आत्मा परमात्मा का अंश है या वंश
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय 1 : सबसे बड़ा आध्यात्मिक प्रश्न
आज लगभग हर धर्म, हर संत और हर ग्रंथ में एक वाक्य सुनाई देता है — “आत्मा परमात्मा का अंश है।”
साथ‑साथ यह भी कहा जाता है —
- आत्मा और परमात्मा एक हैं
- आत्मा और परमात्मा अलग हैं
- हम ईश्वर की संतान हैं
प्रश्न: यदि आत्मा अंश है तो क्या वह परमात्मा में मिल जाएगी? और यदि वंश है तो क्या उसका अस्तित्व सदा अलग रहेगा?
अध्याय 2 : आज का विषय — ज्ञान की चाबी
निष्कर्ष का बीज वाक्य — आत्मा परमात्मा का अंश नहीं, वंश है। यही संपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान की चाबी है।
अध्याय 3 : अंश शब्द का वास्तविक अर्थ
अंश का अर्थ होता है —
- टुकड़ा
- भाग
- विभाज्य तत्व
यदि आत्मा परमात्मा का अंश है तो प्रश्न उठता है — क्या परमात्मा को काटा जा सकता है? क्या उसके टुकड़े हो सकते हैं?
गीता का सिद्धांत
आत्मा को न काटा जा सकता है, न जलाया जा सकता है। तो क्या परमात्मा काटा जा सकता है?
अध्याय 4 : परमात्मा अखंड है (मुरली प्रमाण)
साकार मुरली | 9 अक्टूबर 1967
परमात्मा अखंड है। उसका कोई अंश नहीं। उसके टुकड़े नहीं किए जा सकते।
यदि परमात्मा से कोई अंश निकले, तो वह घटेगा — जो ईश्वर के लिए असंभव है।
अध्याय 5 : समुद्र और बूंद का उदाहरण
बूंद समुद्र से निकली और समुद्र में मिल गई — बूंद का अलग अस्तित्व समाप्त।
प्रश्न: क्या आत्मा का अस्तित्व कभी समाप्त होता है? उत्तर: नहीं।
अध्याय 6 : आत्मा अविनाशी है (मुरली प्रमाण)
मुरली | 18 जनवरी 1969
तुम आत्माएं अविनाशी हो। न कभी नष्ट होती हो, न परमात्मा में समाती हो।
आत्मा जन्म‑मरण करती है, कर्मफल भोगती है, सुख‑दुख अनुभव करती है। परमात्मा यह सब नहीं करता।
अध्याय 7 : आत्मा और परमात्मा स्वरूप से भिन्न
हर आत्मा यूनिक है — एक जैसी दो आत्माएं नहीं। उसी प्रकार परमात्मा भी एक यूनिक आत्मा है।
यदि आत्मा अंश होती, तो आत्मा के विकार परमात्मा में भी आते।
मुरली | 2 जून 1984
परमात्मा सदा निर्विकारी है।
अध्याय 8 : वंश का वास्तविक अर्थ
वंश का अर्थ है —
- संतान
- उत्तराधिकारी
- समान गुण, पर स्वतंत्र सत्ता
मुरली | 21 जनवरी 1976
तुम आत्माएं मेरे बच्चे हो।
उदाहरण : पिता और पुत्र
पुत्र पिता से पैदा होता है, गुण समान हो सकते हैं, पर पिता नहीं बन सकता। दोनों अलग‑अलग सत्ता हैं।
अध्याय 9 : गीता श्लोक का सही अर्थ
गीता अध्याय 15, श्लोक 7 — “ममैवांशो जीव लोके…”
यहाँ अंश का अर्थ शारीरिक टुकड़ा नहीं, बल्कि आत्मिक गुणों की समानता और अधिकार संबंध है।
मुरली | 19 फरवरी 1971
शास्त्रों के अर्थ मनुष्यों ने अपनी बुद्धि से लगाए।
अध्याय 10 : मिलन होता है, विलय नहीं
अव्यक्त मुरली | 30 मार्च 1987
आत्मा और परमात्मा सदा अलग‑अलग सत्ता हैं। मिलन होता है, विलय नहीं।
संबंध — पिता‑संतान | शिक्षक‑विद्यार्थी | सागर‑मछली
अध्याय 11 : संगम युग का विशेष ज्ञान
मुरली | 12 जुलाई 1996यह ज्ञान कल्प में एक बार ही मिलता है।
इस ज्ञान से —
