ड्रामा-01- क्या विनाश और आरंभ अलग-अलग समय पर होते हैं?
ड्रामा का
गुह्य राज
ड्रामा का सबसे गुह राज है आज का कि हर पल
विनाश
और आरंभ
एक साथ
एक ही समय पर
कैसे हो रहा है?
विनाश भी
और स्थापना भी।
अंत भी और आरंभ भी।
एक ही समय होता है।
एक ही समय में दो सच्चाइयां
जानिए
पूरा रहस्य
ड्रामा का सबसे बड़ा रहस्य
हर पल विनाश और आरंभ कैसे
साथ हो रहा
साथसा हो रहा है।
मृत्यु के बाद जन्म और जन्म के बाद
मृत्यु। आज तक हम ऐसे कहते थे तो जन्म और
मृत्यु में कितना अंतर है?
मृत्यु में जन्म हुआ।
होने में एक सेकंड
एक सेकंड भी नहीं।
नो टाइम
जीरो डिले। ये नया शब्द याद रखना है। नो
टाइम जीरो डिले।
डिले भी जीरो।
कोई टाइम लगता है। एक ही सेकंड के अंदर
मृत्यु भी है और जन्म भी।
डिस्क्लेमर है यह वीडियो प्रजापिता
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की
शिक्षाओं पर आधारित आध्यात्मिक ज्ञान को
सरल भाषा में समझाने हेतु बनाया गया है।
यह किसी भी धर्म संप्रदाय या व्यक्ति की
आलोचना हेतु नहीं है।
इसमें प्रस्तुत विचार
आध्यात्मिक
अध्ययन एवं अनुभूति पर आधारित है।
अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी ब्रह्मा
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ड्रामा का सबसे बड़ा गुय राज
ड्रामा का सबसे बड़ा गु राज
हर पल विनाश
और आरंभ एक साथ कैसे हो रहा है?
हर पल विनाश और आरंभ एक साथ कैसे हो रहा
है?
विनाश भी और आरंभ भी एक साथ कैसे हो रहा
है?
आज हम एक ऐसे गहरे विषय को समझने जा रहे
हैं
जिसे समझ लेने के बाद
जीवन के सारे दुख समाप्त हो सकते।
आज ये राज किसी को समझ में आ गया तो उसके
जीवन के सारे दुख क्या हो सकते हैं?
समाप्त
हो सकते हैं।
क्या कभी आपने सोचा?
क्या
कभी आपने सोचा?
क्या सच में विनाश अलग समय पर होता है?
क्या सच में विनाश अलग समय पर होता है?
क्या जन्म और मृत्यु अलग-अलग घटनाएं हैं
या कुछ और ही गहरा रहस्य है या
कुछ और ही गहरा रहस्य है
जन्म और मृत्यु अलग-अलग घटनाएं हैं या एक
साथ होता है?
आज का मुख्य प्रश्न ड्रामा का सबसे बड़ा
गुय राज क्या है और कैसे हर पल विनाश और
आरंभ एक साथ हो रहा है
नंबर एक ड्रामा क्या है
बेसिक फाउंडेशन
मुरली
संदर्भ सार यह सृष्टि
एक ड्रामा है
जिसमें
हर आत्मा
एक्टर है।
हर आत्मा एक भूमिका निभा रही है। हर घटना
पूर्व निश्चित है।
हर घटना पूर्व निश्चित है। हर आत्मा एक
भूमिका निभा रही है। हर घटना पूर्व
निश्चित है।
सब कुछ नियम अनुसार हो रहा है।
सब कुछ नियम अनुसार हो रहा है।
उदाहरण
जैसे एक फिल्म होती है।
हर सीन पहले से तय होता है फिल्म में तो
यह सीन यह सीन ऐसे ऐसे होना और वह फिल्म
जितनी बार भी चलाओ
उसी टाइम पर वैसा वही का वही सीन होगा।
वैसे ही यह जीवन
एक परफेक्ट ड्रामा है। परफेक्ट ड्रामा है।
इसने भी एक्यूरेट होना है। सबसे बड़ा गुय
राज क्या है? मुरली संकेत कि हर पल विनाश
और आरंभ
साथ-साथ हो रहा है।
हर पल
विनाश और आरंभ
साथसा हो रहा है।
इसका अर्थ
एक तरफ कुछ खत्म हो रहा है।
उसी समय कुछ नया शुरू हो रहा है।
उसी समय
कुछ नया शुरू हो रहा है। मतलब परिवर्तन भी
परिवर्तन का मतलब ही यही है
कि बदल रहा है। कोई अच्छा है तो खराब हो
रहा है। खराब है तो अच्छा होता है।
जैसे कोई चीज मान लो अभी 80% है और
डिक्रीज्ड हो रही है तो थोड़ी और कम हो गई
है ना। परिवर्तन तो हो गया ना। वह सिचुएशन
कभी भी नहीं रहती।
चेंज इज द अनचेंजबल लॉ ऑफ नेचर। प्रकृति
का एक नियम है जो हर समय परिवर्तन हो रहा
है। वह परिवर्तन गिरती कला का भी हो सकता
है। वह परिवर्तन चढ़ती कला का भी हो सकता
है।
यानी एंड बराबर बिगिनिंग।
एक तरफ अंत हो रहा है तो दूसरी तरफ आरंभ
भी हो रहा है। बिगिनिंग भी हो रही है।
उदाहरण के लिए आपने एक विचार खत्म किया।
उसी क्षण नया विचार शुरू। यह प्रक्रिया हर
सेकंड चल रही है। एक संकल्प कंप्लीट हो
रहा है तो दूसरे संकल्प का आरंभ भी हो रहा
है। क्योंकि संकल्प शून्य
संकल्प रहित कोई आत्मा रह नहीं सकती।
हर आत्मा को संकल्प में तो रहना ही होगा।
जन्म और मृत्यु एक साथ कैसे?
