(01) The secret of transcendental bliss

अतीन्द्रिय सुख-(01)अतिइंद्रिय सुख का रहस्य

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

YouTube player

अध्याय : अति इंद्रिय सुख का रहस्य

 भूमिका : आज का विषय क्यों आवश्यक है?

आज की दुनिया सुख की तलाश में भाग रही है — कोई दृश्य में, कोई स्वाद में, कोई व्यक्ति में। परंतु फिर भी मन खाली है। कारण यह है कि हम जिस सुख को खोज रहे हैं, वह इंद्रियों का सुख है, जबकि आत्मा को चाहिए अति इंद्रिय सुख

अति इंद्रिय सुख — जो इंद्रियों से नहीं, बुद्धि द्वारा परमात्मा से मिलता है।


 अति इंद्रिय सुख क्या नहीं है?

  • आँखों से दिखने वाला सुख नहीं
  • कानों से सुनने वाला सुख नहीं
  • स्वाद, स्पर्श या भोग से मिलने वाला सुख नहीं
  • मौसम, सुविधा या शरीर से जुड़ा सुख नहीं

शरीर के किसी भी अंग से मिलने वाला सुख साधारण, शारीरिक और क्षणिक होता है।

उदाहरण: मीठा भोजन खाते समय अच्छा लगता है, लेकिन कुछ समय बाद वही स्वाद समाप्त हो जाता है। यह सुख आत्मा को स्थायी तृप्ति नहीं देता।


 अति इंद्रिय सुख क्या है?

  • जो आत्मा अनुभव करती है, शरीर नहीं
  • जो परमात्मा की याद, पवित्रता और प्रेम से मिलता है
  • जो बिना किसी बाहरी कारण के मन को शांत और खुश रखता है

यह वह सुख है, जिसे अनुभव करने के बाद संसार के सारे सुख फीके लगने लगते हैं।


 देह का सुख और आत्मा का सुख – अंतर

देह का सुख आत्मा का सुख (अति इंद्रिय)
इंद्रियों पर आधारित बुद्धि और स्मृति पर आधारित
क्षणिक स्थायी अनुभूति
लत और अशांति बढ़ाता है वैराग्य और शांति बढ़ाता है
वस्तु/व्यक्ति पर निर्भर परमात्मा पर निर्भर

 अति इंद्रिय सुख क्यों नहीं मिलता?

क्योंकि —

जब तक मैं अपने को शरीर समझता हूँ, तब तक आत्मा का सुख अनुभव नहीं कर सकता।

देह‑अभिमान आत्मा को भारी कर देता है और आत्मिक अनुभूति बंद हो जाती है।


 मुरली प्रकाश  (Murli Notes with Date)

🕊️ साकार मुरली – 15‑01‑1969

“मीठे बच्चे, यह अति इंद्रिय सुख किसी देहधारी से नहीं मिलता। यह सुख केवल बाप की याद से मिलता है।”

🕊️ साकार मुरली – 28‑03‑1973

“जो बच्चे अति इंद्रिय सुख का अनुभव करते हैं, वही सच्चे राजयोगी हैं।”

🕊️ अव्यक्त मुरली – 12‑02‑1981

“अति इंद्रिय सुख में रहने वाली आत्मा सदा निश्चिंत और हल्की रहती है।”


 अति इंद्रिय सुख का प्रभाव

  • मन हल्का हो जाता है
  • अकेले में भी अकेलापन नहीं रहता
  • परिस्थितियाँ छोटी लगने लगती हैं
  • बिना कारण खुशी बनी रहती है

उदाहरण: जो आत्मा रोज़ योग में परमात्मा से जुड़ती है, वह बाहरी समस्याओं के बीच भी अंदर से स्थिर रहती है।


 अति इंद्रिय सुख पाने का एकमात्र साधन – राजयोग

राजयोग के 3 सरल स्टेप:

  1. मैं आत्मा हूँ, देह से न्यारा
  2. परमात्मा की याद
  3. परमात्मा से प्यार

बाबा कहते हैं — जो इस सुख का स्वाद चख लेता है, वह संसार के सुखों में उलझता नहीं।


 आज का आत्म‑प्रश्न

प्रश्न यह नहीं कि — दुनिया मुझे क्या दे सकती है,

प्रश्न यह है कि — मैं आत्मा क्या बन सकती हूँ?


