प्रश्न का मन्थन- सच्चेभाई बहन कौन?दुनिया नहीं समझ पाई यह राज !
भाई बहन हो।
लेकिन
दुनिया में तो भाई बहन भी झगड़ते हैं।
रिश्ते भी टूटते हैं।
फिर सच्चा भाई बहन कौन?
आज का मुख्य प्रश्न हम आत्माएं
भाई भाई कैसे हैं?
ब्रह्मा कुमारीज सच्चे भाई-बहन क्यों है?
और यह ज्ञान इतना विशेष क्यों है?
सामान्य व्यक्ति की सोच
कॉमन परस्पेक्टिव है कि एक सामान्य
व्यक्ति रिश्तों को कैसे देखता है।
यह मेरा परिवार यह मेरा भाई, यह मेरा
संबंध, उदाहरण यह मेरा बेटा है। यह मेरी
बहन है। यानी रिश्ते शरीर आधारित। रिश्ते
कैसे हैं? शरीर पर आधारित है।
समस्या क्या है? अटैचमेंट
एक्सपेक्टेशन
दुख
क्योंकि अटैचमेंट है
ये मेरी बहन है।
उससे फिर एक्सपेक्टेशंस है कि मेरे लिए
कुछ करें।
दुख [गला साफ़ करने की आवाज़] उनसे फिर
क्या मिलता है? दुख।
इसलिए जब रिश्ता टूटता है तो दुख होता है।
तो क्या होता है? दुख होता है।
तर्कसंगत व्यक्ति की सोच लॉजिकल
प्रोस्पेक्टिव है। अब एक तर्कसंगत व्यक्ति
सवाल करेगा। क्या हम वास्तव में शरीर हैं?
क्या हम वास्तव में शरीर हैं?
उत्तर नहीं। हम आत्मा हैं। हम आत्मा हैं।
हम कौन है? हम आत्मा हैं।
अब आगे सोचे
सभी आत्माएं
चैतन है।
सभी आत्माएं
चैतन हैं।
सभी आत्माएं
एक ही स्रोत्र से आई हैं।
सभी आत्माएं कहां से आई हैं? परमधाम से आई
हैं।
तो निष्कर्ष
हम सब एक ही परिवार के हैं। हम सब क्या
हैं? एक ही परिवार के हैं।
यानी यूनिवर्सल ब्रदरहुड।
यूनिवर्सल ब्रदरहुड। हम एक ही परमात्मा के
बच्चे हैं।
यूनिवर्सल ब्रदरहुड के साथ
बाबा का महावाक्य
आत्मिक सत्य
मुरली महावाक्य सार हे आत्माएं तुम सब एक
परमपिता शिव के बच्चे हो।
इसलिए भाई भाई हो।
इसका अर्थ परम आत्मा एक
आत्माएं
अनेक
इसलिए
सभी आत्माएं भाई भाई
यहां जेंडर नहीं
स्त्री पुरुष नहीं केवल
आत्मा है। आत्मा ना स्त्री होता है। आत्मा
ना पुरुष होता है।
शरीर स्त्री और पुरुष का होता है। परंतु
आत्मा स्त्री या पुरुष नहीं होता है।
इसलिए हम सभी आत्माएं
भाई भाई है।
और फिर भाई बहन कहां से आया?
फिर भाई बहन कहां से आया?
अब सबसे महत्वपूर्ण बात
मुरली संकेत तुम प्रजापिता
ब्रह्मा की संतान हो।
इसलिए ब्राह्मण हो
भाई बहन हो। ब्रह्मा कुमार ब्रह्मा कुमारी
भाई-बहन
इसका अर्थ यह एक विशेष अवस्था है। यह एक
विशेष अवस्था है। तीन प्रकार के संबंध है।
नंबर एक लौकिक
फिजिकल
शरीर से जुड़ते रिश्ते
अस्थाई
टेंपरेरी।
दूसरा है पारलौकिक
स्पिरिचुअल
आत्मा और परम आत्मा परमानेंट
लौकिक क्या है
लौकिक क्या है अस्थाई
और
पारलौकिक क्या है परमानेंट वो टेंपरेरी
माता-पिता
और ये परमानेंट पिता परमात्मा
हम सब आत्माओं का परमानेंट पिता है। हर
कल्प का पिता है। परंतु शरीर का पिता तो
टेंपरेरी है। शरीर का पिता तो क्या है?