क्योंकि अभी अभी कोई आत्मा शरीर छोड़ रही
है।
उसी सेकंड के अंदर उसी समय सेकंड भी बहुत
बड़ा टाइम है।
आत्मा ने शरीर छोड़ा
और आत्मा
आजाद होते ही तुरंत
मां के गर्भ में प्रवेश करती है।
मुरली सार हर एक्ट में जन्म और मृत्यु
दोनों है। हर एक्ट में जन्म भी है और
मृत्यु भी है।
कोई भी कर्म हम कर रहे हैं। उसमें जन्म और
मृत्यु कैसे होगी?
ये आप देख रहे हैं मॉडल को। आप तो नहीं
देख पाते। मॉडल आपने देखा हुआ है। बॉल
लटकी हुई है। एक बॉल आकर हिट कर रही है।
जो हिट कर रही है उसके उसकी तरफ से खत्म
उसका काम और दूसरे वाली आकर के फिर हिट कर
रही है। क्योंकि वह भाग रही है, दूर जा
रही है। उसके बाद वह आकर के हिट करती है।
इसलिए दोनों बॉल एक दूसरे को हिट कर रहे
हैं।
हर एक्ट में जन्म और मृत्यु दोनों है। बाल
का टकराना
और उसके बाद बाल का दूर जाना। टकराने के
साथ जो दूसरी बाल है वो हिट भी हुई और दूर
भी गई। इसी प्रकार से वह दोबारा रिटर्न
में आकर टक्कर करेगी और वापस फिर दूर चली
जाएगी।
हर जन्म एक्ट में जन्म और मृत्यु दोनों।
हां जी।
यहां हर एक्ट मतलब एक दो जन्म के बाद हो
रहा है। ना
कोई भी कर्म आप कर रहे हो
आपने जैसे ही वो कर्म किया
वो खत्म हुआ
उसकी जगह पर दूसरा कर्म जन्म हो गया।
कुछ ना कुछ और हुआ।
जो चीज वहां रखेंगे उसके अनुसार वो होगा।
हर एक्ट में जन्म और मृत्यु दोनों कोई भी
एक्ट ले लो। हां जी।
हर एक्ट में जन्म और मृत्यु दोनों
कोई एक एक्ट ऐसा बताओ जिसको हम प्रैक्टिकल
करें।
कोई भी एक्ट आपके सामने हो वो बता सकते
हैं।
जैसे हम खाना पका रहे हो। खाना पका रहे
हो। ठीक है कि नहीं? खाना पकाने के साथ हम
एक एक्शन देखते हैं। इसके अंदर जो कर्म हो
रहा है आटे का है या आपका है? क्योंकि दो
जगह दो है। दोनों का कर्म है। अब आप एक
तरफ आटे को बनाया रोटी बना रहे हैं। है
नहीं? जो आप रोटी बना रहे हैं, वह पहले
रोटी नहीं थी।
जो उसका पहले वाला रूप है वह खत्म हो रहा
है और नया रूप बन रहा है। जो खाने लायक
नहीं थी वो बन रही है।
खाने के लायक बन रही है।
हर पल परिवर्तन हो रहा है।
हर पल परिवर्तन हो रहा है।
हम सांस ले रहे हैं। एक तरफ हम सांस ले
रहे हैं और फिर दूसरी तरफ हम सांस को
छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। जैसे ही सांस
अंदर जाएगी और दूसरा सांस बाहर आएगी।
कार्बन डाइऑक्साइड हम छोड़ेंगे। ऑक्सीजन
लेंगे। कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ेंगे।
ऑक्सीजन की
समझे पुराना संस्कार खत्म हुआ
क्या हो गया मृत्यु
पुराना संस्कार खत्म
मृत्यु नए संस्कार शुरू जन्म पुराना
संस्कार हमारा हमारे जीवन से निकल रहा
होगा तो उसकी जगह पर नया संस्कार आ रहा
होगा।
उदाहरण
हां जी।
कर्मों के हिसाब से संस्कार बनते बिगड़ते
हैं।
संस्कार बनाना बुद्धि का ही काम है ना।
बुद्धि संस्कार कैसे बनाती है? उसने ऑर्डर
किया ये करो।
