्रश्न यह है —
यह परिवर्तन कैसे होगा?
क्या केवल युद्ध से सृष्टि परिवर्तन होगा?
बहुत से लोग सोचते हैं कि यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो दुनिया समाप्त हो जाएगी।
लेकिन बीके ज्ञान कहता है कि परिवर्तन केवल एक घटना से नहीं होता।
न केवल युद्ध,
न केवल बाढ़,
न केवल भूकंप।
सृष्टि परिवर्तन एक बहुआयामी प्रक्रिया है।
साकार मुरली 3 फरवरी 1968 में बाबा ने कहा —
“विनाश के कई साधन बनेंगे। आपस की लड़ाई भी होगी और प्राकृतिक आपदाएं भी होंगी।”
इसका अर्थ है कि परिवर्तन के कई कारण हो सकते हैं।
जैसे —
युद्ध
प्राकृतिक आपदाएं
सामाजिक अस्थिरता
बीमारी और संकट
इतिहास भी हमें यही सिखाता है।
प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) के बाद कई साम्राज्य समाप्त हुए और नई राजनीतिक व्यवस्था बनी।
द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) के बाद दुनिया का नक्शा बदल गया।
इसका अर्थ है कि युद्ध अक्सर बड़े परिवर्तन का माध्यम बनता है।
लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह केवल बाहरी परिवर्तन है।
असली परिवर्तन चेतना का है।
साकार मुरली 18 जनवरी 1973
“पहले मनुष्य के विकारों का विनाश होगा, तब नई दुनिया बनेगी।”
काम
क्रोध
लोभ
मोह
अहंकार
इन पाँच विकारों के कारण ही संसार में नैतिक पतन आया है।
आज संसार तमोप्रधान बन चुका है।
सभी आत्माएँ परमात्मा से प्रार्थना कर रही हैं —
“तमसो मा ज्योतिर्गमय”
हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
वैश्विक युद्ध क्यों संभव है?
आज संसार में
अहंकार बढ़ गया है
स्वार्थ बढ़ गया है
संसाधनों के लिए संघर्ष बढ़ रहा है
तकनीकी हथियार अत्यधिक शक्तिशाली हो चुके हैं
जब अहंकार बढ़ता है
तो संघर्ष भी बढ़ता है।
यह भी विश्व नाटक का एक भाग हो सकता है।
क्या बीके ज्ञान युद्ध की भविष्यवाणी करता है?
बीके ज्ञान भय पैदा करने वाली भविष्यवाणी नहीं करता।
यह केवल यह समझाता है कि संसार परिवर्तन के दौर से गुजरता है।
साकार मुरली 6 मार्च 1970
“ड्रामा में जो होना है वह होकर रहेगा।”
इसलिए हमारा ध्यान घटनाओं पर नहीं
पुरुषार्थ पर होना चाहिए।
बीके के लिए सबसे बड़ी तैयारी
यदि संसार में संकट आएँ
तो बीके के लिए सबसे बड़ा सहारा है —
राजयोग
राजयोग का लक्ष्य है कि परिस्थिति कैसी भी हो
मन शांत और स्थिर रहे।
साकार मुरली 17 जनवरी 1969
“अंत समय में बाप की याद ही काम आएगी।”
सबसे बड़ा संदेश
इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि सृष्टि परिवर्तन केवल युद्ध से होगा।
लेकिन यह संभव है कि वैश्विक संघर्ष भी परिवर्तन की प्रक्रिया का एक भाग बन जाए।
निष्कर्ष
सृष्टि परिवर्तन एक व्यापक प्रक्रिया है।
इसमें शामिल हो सकते हैं —
सामाजिक परिवर्तन
प्राकृतिक घटनाएँ
संभवतः युद्ध
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है —
मनुष्य की चेतना का परिवर्तन।
समापन संदेश
यदि हमें आने वाले समय के लिए तैयार होना है
तो डरने की आवश्यकता नहीं।
हमें करना है —
ज्ञान को समझना
योग का अभ्यास करना
दुनिया में शांति का संदेश फैलाना
क्योंकि सृष्टि परिवर्तन अंत नहीं है।
यह एक नई दिव्य दुनिया की शुरुआत है।
