(40)21-11-1984 “Only the one who has self-realization is the divine visible form”
अव्यक्त मुरली-(40)21-11-1984 “स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त” (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं) 21-11-1984 “स्व-दर्शन धारी ही दिव्य…
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अव्यक्त मुरली-(04)“समर्थ की निशानी-संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”11-01-1983 (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं) 11-01-1983 “समर्थ की…