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Create YouTube वीडियो डिस्क्रिप्शन और हैशटैग्स,& disclamer”परमधाम

का रहस्य।
आज हम पांचवा विषय कर रहे हैं।

भगवान कहां रहते हैं?

हर जगह

या एक जगह?

परमात्मा
कहां रहते हैं? हर जगह या एक जगह।

ये सबसे बड़ा प्रश्न है और इसका जो आंसर
है वो बड़ा शॉकिंग है।

आम व्यक्ति
इस आंसर को स्वीकार करने में घबराता है।

जल्दी से इसे स्वीकार नहीं करता।
परंतु आज हम इसे बहुत ध्यान से समझने का

प्रयास करेंगे। ताकि हम किसी को भी समझा
सके। कैसे भी वह प्रश्न करें हम उन्हें

बता सके।
इस बात को हम ध्यान से इसमें चर्चा में

लाने की कोशिश करेंगे।

परमात्मा कहां रहते हैं? क्या भगवान भी
परमधाम में रहते हैं?

क्या भगवान भी परमधाम में है?

डिस्क्लेमर है। यह वीडियो प्रजापिता
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की

मुरली शिक्षाओं पर आधारित है। इसमें
उद्देश्य परमात्मा के वास्तविक स्वरूप और

स्थान को सरल व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से
समझाना है।

गॉड
लिव्स वेयर

भगवान कहां है? कहां रहता है?
नॉट एवरीवेयर

हर जगह नहीं रहता।
शॉकिंग ट्रुथ।

यह बड़ा शॉकिंग ट्रुथ है। सच है। दुख देने
वाला, हर्ट करने वाला, शॉक देने वाला।

भगवान कहां रहते हैं?
क्या वह हर जगह है?

कोई कहते हैं जरे जरे में कण कण में सब
जगह है

या किसी एक जगह पर रहता है।

वो एक जगह कहां है? जहां भगवान रहता है।
और अगर भगवान हर जगह है

तो फिर हमें दिखाई क्यों नहीं देता?

भगवान एक जगह रहता है तो एक जगह कौन सी है
जहां वह रहता है?

और भगवान हर जगह रहता है तो फिर हमें
दिखाई क्यों नहीं देता?

और अगर एक जगह है तो कहां है?

आज ये सबसे बड़ा भ्रम टूटने वाला है।
आज ये सबसे बड़ा भ्रम टूटने वाला है।

रिकैकप करेंगे।
अब तक हमने दो चार वीडियोस बनाए हैं उनमें

हमने क्या-क्या जाना। पहले में हमने जाना
कि हम आत्मा हैं। हम यह शरीर नहीं है।

दूसरे में हमने जाना हमारा घर परमधाम है।
वहां पूर्ण शांति है। वहां क्या है?

संकल्प भी हमारे शांत।
अब सबसे बड़ा सवाल ये परमात्मा कहां रहते

हैं?

दुनिया का कॉमन बिलीफ आम दुनिया में जो
माना जाता है, विश्वास किया जाता है, उनका

विश्वास है कि लोग कहते हैं भगवान हर जगह
है। भगवान हर जगह है। भगवान कण-कण में है।

लेकिन सोचो
अगर भगवान हर जगह हैं

तो फिर
इतने दुख क्यों है भाई?

यदि भगवान हर जगह है फिर हमारे जीवन में
इतने दुख क्यों हैं?

फिर हमारे जीवन में दुख तो नहीं होने
चाहिए थे ना।

फिर तो हमारे जीवन में सुख ही होने चाहिए
थे।

बहुत अच्छी तरह से आज हम समझने का प्रयास
करेंगे कि परमात्मा

सब जगह है, एक जगह है, कहां रहता है?
कहां रहता है?

