PR:-(01)क्यों बढ़ रही है नकारात्मक खबरें?परमात्मा क्या कहते हैं?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
“बातचीत करो तो तनाव है।
लेकिन क्या वाकई यह दुनिया उतनी ही खराब हो गई है जितनी दिखती है?
और अगर परमात्मा आज इस दृश्य को देखते तो वो क्या कहते?
दुनियावाले परमात्मा को सुनाते हैं —
“देख, तेरे इंसान की हालत क्या हो गई भगवान। कितना बदल गया इंसान!”
और स्वयं परमात्मा आज इस दृश्य को देखते तो वे क्या कहते?
बाबा कहते हैं — “वो सब कार्मिक अकाउंट है आपका।”
भाईजी पूछते हैं — “बाबा तो देख ही रहे हैं दृश्य को, तो क्या कहते हैं बाबा?”
उत्तर: “सुख-दुख तुम्हारा दिया हुआ मिल रहा है।”
आज हम समझेंगे —
दुनिया कैसे देखती है, और कैसे देखती है ज्ञान-योग की दृष्टि से, परमात्मा की दृष्टि से।
इसी ध्यान में रखकर हम आज के विषय को आगे बढ़ाएंगे।
1. आम दुनिया को आज क्या दिख रहा है?
भारत के हर कोने में एक ही माहौल है —
नकारात्मक खबरें,
सोशल मीडिया पर शोर,
डर, चिंता, तनाव,
हर बात पर बहस, आलोचना,
मन की शांति गायब।
लोग कहते हैं —
“दुनिया खराब हो गई, लोग बदल गए हैं, अच्छाई बची ही नहीं।”
दुनिया की आंखों में केवल नकारात्मकता भरी है।
हर आत्मा में नकारात्मकता दिखाई देती है।
2. लेकिन परमात्मा इसे कैसे देखते हैं?
मुरली के महावाक्य:
परमात्मा शिव दुनिया को समय-चक्र की दृष्टि से देखते हैं।
डर से नहीं — ज्ञान से।
“यह ड्रामा अनादि और अचल है।”
— साकार मुरली 12 मार्च 2023
जो कुछ भी हो रहा है, वह कल्याण के लिए ही है।
हर आत्मा का कल्याण है।
साक्षी होकर देखो — इसमें भी कल्याण है।
3. अव्यक्त मुरली (8 जनवरी 2024)
बच्चे, नकारात्मकता बढ़ रही है —
इसका अर्थ है आत्मा की शक्ति की पुकार बढ़ रही है।
यह समय है शक्ति लेने और शक्ति देने का।
शक्ति कहां से लेनी? — शिव बाबा से, श्रीमत पर चलकर।
किसे देनी? — सर्व आत्माओं को।
शिव बाबा से शक्ति लेकर डायरेक्ट ज़रूरतमंद तक पहुंचाओ।
4. साकार मुरली (21 जून 2022)
यह भी ड्रामा का पार्ट है।
यदि पुराना खत्म नहीं होगा तो नया कैसे आएगा?
परमात्मा की दृष्टि स्पष्ट है —
यह नकारात्मकता नहीं, परिवर्तन का संधि काल है।
संधि काल —
जैसे गंगा और जमुना मिलकर एक नदी बनती हैं,
वैसे ही कलयुग और सतयुग का मिलन है यह समय।
5. यह परिवर्तन का समय है
जो गिरने का काल था वह समाप्त हो गया।
अब आत्मा को अपनी चरम अवस्था में लौटने का अवसर है।
हर आत्मा की चरम अवस्था अलग है,
हर आत्मा को अपनी उच्चतम अवस्था तक लौटने का अधिकार है।
जहां दुनिया खतरा देखती है,
वहां परमात्मा अवसर देखते हैं।
परमात्मा शिव बाबा पूरे दृश्य को
एक अनादि-अनंत ड्रामा के रूप में देखते हैं —
जिसमें हर दृश्य पूर्व-नियोजित है।
हर दृश्य कल्याणकारी है, गहरे अर्थ से भरा है।
6. दुनिया भर में जो नकारात्मक घटनाएं दिखती हैं…
धोखा, बेईमानी, चोरी, ठगी, मर्डर,
प्राकृतिक आपदाएँ — भूकंप, ज्वालामुखी, बाढ़…
ये सब भी आत्मा की आंतरिक शक्ति बढ़ाने के लिए आते हैं,
ताकि आत्मा सहनशीलता, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति का
नंबर वन रोल निभा सके।
7. ड्रामा की समझ
जो भी हो रहा है — वह कल्याणकारी हो रहा है।
कुछ भी गलत नहीं हो रहा।
हर बात में कल्याण है।
क्योंकि परमात्मा न्यायकारी है।
जिसे भी जो सुख या दुख मिल रहा है —
वह उसका अपना दिया हुआ है।
यह समय है हर आत्मा के हिसाब-किताब बराबर होने का।
8. गीता का वाक्य
“जो हुआ अच्छा हुआ,
जो हो रहा है अच्छा हो रहा है,
जो होगा वह और भी अच्छा होगा।”
9. ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार
पूरा विश्व एक नाटक है,
निश्चित चक्र में चलता है,
हर सीन पहले से फिक्स है।
इसलिए घबराने की नहीं —
समझने की जरूरत है।
जब आत्मा जान ले कि —
“मैं अनेक जन्मों वाला अभिनेता हूं।
यह शरीर और परिस्थितियाँ सिर्फ मंच और पोशाक हैं।”
तो आत्मा दृश्य से ऊपर उठकर
साक्षी दर्शक बन जाती है।
10. मुरली की सीख
बच्चों, ड्रामा में जो कुछ भी चल रहा है
वह कल्याण के लिए ही है।
नफरत, क्रोध, शोर-शराबा भी आत्मा को सिखाने आते हैं—
कि अब मुझे लौटना है अपने मौलिक स्वरूप —
शांति, प्रेम, शक्ति में।
उदाहरण:
शहर में अचानक घटना होती है,
दहशत फैल जाती है,
न्यूज़ चैनल वही दृश्य दिखाते हैं,
सोशल मीडिया अफवाहें फैलाता है…
इन सबका ध्येय आत्मा को जगाना है —
कि अब समय है अपने घर, अपने वास्तविक स्वरूप में लौटने का।