टेंपरेरी है। अलौकिक
कॉन्फ्लुएंस इज
संगम युग पर।
यह एक अलौकिक जन्म होता है।
ब्रह्मा बाबा की संतान
इसलिए ब्राह्मण ब्रह्मा कुमार ब्रह्मा
कुमारी भाई बहन
ये केवल
संगम युग पर
जो ब्रह्मा कुमारीज
ईश्वरीय विश्वविद्यालय में
आते हैं।
ब्रह्मा की संतान बनते हैं।
ब्रह्मा को शिव बाबा को दोनों बाप को अडॉप
करते हैं।
दो बाप को अडॉप करते हैं।
सच्चे भाई बहन
बनने की आध्यात्मिक कसौटी
आध्यात्मिक
कसौटी
इस पूरे विषय का को गहराई से समझने के बाद
एक अत्यंत महत्वपूर्ण
प्रश्न सामने आता है।
क्या केवल
हम सब
भाई बहन हैं।
मान लेना ही पर्याप्त है।
[गला साफ़ करने की आवाज़]
मान लेना ही पर्याप्त है।
उत्तर है नहीं। केवल हम सब भाई बहन हैं।
मान लेना ही काफी है। पर्याप्त है।
पुरुष है वो भाई हैं। स्त्री है वो बहने
हैं। ऐसा मान लेना पर्याप्त है।
नहीं।
बाबा स्पष्ट करते हैं कि तुम सच्चे भाई
बहन तभी हो
जब तुम परमपिता
परम आत्मा की श्रीमत पर पूरा पूरा चलते हो
और सच्चे ब्राह्मण बनते
और सच्चे
ब्राह्मण बनते हो।
इसका गहरा अर्थ यह है कि सच्चा भाई बहन
होना एक संबंध नहीं
बल्कि एक आध्यात्मिक
स्थिति है। स्पिरिचुअल स्टेज है। यह नहीं
कि हमने ब्रह्मा बाबा को अपना बाबा कहा
है। हम ब्रह्मा कुमारी सेंटर पर मुरली
सुनते हैं।
हम ब्रह्मा कुमार ब्रह्मा कुमारी हैं।
नहीं
है
क्या करें अब? कैसी ऐसी बातें करता है
बाबा? सच्चे ब्राह्मण की पहचान क्या है?