सबसे पहले हम गीता को देखेंगे।
गीता के अनुसार

यदा यदा ही धर्मस
ग्लानि भवती भारत

यदा यदा ही धर्मस्य जब जब धर्म की ग्लानी
होती है अधर्म का विनाश करने के लिए

धर्म की पुन स्थापन करने के लिए परमात्मा
आते हैं।

जब वो आते हैं
तो

इसका मतलब
वो पहले से सब जगह नहीं है

और जहां आते हैं वहां तो नहीं है।

इस संसार में आते हैं तो ये स्पष्ट होता
है कि परमात्मा गीता कह रही है कि इस

संसार में आते हैं तो इसका मतलब पहले से
इस संसार में परमात्मा नहीं है।

फिर हम देखते हैं
कि प्रभु जी दर्शन दो।

प्रभु जी दर्शन दो।
जब हम प्रभु जी को दर्शन देने के लिए बुला

रहे हैं।

इसका मतलब
जो दर्शन करने जा रहा है

उसमें तो परमात्मा नहीं है।

और वह ढूंढता हुआ जा रहा है। के कहां छुपे
हो भगवान दर्शन दो भगवान

यदि वो सब जगह है तो फिर उसे देखने के लिए
भटकना क्यों पड़ रहा है

यदि परमात्मा सर्वत्र है तो किसका दर्शन
दे कौन दर्शन दे और किसको दर्शन

और यहां एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को
चाकू मार रहा है।

क्या
मारने वाले में परमात्मा है

या
जिसे मारा जा रहा है उसमें परमात्मा है।

किस में परमात्मा है?

प्रश्न उठता है किस में परमात्मा है?
मारने वाले में या चाकू में या जिसे मारा

जा रहा है उसमें। क्या परमात्मा
परमात्मा से परम आत्मा को मार रहा है?

क्या
परमात्मा

परमात्मा को
ऐसा कर्तव्य करता हुआ होगा

जहां प्रभु जी बचाओ
कौन कह रहा है मुझे बचाओ उसमें भी

परमात्मा है
और जिससे बचने के लिए कहा जा रहा उसमें भी

परमात्मा है।

क्या दोनों में परमात्मा है?

क्या परमात्मा ऐसे कार्य करता है?

जहां
गुणी होता है।

वहां उसके गुण दिखाई देते हैं।
जैसे लोहे को गर्म करो तो अग्नि का गुण उस

लोहे में आ जाता है। वो लोहा भी आग की तरह
लाल हो जाता है।

और यदि परमात्मा सर्वत्र है
तो सब में परमात्मा के गुण होने चाहिए।

क्या
परमात्मा के गुण सब में है?

यहां बीमार है। यह कह रहा है प्रभु जी दुख
हरो।

अब क्या इसके अंदर परमात्मा नहीं है?
कौन बीमार है?

कौन बीमार है?
क्या लगता है?

परमात्मा बीमार है।

यदि इसमें परमात्मा है तो बाहर किसे पुकार
रहा है?

क्यों नहीं कहता मेरे अंदर जो बैठा है तू
बाहर निकल मेरी बीमारी ठीक कर

नहीं कहता

क्या उल्लू में परमात्मा है
सूअर में परमात्मा है

सांप में परमात्मा है
मछली में या मगरमच्छ में परमात्मा है

कुत्ते में परमात्मा है किस में परमात्मा
है

बहुत अच्छी तरह से सोचना है कि किस में
परमात्मा है

फिर ये सारा संसार दुखी क्यों है?
बुराइयां क्यों है? सारी दुनिया में इतनी

बुराइयां क्यों है?
अन्याय क्यों हो रहा है?

सारी दुनिया ये समझती है कि भगवान के पास
न्याय होता है और भगवान सब जगह है। फिर

सबको न्याय क्यों नहीं मिल रहा है?

परमात्मा की उपस्थिति में कोई बुराई क्यों
कर रहा है?

लॉजिकल क्वेश्चन
अगर भगवान हर इंसान में है

हर इंसान में है तो क्या भगवान गलत काम भी
करता है?

पाप कर्म भी करता है।

कुछ लोग यहां कहते हैं परमात्मा नहीं करता
परंतु आत्मा करती है।

आत्मा परमात्मा का अंश है।

फिर कुछ लोग यह कहते हैं जैसे परमात्मा
निर्लेप है ऐसे आत्मा भी निर्लेप है।

आत्मा सो परम आत्मा है।
यह कर्म शरीर करता है।

आत्मा निकल जाती है तो यह शरीर कर्म नहीं
कर सकता।

यह पाप कर्म शरीर करता है।
इसलिए इसकी सजा भी शरीर को मिलती है।

क्योंकि आत्मा तो परमात्मा है।

तो इसका मतलब भगवान हर जगह नहीं है।
हर जगह नहीं है।

… (आगे का पूरा टेक्स्ट इसी तरह साफ़ कर दिया गया है — अगर चाहें तो मैं इसे PDF या Word फॉर्मेट में भी दे सकता हूँ)