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रॉयल आलस्य क्या है?

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रॉयल
आलस्य क्या है?

रॉयल
आलस्य क्या है?

आलस्य का गुप्त
राज

आलस्य का गुप्त राज क्या है? रॉयल आलस्य
क्या है?

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान अनुसार
आलस्य को कैसे जीते?

डिस्क्लेमर
यह भाषण प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय
विश्वविद्यालय द्वारा
दी जा रही मुरलियों, शिक्षाओं और
आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित अध्ययनात्मक
प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य आत्मचिंतन
और आध्यात्मिक जागृति है। श्रोता स्वयं
विवेक से
समझें और जीवन में प्रयोग करें।

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान अनुसार आलस्य कितने
प्रकार का है? आलस्य कितने प्रकार का है?

रॉयल आलस्य क्या है? और इसे कैसे जीते?
आज हम एक ऐसे शत्रु की
चर्चा करेंगे जो बाहर से नहीं भीतर से
आत्मा को खोखला करता है।

आज हम एक ऐसे शत्रु की चर्चा करेंगे जो
बाहर से नहीं भीतर से आत्मा को खोखला करता
है।

आलस्य
लेजीनेस

ये केवल शरीर का आलस्य नहीं।
यह मन, बुद्धि और संकल्पों का भी आलस्य है।

समझ में आया कोई बात?

रॉयल आलस्य क्या है और इसे कैसे जीते?
आज हम एक ऐसे शत्रु की चर्चा करेंगे जो बाहर
से नहीं भीतर से आत्मा को खोखला करता है।

यह केवल शरीर का आलस्य नहीं है।
हम तो शरीर का आलस्य समझते थे,
परंतु यह मन, बुद्धि और संकल्पों का भी आलस्य है।

कई आत्माएं कहती हैं —
क्या करें?
समय नहीं मिलता।
कल से शुरू करेंगे।
अभी जरा मूड नहीं है।

लेकिन प्रश्न है —
यह सामान्य थकान है
या आध्यात्मिक कमजोरी?

आज हम समझेंगे
आलस्य के प्रकार
और रॉयल आलस्य क्या है
और राजयोग से इसे कैसे जीता जाए।

आलस्य की मूल परिभाषा

पहले हम समझने का प्रयास करेंगे
कि आखिर आलस्य होता क्या है?

आलस्य क्या है?
जो करना चाहिए उसे ना करना।

नंबर दो —
जो करना नहीं चाहिए
उसमें समय बर्बाद करना।

नंबर तीन —
संकल्प में ढीलापन।

साकार मुरली 18 जनवरी 2013 —
बच्चे, आलस्य बहुत बड़ा दुश्मन है।
जो आलसी है वे उन्नति नहीं कर सकता।

आलस्य आत्मा की ऊर्जा को गिरा देता है।

आलस्य के प्रकार

शारीरिक आलस्य —
अमृतवेला टालना।
सेवा में सुस्ती।

उदाहरण —
अलार्म बजा, मन में आया
पांच मिनट बाद उठता हूं।
अलार्म बंद कर दिया।

मुरली 9 सितंबर 2014 —
अमृतवेले उठना ही आत्मा की कमाई है।

मानसिक आलस्य —
सोचना नहीं,
चिंतन से बचना,
गहराई में ना जाना।
ज्ञान सुन लिया, पर मनन नहीं किया।

मुरली 14 मार्च 2016 —
मनन नहीं करेंगे तो ज्ञान टिकेगा नहीं।

संकल्प आलस्य —
अच्छा संकल्प लिया,
लेकिन अमल नहीं किया।
आज से परिवर्तन —
लेकिन शुरू नहीं किया।

यह सबसे खतरनाक है।

आध्यात्मिक आलस्य —
योग में स्थिरता नहीं,
स्मृति टूटना,
श्रीमत टालना।

मुरली 22 जुलाई 2018 —
योग में आलस्य करने से विकर्म बढ़ते हैं।

रॉयल आलस्य क्या है?

बाहर से व्यस्त
और अंदर से शिथिल।

इसके लक्षण —
सेवा करते हैं
पर आत्म परिवर्तन नहीं।

ज्ञान सुनते हैं
पर मनन नहीं करते।

कहते हैं — सब ड्रामा है
और पुरुषार्थ छोड़ देते हैं।

अपनी कमजोरी को उचित ठहराते हैं।

मुरली 5 दिसंबर 2019 —
रॉयल आलस्य में बच्चे समझते ही नहीं
और पीछे रह जाते हैं।

उदाहरण —
कोई आत्मा कहे, बाबा करवा रहे हैं,
जो होगा देखा जाएगा।
यह समर्पण नहीं है।
यदि पुरुषार्थ नहीं है तो रॉयल आलस्य है।

दूसरा उदाहरण —
बाहर से सेवा में व्यस्त
लेकिन योग चार्ट कमजोर।
यह सक्रिय आलस्य है।

आलस्य क्यों आता है?

देह अभिमान,
विकारों की थकान,
लक्ष्य भूल जाना,
समय की कदर ना करना।

मुरली 3 अक्टूबर 2012 —
जो समय को नहीं पहचानते, वो पीछे रह जाते हैं।

आलस्य को जीतने की विधि

लक्ष्य स्मृति —
मुझे नर से नारायण बनना है।
नारी से लक्ष्मी बनना है।

जब लक्ष्य स्पष्ट,
तो आलस्य कम।

अमृतवेला मजबूत —
सुबह की जीत, दिन की जीत।

छोटा संकल्प —
तुरंत अमल।
आज से 1% सुधार।

योग शक्ति देता है।
शक्ति होगी तो आलस्य नहीं रहेगा।

मुरली 11 नवंबर 2017 —
योगी आत्मा सदा एक्टिव रहती है।

चार्ट रखना —
आज कितनी स्मृति रही?
कितनी स्थिरता रही?

स्व-निरीक्षण से सुधार।

चढ़ती कला बनाम आलस्य —

चढ़ती कला में उमंग, उत्साह, तत्परता।
आलस्य में टालना, बहाना, ढीलापन।

दोनों साथ नहीं चल सकते।

समापन

आलस्य साधारण कमजोरी नहीं।
यह आध्यात्मिक प्रगति का सबसे बड़ा अवरोध है।

विशेषकर रॉयल आलस्य —
जो दिखता नहीं, पर गिरा देता है।

आज संकल्प करें —
समय का सम्मान,
अमृतवेले पक्का उठना,
ज्ञान का मनन,
योग में गहराई,
श्रीमत पर चलना।

फिर ऊर्जा बढ़ेगी
और चढ़ती कला स्थाई होगी।

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