देह से न्यारा रहता है।
वह है सच्चा ब्राह्मण।
सच्चा ब्राह्मण वे है जो स्वयं को आत्मा
समझता है।
स्वयं को आत्मा समझता है।
देह का उपयोग करता है लेकिन उसमें फंसता
नहीं है।
परमात्मा की श्रीमत पर जीवन जीता है।
अर्थात
वे देह अभिमान से मुक्त होकर आत्मिक
चेतना में स्थित रहता है। आत्मिक
चेतना में क्या रहता है? स्थित रहता है।
झूठे भाई बहन कौन है? बाबा यह भी संकेत
देते हैं। यह भी इशारा देते हैं कि यदि
आत्मा देह अभिमान में है और झूठी माया
झूठे संसार को भोगता है तो वे झूठे भाई
बहन की श्रेणी में आते।
वे झूठे भाई बहन की श्रेणी में आते हैं।
इसका अर्थ जब हम शरीर को ही मैं मानते
हैं। जब हम शरीर को ही मैं मानते हैं। जब
हम संबंधों में आसक्ति,
अपेक्षा और आकर्षण रखते हैं। जब हम माया
के प्रभाव में जीते हैं
तब हमारा संबंध आत्मिक नहीं बल्कि देह
आधारित और अस्थाई बन जाता है और अस्थाई बन
जाता है।
स्पष्ट तुलना आधार
स्पष्ट तुलना आधार
सच्चा भाई बहन ब्राह्मण अवस्था
झूठा संबंध देह अभिमान
पहचान मैं आत्मा हूं
और देहबान वाले को क्या होता है मैं शरीर
हूं
दृष्टि जो आत्मा वाले आत्मा जो रूहानी भाई
बहन है ब्राह्मण है वो वो आत्मिक दृष्टि
से देखेंगे
और जो झूठे भाई बहन हैं वो देह आधार से
देखेंगे।
संबंध
जो सच्चे ब्राह्मण हैं वह पवित्र और
निष्काम होंगे और जो झूठे भाई बहन हैं वे
आसक्ति और अपेक्षा रखेंगे एक दूसरे से।
अनुभव शांति प्रेम स्थिरता
जो सच्चे होंगे उनमें होगी शांति प्रेम
स्थिरता और जो झूठे होंगे उनमें होगा दुख
खिंचाव और अशांति
सरल उदाहरण दो व्यक्ति एक ही आध्यात्मिक
परिवार में है।
सर उदाहरण दिया है। दो व्यक्ति एक ही
आध्यात्मिक परिवार में है। पहला व्यक्ति
सभी को आत्मा समझकर देखता है। शुद्ध
दृष्टि
दूसरा व्यक्ति देह रूप और व्यवहार से
प्रभावित होता है। अशुद्ध दृष्टि परिणाम
पहला सच्चा भाई-बहन पहला क्या है? सच्चा
भाई-बहन
दूसरा केवल नाम मात्र का संबंध। झूठा
संबंध टेंपरेरी संबंध, गहरा निष्कर्ष।
सच्चा भाई-बहन होना कोई सामाजिक पहचान
नहीं।
सच्चा भाई-बहन होना कोई सामाजिक पहचान
नहीं है।
बल्कि यह आत्मिक स्थिति का परिणाम है।
बल्कि यह आत्मिक स्थिति का परिणाम है। हम
सच्चे भाई-बहन
तब बनते हैं जब हम स्वयं को आत्मा समझकर
देह से न्यारे रहकर परमपिता परमात्मा की
श्रीमत पर चलते हैं।
अन्यथा हम भी उसी झूठी माया और
झूठे संसार के संबंधों में उलझे हुए झूठे
भाई-बहन
बन जाते हैं। झूठे भाई-बहन
बन जाते हैं।
कैसे उपयोग करें? गाइडेंस
सच्चे सच्चे भाई बहन
क्यों कहा?
सच्चे सच्चे भाई-बहन
क्यों कहा?
बाबा सच्चे सच्चे शब्द क्यों जोड़ते हैं?
क्योंकि यह संबंध शरीर से नहीं आत्मा से
है।
यहां संबंध शरीर से नहीं आत्मा से है।
तुलना करें। दुनिया में
भाई बहन भी लड़ते हैं।
स्वार्थ होता है। क्या होता है? स्वार्थ
होता है।
यहां पवित्रता
आत्मिक दृष्टि कोई विकार नहीं। यहां
पवित्रता
आत्मिक दृष्टि कोई विकार नहीं।
इसलिए यह सच्चा संबंध है।
नोट यदि विकार है तो वह ब्रह्मा कुमार
ब्रह्मा कुमारी भी नहीं है।
यह दृष्टि क्यों जरूरी है?
यह दृष्टि क्यों जरूरी है? क्योंकि हमारी
सारी समस्याएं कहां से आती हैं?