- आत्म‑अभिमान टूटता है
- पुरुषार्थ जन्म लेता है
- स्वराज्य की प्राप्ति होती है
अध्याय 12 : पुरुषार्थ क्यों आवश्यक है
यदि आत्मा अंश होती, तो पुरुषार्थ व्यर्थ होता।
लेकिन क्योंकि आत्मा वंश है — पुरुषार्थ ही भाग्य बनाता है।
मुरली | 25 नवंबर 1984
जो जैसा पुरुषार्थ करता है, वैसा पद पाता है।
अध्याय 13 : अंतिम निष्कर्ष
- आत्मा परमात्मा का अंश नहीं
- आत्मा परमात्मा की संतान (वंश) है
- मिलन होता है, विलय नहीं
मुरली | 12 मार्च 2003
बाप को पहचानने से ही वर्सा मिलता है।
समापन संदेश
क्योंकि आत्मा वंश है — स्वयं पुरुषार्थ करना होगा। स्वयं को ईश्वर की संतान समझिए। अपने अधिकार को पहचानिए। संगम युग का पूरा लाभ लीजिए।
अध्याय 1 : सबसे बड़ा आध्यात्मिक प्रश्न
प्रश्न 1: लगभग हर धर्म और ग्रंथ में कौन-सा वाक्य सबसे अधिक सुनाई देता है?
उत्तर: लगभग सभी धर्मों, संतों और ग्रंथों में यह वाक्य सुनाई देता है कि “आत्मा परमात्मा का अंश है।”
प्रश्न 2: आत्मा और परमात्मा के संबंध को लेकर कौन-कौन सी धारणाएँ प्रचलित हैं?
उत्तर: तीन मुख्य धारणाएँ प्रचलित हैं—
- आत्मा और परमात्मा एक हैं।
- आत्मा और परमात्मा अलग-अलग हैं।
- हम ईश्वर की संतान हैं।
प्रश्न 3: यदि आत्मा परमात्मा का अंश है, तो सबसे बड़ा प्रश्न क्या उठता है?
उत्तर: यदि आत्मा अंश है, तो प्रश्न उठता है कि क्या आत्मा अंत में परमात्मा में विलीन हो जाएगी और उसका अलग अस्तित्व समाप्त हो जाएगा?
प्रश्न 4: यदि आत्मा वंश (संतान) है, तो इसका क्या अर्थ होगा?
उत्तर: यदि आत्मा वंश है, तो आत्मा सदा स्वतंत्र सत्ता रहेगी और परमात्मा से संबंध होने पर भी उसका अस्तित्व अलग बना रहेगा।
अध्याय 2 : आज का विषय — ज्ञान की चाबी
प्रश्न 5: आज के विषय का बीज-वाक्य क्या है?
उत्तर: आत्मा परमात्मा का अंश नहीं, वंश है। यही संपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान की चाबी है।
अध्याय 3 : अंश शब्द का वास्तविक अर्थ
प्रश्न 6: ‘अंश’ शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर: अंश का अर्थ होता है—
- टुकड़ा
- भाग
- विभाज्य तत्व
प्रश्न 7: यदि आत्मा परमात्मा का अंश है, तो परमात्मा के बारे में कौन-सा प्रश्न खड़ा होता है?
उत्तर: प्रश्न यह उठता है कि क्या परमात्मा को काटा जा सकता है और क्या उसके टुकड़े हो सकते हैं?
प्रश्न 8: गीता आत्मा के बारे में क्या सिद्धांत बताती है?
उत्तर: गीता कहती है कि आत्मा को न काटा जा सकता है, न जलाया जा सकता है और न नष्ट किया जा सकता है।
अध्याय 4 : परमात्मा अखंड है (मुरली प्रमाण)
प्रश्न 9: साकार मुरली (9 अक्टूबर 1967) परमात्मा के बारे में क्या स्पष्ट करती है?
उत्तर: मुरली स्पष्ट करती है कि परमात्मा अखंड है, उसका कोई अंश नहीं और उसके टुकड़े नहीं किए जा सकते।
प्रश्न 10: यदि परमात्मा से कोई अंश निकले तो क्या समस्या उत्पन्न होगी?
उत्तर: यदि अंश निकले तो परमात्मा घटेगा, जबकि ईश्वर का घट-बढ़ होना असंभव है।
अध्याय 5 : समुद्र और बूंद का उदाहरण
प्रश्न 11: समुद्र और बूंद के उदाहरण से क्या समझाया जाता है?
