Short Questions & Answers Are given below (लघु प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
आत्मा, सूक्ष्म शरीर और स्थूल शरीर में अंतर(Difference between soul, subtle body and gross body)
आत्मा का स्वरूप
आत्मा एक अति सूक्ष्म चमकता हुआ सितारा है। आत्मा को न तो देखा जा सकता है और न ही नापा जा सकता है, केवल बुद्धि और विवेक के द्वारा इसका अनुभव किया जा सकता है। हम समझ सकते हैं कि आत्मा एक छोटे सितारे के रूप में होती है, जिसे केवल मन के अनुभव और अंतरात्मा के विवेक से महसूस किया जा सकता है।
सूक्ष्म शरीर का स्वरूप
सूक्ष्म शरीर को ‘लाइट का शरीर’ कहा जाता है। इसे फरिश्ता स्वरूप भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोई आवाज नहीं होती; यह एक मूक फिल्म की तरह है। सूक्ष्म शरीर को देख सकते हैं, लेकिन इसे वही आत्मा देख सकती है जिसका किसी अन्य आत्मा के साथ कोई कार्मिक बंधन बाकी है। यह संबंध उस आत्मा के साथ होता है जिसके साथ आत्मा का अधूरा कर्म होता है। सूक्ष्म शरीर को स्वप्न में देखे गए शरीर की तरह समझ सकते हैं।
स्थूल शरीर का स्वरूप
स्थूल शरीर हड्डी और मांस का बना होता है और इसे भौतिक रूप से देखा और अनुभव किया जा सकता है। आत्मा के लिए स्थूल शरीर आवश्यक है, क्योंकि आत्मा बिना शरीर के भौतिक कार्य नहीं कर सकती।
सूक्ष्म शरीर का उद्देश्य और भूमिका
जब किसी आत्मा को अपने किसी कर्म बंधन को पूरा करना होता है जिसे वह स्थूल शरीर से नहीं कर सकती, तब वह सूक्ष्म शरीर के रूप में प्रकट हो सकती है। यह केवल उसी आत्मा को दिखती है जिसके साथ उसका कर्म बंधन बाकी होता है। सूक्ष्म शरीर के माध्यम से आत्मा स्वप्न और फिल्म जैसी घटनाओं का निर्माण कर सकती है, परंतु इसे छूना या पकड़ना संभव नहीं है।
आत्मा का शरीर बदलना
आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में गति कर सकती है। मृत्यु के समय आत्मा पुराना शरीर छोड़कर तुरंत नए गर्भ में प्रवेश कर जाती है, जहां वह अपने नए शरीर की रचना स्वयं करती है। लगभग तीन महीने का गर्भ पहले से तैयार होता है, जिसमें आत्मा अपना नवजीवन शुरू करती है।
निष्कर्ष
बिना स्थूल शरीर के आत्मा भौतिक कार्य नहीं कर सकती, जबकि सूक्ष्म शरीर एक माध्यम है जिसके द्वारा आत्मा कुछ विशेष कर्मों को पूरा करती है। स्थूल शरीर आत्मा का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो उसे भौतिक जगत में कार्य करने में सहायक होता है।
प्रश्न-उत्तर:
आत्मा, सूक्ष्म शरीर और स्थूल शरीर में अंतर
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प्रश्न: आत्मा का स्वरूप क्या है?
उत्तर: आत्मा एक अति सूक्ष्म चमकता हुआ सितारा है, जिसे देखा या नापा नहीं जा सकता, परंतु बुद्धि और विवेक से अनुभव किया जा सकता है।
- प्रश्न: सूक्ष्म शरीर को क्या कहा जाता है और उसका स्वरूप कैसा होता है?
उत्तर: सूक्ष्म शरीर को ‘लाइट का शरीर’ या फरिश्ता स्वरूप कहा जाता है, जिसमें कोई आवाज नहीं होती और यह मूक फिल्म की तरह होता है।
- प्रश्न: स्थूल शरीर किससे बना होता है और इसकी क्या विशेषता है?
उत्तर: स्थूल शरीर हड्डी और मांस से बना होता है, जिसे भौतिक रूप में देखा और अनुभव किया जा सकता है। यह आत्मा के भौतिक कार्यों के लिए आवश्यक है।
- प्रश्न: सूक्ष्म शरीर कब प्रकट होता है?
उत्तर: जब आत्मा को अपने किसी कर्म बंधन को पूरा करना होता है, जिसे वह स्थूल शरीर से नहीं कर सकती, तब वह सूक्ष्म शरीर के रूप में प्रकट होती है।
- प्रश्न: सूक्ष्म शरीर को कौन देख सकता है?
उत्तर: सूक्ष्म शरीर केवल उसी आत्मा को दिखता है जिसके साथ उसका कोई अधूरा कर्म बंधन होता है।
- प्रश्न: मृत्यु के समय आत्मा का शरीर बदलने की प्रक्रिया क्या होती है?
उत्तर: मृत्यु के समय आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नए गर्भ में प्रवेश कर जाती है, जहाँ वह अपने नए शरीर का निर्माण करती है।
- प्रश्न: बिना स्थूल शरीर के आत्मा क्या कार्य नहीं कर सकती?
उत्तर: आत्मा बिना स्थूल शरीर के भौतिक कार्य नहीं कर सकती।