Short Questions & Answers Are given below (लघु प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
यादगार कायम करने की विधि – २५-०१-१९७०
देखा जाता है इस रीति नहीं खींचेगा तो फिर ढीला छोड़ना चाहिए | जिससे वह स्वयं खींचेगा |विघ्नों को मिटाने की युक्तियाँ अगर सदैव याद हैं तो पुरुषार्थ में ढीले नहीं होंगे | युक्तियाँ भूल जाते हैं तो पुरुषार्थ में ढीला हो जाता है | एक एक बात के लिए कितनी युक्तियाँ मिली हैं ? प्राप्ति कितनी बड़ी है और रास्ता कितना सरल है | जो अनेक जन्म पुरुषार्थ करने पर भी कोई नहीं पा सकते | वह एक जन्म के भी कुछ घड़ियों में प्राप्त कर रहे हो | इतना नशा रहता है ना! “इच्छा मात्रं अविद्या” ऐसी अवस्था प्राप्त करने का तरीका बताया | ऐसी ऊँची नॉलेज और कितनी महीन है | जीवन में इतना ऊँचा लक्ष्य कोई रख नहीं सकता कि मैं देवता बन सकता हूँ | यह कब सोचा था कि हम ही देवता थे ? सोचा क्या था और बनते क्या हो ? बिन मांगे अमूल्य रत्न मिल जाते हैं | ऐसे पद्मापद्म भाग्यशाली अपने को समझते हो ? प्रेसिडेंट आदि भी आपके आगे क्या हैं ? इतनी ऊँची दृष्टि, इतना ऊँचा स्वमान यद् रहता है कि कब भूल भी जाते हो ? स्मृति-विस्मृति की चढ़ाई उतारते चढ़ते हो ? गन्दगी से मछर आदि प्रगट होते हैं इसलिए उनको हटाया जाता है | वैसे ही अपनी कमजोरी से माया के कीड़े पकड़ लेते हैं | कमज़ोरी को आने न दो तो माया आयेगी नहीं | सदैव यह यद् रखो कि सर्वशक्तिवान के साथ हमारा सम्बन्ध है | फिर कमजोरी क्यों ? सर्वशक्तिवान बाप के बच्चे होते भी माया की शक्ति को खलास नहीं मर सकते | एक बात सदैव याद रखो कि बाप मेरा सर्वशक्तिवान है | हम सभी से श्रेष्ठ सूर्यवंशी हैं | हमारे ऊपर माया कैसे वार कर सकती है | अपना बाप, अपना वंश यद् रखेंगे तो माया कुछ भी नहीं कर सकेगी | स्मृति स्वरुप बनना है | इतने जन्म विस्मृति में रहे फिर भी विस्मृति अच्छी लगती है ? ६३ जन्म विस्मृति में धोखा खाया, अब एक जन्म के लिए धोखे से बचना मुश्किल लगता है ? अगर बार-बार कमज़ोर बनते, चेकिंग नहीं रखते तो फिर उनकी नेचर ही कमज़ोर बन जाती है | अवस्था चेक कर अपने को ताक़तवर बनाना है, कमजोरी को बदल शक्ति लानी है |
अभी जो बैठे हैं वह अपे को सूर्यवंशी सितारे समझते हो ? सूर्यवंशी सितारों का क्या कर्त्तव्य है ? सूर्यवंशी सितारा माया के अधीन हो सकते हैं ? सभी मायाजीत बने हो ? बने हैं वा बनना है ? मायाजीत का टाइटल अपने ऊपर धारण किया है ? युगल में भी एक कहते हैं कि मायाजीत बन रहे हैं और एक कहते हैं कि बन गए हैं | एक ही पढाई, एक ही पढ़नेवाला, फिर भी कोई विजयी बन गए हैं, कोई बन रहे हैं, यह फर्क क्यों ? अगर अब तक भी त्रुटियाँ रहेंगी तो त्रुटियों वाले त्रेता युग के बन जायेंगे | और जो पुरुषार्थी हैं वह सतयुग के बनेंगे | पहले से ही पूरा अभ्यास होगा तो वह अभ्यास मदद देगा | अगर ऐसा ही अभ्यास रहा, कभी विस्मृति कभी स्मृति तो अंत समय भी विस्मृति हो सकती है | जो बहुत समय के संस्कार होते हैं वाही अंत की स्थिति रहती है | लौकिक रीति से जब कोई शरीर छोड़ते हैं, अगर कोई संस्कार दृढ़ होता है, खान-पान वा पहनने आदि का तो पिछाड़ी समय भी वह संस्कार सामने आता है | इसलिए अभी से लेकर सदैव स्मृति के संस्कार भरो | तो अंत में यही मददगार बनेंगे – विजयी बनने में | स्टूडेंट बहुत समय की पढाई ठीक नहीं पढ़ते हैं तो पेपर ठीक नहीं दे सकते | बहुत समय का अभ्यास