P-2(13)How old is our Earth?

A.V.N:-2(13)हमारी पृथ्वी कितनी पुरानी है?

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(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

अध्याय 13 — हमारी पृथ्वी कितनी पुरानी है? (भाग–2)

वैज्ञानिक अनिश्चितता बनाम ईश्वरीय सत्य


 भूमिका — प्रश्न केवल आयु का नहीं, सत्य का है

आज हम पृथ्वी की आयु पर चर्चा को और गहराई से ले जाते हैं।
यह प्रश्न केवल पृथ्वी की उम्र का नहीं है —
यह प्रश्न है सत्य और अनुमान के फर्क का।

हमने पार्ट–1 में देखा था कि
विज्ञान पृथ्वी को अरबों वर्ष पुरानी मानता है,
परंतु वैज्ञानिक स्वयं एक मत नहीं हैं।

आज हम समझेंगे —

  • वैज्ञानिक अनिश्चित क्यों हैं?

  • अनुमान और सत्य में क्या अंतर है?

  • ईश्वरीय ज्ञान क्या कहता है?


 वैज्ञानिक अनिश्चितता क्या है?

विज्ञान प्रयोगों पर आधारित है
और प्रयोग समय के साथ बदलते रहते हैं।

आज जो सत्य है
कल वही संशोधित हो जाता है।

वैज्ञानिक पद्धतियाँ

जैसे —

  • कार्बन डेटिंग

  • रेडियो कार्बन डेटिंग

  • यूरेनियम-लेड विधि

हर विधि अलग परिणाम देती है।


 उदाहरण — एक ही चट्टान, दो अलग आयु

एक ही चट्टान को लिया गया —

  • रेडियो कार्बन से आयु निकली — कुछ हजार वर्ष

  • यूरेनियम-लेड से आयु निकली — करोड़ों वर्ष

चट्टान वही है
पर परिणाम अलग-अलग।

 इससे स्पष्ट होता है कि ये निष्कर्ष नहीं, अनुमान हैं।


 वैज्ञानिक त्रुटियाँ

1. प्रारंभिक स्थिति को मान लेना

मान लेते हैं कि शुरुआत ऐसी ही रही होगी।
मान लिया हुआ सत्य, सत्य नहीं होता।

2. प्राकृतिक आपदाओं की अनदेखी

भूकंप, ज्वालामुखी, प्रलय इतिहास बदल देते हैं।

3. समय को रेखीय मानना

जबकि समय एक चक्र है।
घड़ी भी चक्र में चलती है।

4. परिवर्तन को समान गति मान लेना

जबकि असाधारण घटनाएँ इतिहास पलट देती हैं।


 बदलते वैज्ञानिक सिद्धांत

कभी कहा गया —

  • पृथ्वी स्थिर है

  • फिर कहा पृथ्वी घूमती है

कभी कहा —

  • परमाणु अविभाज्य है

  • फिर कहा परमाणु टूटता है

डार्विन का सिद्धांत भी बदल रहा है।

 जो आज सत्य है, वह कल असत्य हो सकता है।


 ब्रह्माकुमारी दृष्टि — विज्ञान बनाम अध्यात्म

विज्ञान अध्यात्म
परिवर्तनशील अचल
अनुमान सत्य
इन्द्रियों पर आधारित ज्ञान-सागर शिव बाबा पर आधारित
वस्तुओं को जानता है काल को जानता है

 Murli Notes (प्रमाण सहित)

 मुरली प्रमाण – 18.01.1968 (साकार मुरली)

“विज्ञान का घमंड अंत में सिर झुकाएगा।
मनुष्य अपनी बुद्धि से खोज करता है,
पर सत्य केवल ज्ञान-सागर ही सुनाते हैं।”


 मुरली प्रमाण – 05.12.1970 (साकार मुरली)

“यह सृष्टि चक्र अनादि है,
न आदि है न अंत है।
यह नाटक 5000 वर्ष का रिपीट होता रहता है।”


 मुरली प्रमाण – 12.03.1973

“मनुष्य कल्पना करता है,
पर बाप सत्य बताते हैं।”