आपने कर दिया
तो
हो गया ना काम।
पहले तो
ओम शांति निर्णय लेगी तभी तो कुछ आगे
हां जी
निर्णय बुद्धि निर्णय लेती है तभी तो कुछ
कर पाए
हां बुद्धि निर्णय लेती है
आपको गुस्सा आया
आपने उसे छोड़ दिया
तो गुस्से की मृत्यु
शांति का जन्म
आप चुप रहे
आपने कोई प्रतिक्रिया नहीं की
तो शांत हो गया।
उसके बाद भी पार्ट है अपना
हर पल, जन्म और मृत्यु एक साथ।
क्रिया और प्रतिक्रिया का रहस्य
क्रिया और प्रतिक्रिया का रहस्य क्रिया और
प्रतिक्रिया का रहस्य
क्रिया और प्रतिक्रिया एक ही क्षण में
होती है। क्रिया भी और प्रतिक्रिया भी।
एक ही एक्शन में दोनों बराबर होते हैं।
इसका अर्थ है जो आप करते हैं वह क्रिया
है। उसका प्रभाव प्रतिक्रिया है।
दोनों साथसा होते हैं।
अगर किसी को थप्पड़ मारा
उदाहरण के लिए आप किसी को आपने किसी को
थप्पड़ मारा।
आपके लिए क्रिया
और जिसको थप्पड़ मारा उसके लिए
प्रतिक्रिया
भाई भाई जी
हां जी
मेरे को एक थप्पड़ मारूंगा भाई जी
हां
और मुंह में थप्पड़ कोई मार मुंह में मार
देंगे पर मैंने नहीं मारे भैया आपको बता
देखिए आपको किसी ने थप्पड़ मारा वो उसकी
क्रिया थी अब आपने उसे नहीं मारा यह आपकी
प्रतिक्रिया थी
मार दिया तो भी प्रतिक्रिया है
मारा तो भी प्रतिक्रिया नहीं मारा तो भी
एक्शन का रिएक्शन है। है ना? आप उसको
मारते
जी आपको आप यदि मारते
किसी भी जन्म में
चाहे अभी या किसी भी जन्म में आपने उसको
दुख दिया था। इसलिए उसने आज आपको मारा
नहीं उस टाइम
आप दुखी नहीं वे दुखी नहीं हुआ था अब आप
दुखी नहीं होंगे
ठीक है कि नहीं
तो हर आत्मा को अपना पार्ट मिला हुआ है
उसने अपने पाठ के मुताबिक चलना है
परंतु यह याद रखना है क्रिया और
प्रतिक्रिया दोनों पैरेलल साथसा चलती है
और दोनों को ही न्याय मिलता है
लेकिन दोनों एक ही समय पर हुए
कार्मिक अकाउंट का खेल
मुरली सार हर कर्म एक साथ हिसाब बराबर भी
करता है और नया बनाता
बराबर भी करता है
और नया बनाता है। इसका अर्थ पुराने कर्म
खत्म
नया कर्म शुरू
पुराने कर्म खत्म
नया कर्म शुरू।
उदाहरण आपने किसी को दुख दिया।
पुराना हिसाब खत्म हुआ नया शुरू हो गया।
क्योंकि आपने दुख दिया। क्यों दिया?
क्योंकि उसने आपको दिया हुआ था। परंतु
आपने दुख देकर लिख दिया भाई जब तेरा दिल
करे मार दिया।
ठीक।
यही है कंटीन्यूअस अकाउंटिंग सिस्टम।
क्या इस ड्रामा में अन्याय होता है?
क्या इस ड्रामा में
अन्याय होता है?
नहीं होता।
नहीं होता।
नहीं होता।
हर आत्मा को न्याय मिलता है।
मुरली में बाबा ने कहा किसी भी आत्मा के
साथ
अन्याय नहीं होता।
क्यों? हर कर्म का परिणाम तय है।
हर कर्म का परिणाम तय है।
हर आत्मा अपना हिसाब खुद बना रही है। हर
आत्मा अपना हिसाब खुद बना रही है। उदाहरण
दो लोग एक ही घटना में एक खुश हो रहा है।
उसी गणना से दूसरा दुखी हो रहा है।
टाइम एक ही है।
क्यों अलग-अलग कार्मिक अकाउंट है?
