A.V.N:-P-2(01)क्या यह जगत सत्य है या एक स्वप्न है या एक भ्रम है
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
जो दिख रहा है क्या वही सत्य है? | अविनाशी विश्व नाटक Part-2 | आत्मा का रहस्य”
अध्याय की भूमिका
आज हम अविनाशी विश्व नाटक के एक अत्यंत गहन और रहस्यमय प्रश्न पर मनन करेंगे —
क्या यह जगत सत्य है?
या यह एक स्वप्न है?
या यह केवल एक भ्रम है?
कुछ लोग कहते हैं —
“यह संसार सपना है,
जागो तो कुछ नहीं अपना है।”
कुछ कहते हैं —
“यह संसार भ्रम है, वास्तव में कुछ भी नहीं।”
और कुछ कहते हैं —
“यह संसार ही सत्य है।”
तो आज हम इन तीनों बातों को आध्यात्मिक दृष्टि से समझेंगे।
दृश्य जगत — क्या जो दिखता है वही सत्य है?
हम जो देख रहे हैं —
यह धरती
यह आकाश
यह शरीर
यह रिश्ते
यह धन-संपत्ति
यह सुख-दुख
क्या यह सब सत्य है?
देखिए —
सामने दिखाई दे रहा है
हम उसे स्पर्श कर सकते हैं
अनुभव कर सकते हैं
इसलिए इसे पूरी तरह झूठ भी नहीं कह सकते।
लेकिन प्रश्न यह है —
क्या यह स्थायी सत्य है?
क्या यह परम सत्य है?
उत्तर है — नहीं।
क्योंकि यह सब परिवर्तनशील है।
आज है
कल नहीं रहेगा
2️⃣ संसार क्यों स्थायी सत्य नहीं है?
यह संसार —
आज है
कल बदल जाता है
परसों समाप्त हो जाता है
यह शरीर —
बचपन से जवानी
जवानी से बुढ़ापा
और फिर मिट्टी में मिल जाता है
यह रिश्ते —
आज साथ
कल बिछड़ जाते हैं
इसलिए इसे कहा गया है —
जो बदलता है वह परम सत्य नहीं हो सकता।
3️⃣ स्वप्न का उदाहरण
जैसे —
रात में हम सपना देखते हैं
उस समय वह बिल्कुल वास्तविक लगता है
हम हँसते हैं
रोते हैं
डरते हैं
भागते हैं
पर नींद खुलते ही कहते हैं —
“अरे! यह तो सपना था।”
उसी प्रकार यह संसार भी परिवर्तनशील है।
और जो परिवर्तनशील है वह परम सत्य नहीं हो सकता।
अव्यक्त मुरली — 18 जून 1970
“बच्चे, यह दुनिया एक नाटक है।
जो दिखाई देता है वह स्थाई सत्य नहीं है।
सत्य तो आत्मा और परमात्मा ही है।”
4️⃣ आत्मा — परम सत्य
आत्मा —
अजर है
अमर है
अविनाशी है
शरीर —
पाँच तत्वों से बना है
और नष्ट हो जाता है
आत्मा निकल जाए तो —
शरीर मिट्टी है
जला दो
दफना दो
कुछ भी कर लो
पर आत्मा नहीं जलती
न मिटती
न मरती
5️⃣ मोमबत्ती का उदाहरण
मोमबत्ती की लौ एक सी रहती है
मोम पिघलता रहता है
लौ = आत्मा
मोम = शरीर
शरीर बदलता रहता है
आत्मा नहीं बदलती
एक शरीर गया
दूसरा मिला
लेकिन आत्मा वही रही
6️⃣ ब्रह्मांड — एक महान रंगमंच
यह ब्रह्मांड एक विशाल रंगमंच है
हम सब इसके अभिनेता हैं
हर 5000 वर्ष में —
कभी राजा
कभी प्रजा
कभी स्त्री
कभी पुरुष
कभी बच्चा
कभी वृद्ध
हर जन्म एक सीन है
लेकिन अभिनेता वही रहता है — आत्मा
ड्रामा बदलता है
अभिनेता नहीं
7️⃣ सृष्टि चक्र और सृष्टि का रहस्य
सृष्टि अनादि है
अविनाशी है
लेकिन सृष्टि चक्र —
शुरू होता है
पूरा होता है
फिर दोबारा शुरू होता है
जैसे फिल्म बार-बार चलती है
पर सिनेमा हॉल नहीं मिटता
8️⃣ भ्रम क्यों लगता है?
यह माया का चमत्कार है।
जब आत्मा शरीर को ही “मैं” मान लेती है —
तब यह संसार बहुत वास्तविक लगता है।
यह मेरा बेटा
यह मेरा घर
यह मेरा संसार
इसी को कहा गया है — देह अभिमान
मुरली — 10 जुलाई 1975
“देह अभिमान में जगत सत्य लगता है
और देही अभिमान में भ्रम मिट जाता है।”
9️⃣ जब आत्मा जागती है
जब आत्मा समझती है —
मैं शरीर नहीं हूँ
मैं आत्मा हूँ
तब यह संसार स्वप्न समान प्रतीत होता है
क्योंकि एक दिन यह संसार समाप्त होगा
और आत्माएं परमधाम चली जाएंगी
तब यह सब कुछ बीता हुआ सपना बन जाएगा।
निष्कर्ष
बीके ज्ञान यह नहीं कहता कि जगत झूठ है।
यह एक रियलिटी है
लेकिन परम सत्य नहीं है।
परम सत्य है —
आत्मा
परमात्मा
जगत चलता रहेगा
ड्रामा चलता रहेगा
चक्र चलता रहेगा
लेकिन आत्मा —
अजर
अमर
अविनाशी
शाश्वत
वही परम सत्य है।
प्रश्न 1: क्या जो हमें दिखाई देता है वही सत्य है?