 पृथ्वी की आयु पर ईश्वरीय निष्कर्ष

पृथ्वी —

  • न अरबों वर्ष पुरानी है

  • न अनिश्चित काल की है

यह एक निश्चित 5000 वर्ष का रिपीट होने वाला ड्रामा है।

यह सृष्टि —

  • अनादि है

  • अनंत है

  • चक्र में चलती है

जैसे घड़ी कभी रुकती नहीं
वैसे ही समय भी कभी नहीं रुकता।


 विज्ञान बनाम ज्ञान — परिणाम

यदि हम केवल विज्ञान पर निर्भर रहेंगे —

  • भ्रम बढ़ेगा

  • भय बढ़ेगा

  • अनिश्चितता बढ़ेगी

यदि हम ईश्वरीय ज्ञान को समझेंगे —

  • स्पष्टता मिलेगी

  • शांति मिलेगी

  • भविष्य सुरक्षित होगा


 निष्कर्ष — आत्मचिंतन का प्रश्न

आज प्रश्न यह नहीं कि
वैज्ञानिक क्या कहते हैं —

आज प्रश्न यह है —

क्या मैं सत्य को पहचानने के लिए तैयार हूँ?
क्या मैं अनुमान से ऊपर उठकर ज्ञान को स्वीकार कर सकता हूँ?


 समापन संदेश

यह नाटक चलता रहेगा,
यह चक्र घूमता रहेगा,
पर जो आत्मा सत्य को पहचान लेती है
वही सदा अडोल और निश्चिंत रहती है।

प्रश्न 1: आज का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर:
आज का मुख्य विषय पृथ्वी की आयु को केवल वैज्ञानिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सत्य और अनुमान के अंतर को समझते हुए देखना है। यह जानना है कि वैज्ञानिक अनिश्चित क्यों हैं और ईश्वरीय ज्ञान क्या कहता है।


 प्रश्न 2: यह प्रश्न केवल पृथ्वी की आयु का क्यों नहीं है?

उत्तर:
यह प्रश्न केवल पृथ्वी की उम्र का नहीं है, बल्कि यह प्रश्न है कि
सत्य क्या है और अनुमान क्या है।
क्योंकि अनुमान कभी भी बदल सकता है, लेकिन सत्य अचल होता है।


 प्रश्न 3: वैज्ञानिक पृथ्वी की आयु को लेकर एकमत क्यों नहीं हैं?

उत्तर:
क्योंकि वैज्ञानिक अलग-अलग विधियों से शोध करते हैं और हर विधि अलग परिणाम देती है।
इसलिए कोई पृथ्वी को हजारों वर्ष पुरानी बताता है तो कोई करोड़ों-अरबों वर्ष पुरानी।


 प्रश्न 4: वैज्ञानिक अनिश्चितता क्या है?

उत्तर:
वैज्ञानिक अनिश्चितता का अर्थ है कि
विज्ञान प्रयोगों पर आधारित है और प्रयोग समय के साथ बदलते रहते हैं।
आज जो सत्य माना जाता है, कल वही संशोधित हो जाता है।


 प्रश्न 5: पृथ्वी की आयु मापने की प्रमुख वैज्ञानिक विधियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर:
मुख्य विधियाँ हैं —

  • कार्बन डेटिंग

  • रेडियो कार्बन डेटिंग

  • यूरेनियम-लेड विधि

हर विधि से अलग-अलग परिणाम निकलते हैं।


प्रश्न 6: एक ही चट्टान से दो अलग आयु कैसे निकलती है?

उत्तर:
उदाहरण के रूप में —
एक ही चट्टान की आयु

  • रेडियो कार्बन से कुछ हजार वर्ष निकलती है

  • यूरेनियम-लेड से करोड़ों वर्ष निकलती है

इससे सिद्ध होता है कि ये निष्कर्ष नहीं बल्कि अनुमान हैं।


 प्रश्न 7: वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रमुख त्रुटियाँ क्या हैं?