 समापन

अति इंद्रिय सुख कोई कल्पना नहीं, बल्कि अनुभव है — जो हर आत्मा के लिए संभव है, यदि वह शरीर से ऊपर उठकर परमात्मा से जुड़ जाए।

प्रश्न 1: आज की दुनिया में मनुष्य सुखी क्यों नहीं है, जबकि साधन बढ़ते जा रहे हैं?
उत्तर:
क्योंकि आज का मनुष्य सुख को इंद्रियों, वस्तुओं और व्यक्तियों में खोज रहा है। यह सुख क्षणिक है, इसलिए थोड़ी देर बाद मन फिर खाली हो जाता है। आत्मा को जिस सुख की आवश्यकता है, वह अति इंद्रिय सुख है, जो इंद्रियों से नहीं बल्कि परमात्मा से मिलता है।


प्रश्न 2: अति इंद्रिय सुख क्या है?
उत्तर:
अति इंद्रिय सुख वह सुख है जो
इंद्रियों से नहीं,
बुद्धि द्वारा,
परमात्मा की याद से मिलता है।
यह आत्मा का सुख है, शरीर का नहीं।


🔶 अति इंद्रिय सुख क्या नहीं है?

प्रश्न 3: क्या आँखों से दिखने वाला सुख अति इंद्रिय सुख है?
उत्तर:
नहीं। आँखों से मिलने वाला सुख शारीरिक और क्षणिक होता है। जो देखा जा सकता है, वह इंद्रिय सुख है, अति इंद्रिय सुख नहीं।


प्रश्न 4: क्या कानों से सुनने, स्वाद या स्पर्श से मिलने वाला सुख अति इंद्रिय सुख कहलाता है?
उत्तर:
नहीं।

  • कानों से सुनकर अच्छा लगना

  • स्वाद से तृप्ति मिलना

  • स्पर्श या भोग से सुख मिलना
    ये सभी देह के सुख हैं, आत्मा के नहीं।


प्रश्न 5: साधारण शारीरिक सुख का उदाहरण क्या है?
उत्तर:
मीठा भोजन खाते समय अच्छा लगता है, लेकिन कुछ समय बाद वही स्वाद समाप्त हो जाता है। यह सुख आत्मा को स्थायी तृप्ति नहीं देता, इसलिए इसे अति इंद्रिय सुख नहीं कहा जा सकता।


🔶 अति इंद्रिय सुख क्या है?

प्रश्न 6: अति इंद्रिय सुख वास्तव में किसे कहते हैं?
उत्तर:
अति इंद्रिय सुख वह है—

  • जिसे आत्मा अनुभव करती है,

  • जो परमात्मा की याद, पवित्रता और प्रेम से मिलता है,

  • जो बिना किसी बाहरी कारण के मन को शांत और प्रसन्न रखता है।


प्रश्न 7: अति इंद्रिय सुख का प्रभाव क्या होता है?
उत्तर:
जब आत्मा अति इंद्रिय सुख का अनुभव करती है, तो संसार के सभी शारीरिक सुख फीके लगने लगते हैं और मन भीतर से भर जाता है।


🔶 देह का सुख और आत्मा का सुख – अंतर

प्रश्न 8: देह के सुख और आत्मा के सुख में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:

  • देह का सुख इंद्रियों पर आधारित होता है,

  • आत्मा का सुख बुद्धि और स्मृति पर आधारित होता है।

देह का सुख क्षणिक और अशांति देने वाला है,
जबकि आत्मा का सुख स्थायी और शांति देने वाला है।


प्रश्न 9: देह का सुख क्यों लत बन जाता है?
उत्तर:
क्योंकि वह वस्तु, व्यक्ति और परिस्थिति पर निर्भर होता है। जैसे-जैसे सुख खत्म होता है, इच्छा बढ़ती जाती है और मन अशांत होता जाता है।


🔶 अति इंद्रिय सुख क्यों नहीं मिलता?

प्रश्न 10: अधिकांश लोगों को अति इंद्रिय सुख का अनुभव क्यों नहीं होता?
उत्तर:
क्योंकि—
👉 जब तक मैं अपने को शरीर समझता हूँ, तब तक आत्मा का सुख अनुभव नहीं कर सकता।
देह-अभिमान आत्मा को भारी बना देता है और आत्मिक अनुभूति बंद हो जाती है।


🔶 मुरली प्रकाश (Murli Notes with Date)

प्रश्न 11: बाबा अति इंद्रिय सुख के बारे में क्या कहते हैं?
उत्तर:

🕊️ साकार मुरली – 15-01-1969

“मीठे बच्चे, यह अति इंद्रिय सुख किसी देहधारी से नहीं मिलता। यह सुख केवल बाप की याद से मिलता है।”


प्रश्न 12: सच्चा राजयोगी किसे कहा गया है?
उत्तर:

🕊️ साकार मुरली – 28-03-1973

“जो बच्चे अति इंद्रिय सुख का अनुभव करते हैं, वही सच्चे राजयोगी हैं।”