देह अभिमान से,
अटैचमेंट से जब हम आत्मा को देखते हैं
सम्मान,
शांति, समानता।
उदाहरण कोई आपको गुस्सा दिलाए। कोई आपको
गुस्सा दिलाए।
पहले यह व्यक्ति गलत है।
पहले यह व्यक्ति गलत है। अब बाबा के बच्चे
बन गए। अब वो आत्मा यदि हमें गुस्सा
दिलाती है तो हमारी बुद्धि में क्या आता
है? यह आत्मा
है। उसका यह संस्कार है। उसका संस्कार है।
हम उसके बारे में कोई निर्णय करने वाले
नहीं है। यह उसका संस्कार है।
परिणाम शांति।
हमने उसको गलत समझा तो उसका परिणाम क्या
निकला? दुख। अशांति हमने उसको आत्मा समझा
उसका पाठ समझा तो उसका परिणाम क्या मिला?
शांति।
ब्रह्मा कुमारीज की विशेषता
बाबा क्यों कहते हैं? तुम सच्चे भाई-बहन
हो। तुम सच्चे भाई बहन हो।
क्योंकि
यहां पवित्रता का नियम है। यहां दृष्टि
शुद्ध है। यहां पवित्रता का नियम है। यहां
दृष्टि शुद्ध है।
यहां संबंध आत्मिक है। इसलिए यह दुनिया का
सबसे पवित्र संबंध है। ये दुनिया का सबसे
पवित्र संबंध है।
इसका जीवन में अभ्यास कैसे करें?
रोज अभ्यास करें। मैं
आत्मा हूं।
सामने वाला आत्मा है। हम एक ही पिता की
संतान हैं। हम एक ही पिता की संतान हैं।
उदाहरण ऑफिस में परिवार में
हर जगह
ऑफिस में परिवार में हर जगह
सोल कॉन्शियस विजन हमारा जो दृष्टिकोण है
वह कैसा होगा आत्मिक
स्थिति का आत्म चेतना का आत्मा चेतना के
हिसाब से हम देखेंगे हालांकि चेतना आत्मा
को ही कहा जाता है। क्या इससे जीवन बदल
सकता है? हां पूरी तरह परिणाम गुस्सा कम
दुख कम प्रेम बढ़ता है क्योंकि अब हम शरीर
नहीं देख रहे आत्मा देख रहे हैं अब हम
शरीर नहीं देख रहे आत्मा देख रहे हैं बस
अंतिम गहरा रास
तीन स्तर याद रखें। नंबर एक आत्मा स्तर
भाई भाई। आत्मिक दृष्टि से हम सभी आत्माएं
भाई भाई हैं।
ब्राह्मण स्तर भाई-बहन
शरीर स्तर लौकिक सभी रिश्ते।
यह भाई बहन वाला ब्राह्मण स्तर में अलौकिक
रिश्ता है। जिसमें आत्मा समझकर व्यवहार
में आते हैं। परंतु पहले वाले में व्यवहार
में हम भाई भाई की दृष्टि से आए जब हम
अपने को आत्मा समझेंगे।
परमात्मा की संतान समझेंगे।
लेकिन सच्चा संबंध
आत्मिक संबंध है। परमानेंट संबंध है कि हम
सब आत्माएं
भाई भाई हैं।
पावर कंक्लूजन हमें शरीर हम शरीर नहीं हम
आत्मा हैं। और
हम सब शिव बाबा की संतान हैं। इसलिए हम
भाई भाई हैं।
और ब्रह्मा बाबा की संतान होने से हम
सच्चे भाई बहन हैं।
फाइनल टेक अवे
से देह नहीं देखना।
आत्मा देखना
जो बीत गया वह मेरे हाथ में है क्योंकि
दृष्टि बदलती है तो दुनिया बदल जाती है।
अगर आपको यह ज्ञान अच्छा लगा
तो लाइक करें, सब्सक्राइब करें, शेयर करें
और कमेंट में लिखें हम सब आत्माएं
भाई भाई हैं।