उत्तर: जब बूंद समुद्र में मिल जाती है, तो उसका अलग अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 12: क्या आत्मा का अस्तित्व कभी समाप्त होता है?
उत्तर: नहीं, आत्मा का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं होता।
अध्याय 6 : आत्मा अविनाशी है (मुरली प्रमाण)
प्रश्न 13: मुरली (18 जनवरी 1969) आत्मा के बारे में क्या कहती है?
उत्तर: मुरली कहती है कि आत्माएं अविनाशी हैं—न वे नष्ट होती हैं और न परमात्मा में समाती हैं।
प्रश्न 14: आत्मा और परमात्मा के कार्यों में क्या अंतर है?
उत्तर: आत्मा जन्म-मरण करती है, कर्मफल भोगती है और सुख-दुख अनुभव करती है, जबकि परमात्मा यह सब नहीं करता।
अध्याय 7 : आत्मा और परमात्मा स्वरूप से भिन्न
प्रश्न 15: आत्मा और परमात्मा को स्वरूप से अलग क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि हर आत्मा यूनिक है और परमात्मा भी एक यूनिक आत्मा है, पर दोनों के कार्य और अवस्था अलग-अलग हैं।
प्रश्न 16: यदि आत्मा अंश होती, तो कौन-सी समस्या उत्पन्न होती?
उत्तर: आत्मा के विकार परमात्मा में भी आ जाते, जबकि मुरली (2 जून 1984) कहती है कि परमात्मा सदा निर्विकारी है।
अध्याय 8 : वंश का वास्तविक अर्थ
प्रश्न 17: ‘वंश’ शब्द का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
उत्तर: वंश का अर्थ है संतान या उत्तराधिकारी—समान गुणों वाली, पर स्वतंत्र सत्ता।
प्रश्न 18: मुरली (21 जनवरी 1976) आत्माओं को क्या कहती है?
उत्तर: मुरली कहती है—तुम आत्माएं मेरे बच्चे हो।
अध्याय 9 : गीता श्लोक का सही अर्थ
प्रश्न 19: गीता अध्याय 15, श्लोक 7 का सही अर्थ क्या है?
उत्तर: यहाँ ‘अंश’ का अर्थ शारीरिक टुकड़ा नहीं, बल्कि आत्मिक गुणों की समानता और अधिकार संबंध है।
अध्याय 10 : मिलन होता है, विलय नहीं
प्रश्न 20: अव्यक्त मुरली (30 मार्च 1987) आत्मा-परमात्मा संबंध को कैसे स्पष्ट करती है?
उत्तर: मुरली कहती है कि आत्मा और परमात्मा सदा अलग-अलग सत्ता हैं—मिलन होता है, विलय नहीं।
अध्याय 11 : संगम युग का विशेष ज्ञान
प्रश्न 21: संगम युग के ज्ञान की विशेषता क्या है?
उत्तर: यह ज्ञान कल्प में केवल एक बार मिलता है और आत्मा को उसकी सच्ची पहचान देता है।
अध्याय 12 : पुरुषार्थ क्यों आवश्यक है
प्रश्न 22: आत्मा के वंश होने से पुरुषार्थ क्यों आवश्यक हो जाता है?
उत्तर: क्योंकि आत्मा स्वतंत्र सत्ता है, इसलिए उसका पुरुषार्थ ही उसका भाग्य बनाता है।
अध्याय 13 : अंतिम निष्कर्ष
प्रश्न 23: इस पूरे ज्ञान का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
उत्तर: आत्मा परमात्मा का अंश नहीं, बल्कि उसकी संतान (वंश) है। मिलन होता है, विलय नहीं।
समापन संदेश
प्रश्न 24: इस ज्ञान से हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर: स्वयं को ईश्वर की संतान समझकर पुरुषार्थ करना चाहिए, अपने अधिकार को पहचानना चाहिए और संगम युग का पूरा लाभ लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त साकार एवं अव्यक्त मुरलियों, श्रीमद्भगवद्गीता एवं आध्यात्मिक चिंतन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, ग्रंथ या मान्यता का खंडन करना नहीं, बल्कि आत्मा‑परमात्मा के सत्य संबंध को स्पष्ट करना है। दर्शक इसे आध्यात्मिक अध्ययन एवं आत्मचिंतन के रूप में ग्रहण करें।
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