उत्तर:

  1. प्रारंभिक स्थिति को मान लेना —
    मान लेते हैं कि शुरुआत ऐसी ही रही होगी।

  2. प्राकृतिक आपदाओं की अनदेखी —
    भूकंप, ज्वालामुखी और प्रलय इतिहास बदल देते हैं।

  3. समय को रेखीय मानना —
    जबकि समय चक्र में चलता है।

  4. परिवर्तन को समान गति से मान लेना —
    जबकि असाधारण घटनाएँ इतिहास बदल देती हैं।


 प्रश्न 8: वैज्ञानिक सिद्धांत क्यों बदलते रहते हैं?

उत्तर:
क्योंकि विज्ञान प्रयोगों पर आधारित है।
जैसे पहले कहा गया पृथ्वी स्थिर है, फिर कहा पृथ्वी घूमती है।
पहले कहा परमाणु अविभाज्य है, फिर कहा वह टूटता है।
इसलिए विज्ञान परिवर्तनशील है।


 प्रश्न 9: ब्रह्माकुमारी दृष्टि से विज्ञान और अध्यात्म में क्या अंतर है?

उत्तर:

विज्ञान अध्यात्म
परिवर्तनशील अचल
अनुमान सत्य
इन्द्रियों पर आधारित ज्ञान-सागर शिव बाबा पर आधारित
वस्तुओं को जानता है काल को जानता है

 प्रश्न 10: मुरली क्या प्रमाण देती है?

उत्तर:

मुरली प्रमाण – 18.01.1968

“विज्ञान का घमंड अंत में सिर झुकाएगा।
मनुष्य अपनी बुद्धि से खोज करता है,
पर सत्य केवल ज्ञान-सागर ही सुनाते हैं।”


मुरली प्रमाण – 05.12.1970

“यह सृष्टि चक्र अनादि है,
न आदि है न अंत है।
यह नाटक 5000 वर्ष का रिपीट होता रहता है।”


मुरली प्रमाण – 12.03.1973

“मनुष्य कल्पना करता है,
पर बाप सत्य बताते हैं।”


 प्रश्न 11: ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार पृथ्वी कितनी पुरानी है?

उत्तर:
ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार पृथ्वी
न अरबों वर्ष पुरानी है
न अनिश्चित काल की है।

यह एक निश्चित 5000 वर्ष का रिपीट होने वाला नाटक है।


 प्रश्न 12: सृष्टि के बारे में ईश्वरीय सत्य क्या है?

उत्तर:
सृष्टि —

  • अनादि है

  • अनंत है

  • चक्र में चलती है

जैसे घड़ी कभी नहीं रुकती, वैसे ही समय भी कभी नहीं रुकता।


 प्रश्न 13: केवल विज्ञान पर निर्भर रहने से क्या परिणाम होंगे?

उत्तर:

  • भ्रम बढ़ेगा

  • भय बढ़ेगा

  • अनिश्चितता बढ़ेगी


 प्रश्न 14: ईश्वरीय ज्ञान को समझने से क्या प्राप्त होगा?

उत्तर:

  • स्पष्टता

  • शांति

  • भविष्य की सुरक्षा


 प्रश्न 15: आज का आत्मचिंतन का मुख्य प्रश्न क्या है?

उत्तर:
आज प्रश्न यह नहीं है कि वैज्ञानिक क्या कहते हैं,
आज प्रश्न यह है —

क्या मैं सत्य को पहचानने के लिए तैयार हूँ?
क्या मैं अनुमान से ऊपर उठकर ज्ञान को स्वीकार कर सकता हूँ?


 समापन संदेश

यह नाटक चलता रहेगा,
यह चक्र घूमता रहेगा,
पर जो आत्मा सत्य को पहचान लेती है
वही सदा अडोल और निश्चिंत रहती है।

Disclaimer (डिस्क्लेमर):
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय ज्ञान, मुरली और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी वैज्ञानिक संस्था या वैज्ञानिक शोध का विरोध करना नहीं, बल्कि आत्मिक दृष्टि से सत्य को समझाना है।
यह वीडियो केवल आध्यात्मिक जागृति एवं आत्मचिंतन के लिए है।

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