Divine Health/(14)

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Divine Health/(14)”दिव्य स्वास्थ्य व्रत के अद्भुत फायदे | शरीर, मन और आत्मा की संपूर्ण सफाई का रहस्य”


प्रस्तावना

भाइयों और बहनों,
दुनिया में लोग अलग-अलग कारणों से उपवास रखते हैं – धार्मिक, स्वास्थ्य या मानसिक शांति के लिए।
लेकिन क्या आप जानते हैं, उपवास का असली लाभ केवल पेट खाली करने में नहीं,
बल्कि शरीर, मन और आत्मा की गहरी सफाई में है।


1. उपवास – प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया

  • उपवास शरीर के लिए एक प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया है।

  • लंबे समय तक उपवास में शरीर अपने भंडार से भोजन लेना शुरू कर देता है।

  • जब आवश्यक पोषक तत्व बाहर से नहीं मिलते,
    तो शरीर ऑटोलाइसिस प्रक्रिया से पुरानी, रोग-ग्रस्त और मृत कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है।

  • वह वेस्ट को बेस्ट में बदल देता है।

उदाहरण

जैसे घर की सफाई करते समय हम बेकार चीजें निकालते हैं
ताकि नई और उपयोगी वस्तुएं रखी जा सकें।


2. रोग-ग्रस्त कोशिकाओं का नाश

  • शरीर सबसे पहले उन्हीं ऊतकों को तोड़ता है जो हानिकारक हैं।

  • परिणामस्वरूप शरीर हल्का, स्वच्छ और ऊर्जा से भरपूर महसूस करता है।


3. महत्वपूर्ण अंगों का कायाकल्प

  • उपवास के दौरान हृदय, यकृत, मस्तिष्क और तंत्रिकाएं मजबूत और स्वस्थ हो जाते हैं।

  • कई पुराने रोगों में चमत्कारिक सुधार देखा गया है।

उदाहरण

जैसे पुराना कंप्यूटर रिस्टार्ट करने पर तेज चलने लगता है,
वैसे ही शरीर भी उपवास से रिसेट हो जाता है।


4. नई कोशिकाओं का निर्माण

  • कमजोर कोशिकाओं से निकले अमीनो एसिड नई और स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण में उपयोग होते हैं।

  • त्वचा में निखार आता है, रंग साफ होता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।


5. विषाक्त पदार्थों का निष्काशन

  • उपवास के दौरान उन्मूलन अंग जैसे फेफड़े, यकृत, गुर्दे, त्वचा पाचन के बोझ से मुक्त हो जाते हैं।

  • जमा हुए टॉक्सिन्स को तेजी से बाहर निकालते हैं।

उदाहरण

जैसे फैक्ट्री की मशीन मेंटेनेंस मोड में सफाई और रिपेयर का काम करती है,
वैसे ही शरीर उपवास के दौरान रिपेयर और मेंटेनेंस करता है।


6. पाचन और पोषण क्षमता में सुधार

  • उपवास के बाद शरीर भोजन को बेहतर तरीके से पचाता और अवशोषित करता है।

  • कम भोजन में भी अधिक पोषण मिलता है और पाचन संबंधी परेशानियां कम होती हैं।


7. मन और आत्मा पर प्रभाव

  • उपवास मन को शांत करता है और विचारों की गति धीमी करता है।

  • ध्यान और आत्मिक अभ्यास गहरा होता है।

मुरली ज्ञान

  • 15 जुलाई 1998 – शरीर की सफाई तो मन की सफाई के लिए है। पवित्रता में ही असली स्वास्थ्य है।

  • 2 सितंबर 2004 – व्रत का सबसे बड़ा अर्थ है आत्मा को विकारों से दूर रखना।

  • 21 अगस्त 2010 – जब आत्मा स्वच्छ है, तो शरीर की सेवा अपने आप सुधर जाती है।


समापन संदेश

भाइयों और बहनों,
व्रत केवल पेट की सफाई नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की संपूर्ण चिकित्सा है।

अगर हम उपवास के साथ परमात्मा का सिमरन जोड़ दें
तो यह प्रक्रिया और भी शक्तिशाली बन जाती है।

शरीर शुद्ध, मन शांत और आत्मा शक्तिशाली।

Q1: उपवास को प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया क्यों कहा जाता है?