जो हमने
अलग-अलग कार्मिक हिसाब कार्म हमने अलग-अलग
किए हैं तो उसका कार्मिक हिसाब भी अलग-अलग
लिखा जाएगा।
हम परफेक्ट एक्टर हैं। सातवां पॉइंट याद
रखना है। हम परफेक्ट एक्टर हैं।
चार
हम परफेक्ट एक्टर क्यों हैं भाई?
मुरली सार
इस ड्रामा में कोई मिस्टेक नहीं होती।
इस ड्रामा में कोई मिस्टेक नहीं होती।
क्यों? कोई रिटेक नहीं होता।
दोबारा से रिकॉर्डिंग की जाए। नो चांस।
कोई रिटेक नहीं।
कोई रिहर्सल नहीं।
कोई रिटेक नहीं।
कोई वल
कोई रिसल भी नहीं।
कोई रिटेक नहीं, कोई रिहर्सल नहीं फिर भी
ड्रामा परफेक्ट। कोई गलती नहीं हो सकती।
जो हो रहा है एग्जजेक्टली परफेक्ट हो रहा
है।
उदाहरण
फिल्म में गलती होती है।
फिल्म में दुनिया वाली फिल्म में कोई गलती
हो जाए तो उसको रिटेक कर देते हैं। लेकिन
जीवन में कोई गलती हो जाए तो
उसको रीिटेक नहीं कर सकते।
यह समझ आने से क्या लाभ होगा भाई? हम इस
बात को समझ रहे हैं। कोई फायदा भी होगा।
हम परेशान नहीं होंगे।
बिल्कुल।
सबसे बड़ा लाभ दुख खत्म।
उनको बहुत अच्छी तरह से समझाना है कि आपके
दुख का कारण
सबसे बड़ा लाभ क्या होता है कि यह समझ आने
से के दुख खत्म हो जाता है।
कोई भी बात हमें दुख ही नहीं कर सकती।
मजबूर कर सकती है। वह तो एकदम हमें झुटके
में बैठाए नहीं।
उदाहरण अगर कोई आपको दुख दे यह गलत है। यह
मेरा हिसाब है।
शांति स्वीकार्यता तुरंत आ जाएगी। आपके
अंदर शांति भी आ जाएगी। फिर स्वीकार्यता
भी आ जाएगी।
पुरुषार्थ
का भिन्नभिन्न स्थान क्या है?
पुरुषार्थ का स्थान क्या है?
अगर सब फिक्स है तो मेहनत क्यों?
समझ बदल सकती है, प्रतिक्रिया भी बदल सकती
है।
समझ बदल सकती है, प्रतिक्रिया भी बदल सकती
है। कोई आपको अपमानित करे तो
गुस्सा नया दुख शांति प्रतिभा
और मुक्ति का
गुस्सा
नया दुख शांति मुक्ति
रियल पुरुषार्थ
जीवन में इसे कैसे लागू किया करें
हर स्थिति में सोचे
कि यह भी ड्रामा है।
ये भी हिसाब किताब है।
अभ्यास
अपने आप को रोको
ऑब्जर्व करो फिर प्रतिक्रिया करो
वो एक्शन परमात्मा की याद का एक्शन
जो है ना बन जाता है एकदम
सभी उसको इजीली
एक्सेप्ट भी कर लेते
तो क्या करना है हमें? पॉज करना है, रुकना
है, ऑब्जर्व करना है, समझना है और फिर
रिएक्ट करना है, प्रतिक्रिया करनी है।
धीरे-धीरे आप ड्रामा के खिलाड़ी बन जाओगे।
पीड़ित नहीं।
पावरफुल कंक्लूजन जीवन में जो कुछ भी हो
रहा है
वो अलग-अलग नहीं है। कोई भी एक्ट अलग नहीं
है।
अलग-अलग नहीं है। सब कुछ एक साथ हो रहा
है। एक ही क्षण में हो रहा है।
याद रखो हर पल विनाश
हर पल संगम युग
याद रखो हर पल
विनाश हर पल अरब
यही है ड्रामा की का सबसे बड़ा गुरा राज
फाइनल टेक अवे अब से शिकायत नहीं समझ नहीं
समझ रखो
अब से अपने पास कोई शिकायत नहीं रखो।
सिर्फ क्या रखो? समझ।
क्यों? क्योंकि कुछ खत्म हो रहा है तो कुछ
नया शुरू हो रहा है।
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ओम
शांति हर कमेंट में लिखो
मैं ड्रामा को समझकर खुश रहूंगा।