उत्तर:
जो हमें दिखाई देता है — धरती, आकाश, शरीर, रिश्ते, धन-संपत्ति, सुख-दुख —
यह सब हमें अनुभव में आता है, इसलिए इसे पूरी तरह झूठ नहीं कह सकते।
लेकिन यह स्थायी नहीं है।
आज है, कल नहीं रहेगा।
इसलिए यह परम सत्य नहीं है।
प्रश्न 2: क्या दृश्य जगत को सत्य कहा जा सकता है?
उत्तर:
यह संसार एक वास्तविकता है, लेकिन अस्थायी है।
जो बदलता है, वह परम सत्य नहीं हो सकता।
इसलिए इसे टेम्पररी रियलिटी कहा जाएगा, परम सत्य नहीं।
प्रश्न 3: संसार स्थायी सत्य क्यों नहीं है?
उत्तर:
क्योंकि —
-
शरीर बदलता है
-
रिश्ते टूटते हैं
-
परिस्थितियाँ बदलती हैं
-
सुख-दुख आते-जाते हैं
जो नष्ट होता है, वह शाश्वत सत्य नहीं हो सकता।
प्रश्न 4: संसार को स्वप्न के समान क्यों कहा गया है?
उत्तर:
जैसे सपना नींद में बिल्कुल सच लगता है —
हम हँसते हैं, रोते हैं, डरते हैं —
लेकिन जागने पर समझ आता है कि वह सपना था।
उसी प्रकार यह संसार भी परिवर्तनशील है।
इसलिए इसे स्वप्न समान कहा गया है।
प्रश्न 5: अव्यक्त मुरली संसार के बारे में क्या कहती है?
उत्तर (अव्यक्त मुरली — 18 जून 1970):
“बच्चे, यह दुनिया एक नाटक है।
जो दिखाई देता है वह स्थाई सत्य नहीं है।
सत्य तो आत्मा और परमात्मा ही है।”
प्रश्न 6: परम सत्य कौन है?
उत्तर:
परम सत्य है —
आत्मा
परमात्मा
आत्मा अजर है, अमर है, अविनाशी है।
शरीर पाँच तत्वों से बना है और नष्ट हो जाता है।
प्रश्न 7: आत्मा और शरीर में क्या अंतर है?
उत्तर:
-
शरीर मिट्टी से बना है
-
आत्मा चेतन शक्ति है
आत्मा निकल जाए तो शरीर मिट्टी है।
लेकिन आत्मा कभी नहीं मिटती।
प्रश्न 8: मोमबत्ती का उदाहरण क्या सिखाता है?
उत्तर:
मोम पिघलता रहता है
लेकिन लौ एक सी रहती है
मोम = शरीर
लौ = आत्मा
शरीर बदलता है
आत्मा नहीं बदलती
प्रश्न 9: यह ब्रह्मांड क्या है?
उत्तर:
यह ब्रह्मांड एक विशाल रंगमंच है।
हम सब इसके अभिनेता हैं।
हर जन्म एक सीन है
लेकिन अभिनेता वही रहता है — आत्मा
प्रश्न 10: सृष्टि और सृष्टि चक्र में क्या अंतर है?
उत्तर:
सृष्टि अनादि और अविनाशी है
लेकिन सृष्टि चक्र चलता रहता है
जैसे फिल्म बार-बार चलती है
पर सिनेमा हॉल नहीं मिटता
प्रश्न 11: संसार भ्रम क्यों लगता है?
उत्तर:
जब आत्मा शरीर को ही “मैं” मान लेती है,
तब यह संसार बहुत वास्तविक लगता है।
इसे कहा जाता है — देह अभिमान।
प्रश्न 12: मुरली क्या कहती है भ्रम के बारे में?
उत्तर (मुरली — 10 जुलाई 1975):
“देह अभिमान में जगत सत्य लगता है
और देही अभिमान में भ्रम मिट जाता है।”
प्रश्न 13: आत्मा जागती है तो क्या होता है?
उत्तर:
जब आत्मा समझती है —
“मैं शरीर नहीं हूँ, मैं आत्मा हूँ”
तब यह संसार स्वप्न समान प्रतीत होता है।
प्रश्न 14: बीके ज्ञान संसार को झूठ क्यों नहीं कहता?
उत्तर:
बीके ज्ञान कहता है —
यह संसार रियलिटी है
लेकिन परम सत्य नहीं है
यह चलता रहेगा
ड्रामा चलता रहेगा
चक्र चलता रहेगा
लेकिन आत्मा शाश्वत है।
निष्कर्ष
परम सत्य है —
आत्मा
परमात्मा
संसार नाटक है
शरीर वस्त्र है
आत्मा अभिनेता है
जो दिख रहा है वह स्थायी सत्य नहीं है —
सत्य तो आत्मा है।
डिस्क्लेमर:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय ज्ञान, मुरली और आध्यात्मिक अनुभूति पर आधारित है।
इसका उद्देश्य आत्मिक जागृति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
यह किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं बनाया गया है।
यह ज्ञान आत्मा और परमात्मा के शाश्वत सत्य को समझने के लिए प्रस्तुत किया गया है।
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