चाहिए | इसलिए अब ये विस्मृति के अथवा हार खाने के संस्कार मिट जाने चाहिए | अभी वह समय आ गया | क्योंकि साकार रूप में सम्पूर्णता का सबूत देखा | साकार सम्पूर्णता को प्राप्त कर चुके, फिर आप कब करेंगे ? समय की घंटी बज चुकी है | फिर भी घंटी बजने के बाद अगर पुरुषार्थ करेंगे तो क्या होगा ? बन सकेंगे ? पहली सीटी बज चुकी है | दूसरी भी बज गयी | पहली सीटी थी साकार में माँ की और दूसरी बजी साकार रूप की | अब तीसरी सीटी बजनी है | दो सीटी होती हैं तैयार करने की और तीसरी होती है सवार हो जाने की | दो घंटी इत्तलाव की होती हैं | तीसरी इत्तलाव की नहीं होती है | तीसरी होती है सवार हो जाने की | तीसरी में जो रह गया सो रह गया | इतना थोडा समय है फिर क्या करना चाहिए ? अगर तीसरी सीटी पर संस्कारों को समेटना शुरू करेंगे तो फिर रह जायेंगे | सुनाया था ना कि पेटी बिस्तर कौन-सा है | व्यर्थ संकल्पों रूपी बिस्तरा और अनेक समस्याओं की पेटी दोनों ही बंद करनी है | जब दोनों ही समेत कर तैयार होंगे तब जा सकेंगे | अगर कुछ रह गया तो बुद्धियोग ज़रूर उस तरफ जायेगा | फिर सवार हो न सकेंगे अर्थात् विजयी बन नहीं सकेंगे | अब इसे क्या करना पड़े ? कब कर लेंगे यह `कब’ शब्द को निकाल दो | `अब’ शब्द को धारण करो | कब कर लेंगे, धीरे-धीरे करेंगे | ऐसे सोचनेवाले दूर ही रह जायेंगे | ऐसा समय अब पहुँच गया है | इसलिए बापदादा सुना देते हैं फिर कोई उलहना न दे | समय का भी आधार रखना है | अगर समय के आधार पर ठहरे तो प्राप्ति कुछ नहीं होगी | समय के पहले बदलने से अपने किये का फल मिलेगा | जो करेगा वह पायेगा | समय प्रमाण किया, वह तो समय की कमाल हुई | अपनी मेहनत करनी है |
बाप का बच्चों पर स्नेह होता है | तो स्नेह की निशानी है सम्पूर्ण बनना | चल तो रहे हैं लेकिन स्पीड को भी देखना है | अभी सम्पूर्णता का लक्ष्य रखना है तब सम्पूर्ण राज्य में आएंगे | कोई कमी रह गयी तो सम्पूर्ण राज्य नहीं पाएंगे | जितनी ज्यादा प्रजा बनायेंगे उतना नजदीक में आयेंगे | दूर वाले तो दूर ही देखने आएंगे | नजदीक वाले हर कार्य में साथ रहेंगे | नंबरवन शक्तियां हैं वा पाण्डव हैं ? दुसरे को आगे बढ़ाना यह भी तो खुद आगे बढ़ना है | आगे बढ़ानेवाले का नाम तो होगा ना | बीच-बीच में चेकिंग भी चाहिए | हर कार्य करने के पहले और बाद में चेकिंग करते रहो | जब कार्य शुरू करते हो तो देखो उसी स्थिति में रह कार्य शुरू कर रहा हूँ ? फिर बिच में भी चेकिंग करते रहो | कितना समय याद रही ? कार्य के शुरू में चेकिंग करने से वह कार्य भी सफल होगा और स्थिति भी एकरस रहेगी | सिर्फ़ रात को चार्ट चेक करते तो सारा दिन तो ऐसे ही बीत जाता है | लेकिन हर कर्म के हर घंटे में चेकिंग चाहिए | अभ्यास पद जाता है तो फिर वह अभ्यास अविनाशी हो जाता है | हिम्मत रखने से फिर सहज हो जायेगा | मुश्किल सोचेंगे तो मुश्किल फील होगा | अपने पुरुषार्थ को कब तेज़ करेंगे, अभी समय ही कहाँ है |
सारे कल्प की तकदीर इस घडी बनानी है | ऐसे ध्यान देकर चलना है | सारे कल्प की तकदीर बनने का समय अब है | इस समय को अमूल्य समझ कर प्रयोग करो तब सम्पूर्ण बनेंगे | एक सेकंड में पद्मों की कमाई करनी है | एक सेकंड गँवाया गोया पद्मों की कमाई गंवायी, अटेंशन इतना रखेंगे तो विजयी बनेंगे | एक सेकंड भी व्यर्थ नहीं गँवाना है | संगम का एक सेकंड भी बहुत बड़ा है | एक सेकंड में ही क्या से क्या बन सकते हो | इतना हिसाब रखना है |