प्रश्न 13: अति इंद्रिय सुख में रहने वाली आत्मा की स्थिति कैसी होती है?
उत्तर:

🕊️ अव्यक्त मुरली – 12-02-1981

“अति इंद्रिय सुख में रहने वाली आत्मा सदा निश्चिंत और हल्की रहती है।”


🔶 अति इंद्रिय सुख का प्रभाव

प्रश्न 14: अति इंद्रिय सुख का आत्मा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:

  • मन हल्का हो जाता है

  • अकेले में भी अकेलापन नहीं रहता

  • परिस्थितियाँ छोटी लगने लगती हैं

  • बिना कारण खुशी बनी रहती है


प्रश्न 15: इसका व्यावहारिक उदाहरण क्या है?
उत्तर:
जो आत्मा रोज़ राजयोग में परमात्मा से जुड़ती है, वह बाहरी समस्याओं के बीच भी अंदर से स्थिर और शांत रहती है।


🔶 अति इंद्रिय सुख पाने का साधन – राजयोग

प्रश्न 16: अति इंद्रिय सुख पाने का एकमात्र साधन क्या है?
उत्तर:
👉 राजयोग — आत्मा और परमात्मा का संबंध।


प्रश्न 17: राजयोग के तीन सरल स्टेप कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. मैं आत्मा हूँ, देह से न्यारा

  2. परमात्मा की याद

  3. परमात्मा से प्यार


प्रश्न 18: जो अति इंद्रिय सुख का स्वाद चख लेता है, उसकी स्थिति कैसी हो जाती है?
उत्तर:
बाबा कहते हैं—
जो इस सुख का स्वाद चख लेता है, वह फिर संसार के सुखों में उलझता नहीं।


🔶 आज का आत्म-प्रश्न

प्रश्न 19: आज आत्मा के लिए सबसे बड़ा प्रश्न क्या है?
उत्तर:
प्रश्न यह नहीं कि दुनिया मुझे क्या दे सकती है,
👉 प्रश्न यह है कि मैं आत्मा क्या बन सकती हूँ?


 समापन

प्रश्न 20: क्या अति इंद्रिय सुख कल्पना है या वास्तविक अनुभव?
उत्तर:
अति इंद्रिय सुख कोई कल्पना नहीं, बल्कि आत्मा का वास्तविक अनुभव है—
जो हर आत्मा के लिए संभव है,
यदि वह शरीर से ऊपर उठकर परमात्मा से जुड़ जाए।

Disclaimer (डिस्क्लेमर)

यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की राजयोग शिक्षा, मुरली एवं आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य आत्मिक जागृति और सकारात्मक जीवन दृष्टि देना है। यह किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने या चिकित्सा/मनोवैज्ञानिक सलाह का विकल्प नहीं है।

अति इंद्रिय सुख का रहस्य, अति इंद्रिय सुख क्या है, अतींद्रिय सुख, आत्मिक सुख, रूहानी सुख, इंद्रिय सुख और आत्मिक सुख, देह का सुख और आत्मा का सुख, राजयोग अनुभव, राजयोग मेडिटेशन, ब्रह्माकुमारी राजयोग, परमात्मा की याद, आत्मा और परमात्मा, ईश्वरीय सुख, आत्मिक शांति, मन की शांति, आध्यात्मिक ज्ञान हिंदी, ब्रह्माकुमारी मुरली, साकार मुरली ज्ञान, अव्यक्त मुरली, बाबा की याद, ईश्वरीय प्रेम, देह अभिमान, आत्म अभिमान, राजयोग के तीन स्टेप, स्पिरिचुअल वीडियो हिंदी, आध्यात्मिक प्रवचन, आध्यात्मिक जागृति, जीवन में सच्चा सुख, परम सुख की अनुभूति, BK spiritual knowledge, Brahma Kumaris Hindi, Shiv Baba gyan, Om Shanti,The secret of supersensory happiness, what is supersensory happiness, supersensory happiness, spiritual happiness, spiritual happiness, sensory happiness and spiritual happiness, happiness of the body and happiness of the soul, Rajyoga experience, Rajyoga meditation, Brahmakumari Rajyoga, remembrance of God, soul and God, divine happiness, spiritual peace, peace of mind, spiritual knowledge in Hindi, Brahmakumari Murli, sakar Murli knowledge, avyakt Murli, remembrance of Baba, divine love, body pride, self pride, three steps of Rajyoga, spiritual video in Hindi, spiritual discourse, spiritual awakening, true happiness in life, experience of ultimate happiness, BK spiritual knowledge, Brahma Kumaris Hindi, Shiv Baba knowledge, Om Shanti,