A1: क्योंकि उपवास के दौरान शरीर अपने भंडार से भोजन लेना शुरू कर देता है और
पुरानी, रोग-ग्रस्त व मृत कोशिकाओं को ऑटोलाइसिस प्रक्रिया द्वारा नष्ट करता है।
यह वेस्ट को बेस्ट में बदल देता है।


Q2: क्या उपवास से शरीर की पुरानी और हानिकारक कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं?

A2: हां। उपवास के समय शरीर सबसे पहले उन्हीं ऊतकों को तोड़ता है जो हानिकारक हैं।
इससे शरीर हल्का, स्वच्छ और ऊर्जा से भरपूर महसूस करता है।


Q3: क्या उपवास महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित करता है?

A3: हां। उपवास के दौरान हृदय, यकृत, मस्तिष्क और तंत्रिकाएं मजबूत और स्वस्थ हो जाते हैं।
पुराने रोगों में भी चमत्कारिक सुधार देखा गया है।
जैसे पुराना कंप्यूटर रिस्टार्ट करने पर तेज चलने लगता है,
वैसे ही शरीर उपवास से रिसेट हो जाता है।


Q4: क्या उपवास से नई कोशिकाओं का निर्माण संभव है?

A4: हां। कमजोर कोशिकाओं से निकले अमीनो एसिड नई और स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण में उपयोग होते हैं।
इससे त्वचा में निखार आता है, रंग साफ होता है और मानसिक स्पष्टता भी बढ़ती है।


Q5: क्या उपवास शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है?

A5: बिल्कुल। उपवास के दौरान फेफड़े, यकृत, गुर्दे और त्वचा जैसे उन्मूलन अंग पाचन के बोझ से मुक्त हो जाते हैं और
जमा हुए टॉक्सिन्स को तेजी से बाहर निकालते हैं।


Q6: उपवास का पाचन और पोषण पर क्या प्रभाव पड़ता है?

A6: उपवास के बाद शरीर भोजन को बेहतर तरीके से पचाता और अवशोषित करता है।
कम भोजन में भी अधिक पोषण मिलता है और पाचन संबंधी परेशानियां कम होती हैं।


Q7: क्या उपवास मन और आत्मा को भी प्रभावित करता है?

A7: हां। उपवास मन को शांत करता है, विचारों की गति धीमी करता है और
ध्यान एवं आत्मिक अभ्यास को गहरा बनाता है।


Q8: मुरली में व्रत के बारे में क्या कहा गया है?

A8:

  • 15 जुलाई 1998: शरीर की सफाई तो मन की सफाई के लिए है। पवित्रता में ही असली स्वास्थ्य है।

  • 2 सितंबर 2004: व्रत का सबसे बड़ा अर्थ है आत्मा को विकारों से दूर रखना।

  • 21 अगस्त 2010: जब आत्मा स्वच्छ है, तो शरीर की सेवा अपने आप सुधर जाती है।


Q9: उपवास को और अधिक शक्तिशाली कैसे बनाया जा सकता है?

A9: अगर हम उपवास के साथ परमात्मा का सिमरन जोड़ दें,
तो यह प्रक्रिया और भी शक्तिशाली बन जाती है।
शरीर शुद्ध, मन शांत और आत्मा शक्तिशाली हो जाती है।

डिस्क्लेमर: यह वीडियो केवल सामान्य जानकारी और आध्यात्मिक/स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से बनाया गया है। यहाँ बताए गए उपवास और व्रत के लाभ पारंपरिक अनुभव और शोध पर आधारित हैं। किसी भी प्रकार का उपवास या स्वास्थ्य-संबंधी बदलाव करने से पहले अपने चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। निर्माता किसी भी स्वास्थ्य परिणाम के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी नहीं होंगे।

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