जहाँ पाँचों तत्त्व नहीं होते, वहाँ कौन होता है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
परमधाम का दिव्य रहस्य – आत्मा और ब्रह्म तत्व की अद्भुत अवस्था
प्रस्तावना
आज हम एक अत्यंत गहरे और अद्भुत रहस्य पर चर्चा करेंगे – जहां पांच तत्व नहीं होते, वहां कौन रहता है?
इस विषय में बाबा ने स्पष्ट किया है कि परमधाम वह स्थान है जहाँ केवल आत्माएं और परमात्मा (ब्रह्म तत्व) निवास करते हैं। यहाँ कोई सूरज, चाँद या आकाश नहीं है।
परमधाम – पांच तत्वों से परे
मुरली नोट:
“जहां पांचों तत्व नहीं होते, वहां आत्माएं और ब्रह्म तत्व रहते हैं।” – Avyakt Murli 5 अगस्त 2025
विवरण:
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पांच तत्व: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
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इन तत्वों का अस्तित्व जहां है, वहां अन्य तत्व नहीं मिलते।
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छठा तत्व: ब्रह्म महात तत्व – परमात्मा और आत्माओं का निवास।
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उदाहरण: जैसे पानी में चीनी घुल जाती है, पर पानी का आयतन वैसा ही रहता है, वैसे ही करोड़ों आत्माएं भी ब्रह्म तत्व में चली जाएं तो कोई फर्क नहीं पड़ता।
आत्मा का अद्भुत स्वरूप
मुरली नोट:
“आत्मा का स्वरूप वस्तु से भी परे, आयतन से भी परे है।”
विवरण:
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आत्मा का कोई आकार, वजन या आयतन नहीं।
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चाहे कितनी भी आत्माएं किसी भी स्थान में हों, किसी भी तत्व में हों, उनका अस्तित्व अदृश्य और स्थिर है।
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उदाहरण: जैसे 9 अरब आत्माएं एक गिलास पानी में चली जाएं, फिर भी पानी का स्वरूप वैसा ही रहेगा।
आत्मा और शरीर का संबंध
मुरली नोट:
“आत्मा प्रकाश और ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है। जब शरीर में आती है तो चेहरे और आंखों में चमक होती है।”
विवरण:
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शरीर में आत्मा के आने से जीवन और रोशनी मिलती है।
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आत्मा निकलने पर शरीर बुझा हुआ दीपक जैसा दिखाई देता है।
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आत्मा ना आकार बढ़ाती है, ना घटाती है, ना वजन बदलती है – सदैव स्थिर ऊर्जा।
तीन अवस्थाएं – आत्मा का निवास
मुरली नोट:
“तीन अवस्थाएं: परमधाम, सूक्ष्म वतन, भौतिक संसार।”
विवरण:
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परमधाम: संकल्प रहित, केवल शांति और अस्तित्व।
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सूक्ष्म वतन: आत्मा संकल्प कर सकती है, देव स्वरूप दृष्टिगोचर।
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भौतिक संसार: पांच तत्वों का अनुभव, देह का भान और कर्मों का खेल।
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परमधाम में आत्मा और परमात्मा का निवास शांति और प्रकाश का है।
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आत्मा का स्वरूप इतना सूक्ष्म कि पांच तत्व उसे छू भी नहीं सकते।
मुख्य संदेश
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आत्मा का स्वरूप सूक्ष्म और अविनाशी है।
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पांच तत्वों से भी परे होना आत्मा का मूल स्वरूप है।
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हम इस नाटक (संसार) के केवल यात्री हैं; हमारा असली घर परमधाम है।
परमधाम का दिव्य रहस्य – आत्मा और ब्रह्म तत्व की अद्भुत अवस्था
प्रश्न: परमधाम क्या है और वहाँ कौन रहता है?
उत्तर:परमधाम वह स्थान है जहाँ पाँचों तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) नहीं होते। वहाँ केवल आत्माएं और परमात्मा (ब्रह्म तत्व) निवास करते हैं। सूरज, चाँद, आकाश जैसी भौतिक चीज़ें वहाँ नहीं हैं। यह स्थान आत्मा की असली जड़ पहचान तक पहुँचाने वाला है।
प्रश्न: पाँचों तत्वों के बाहर कौन सा छठा तत्व है?
उत्तर:पाँचों तत्वों के बाहर स्थित छठा तत्व ब्रह्म महात तत्व है। यह परमात्मा और आत्माओं का निवास है। यह तत्व किसी अन्य तत्व में मिश्रित नहीं होता और इसकी आयतन या आकार पर कोई असर नहीं पड़ता।
प्रश्न: आत्मा का स्वरूप कैसा होता है?
उत्तर:आत्मा का स्वरूप सूक्ष्म ऊर्जा का है। इसका कोई आकार, वजन या आयतन नहीं होता। यह प्रकाश और ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है। जब आत्मा शरीर में रहती है, तो शरीर में जीवन और चमक आती है।
प्रश्न: आत्मा और शरीर का संबंध कैसे है?
उत्तर:आत्मा शरीर में प्रवेश करने पर आँखों में रोशनी, चेहरे में चमक और शरीर में जीवन शक्ति देती है। जब आत्मा निकलती है, तो शरीर बुझा हुआ दीपक जैसा दिखता है। आत्मा ना आकार बढ़ाती है, ना घटाती है, ना वजन बदलती है।
प्रश्न: आत्मा के निवास की तीन अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
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परमधाम: संकल्प रहित, केवल शांति और अस्तित्व।
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सूक्ष्म वतन: आत्मा संकल्प कर सकती है और देव स्वरूप दृष्टिगोचर हो सकता है।
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भौतिक संसार: पांच तत्वों का अनुभव, देह का भान और कर्मों का खेल।
प्रश्न: परमधाम क्यों इतना अद्भुत और अनोखा है?
उत्तर:परमधाम में ना तत्व हैं, ना धरा, ना गगन। यहाँ केवल शांति, प्रकाश और परम सत्ता का अस्तित्व है। आत्मा और परमात्मा का स्वरूप इतना सूक्ष्म है कि भौतिक दुनिया के नियम वहाँ लागू नहीं होते।
प्रश्न: हम आत्मा के रूप में अपने आप को कैसे पहचान सकते हैं?
उत्तर:हमारी असली पहचान भौतिक देह से परे है। हम पांच तत्वों से परे, आकाश से भी परे हैं। जब हम आत्मा के स्वरूप में स्थिर होते हैं, तो देहाभिमानी होने की बजाय आत्मिक स्वरूप में अनुभव कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह वीडियो Brahma Kumaris Avyakt Murli 5 अगस्त 2025 पर आधारित है।
वीडियो में दी गई जानकारी आध्यात्मिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से है।
यह किसी भी तरह से व्यक्तिगत, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
देखने वाले दर्शक इसे अपनी विवेक बुद्धि और आंतरिक अनुभव के अनुसार अपनाएं
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